Allergy Rhinitis: नाक में एलर्जी की समस्या का घरेलू इलाज क्या है?

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Update Date जुलाई 3, 2020 . 7 मिनट में पढ़ें
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नाक में एलर्जी की समस्या तब होती है, जब एलर्जी पैदा करने वाले तत्व या कण हमारे शरीर के भीतर प्रवेश कर जाते हैं और इनके प्रति हमारा इम्यून सिस्टम प्रतिक्रिया देता है। एलर्जी पैदा करने वाले इन कणों को एलर्जेन (Allergen) भी कहा जाता है। वैसे, तो हमारे नाक में प्रदूषित कणों को रोकने की क्षमता होती है, लेकिन ये कण किसी तरह हमारी नाक के संपर्क में आने या सांस द्वारा शरीर के भीतर चले जाते हैं। एलर्जेन खाने, ड्रिंक्स या वातावारण में मौजूद हो सकते हैं। कई एलर्जेन खतरनाक नहीं होते हैं और अधिकतर लोगों को प्रभावित नहीं करते हैं। मेडिकल भाषा में इसे नेसल एलर्जी (Nasal Allergy), हे फीवर (Hay Fever) और एलर्जिक रायनाइटिस (Allergic Rhinitis) भी कहा जाता है।

नाक में एलर्जी के प्रकार

हमारी नाक में एलर्जी (Allergic Rhinitis) होने के दो प्रकार हो सकते हैं, जिसकी वजह से हमें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जैसे-

मौसमी एलर्जी (Seasonal)

मौसमी एलर्जी में आपको साल के किसी एक निश्चित मौसम में नाक में एलर्जी (Allergic Rhinitis) की समस्या होने लगती है। खासतौर से किसी निश्चित मौसम में जो पौधे या पेड़ अपने परागण छोड़ते हैं, वो मौसमी एलर्जी का कारण बन सकते हैं। जैसे- गर्मी में आपको घास या वीड के परागण से एलर्जी हो सकती है। वहीं, वसंत में आपको पेड़ों के परागण से एलर्जिक रायनाइटिस ((Allergic Rhinitis)) की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, पतझड़ में वीड आपको दिक्कत पैदा कर सकती है और मार्च अंत से नवंबर तक फंगस स्पोर्स (Fungus Spores) इस समस्या का मुख्य कारण होते हैं। लेकिन, यह पूरे साल परेशान कर सकते हैं।

बारहमासी एलर्जी (Perennial)

बारहमासी एलर्जी की वजह से होने वाली नाक में एलर्जी वो एलर्जी होती है, जो आपको पूरे साल या साल में कभी भी परेशान कर सकती है। खासतौर से, बारहमासी आपके घर के अंदर मौजूद एलर्जेन की वजह से होती है। जैसे- घर की धूल के कण, पंख, एनिमल डैंडर (यह छोटे स्किन फ्लेक्स होते हैं, जो कि बिल्ली या कुत्तों के फर के साथ झड़ते हैं), जो कि तकिए, बिस्तर, कारपेट, भारी पर्दे और सोफे या चेयर में पाई जाने वाली फोम में मौजूद हो सकते हैं। इसके अलावा, बाथरूम या बेसमेंट जैसी नमीदार जगहों पर मिलने वाला मोल्ड भी काफी आम एलर्जेन माना जाता है।

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नाक में एलर्जी (Allergic Rhinitis) होने के कारण

जैसा कि आपको ऊपर बताया गया है कि नाक में सांस के द्वारा एलर्जेन जाने की वजह से नोज में एलर्जी (Allergic Rhinitis) हो सकती है। इसके अलावा, आपको ऊपर मौसमी और बारहमासी एलर्जी के कुछ कारणों के बारे में भी बताया गया है। अब, कुछ अन्य कारणों के बारे में विस्तार से बात करते हैं।

नोज में एलर्जी (Allergic Rhinitis) के सामान्य कारण-

  • पेड़ के परागण
  • घास के परागण
  • धूल के कण
  • एनिमल डैंडर
  • कैट सलाइवा
  • मोल्ड
  • सिगरेट या बीड़ी का धुंआ
  • परफ्यूम

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जेनेटिक फैक्टर

इन सभी कारणों के अलावा नाक में एलर्जी (Allergic Rhinitis) का एक बड़ा कारण जेनेटिक फैक्टर भी होते हैं। अगर, आपकी फैमिली में किसी को यह समस्या है या थी, तो आपको इस समस्या के होने की आशंका बढ़ जाती है। कई स्टडी में देखा गया है कि, जिन लोगों को नोज में एलर्जी (Allergic Rhinitis) की दिक्कत होती है, तो उनके बच्चों को हे फीवर होने का खतरा काफी ज्यादा होता है।

अस्थमा या एक्जिमा

इसके अधिकतर मामलों में देखा गया है कि, अस्थमा या एक्जिमा (Allergic dermatitis) से ग्रसित मरीजों में दूसरे व्यक्तियों के मुकाबले नाक की एलर्जी होने का खतरा ज्यादा होता है। दरअसल, नाक में एलर्जी वाले एक तिहाई व्यक्तियों में भी माइल्ड, इंटरमिट्टेंट या एलर्जिक अस्थमा देखा गया है।

नोज में एलर्जी के लक्षण

जब आपके शरीर या नाक में एलर्जेन दाखिल हो जाते हैं, तब हमारा इम्यून सिस्टम उसपर प्रतिक्रिया देता है। प्रतिक्रिया में वह हमारे रक्त में हिस्टामाइन और ल्यूकोट्रिएनेस (histamine and leukotrienes) नामक कैमिकल रिलीज करता है, जो कि एलर्जी करने वाले एलर्जेन से लड़ते हैं। इस दौरान हमारा शरीर निम्नलिखित लक्षणों के द्वारा हमारे शरीर को सुरक्षा प्रदान करने की कोशिश करता है। दरअसल, नाक में एलर्जी के लक्षण इन कैमिकल के एलर्जेन से लड़ने के संकेत होते हैं। जैसे-

इन लक्षणों को आप ओवर द काउंटर मेडिकेशन से नियंत्रित नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा, यह लक्षण कई बार इतने गंभीर हो जाते हैं कि, आपको काफी चिड़चिड़ा कर सकते हैं। इसलिए, इन लक्षणों के दिखने पर किसी डॉक्टर को दिखाकर ही कोई दवा लें। ऊपर बताए गए नाक में एलर्जी के लक्षण काफी परेशानी भरे हो सकते हैं, जो कि आपके दैनिक कार्यों में भी रुकावट बन सकते हैं। जैसे-

नाक में एलर्जी के लक्षणों के दौरान ध्यान रखें ये बातें

नोज में एलर्जी के दौरान आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे आपके लक्षणों में राहत मिल सकती है। जैसे-

  • नाक बहना इस परेशानी के होने का आम लक्षण है, लेकिन इस दौरान ज्यादा सावधानी बरतें। क्योंकि, लापरवाही बरतने से स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए, नाक बहने के दौरान बिल्ली या कुत्ते से दूर रहें।
  • अगर आपको नाक में एलर्जी के कारण साइनस की वजह से ज्यादा दर्द हो रहा है, तो गर्म कपड़े को चेहरे पर रखें या दिन में कुछ बार स्टीम लें।
  • अगर इसके कारण आपको लगातार काफी छींक आ रही है, तो ओवर द काउंटर एंटीहिस्टामाइन ट्राय कर सकती हैं। लेकिन, डॉक्टर की सलाह से ही एलर्जी की दवा लेना ज्यादा सुरक्षित है।
  • अगर इसके कारण आपकी आंखों में बहुत ज्यादा खुजली हो रही है, तो आंखों को मलें नहीं। इसके अलावा, अगर आप घर में हैं, तो सभी खिड़की-दरवाजे बंद रखें और बाहर जाने पर सनग्लास पहनें। आंखों को आराम देने के लिए ठंडे पानी से भीगा हुआ कपड़ा आंखों पर रखें।
  • पोस्टनेजल ड्रिप में आपके नाक के पीछे वाले हिस्से से मोटा म्यूकस निकलता रहता है। जो कि आप कई बार निगल लेते हैं। लेकिन, इससे गले में लंप बन सकता है, जो कि बाद में दर्द और परेशानी पैदा कर सकता है। ऐसे में डॉक्टर से म्यूकस को पतला करने वाले नेजल स्प्रे के बारे में पूछें।

नाक में एलर्जी और जुकाम में अंतर

नाक में खुजली (एलर्जिक रायनाइटिस) एलर्जेन के संपर्क में आने के तुरंत बाद शुरू होने लगती है। जबकि, जुकाम वायरस के संपर्क में आने के एक से तीन दिन के भीतर शुरू होता है। इसके अलावा, यह परेशानी तब तक जारी रहती है, जबतक कि आप एलर्जेन के संपर्क में रहते हैं और आमतौर पर, जुकाम तीन से सात दिन के भीतर ठीक हो जाता है। नोज में एलर्जी का सबसे सामान्य लक्षण नाक बहने के साथ उससे पतला और पानी जैसा डिस्चार्ज होना होता है, लेकिन जुकाम में आपकी नाक से होने वाला डिस्चार्ज मोटा और पीले रंग का हो सकता है। इसमें बुखार नहीं आता है, लेकिन दूसरी तरफ जुकाम के साथ हल्का बुखार भी हो सकता है।

बच्चों की नाक में एलर्जी की समस्या

बच्चों में नाक में एलर्जी होने की समस्या आम होती है, क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम इतना मजबूत नहीं होता है। लेकिन, फिर भी तीन साल से कम उम्र के बच्चों को इस परेशानी के होने की आशंका कम होती है। इसके के लक्षण बच्चों में दिखने पर जल्द ही उपचार करवाना जरूरी होता है। क्योंकि, ज्यादा समय तक नोज में एलर्जी रहने से बच्चों में अस्थमा, साइनस या क्रॉनिक ईयर इंफेक्शन जैसी लंबी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। किशोरों को इस परेशानी से ज्यादा परेशानी हो सकती है, क्योंकि इससे उन्हें सोने या ध्यान लगाने में दिक्कत हो सकती है।

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नाक में एलर्जी के जोखिम

नोज में एलर्जी (एलर्जिक रायनाइटिस) की समस्या बाकी कई कारकों की वजह से भी गंभीर हो सकती है। क्योंकि, इसके होने की वजह से नाक की लाइनिंग में सूजन आ जाती है और आपकी नाक ज्यादा संवेदनशील हो जाती है। जिससे, वह दूसरे कारकों के प्रति भी प्रतिक्रिया करने लगती है। आइए, इन कारकों के बारे में जानते हैं।

  • लकड़ी जलने का धुंआ
  • तम्बाकू का धुंआ
  • वायु प्रदूषण
  • तेज गंध
  • तापमान में बदलाव
  • परफ्यूम
  • उमस
  • हवा
  • ऐरोसोल स्प्रे
  • रूम स्प्रे

नाक में एलर्जी होने पर डॉक्टर से कब मिलें?

नाक में एलर्जी होने के लक्षण एकदम से कभी खतरनाक नहीं होते हैं। कई बार नाक में एलर्जी की जांच के लिए एलर्जी टेस्टिंग की जरूरत भी नहीं होती है। आपको अगर सावधानियां अपनाने के बाद भी आराम नहीं मिल रहा है और आपके लक्षण गंभीर हो रहे हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। आप डॉक्टर से एलर्जी टेस्टिंग के लिए कह सकते हैं, जिससे आपकी नाक में एलर्जी के सटीक कारण का पता लग सके। आप नाक में एलर्जी होने पर डॉक्टर के पास जा सकते हैं, यदि

  1. अगर नाक में एलर्जी के लक्षण एक हफ्ते से ज्यादा तक जारी रहें और काफी परेशान करते रहें।
  2. बचाव और ओवर द काउंटर एलर्जी मेडिसिन आराम न कर रही हों।
  3. अगर आपको अस्थमा या एक्जिमा जैसी समस्या है, जो कि नाक में एलर्जी की समस्या को और गंभीर कर सकती है।
  4. अगर पूरे साल नाक में एलर्जी है।
  5. डॉक्टर के द्वारा बताई गई एलर्जी की दवाओं के सेवन से साइड इफेक्ट्स होने पर।
  6. एलर्जी शॉट्स या इम्यूनोथेरेपी के विकल्प के बारे में जानने के लिए।

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नाक में एलर्जी का ट्रीटमेंट

नाक में एलर्जी के ट्रीटमेंट का सबसे बेहतर तरीका एलर्जेन से बचाव है। हालांकि, इन एलर्जेन से पूरी तरह दूर रह पाना संभव नहीं है। उदाहरण के लिए, पेड़ या पौधों के परागण पूरी हवा में मौजूद रहते हैं, इसलिए आप हवा से दूर नहीं रह सकते। लेकिन, फिर भी नाक में एलर्जी हो जाने के बाद निम्नलिखित तरीकों से इसका इलाज किया जा सकता है।

मेडिकेशन

दवाइयों की मदद से नाक में एलर्जी के लक्षणों से राहत तो मिल सकती है, लेकिन उनसे एलर्जी ठीक नहीं हो सकती। एलर्जी मेडिसिन की अधिकतर विकल्प ओवर द काउंटर ही हैं, लेकिन किसी भी दवाई का उपयोग करने से पहले अपने फार्मसिस्ट और डॉक्टर से बात कर लेना सुरक्षित होता है। नाक में एलर्जी के लिए निम्नलिखित मेडिकेशन का उपयोग किया जा सकता है।

  • एंटीहिस्टामाइन
  • डिकंजेस्टेंट्स
  • एंटी ल्यूकोट्राइन
  • स्टेरॉइड स्प्रे
  • इम्यूनोथेरेपी
  • आई ड्रोप और नेजल स्प्रे

इम्यूनोथेरेपी- इम्यूनोथेरेपी को हाइपोसेंसिटाइजेशन भी कहा जाता है। इस थेरेपी की मदद से इम्यून सिस्टम को मजबूत किया जाता है। इसका मकसद एलर्जेन के प्रति लंबे समय तक सहनशीलता बढ़ाना होता है। लेकिन, इम्यूनोथेरेपी सिर्फ गंभीर एलर्जी का इलाज करने के लिए ही उपयोग की जाती है।

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नाक में एलर्जी की जांच

इसकी जांच के लिए आपका डॉक्टर आपके एलर्जी के कारणों के बारे में पूछ सकता है या उसके ज्यादा होने के एक निश्चित समय के बारे में पूछ सकता है।

  • इसके अलावा, डॉक्टर आपकी नाक की जांच कर सकता है, कि कहीं उसमें नेजल पोलिप तो विकसित नहीं हो गए हैं।
  • एलर्जी टेस्ट के लिए दो प्रकार के टेस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है। पहला- स्किन प्रिक टेस्ट और दूसरा ब्लड टेस्ट
  • स्किन प्रिक टेस्ट में आपके विभिन्न तरह के एलर्जेन को सुई की मदद से आपके शरीर में डाला जाता है और उसके प्रति आपके इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया देखी जाती है।
  • ब्लड टेस्ट में आपके रक्त में इम्यूनोग्लोब्युलिन ई एंटीबॉडी की जांच की जाती है, जो कि एलर्जेन के संपर्क में आने से उत्पादित होने लगता है।
  • नेजल एंडोस्कोपी
  • सीटी स्कैन

क्या एलर्जी शॉट्स असरदार होते हैं?

इम्यूनोथेरेपी को ही एलर्जी शॉट्स कहा जाता है। अगर, आपको हर साल तीन महीने से ज्यादा नोज में एलर्जी के लक्षण परेशान करते हैं, तो यह तरीका काफी असरदार साबित हो सकता है। इसकी मदद से आपकी नाक में एलर्जी के लक्षणों को कम करने के लिए दवाइयों की निर्भरता को कम किया जा सकता है।

नोज में एलर्जी के लिए घरेलू उपाय

इसके लिए घरेलू उपाय आपकी एलर्जी के कारण या प्रकार पर निर्भर करता है। जैसे कि अगर आपको मौसमी नोज में एलर्जी होती है, तो आपको उस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ सकती है। यदि आपको घर के अंदर मौजूद कारणों की वजह से नाक में एलर्जी होती है, तो आपको उससे संबंधित बचाव करने चाहिए। आइए, नोज में एलर्जी के लिए घरेलू उपायों के बारे में जानते हैं।

बटरबर- बटरबर एक पौधा होता है, जो कि एक स्टडी में आंखों में खुजली के लिए काफी असरदार होता है। इसे, ओरल एंटीहिस्टामाइन की तरह इस्तेमाल किया जाता है।

पपीता या पाइनएप्पल- पपीता या पाइनएप्पल में मौजूद ब्रोमलेन एंजाइम होता है। यह एंजाइम नाक में हुई सूजन को कम करके लक्षणों में मदद करता है।

शहद- शहद खाने से एलर्जिक रिएक्शन कम होने लगता है।

विटामिन सी- नेचुरल मेडिकेशन के प्रैक्टिस करने वाले लोगों का सुझाव है कि विटामिन-सी का प्रतिदिन सेवन 2000 मिलीग्राम करने से हिस्टामाइन लेवल कम होता है।

एक्यूपंक्चर- 2015 में 13 स्टडी के रिव्यू से सामने आया है कि एक्यूपंक्चर मौसमी और बारहमासी नाक की एलर्जी पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

प्रोबायॉटिक्स- 2015 में हुई 23 स्टडी से सामने आया है कि प्रोबायॉटिक्स का उपयोग करने से लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है।

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