Electronystagmography: इलेक्ट्रोनिस्टेग्मोग्राफी क्या है?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट मई 28, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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जानिए मूल बातें

इलेक्ट्रोनिस्टेग्मोग्राफी क्या है?

क्या बेड से उठते ही आपको चक्कर आते हैं या किसी ऊंचाई से अगर आप नीचे देखते हैं तो आपका दिल घबराता है या उल्टी आती है? यह एक बहुत ही सामान्य फीलिंग है जिसे वर्टिगो (vertigo) कहा जाता है और कई लोग को अक्सर यह परेशानी होती है। हालांकि वर्टिगो को पहचानना बहुत मुश्किल है क्योंकि यह कान के अंदर की समस्याओं से जुड़ी हुई समस्या है। लेकिन, जब आप डॉक्टर से इस बारे में बात करते हैं तो वो जांच कर के इस बात का पता लगाते हैं कि क्या यह एक बीमारी, वायरस या किसी अन्य बीमारी का लक्षण है। इसके लिए एक टेस्ट है जिसे इलेक्ट्रोनिस्टेग्मोग्राफी कहा जाता है। जानें इस टेस्ट के बारे में पूरी जानकारी।

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इलेक्ट्रोनिस्टेग्मोग्राफी क्यों किया जाता है?

इलेक्ट्रोनिस्टेग्मोग्राफी आंखों और कानों का टेस्ट है जिसमें आंखों के हिलने से यह पता लगाया जाता है कि दिमाग की दो नसें कितनी अच्छे से काम कर रही है। यह दो नसे इस प्रकार हैं।

  •  वेस्टिबुलर (Vestibular) जो दिमाग से कान तक जाती है।
  • ऑक्यूलोमोटर  (Occulomotor) जो दिमाग से आंखों तक जाती है।

इस टेस्ट को ENG भी कहा जाता है। इसमें डॉक्टर आंखों के ऊपर और नीचे इलेक्ट्रोड्स (electrodes) डालते है और लाइट, गति, गहराई, कानों में मौजूद तरल के प्रति आपकी प्रतिक्रिया को जांचा जाता है।

इलेक्ट्रोनिस्टेग्मोग्राफी की सलाह कब दी जाती है?

वर्टिगो एक बहुत ही सामान्य बीमारी है। लेकिन इसका इलाज करना चुनौती पूर्ण होता है। डॉक्टर इस टेस्ट की सलाह दे सकते हैं अगर आपको निम्नलिखित समस्याएं हों।

  • चक्कर आ रहे हो।
  • उल्टी आ रही हो।
  • शरीर का संतुलन न बन रहा हो।
  • टिनिटस (ऐसी स्थिति जब आपको लगता है कि आपने कोई आवाज सुनी है लेकिन सच में ऐसा नहीं होता)

इन स्थितियों में भी डॉक्टर इलेक्ट्रोनिस्टेग्मोग्राफी करवा सकते है:

  • अशर  सिंड्रोम (Usher syndrome ): यह ऐसी समस्या है जिसका प्रभाव आंखों की रोशनी, शरीर के संतुलन और सुनने की स्थिति पर पड़ता है।
  • एकॉस्टिक न्युरोमा 
  • लैबीरिंथाइटिस  (labyrinthitis) : कान के अंदर जलन
  • मेनियर (Meniere )रोग: कान के अंदर होने वाली समस्या जिसका प्रभाव हमारे शरीर के संतुलन और सुनने की क्षमता पर पड़ता है।
  • कान के अंदर किसी घाव का होना
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इलेक्ट्रोनिस्टेग्मोग्राफी कराने से पहले जानने योग्य बातें

इलेक्ट्रोनिस्टेग्मोग्राफी टेस्ट के प्रकार और उन्हें कैसे किया जाता है?

कैलोरिक टेस्ट

इस टेस्ट को करने के लिए इलेक्ट्रोड पैचस को आंखों के ऊपर, नीचे और हर एक हिस्से में लगाया जाता है। एक दूसरे इलेक्ट्रोड को माथे पर लगाया जाता है। जब आपका सिर एक ही स्थिति में होता है, तो डॉक्टर गर्म और ठंडी हवा का उपयोग करके आपकी संतुलन प्रणाली को प्रेरित करते है। इसमें कभी-कभी पानी का प्रयोग भी किया जाता है। इस टेस्ट में कान का अंदर का हिस्सा और नसें तापमान के बदलने से अलग-अलग प्रतिक्रिया देगा इससे इलेक्ट्रोड आपकी आंखों के सभी गतिविधियों को रिकॉर्ड करेगी।

ओकलोमोटर टेस्ट

इस टेस्ट में सिर को स्थिर रखा जाता है और रोगी को एक रोशनी को देखने के लिए कहा जाता है। इससे डॉक्टर पहचान जाते हैं कि आपकी आंखें कैसे काम कर रही है। 

पोसिशनल टेस्ट

इसमें डॉक्टर रोगी को अपने सिर को तेजी से हिलाने के लिए कहते हैं।  इसके साथ ही जल्दी-जल्दी उठने और बैठने के लिए भी कहा जाता है। इससे इस बात का अंदाजा हो जाता है कि किसी भी गतिविधि से हमारी आंखे कैसी प्रतिक्रिया देती है।

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जोखिम

इलेक्ट्रोनिस्टेग्मोग्राफी टेस्ट से होने वाले नुकसान क्या हैं?

हालांकि, इस टेस्ट से होने वाले नुक्सान या जोखिम बहुत कम हैं जैसे:

  • चक्कर आना या मतली आदि। 
  • जिन लोगों का इलेक्ट्रोनिस्टेग्मोग्राफी टेस्ट होता है उन्हें गॉगल्स पहनने में भी असुविधा होती है। 
  • इस टेस्ट में होने वाली स्थिति में तेजी से बदलाव के कारण पीठ और गले की परेशानियां बढ़ सकती है। 
  • वाटर क्लोरिक टेस्ट से भी थोड़ी परेशानी हो सकती है।
  • कुछ खास मेडिकल स्थितियों में भी कुछ जोखिम हो सकते हैं। इसलिए इस टेस्ट से पहले डॉक्टर से अपनी मेडिकल स्थितियों को आवश्यक शेयर करें।

कुछ खास स्थितियों या कारणों से भी इलेक्ट्रोनिस्टेग्मोग्राफी टेस्ट प्रभावित हो सकता है जैसे:

  • एअरवेक्स
  • धुंधली दृष्टि
  • लगातार आंखों का झपकना
  • कुछ दवाएं, जैसे सीडेटिव, ट्रैंक्विलाइजर और एंटीवर्टिगो दवाएं

टेस्ट से पहले की तैयारी 

अपने डॉक्टर को पहले ही बता दें अगर आप कोई हर्बल या कोई और दवाई ले रहे है। आपके डॉक्टर आपको टेस्ट से पहले कुछ घंटों तक कुछ न खाने की सलाह दे सकते हैं। यही नहीं आपको 24 से 48 घंटों तक चाय कॉफी या कोई भी कैफीन लेने के लिए मना किया जाता है। अपने डॉक्टर की सलाह का पूरा पालन करें।

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इलेक्ट्रोनिस्टेग्मोग्राफी टेस्ट के बाद क्या होता है?

टेस्ट के बाद डॉक्टर आपके शरीर पर लगे इलेक्ट्रोड पैच हटा देंगे और इस जगह को साफ भी कर दिया जाएगा। यही नहीं, डॉक्टर आपको उन दवाओं को फिर से जारी रखने के लिए कह सकते हैं जो आप इस टेस्ट से पहले लिया करते थे।

इस टेस्ट को पूरा होने में लगभग 90 मिनट लगते है। अगर  ENG का परिणाम वर्टिगो के किसी फॉर्म के रूप में आता है तो डॉक्टर आपको फिजिकल थेरेपी, सर्जरी और कोई अन्य विकारों के लिए सही उपचार की सलाह दे सकते हैं लेकिन अगर  ENG के परिणाम सही आता है तो डॉक्टर आपको किन्ही अन्य टेस्ट की सलाह दे सकते है ताकि आपकी समस्या का सही कारण पता चल सके।

परिणामों को समझें

मेरे परिणामों का क्या मतलब है?

अगर आपके ENG टेस्ट के परिणाम असामान्य आते है तो इसका अर्थ है कि आपके कान के अंदर या दिमाग के हिस्से में समस्या है जो आंखों की गतिविधि को नियंत्रित करता है। सुनने की नस की अन्य बीमारियां या घाव वर्टिगो का कारण बन सकती हैं, जिनमे से कुछ इस प्रकार है:

  • रक्त वाहिका विकार जो कान में रक्तस्राव का कारण बनता है
  • कान का ट्यूमर
  • अनुवांशिक विकार
  • कान के अंदर के भाग में चोट
  • दवाएं जो कान की नसों के लिए विषैली हैं
  • मल्टीपल स्क्लेरोसिस
  • चिकन पॉक्स, खसरा और फ्लू जैसे वायरल संक्रमण
  • गति या मूवमेंट संबंधी विकार
  • केमिकल विषाक्तता
हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपका इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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