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हार्ट वॉल्व का क्या होता है काम? जानिए हार्ट वॉल्व से जुड़ी समस्याओं के बारे में

हार्ट वॉल्व का क्या होता है काम? जानिए हार्ट वॉल्व से जुड़ी समस्याओं के बारे में

हार्ट में चार वॉल्व होते हैं। हार्ट के चार चैम्बर में ये वॉल्व पाए जाते हैं। वॉल्व की हेल्प से ब्लड सही दिशा में आगे बढ़ता है। माइट्रल (Mitral) वॉल्व और ट्राइकसपिड वॉल्व (Mitral valve and tricuspid valve) अपर हार्ट चैम्बर और वेंट्रिकल्स (Ventricles) में स्थित होते हैं। इसे लोअर हार्ट चैम्बर भी कहते हैं। ऑर्टिक वॉल्व और पल्मोनरी वॉल्व ब्लड वैसल्स (हार्ट के बाहर जाने वाली ब्लड वैसल्स) और वेट्रिकल्स के बीच में उपस्थित होते हैं। हार्ट फंक्शन में हार्ट वॉल्व की प्रमुख भूमिका होती है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको हार्ट वॉल्व की जानकारी देंगे और हार्ट वॉल्व डिजीज के बारे में बताएंगे। जानिए हार्ट वॉल्व कैसे काम करते हैं?

हार्ट वॉल्व (Heart valve) कैसे काम करते हैं?

सर्क्युलेटरी सिस्टम की हेल्प से ऑक्सीजन और पोषक तत्व शरीर के सभी ऊतकों में पहुंचता है। हार्ट वॉल्व की इनमें प्रमुख भूमिका होती है। जानिए हार्ट वॉल्व के प्रकार और उनके फंक्शन के बारे में।

ट्राईकस्पिड वॉल्व (Tricuspid Valve)

ट्राईकस्पिड वॉल्व में तीन लीफलेट्स (leaflets) होते हैं। ट्राईकस्पिड वॉल्व की हेल्प से टॉप राइट चैम्बर (Right atrium) और बॉटम राइट चैम्बर (right ventricle) सेपरेट होता है। ये राइट एट्रियम से राइट वेंट्रिकल की तरफ ब्लड फ्लो में मदद करता है। साथ ही ट्राईकस्पिड वॉल्व राइट वेंट्रिकल से राइट एट्रियम की ओर ब्ल फ्लो को वापस जाने से रोकने का काम भी करता है। ट्राईकस्पिड वॉल्व (Tricuspid Valve) में खराबी के कारण ट्राइकसपिड एट्रेसिया (Tricuspid atresia), ट्राइकसपिड रेगर्जिटेशन (Tricuspid regurgitation) और ट्राइकसपिड स्टेनोसिस ( tricuspid stenosis) समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

और पढ़ें: हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट में क्या अंतर है?

पल्मोनरी वॉल्व (Pulmonary Valve)

पल्मोनरी वॉल्व में तीन लीफलेट्स होती हैं। ये राइट वेंट्रिकल को पल्मोनरी आर्टरी से सेपरेट करता है। पल्मोनरी वॉल्व की हेल्प से ब्लड फ्लो राइट वेंट्रिकल से लंग्स की ओर पंप होता है, जहां इसे ऑक्सीजन प्राप्त होती है। ये पल्मोनरी आर्टरी से राइट वेंट्रिकल की ओर ब्लड के फ्लो को रोकने का काम करता है। पल्मोनरी वॉल्व में खराबी के कारण पल्मोनरी वॉल्व स्टेनोसिस ( Pulmonary valve stenosis), पल्मोनरी वॉल्व रेगर्जिटेशन ( Pulmonary valve regurgitation) आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

माइट्रल वॉल्व (Mitral Valve)

माइट्रल वॉल्व (Mitral Valve) में दो लीफलेट्स ( Leaflets) होती हैं। ये टॉप लेफ्ट चैम्बर (Left atrium) को बॉटम लेफ्ट चैम्बर (Left ventricle) से अलग करने का काम करता है। ये ब्लड फ्लो को लंग्स से लेफ्ट एट्रियम में पंप करने के लिए अलाऊ करता है। अगर माइट्रल वॉल्व में खराबी आ जाए, तो मित्राल वॉल्व प्रोलेप्स (Mitral valve prolapse), मित्राल वॉल्व रेगर्जिटेशन (Mitral valve regurgitation) और मित्राल वॉल्व स्टेनोसिस (Mitral valve stenosis) की समस्या हो जाती है।

एओर्टिक वॉल्व (Aortic Valve)

एओर्टिक वॉल्व में तीन लीफलेट्स होती है। ये लेफ्ट वेंट्रीकल ( Left ventricle) को अरोटा (Aorta) से अलग करता है। ये ब्लड को अरोटा और बॉडी से लेफ्ट वेंट्रिकल की ओर ब्लड को छोड़ने की अनुमति देता है। साथ ही ये लेफ्ट वेंट्रिकल और अरोटा से ब्लड के बैकफ्लो को रोकने का काम भी करता है। एओर्टिक वॉल्व में खराबी के कारण एओर्टिक रेगर्जिटेशन (Aortic regurgitation), एओर्टिक स्टेनोसिस (Aortic stenosis) की समस्या हो जाती है।

और पढ़ें: और पढ़ें: लड़का या लड़की : क्या हार्टबीट से बच्चे के सेक्स का पता लगाया जा सकता है?

हार्ट वॉल्व (Heart valve) से जुड़ी कौन-कौन सी दिक्कतें हो सकती हैं?

हार्ट वॉल्व से जुड़ी किसी तरह की बीमारी होने पर सालों तक आमतौर पर लक्षण नजर नहीं आते हैं। अगर किसी व्यक्ति को हार्ट वॉल्व से जुड़ी समस्या काफी समय से है, तो निम्नलिखित लक्षण नजर आ सकते हैं।

किन्ही कारणों से हार्ट वॉल्व सही से नहीं खुल पाते हैं, जिस कारण से ब्लड फ्लो होने में दिक्कत होती है। इस कारण से पूरे शरीर में बुरा असर पड़ता है। हार्ट वॉल्व डिजीज जन्मजात हो सकती हैं। कई कारणों या फिर कंडीशन के कारण भी हार्ट वॉल्व डिजीज हो सकती है। इंफेक्शन और अन्य हेल्थ कंडीशन के कारण ये समस्या हो सकती है। जानिए हार्ट वॉल्व प्रॉब्मल और हार्ट वॉल्व से जुड़े रिस्क फैक्टर के बारे में।

हार्ट वॉल्व से जुड़ी समस्या : रेगर्जिटेशन (Regurgitation)

हार्ट वॉल्व से जुड़ी इस समस्या में वॉल्व फ्लैप्स ठीक तरीके से बंद नहीं हो पाते हैं, जिसके कारण हार्ट में ब्लड लीक होता है। आमतौर पर वॉल्व फ्लैप्स के उखड़ने के कारण ये स्थिति पैदा होती है। इसे प्रोलैप्स कंडीशन कहते हैं।

हार्ट वॉल्व से जुड़ी समस्या : स्टेनोसिस (Stenosis)

स्टेनोसिस (Stenosis) की समस्या होने पर वॉल्व फ्लैप्स मोटे और कठोर हो जाते हैं और साथ ही एक साथ फ्यूज हो जाते हैं। वॉल्व के संकुचित हो जाने से वॉल्व ब्लड फ्लो कम हो जाता है।

हार्ट वॉल्व से जुड़ी समस्या : एट्रिसिया (Atresia)

इस कंडीशन में वॉल्व नहीं बन पाता है और साथ ही टिशू की कठोर परत हार्ट चैम्बर में ब्ल फ्लो को ब्लॉक करने का काम करती है।

और पढ़ें: हार्ट अटैक में फर्स्ट ऐड कब और कैसे दें? पढ़िए इसकी पूरी जानकारी

जानिए क्या होते हैं हार्ट वॉल्व से जुड़े रिस्क फैक्टर्स और कॉम्प्लीकेशन (Risk Factors and Complications related to Heart Valve)?

हार्ट वॉल्व डिजीज कई कारणों से हो सकती है। जानिए कौन से कारण है, जो हार्ट वॉल्व के रिस्क को बढ़ाने का काम करते हैं।

  • उम्र बढ़ने के साथ हार्ट वॉल्व डिजीज का खतरा।
  • ऐसा कोई इंफेक्शन, जो हार्ट वॉल्व को बुरी तरह से प्रभावित करें।
  • हाय ब्लड प्रेशर, हाय कॉलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और अन्य हार्ट डिजीज के कारण रिस्क फैक्टर बढ़ने का खतरा।
  • जन्मजात होने वाली हार्ट डिजीज के कारण हार्ट वॉल्व में खराबी।

हार्ट वॉल्व में खराबी के कारण कई कॉम्प्लीकेशंस का सामना करना पड़ सकता है। हार्ट फेलियर (Heart failure), स्ट्रोक (Stroke), ब्लड क्लॉट का खतरा, हार्ट रिदम का एब्नॉर्मल होना आदि शामिल हैं। हार्ट वॉल्व में खराबी के कारण व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।

इन दिक्कतों का निदान कैसे किया जा सकता है?

हीरानंदानी हॉस्पिटल, वाशी ए फोर्टिस नेटवर्क हॉस्पिटल, इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के निदेशक डॉ. बृजेश कुंवर के अनुसार, ” अगर आपको बीमारी के लक्षण नजर आते हैं, तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर हार्ट मर्मर (heart murmur) या अन्य हार्ट वॉल्व डिजीज को डिटेक्ट करने की कोशिश करेंगे। कार्डियोलॉजिस्ट कंडीशन को डायग्नोज करने की कोशिश करेंगे। फिर इसके बाद डॉक्टर मेडिकेशन और सर्जरी के बारे में तय करते हैं। सभी हार्ट डिजीज को सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है। हार्ट डिजीज का इलाज मरीज की कंडिशन पर निर्भर करता है। मेडिकेशन या सर्जरी से पहले क्लीनिकल और रेडियोलॉजिकल इंवेस्टिगेशन किया जाता है। अगर मरीज दवाओं या थेरिपी की मदद से ठीक नहीं हो सकता है, तो पेशेंट को सर्जरी की जरूरत पड़ती है। सर्जरी के जोखिम और लाभों दोनों को जांचने के बाद पेशेंट को विशेषज्ञ द्वारा सही सलाह दी जानी चाहिए।”

डॉक्टर आपसे बीमारी के लक्षणों के बारे में जानकारी लेने के साथ ही फिजिकल एक्जामिनेशन भी कर सकते हैं। फिजिकल चेकअप के दौरान डॉक्टर स्टेथोस्कोप की मदद लेते हैं। टेस्ट और प्रोसीजर के दौरान डॉक्टर ईकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography-ECG) करते हैं। इससे हार्ट डिजीज का पता चलता है। साथ ही डॉक्टर इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम और चेस्ट एक्स-रे भी कर सकते हैं। डॉक्टर चेस्ट एक्स-रे, स्ट्रेस टेस्टिंग और कार्डियक कैथेटराइजेशन (cardiac catheterization) भी करते हैं। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं।

हार्ट वॉल्व (Heart valve) से जुड़ी तकलीफ के लिए ट्रीटमेंट

हार्ट वॉल्व की तकलीफ से बचने के लिए अभी तक कोई मेडिसिन नहीं बनी है। अगर लाइफस्टाइल में बदलाव किया जाए और बीमारी के लक्षणों को दबाया जाए, तो पेशेंट को राहत मिल सकती है। हार्ट वॉल्व डिजीज से छुटकारा पाने के लिए डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। बीमारी के लक्षणों को कम करने के लिए डॉक्टर आपको कुछ मेडिसिन लेने की सलाह दे सकते हैं। जानिए हार्ट वॉल्व से जुड़े ट्रीटमेंट के बारे में।

मेडिकेशन (Medicines)

डॉक्टर आपको ब्लड प्रेशर लो करने या फिर हाय ब्लड कॉलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए दवा देंगे। साथ ही अनियमित हार्टबीट को ठीक करने के लिए भी मेडिसिन दी जाती है। वहीं जिन लोगों को क्लॉट की समस्या हो जाती है, उसे भी मेडिसिंस की हेल्प से ठीक किया जाता है। ब्लड वेसल्स को वाइड करने के लिए भी डॉक्टर दवा का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं।

हार्ट वॉल्व को रिप्लेस करके (Repairing or Replacing Heart Valves) बीमारी का इलाज

डॉक्टर आपको हार्ट वॉल्व को रिप्लेस करवाने या फिर रिपेयर करवाने की सलाह दे सकते हैं। ऐसा करने से मौत के खतरे को कम किया जा सकता है। अगर आप हार्ट वॉल्व नहीं रिपेयर या रिप्लेस करवाते हैं, तो हार्ट को हर समय खतरा बना रहता है। एज और हेल्थ को देखते हुए डॉक्टर हार्ट सर्जरी की सलाह देते हैं। हार्ट वॉल्व रिप्लेस करवाने से हार्ट मसल्स को स्ट्रेंथ मिलती है। जो लोग हार्ट वॉल्व को रिप्लेस करवाते हैं, उन्हें इंफेक्टिव एंडोकार्डाइटिस ( infective endocarditis) का खतरा कम हो जाता है।

रॉस प्रोसेस (Ross Procedure)

डॉक्टर रॉस प्रोसेस की हेल्प से एओर्टिक (aortic) वॉल्व की समस्या को ठीक करते हैं। इस सर्जरी के बाद ऑर्टिक वॉल्व को पल्मोनरी वॉल्व से रिप्लेस कर देते हैं। इस प्रक्रिया में रिस्क अधिक होता है क्योंकि इसके लिए डोनर की जरूरत पड़ती है। बच्चों के लिए इस प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित माना जाता है, जबकि वयस्कों और अधिक उम्र के लोगों में अधिक जटिलताएं होती हैं।aortic

हार्ट वॉल्व की समस्याओं से छुटकारे के लिए इन बातों का रखें ध्यान

हम आपको जैसा कि पहले ही बता चुके हैं कि हार्ट वॉल्व डिजीज से बचाव के लिए अभी तक कोई दवा नहीं बनी है। बीमारी के लक्षणों को कम करने के लिए डॉक्टर दवाओं का सेवन करने की सलाह देते हैं। आपको अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान देने के साथ ही खाने में पौष्टिक आहार शामिल करना चाहिए। जानिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

  • उम्र बढ़ने के साथ ही खाने में फैट को सीमित कर दें।
  • प्रोसेस्ड फूड को न कहें और घर के बने फूड्स को ही खाएं।
  • रोजाना आधे से एक घंटे वॉक जरूर करें।
  • स्ट्रेस को खुद पर हावी न होने दें। आप चाहे तो डॉक्टर को इस बारे में जरूर बताएं।
  • रोजाना सात से आठ घंटे की नींद जरूर लें। अच्छी नींद लेने से शरीर स्वस्थ्य रहता है।
  • बुरी आदतों जैसे कि स्मोकिंग और एल्कोहॉल का सेवन बिल्कुल बंद कर दें।

हार्ट को हेल्दी रखने के लिए आपको लाइफस्टाइल में सुधार के साथ ही खानपान में भी ध्यान देने की जरूरत है। अगर आप फैटी चीजों के साथ ही अधिक मात्रा में नमक का सेवन करते हैं, तो आपके हार्ट के खतरा हो सकता है। हार्ट वॉल्व के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप हार्ट स्पेशलिस्ट से जरूर जानकारी लें। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

हार्ट से संबंधित अधिक जानकारी के लिए देखें ये वीडियो –

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ घंटे पहले को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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