सामान्य तौर पर वर्टिन टेबलेट का इस्तेमाल कान के अंदर के जुड़े डिसऑर्डर को ठीक करने के लिए किया जाता है। जिसे हम मिनिएरिस डिजीज ( Ménière’s disease) के नाम से जानते हैं। इस बीमारी के होने से सामान्य तौर पर कुछ लक्षण दिखते हैं, उनमें सिर चकराना (वर्टिगो), कान में कुछ बजते हुए सुनाई देना (tinnitus) आदि। इसके साथ ही कान में पानी जाने के कारण लॉस ऑफ हियरिंग जैसे केस में इस दवा का इस्तेमाल किया जाता है।

इस दवा का सेवन करने के पूर्व यदि आपको पूर्व में किसी प्रकार की बीमारी हुई हो, या फिर आप बीमार हो और साथ ही कोई अन्य दवा का सेवन कर रहे हो तो ऐसी स्थिति में डॉक्टरी सलाह की बहुत जरूरत होती है। खासतौर से तब जब व्यक्ति स्टमक अल्सर, अस्थमा, हाई और लो ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी से जूझ रहा होता है। इतना ही नहीं यदि आप गर्भवती हैं या फिर प्रेग्नेंसी प्लानिंग के बारे में सोच रही हैं तो ऐसे में डॉक्टरी सलाह लेना बेहद ही जरूरी हो जाता है।
डॉक्टर जितना सुझाए उतनी मात्रा में ही दवा का सेवन करना चाहिए।
व्यस्कों के लिए : शुरुआती दिनों में डॉक्टर इलाज करने के लिए 8 से 16 एमजी दवा दिन में तीन बार लेने की सलाह देते हैं। दवा को खाने के साथ लेने की सलाह दी जाती है, वहीं प्रतिदिन औसतन 24 से 48 एमजी की खुराक मरीज को दी जाती है। यह ध्यान रखा जाता है कि प्रतिदिन का डोज 48 एमजी से अधिक न हो। मरीज की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई बार डॉक्टर डोज का निर्धारण करते हैं। कई मामलों में तो महज कुछ ही सप्ताह में दवा का असर दिखना शुरू हो जाता है। मौजूदा समय में हेपेटिक इम्पेयरमेंट और रेनेल इम्पेयरमेंट को लेकर कोई खास जानकारी उपलब्ध नहीं है।
बच्चे और किशोर : यह टेबलेट 18 साल से कम आयु के बच्चों व किशोरों को नहीं दी जाती है। मौजूदा समय में दवा की सेफ्टी और प्रभाव से संबंधित शोध उपलब्ध नहीं होने के कारण उनको दवा नहीं दी जाती है।
आपात या ओवरडोज की स्थिति में तुरंत अपने नजदीकी डॉक्टर या आपातकालीन सेवा से संपर्क करें।
अगर वर्टिन का डोज मिस हो जाता है तो जल्द से जल्द इसे लें। हालांकि, यदि आपका अगली खुराक का समय नजदीक आ गया है तो भूले हुए डोज को ना खाएं। पहले से तय नियमित डोज को लें। एक बार में दो खुराक ना खाएं। यदि आप लगातार दवा मिस कर रहे हैं तो दवा लेने के लिए अलॉर्म लगाएं या फिर घर पर पेरेटेंट्स को दवा लेने के बारे में याद दिलाने को कहें। वर्टिन दवा का इफेक्ट लोगों पर अलग अलग दिखता है। किसी में कुछ ही दिनों में असर दिखता है तो किसी को इफेक्ट दिखने में लंबा समय लगता है। जरूरी है कि डॉक्टर के संपर्क में बने रहे।
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वर्टिन टेबलेट के सेवन की बात करें तो इसे पानी के साथ पूरा का पूरा निगलना सही होता है। बीमार व्यक्ति के लक्षणों को देखते हुए डॉक्टर यह निर्धारित करते हैं कि मरीज को कितना और कब डोज देना चाहिए। ताकि उसे जल्द से जल्द ठीक किया जा सके। ऐसा हो सकता है कि डॉक्टर के सुझाव के अनुसार मरीज को इस दवा का सेवन कई महीनों तक करना पड़ सकता है। साथ ही ठीक होने के बाद भी दवा का सेवन महीनों तक करना पड़ सकता है। खाने के बाद दवा का सेवन किया जाए तो उसके कारण पेट संबंधी परेशानियों से निजात पाया जा सकता है, लेकिन जरूरी है कि दवा का सेवन करने के पूर्व डॉक्टरी सलाह ली जाए।
मिनिएरिज डिजीज में इस दवा के कई फायदे होते हैं। यह दवा हिस्टेमिन एनालॉग (histamine analogues) दवा की ग्रुप से आती है। यह कान के आंतरिक भाग में खून को सुचारू रूप से फ्लो करने में मददगार साबित होती है, वहीं अत्यधिक फ्लूइड प्रेशर को कम करने में मददगार साबित होती है। इसी प्रेशर के कारण व्यक्ति को जी मचलाना, वर्टिगो, सिर चकराना, टिनिटस (कान में आवाज सुनाई देना), सुनाई न देना जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
वर्टिन टेबलेट का सेवन करने से लक्षणों में एकाएक कमी आती है। वहीं जैसे-जैसे इसका सेवन करते जाते हैं वैसे-वैसे लक्षणों में भी कमी आने लगती है। यदि आप डोज मिस किए बिना इस दवा का नियमित तौर पर सेवन करते हैं तो आपको बेहतर नतीजे देखने को मिलते हैं, लेकिन दवा का सेवन करने से शुरुआती सप्ताह में ही आपको इसका असर दिखना शुरू हो जाता है। और पढ़ें : Cefotaxime : सीफोटेक्सीम क्या है? जानिए इसके उपयोग, साइड इफेक्ट्स और सावधानियां
वर्टिन का सेवन करने से सामान्य साइड इफेक्ट की बात करें तो मरीज को सिर दर्द, बीमार का होने का अहसास होना, इनडायजेशन (अपच) के साथ पेट दर्द या पेट में सूजन की समस्या हो सकती है।
इस दवा के सेवन से होने वाले साइड इफेक्ट्स के ज्यादातर मामलों में चिकित्सीय सलाह की जरूरत नहीं पड़ती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि साइड इफेक्ट्स समय के साथ खुद ब खुद ही चले जाते हैं। हमारे शरीर की संरचना ही ऐसे हुई है कि साइड इफेक्ट जल्द से जल्द ठीक हो जाते हैं ,लेकिन यदि साइड इफेक्ट्स ठीक न हो तो जरूरी है किजल्द से जल्द डॉक्टरी सलाह ली जाए। इस दवा के सेवन से होने वाले साइड इफेक्ट पर एक नजर ;
साइड इफेक्ट्स से कैसे पाए निजात
सूजन : एक बार में ज्यादा खाने की बजाय कम मात्रा में खाना का सेवन करें। हड़बड़ाकर खाने की बजाय धीरे-धीरे भोजन करें। नियमित रूप से व्यायाम करें ताकि खाना आसानी से पच जाए। खाने के साथ बात न करें, इससे पेट में हवा चली जाती है। स्ट्रा से पानी न पिंए वहीं च्यूंगम का सेवन न कर सिगरेट और शराब से परहेज करें। वैसे खाद्य पदार्थ जिसे पचाने में दिक्कत होती है उनका सेवन कम करें।
इनडायजेशन : खाने के साथ और खाने के बाद दवा का सेवन करना फायदेमंद होता है। दवा का सेवन करने के दौरान इनडायजेशन की परेशानी से बचने के लिए कोशिश करनी चाहिए। कम-कम कर खाना खाते रहिए। ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन कतई नहीं करना चाहिए जिससे आपके पेट को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना करना पड़े। कोशिश करें कि तैलीय खाद्य पदार्थ के साथ मसालेयुक्त खाद्य पदार्थ का सेवन न करें।
वहीं कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक, कैफीन और सिट्रस फ्रूट्स का सेवन कम करना चाहिए। दवा का सेवन करने के दौरान स्मोकिंग और शराब का सेवन कतई नहीं करना चाहिए, नहीं तो दुष्परिणामों का सामना करना पड़ सकता है वहीं आपकी परेशानी और बढ़ सकती है। सोने के दो से तीन पहले खाने का सेवन नहीं करना चाहिए। कोशिश करें कि बेड की सतह से आपका सिर थोड़ा ऊंचा रहे, इसके लिए दो से तीन तकिए का इस्तेमाल कर सकते हैं। बावजूद इसके स्थिति में सुधार न हो तो ऐसी परिस्थिति में आपको डॉक्टरी सलाह लेने की जरूरत होती है।
सिर दर्द : दवा का सेवन करने के दौरान आप इस बात का ख्याल रखें कि शरीर को पूरा आराम दें और नियमित मात्रा में पानी का सेवन करते रहें। ताकि शरीर में पानी की कमी न होने पाए। कमरे को अंधेरा कर नींद लें। वहीं जितना सामान्य दिनों में आप नींद लेते हैं उतनी ही नींद लें। कोशिश करें कि लंबे समय तक टीवी, मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल न करें। यदि सिर दर्द ठीक न हो तो उस स्थिति में जरूरी है कि डॉक्टरी सलाह लें। वहीं डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही पेनकिलर का सेवन करें।
जी मिचलाना : इस समस्या से निजात पाने के लिए आप कम मात्रा में खाना व पेय का सेवन करें। फैटी और फ्राइड भोजन के साथ मसालेदार और मीठे खाद्य पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए। कोशिश करें कि ठंडा या फिर हल्का गर्म भोजन ग्रहण करें, जिससे भोजन की सुगंध आए और आप बेहतर फील करें। आप चाहे तो अदरक की कम मात्रा चबाने के साथ अदरक की चाय पी सकते हैं। केले का सेवन करना फायदेमंद होता है इससे पोटेशियम मिलता है। वहीं उल्टी की इच्छा भी नहीं होती है। बीमार होने के कारण शरीर से विटामिन और मिनरल की कमी होने के कारण ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट लेना चाहिए। मौजूदा समय में कई दवाएं भी हैं जिससे हम बीमार होने से बच सकते हैं। बावजूद इसके स्थिति में कोई सुधार नहीं होता है तो ऐसे में आपको डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।
पेट दर्द से बचाव : आप रिलैक्स होने की कोशिश करें और गर्म पानी पीने से पेट दर्द से राहत मिल सकती है। एक समय में ज्यादा मात्रा में खाद्य पदार्थ का सेवन करने की बजाय कम- कम करके खाएं। ऐसी स्थिति में शराब और चाय का सेवन नहीं करना चाहिए। बावजूद इसके दर्द ज्यादा है तो डॉक्टरी सलाह लेना चाहिए। दर्द कम करने0 को लेकर डॉक्टर अन्य दवा का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं।
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मिनियर्स डिजीज के कारण कुछ समस्याएं हो सकती है। जैसे स्ट्रेस, थकान, इमोशनल डिस्ट्रेस, प्रेशर का बदलना जैसे लक्षण हो सकते हैं। इतना ही नहीं यदि आप यह दवा लेते हैं और कुछ खाद्य व डेयरी प्रोडक्ट जैसे कैफीन, शराब, हाई सोडियम युक्त खाद्य पदार्थ के सेवन से बीमारी और बढ़ सकती है। वहीं रोजाना 2 ग्राम लो सॉल्ट डायट अपनाकर आप मिनियर्स डिजीज को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं।
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मौजूदा समय में इस दवा के साथ सभी दवाओं के रिएक्शन की जानकारी नहीं है, उसके बारे में शोध किए जा रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि इस दवा का सेवन करने के पूर्व आप पहले से कोई दवा का सेवन करते हैं या हर्बल प्रोडक्ट का सेवन करते हैं तो उसके बारे में अपने डॉक्टर को जरूर बताएं। इसके साथ कुछ दवाएं हैं जो रिएक्शन कर सकती हैं उनमें स्किन पर लगाई जाने वाली एंटीस्टेमींस, ओइंटमेंट्स, स्प्रे, डिफरहाइड्रेमिन, कोडीनस हायड्रोकोडोन, अल्प्राजोलम, जोलेपीडम, कारीसोप्रोडोल, साइक्लोबेंजाफ्रिन, सिट्रिजिन, डिफिनहाइड्रेमिन जैसी दवाओं का इस्तेमाल करने के पूर्व डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए।
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इस दवा को आप रूम टेम्प्रेचर पर रख सकते हैं, लेकिन कोशिश यही रहनी चाहिए कि इसे सूर्य की रोशनी और हीट से बचाकर रखा जाए। इसे फ्रीज में नहीं रखना है। बच्चों से दवा को दूर रखें और घर में यदि पालतू जानवर हैं तो उनसे भी इस दवा को बचाकर रखना चाहिए।
जब तक दवा को फ्लश करने की सलाह नहीं दी जाती है तब तक ऐसा न करें। प्रकृति का ध्यान रखते हुए दवा का निष्पादन करें। ताकि उससे इंसान व प्रकृति को नुकसान न पहुंचे। दवा के निष्पादन को लेकर डॉक्टरी सलाह जरूर लें।
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए डाॅक्टरी सलाह लें। ।
डिस्क्लेमर
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Current Version
05/06/2020
Satish singh द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील
Updated by: Manjari Khare