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इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर की समस्या से रहें सावधान!

इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर की समस्या से रहें सावधान!

मेटाबॉलिज्म (Metabolism) एक स्वस्थ्य शरीर के लिए काफी अहम माना जा सकता है। हमारे शरीर में भोजन को एनर्जी क रूप में बदलने की प्रक्रिया ही मेटाबॉलिज्म होता है। इसमें आयी गड़बड़ी, कई कई शारीरिक समस्याओं का कारण बन सकता है। कुछ लोगों में मेटबाॅलिज्म की समसया जन्मजात देखी जाती है। जिसे इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर कहा जाता है। यह एक दुर्लभ प्रकार का आनुवंशिक विकार हैं। जिसमें मरीज का शरीर ठीक से भोजन को ऊर्जा में कंवर्ट नहीं पाता है। यह विकार आमतौर पर एंजाइम में दोषों के कारण होता है, जो भोजन के कुछ हिस्सों को तोड़ने में मदद करते हैं। यदि उन्हें नियंत्रित नहीं किया जाता है, तो इनबॉर्न मेंटाबॉलिज्म डिसऑर्डर (Inborn Metabolism Disorder) कई अन्य चिकित्सा समस्याओं का कारण बन सकता है। चयापचय की कई अलग-अलग प्रकार की जन्मजात जटिलताएं होती हैं। उनमें से कुछ हैं: फ्रुक्टोज इंटोलेरेंस गैलेक्टोसिमिया मेपल मैपल शुगर यूरिन डिजीज (Fructose Intolerance Galactosemia Maple Sugar Urine Disease ) और फेनिलकेटोनुरिया (Phenylketonuria) आदि। तो आइए जानते हैं कि इनबॉर्न मेंटाबॉलिज्म डिसऑर्डर (Inborn Metabolism Disorder) क्या है:

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इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर क्या है (What is Inborn Metabolism Disorder)?

इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर यानि कि किसी मरीज में जन्म के साथ ही उसके मेटबॉलिज्म से संबंधित दिक्कत होना। इसके कारण होने वाली समस्याओं में, शरीर में कार्बोहाइड्रेट, फैटी एसिड और प्रोटीन के स्टोरेज के कारण मेटाबॉल्जिम ट्रैक्ट में विफलता होना शामिल है लेकिन यह बहुत दुर्लभ समस्या है, जो कि 2500 जन्मों में से 1 मरीज में देखी जाती है। मेटाबॉलिज्म, एक जैव रासायनिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा हमारा शरीर पोषक तत्वों को भोजन से ऊर्जा में परिवर्तित करता है। चयापचय में जन्मजात दोष, शरीर भोजन से पोषक तत्वों को ठीक से नहीं तोड़ पाता है। इसके परिणामस्वरूप शरीर की कोशिकाओं में खाद्य पदार्थ जमा हो जाते हैं, जिससे चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण परिणाम सामने आते हैं। यदि इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर की जटिलताओं को चिकित्सकीय रूप से प्रबंधित नहीं किया जाता है, तो वे विकासात्मक देरी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों को जन्म दे सकते हैं।

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इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर के लक्षण (Symptoms of Inborn Metabolism Disorder )

अधिकांश इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर संबंधी विकार शैशवावस्था या बचपन में ही नजर आने लगते हैं और कुछ हल्की स्थितियां वयस्कता में प्रकट हो सकती हैं। इसके लक्षण और संकेत स्थिति से जुड़ी अंतर्निहित चयापचय की समस्या पर निर्भर करते हैं। इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर की स्थितियों के कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:

वयस्को में नजर आने वाले लक्षण कुछ और भी शामिल हो सकते हैं:

  • बढ़ता मोटापा यानी वजन का तेजी से बढ़ना
  • कमर का बढ़ता आकार यानी कमर के हिस्से में मोटापा ज्यादा बढ़ना
  • गर्दन पर काले धब्बे नजर आना
  • सुस्ती होना, आलस लगना या सुबह उठकर खासतौर पर फ्रेश महसूस न होना
  • बदन दर्द होना और ऐसा लगातार बने रहना
  • जोर की भूख लगना और लगातार खाना खाते रहना
  • मिठाई खाने की इच्छा होना और चाह के भी उसे न रोक पाना
  • किसी भी काम में मन न लगना
  • एक्सरसाइज के दौरान मन न लगना और बहुत जल्दी थक जाना

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इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर के कारण (Causes of Inborn Metabolism Disorder )

एंजाइम के रूप में जाने जाने वाले कुछ रसायन, मेटाबॉलिज्म ट्रैक्ट की प्रक्रियाओं को सुविधाजनक बनाते हैं। इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर, जीन में होने वाला एक दोष है, जिसे उत्परिवर्तन भी कहा जाता है, जो एक विशेष एंजाइम के उत्पादन को नियंत्रित करता है। जिसके परिणामस्वरूप एंजाइम में दोष या एंजाइम की मात्रा कम हो सकती है। प्रत्येक जीन की दो प्रतियां होती हैं और हम प्रत्येक माता-पिता से एक प्रति प्राप्त करते हैं। व्यक्ति में पहली बार उत्परिवर्तन उत्पन्न हो सकता है या माता-पिता से विरासत में मिला हो सकता है। यह वंशानुक्रम विभिन्न पैटर्नों में हो सकता है, जिनमें शामिल हैं: ऑटोसोमल या सेक्स-लिंक्ड, डोमिनेंट या रिसेसिव। जिन व्यक्तियों को इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर होता है, वे आमतौर पर एक ऑटोसोमल रिसेसिव पैटर्न में स्थिति को प्राप्त करते हैं। जिन व्यक्तियों के शरीर में चयापचय प्रतिक्रिया करने के लिए पर्याप्त एंजाइम नहीं होता है, तो चयापचय संबंधी विकार से लोग प्रभावित हो सकते हैं।

इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर के विभिन्न प्रकार क्या हैं (What are the Different Types of Inborn Metabolism Disorder )?

इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर काफी दुर्लभ हैं और यह अनुमान लगाया गया है कि प्रत्येक 1,500 व्यक्तियों में से 1 को प्रभावित करता है। इन स्थितियों के महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्रभावों के कारण, सही समय पर आवश्यक देखभाल प्रदान करने और गंभीर जटिलताओं को रोकने के लिए इन विकारों को समझना महत्वपूर्ण है। कुछ सामान्य रूप से ज्ञात विरासत में मिली चयापचय संबंधी विकारों में शामिल हैं: लाइसोसोमल स्टोरेज डिसऑर्डर (Lysosomal storage disorder)] लाइसोसोम कोशिकाओं के भीतर एक विशेष सबयूनिट हैं जो अपशिष्ट उत्पादों को तोड़ते हैं। लाइसोसोमल एंजाइम की कमी से कोशिकाओं में वेस्ट टॉक्सिक का निर्माण होता है, जिससे निम्नलिखित विकार उत्पन्न होते हैं: हर्लर सिंड्रोम लाइसोसोमल अल्फा-एल-इडुरोनिडेस नामक एंजाइम की कमी के कारण होता है, जो ग्लाइकोसामिनोग्लाइकेन्स नामक बड़े चीनी अणुओं के टूटने में मदद करता है। ग्लाइकोसामिनोग्लाइकेन्स का संचय जोड़ों, हृदय और अन्य अंगों को प्रभावित करता है। जिससे हड्डी की असामान्य संरचना और विकास में देरी होती है। इसके अन्य प्रकार में सिंहोमायएलिनेज (Sphingomyelinase) भी है, जो शरीर में लिपिड को तोड़ने में मदद करता है। क्लासिक गैलेक्टोसिमिया भी एक प्रकार है, जो चयापचय स्थिति है जिसमें शरीर गैलेक्टोज (दूध में पाई जाने वाली चीनी) को एंजाइम गैलेक्टोज-1-फॉस्फेट यूरिडाइल ट्रांसफरेज (जीएएलटी) की कमी के कारण नहीं तोड़ सकता है। यदि गैलेक्टोसिमिया वाले शिशुओं को दूध (मानव या पशु) दिया जाता है, तो गैलेक्टोज उनके सिस्टम में जमा हो जाता है और गुर्दे, यकृत, मस्तिष्क और आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा, फेनिलकेटोनुरिया (Phenylketonuria ) एंजाइम फेनिलएलनिन हाइड्रॉक्सिलेज (पीएएच) की कमी के कारण होता है, जो अमीनो एसिड फेनिलएलनिन के टूटने के लिए आवश्यक है। यदि बच्चे प्रोटीन सामग्री में उच्च खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, तो उनके शरीर में फेनिलएलनिन जमा हो जाता है, जो गंभीर बौद्धिक अक्षमता और तंत्रिका संबंधी और व्यवहार संबंधी समस्याओं का कारण बनता है।

इसके अलावा, ग्लाइकोजन स्टोरेज डिसऑर्डर (जीएसडी) चयापचय संबंधी विकारों का एक समूह है। जिसमें हमारे शरीर में ग्लाइकोजन के रूप में ग्लाइकोजन के टूटने या ग्लूकोज के भंडारण के लिए जिम्मेदार एंजाइमों में दोष होते हैं। यदि ग्लाइकोजन को संसाधित करने के लिए आवश्यक एंजाइम की कमी होती है, तो ग्लाइकोजन यकृत और मांसपेशियों में जमा हो जाता है जिससे कमजोरी और मांसपेशियों में दर्द होता है। ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में तोड़ने में असमर्थता के परिणामस्वरूप निम्न रक्त शर्करा के स्तर की स्थिति हो सकती है।

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इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर का इलाज कैसे करते हैं (How to treat Inborn Metabolism Disorder )?

यदि इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर की स्थिति का पता प्रारंभिक चरण में ही लग जाए, तो इसके कारण होने वाली बड़ी जटिलताओं को रोका जा सकता है। निम्नलिखित विधियां विरासत में मिली चयापचय संबंधी विकारों के इलाज में मदद करती हैं, जिनमें शामिल हैं: ऐसे भोजन के सेवन को मना किया जाता है, खासतौर पर ऐसे विशेष आहार, जिसे चयापचय नहीं किया जा सकता है। निष्क्रिय एंजाइमों को एक एंजाइम पूरक या अन्य पूरक के साथ रिप्लेसमेंट मेडिकेसन ट्रीटमेंट अपनाना, जो कि डॉक्टर की गाइडेंस द्वारा होता है। इसके अन्य ट्रीटमेंट में रक्त को शुद्ध करने वाले रसायनों से उपचार करके शरीर में जमा खराब रसायनों को हटाना। इन विकारों के उपचार में जीन थेरिपी की भी भूमिका होती है, जहां उत्परिवर्तित जीन को सामान्य जीन द्वारा पूरक किया जा सकता है, जो एंजाइम का उत्पादन कर सकते हैं। यह सभी उपचार डॉक्टर की सलाह पर ही होता है।

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इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर का इलाज समय रहते जरूरी है। इससे कई बड़ी जटिलताओं को भी रोका जा सकता है। इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर को हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरिपी द्वारा ठीक किया जा सकता है। इनबॉर्न मेटाबॉलिज्म डिसऑर्डर के उपचार के बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 21/02/2022 को
और Hello Swasthya Medical Panel द्वारा फैक्ट चेक्ड