अकूस्टिक न्यूरोमा जिसे ध्वनिक न्यूरोमा भी कहा जाता है, एक नॉन कैंसरस ट्यूमर है जो मुख्य तंत्रिका तंत्र में धीरे-धीरे विकसित होता है, मुख्य तंत्रिका जो आंतरिक कान से मस्तिष्क तक जाती है। भले ही ट्यूमर कैंसरमुक्त होता है, लेकिन इससे कई अन्य समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। अकूस्टिक न्यूरोमा क्या है और इसका किसी के स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है जानिए इस आर्टिकल में।
कान के अंदर से होते हुए मस्तिष्क तक जाने वाली मुख्य तंत्रिका में विकिसत होने ट्यूमर को अकूस्टिक न्यूरोमा कहा जाता है। हालांकि यह कैंसरमुक्त होता है, लेकिन इससे कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। मुख्य तंत्रिका की शाखाएं जहां ट्यूमर विकसित होता है,वह सुनने की क्षमता और बैलेंस बनाने में मदद करता है, ऐसे में अकूस्टिक न्यूरोमा के दवाब से हियरिंग लॉस , कान में कुछ बजने की आवाज या अस्थिरता की समस्या हो सकती है।

ट्यूमर यदि बड़ा हो तो वह क्रेनियल नर्व्स पर दबाव डालता है, यह नर्व फेसियल एक्सप्रेशन और सेंसेशन महसूस करने वाली मांसपेशियों को नियंत्रित करती है। अकूस्टिक न्यूरोमा आमतौर पर श्वान सेल्स (Schwann cells) से बनती हैं जो नर्व को ढंके रहता है और अकूस्टिक न्यूरोमा धीरे-धीरे बढ़ता या बिल्कुल नहीं बढ़ता। दुर्लभ मामलों में यह तेजी से विकसित होता है और इतना बड़ा हो जाता है कि मस्तिष्क पर दबाव बनाकर उसके महत्वपूर्ण कार्यों में हस्तक्षेप करता है। ऐसी स्थिति बहुत घातक होती है।
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अकूस्टिक न्यूरोमा जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए इसके लक्षणों को पहचानकर तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है। इसके लक्षणों में शामिल हैः
अकूस्टिक न्यूरोमा धीमी गति से बढ़ता है, लेकिन यह मस्तिष्क के महत्वपूर्ण संरचना को प्रभावित करता है और जानलेवा भी साबित हो सकता है।
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दरअसल, अकूस्टिक न्यूरोमा के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि कुछ रिस्क फैक्टर हैं जो इसका जोखिम बढ़ा देते हैं, इसमें शामिल हैः
फैमिली हिस्ट्री- न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस टाइप 2 परिवार में कई पीढ़ियों से चल रहा हो सकता है। हालांकि, ऐसा केवल 5 प्रतिशत मामलों में ही होता है।
रेडिएशन एक्पोजर- बचपन में सिर और गर्दन में रेडिएशन के अधिक एक्सपोजर से आगे चलकर अकूस्टिक न्यूरोमा का खतरा बढ़ सकता है।
उम्र- अकूस्टिक न्यूरोमा अक्सर 30 से 60 की उम्र में होता है।
अध्ययन के मुताबिक, लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहने से भी अकूस्टिक न्यूरोमा का खतरा बढ़ जाता है। कुछ लोगों का मानना है कि फोन के अधिक इस्तेमाल से भी अकूस्टिक न्यूरोमा का खतरा रहता है, लेकिन किसी रिसर्च में अभी तक यह साबित नहीं हुआ है।
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अकूस्टिक न्यूरोमा के निदान के लिए डॉक्टर-
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अकूस्टिक न्यूरोमा के कारण कई जटिलताएं हो सकता हैं-
चक्कर आना और संतुलन खोना- ऐसा होना पर आपके लिए रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाता है।
हाइड्रोकेफलस- बड़ा ट्यूमिर जो मस्तिष्क को पर दबाव बनाता है के कारण स्पाइनल कॉर्ड और मस्तिष्क के बीच बने वाले तरल पर असर पड़ता है। यदि तरल सिर में जमा हो जाता है तो इससे हाइड्रोकेफलस (Hydrocephalus) होता है।
फेशियल पैरालाइसिस- सर्जरी या दुर्लभ मामलों में ट्यूमर फेशियल नर्व को प्रभावित करती है जिससे फेशियल पैरालाइसिस हो सकता है। ऐसे में चेहरे का एक हिस्सा प्रभावित हो सकता है और आपको बोलने में दिक्कत होगी।
हियरिंग लॉस- यह उपचार के बाद भी पूरी तरह से ठीक नहीं होता है।
अकूस्टिक न्यूरोमा से बचने का कोई तरीका नहीं है। फिलहाल साइंटिस्ट ऐसे थेरेपी का विकास करने में लगे हैं जो अकूस्टिक न्यूरोमा के लिए जिम्मेदार श्वान सेल्स के अधिक निर्माण को कंट्रोल करे।
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अकूस्टिक न्यूरोमा के लिए कई उपचार है, लेकिन यह व्यक्ति की उम्र, सामान्य स्वास्थ्य और ट्यूमर के स्थान और आकार पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में डॉक्टर इंतजार करके ट्यूमर पर निगरानी रखता है। यदि ट्यूमर छोटा है और धीमी गति से विकसित हो रहा है तो इसके लिए कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ती। ट्यूमर के उपचार के तरीकों में शामिल हैः
इसे वॉचफुल वेटिंग भी कहते हैं, क्योंकि अकूस्टिक न्यूरोमा कैंसरस नहीं होता है और धीमी गति से बढ़ता है। इसलिए तुरंत इसका उपचार करना जरूरी नहीं होता। आमतौर पर डॉक्टर समय-समय पर MRI के जरिए ट्यूमर की जांच करता है और यदि उसे लगा कि ट्यूमर अधिक बढ़ रहा है या कोई गंभीर लक्षण दिखने लगे हैं तो वह अन्य उपचार की सलाह देता है।
इस प्रक्रिया में रेडिएशन की मदद से ट्यूमर को टारगेट किया जाता है। डॉक्टर स्कैल्प को सुन्न करके एक हल्का हेड फ्रेम लगाता है। इमेजिंग स्कैन से ट्यूमर का साइज और इसकी स्थिति देखने के बाद रेडिएशन किरण का इस्तेमाल करता है। इस प्रक्रिया से उपचार का असर पता चलने में हफ्ते, महीने या साल भी लग सकते हैं। इतना ही नहीं कई बार ट्यूमर दोबारा भी हो सकता है। सिर्फ 3 सेंटीमीटर या इससे छोटे ट्यूमर के लिए ही रेडियोसर्जरी की जाती है।
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इस प्रक्रिया में सर्जन चीरा लगाकर पूरे ट्यूमर को निकाल देता है, लेकिन कई बार सर्जन ट्यूमर के कुछ हिस्से को ही निकालता है, क्योंकि पूरा ट्यूमर निकालने पर चेहरे के नर्व्स प्रभावित हो सकते हैं। फेशियल नर्व्स के क्षतिग्रस्त होने पर फेशियल पैरालाइसिस हो सकता है।
हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर
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(Accessed on 6 February 2020)
Acoustic Neuroma
https://www.health.harvard.edu/a_to_z/acoustic-neuroma-a-to-z
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https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/acoustic-neuroma/symptoms-causes/syc-20356127
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https://www.webmd.com/brain/acoustic-neuroma-causes-symptoms-treatments#1
All about acoustic neuroma
https://www.medicalnewstoday.com/articles/186184.php#treatment
Current Version
28/05/2020
Kanchan Singh द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील
Updated by: Shikha Patel