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किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी है विल पावर का स्ट्रांग होना

किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी है विल पावर का स्ट्रांग होना

कहते हैं कि जिंदगी न जाने कब कौन से दिन दिखा दे, किसी को नहीं पता होता है, सच है यह कहावत। ऐसा कुछ मेरे साथ भी हुआ, आज से जब दो साल पहले मुझे ये पता चला कि मेरे ब्रेन की पिट्यूटरी में ट्यूमर है। तो ये बात मेरे लिए स्वीकार करना बिल्कुल भी आसान नहीं था। उसे समय काफी दिनों तक मैं यही बात सोचती रही कि मेरे साथ ऐसा कैसे हो सकता है। मुझे लगा कि शायद रिपोर्ट गलत हो सकती है, इसलिए मैं ने जोर देकर दोबारा टेस्ट करवाया, लकिन फिर भी वही रिपोर्ट आई। प्रोलैक्टिन टेस्ट करवाया तो वो भी बहुत बढ़ा हुआ था। यह समस्या बढ़ें हुए प्रोलैक्टिन के कारण होती है। उस समय लग रहा था कि जैसे कि मेरी जिंदगी बदल गई हो और ब्रेन टयूमर के नाम सुनकर ऐसे ही दिमाग में कई तरह के निगेटिव ख्याल आते हैं। यह समस्या मुझे आज भी है, पर मेरी स्ट्रांग विल पॉवर ने मुझे कमजाेर नहीं होने दिया और मैं एक नॉर्मल लाइफ जी रही हूं।इस बात को कभी भी मैं ने अपने उपर हावी नहीं होने दिया।

उस समय स्वीकार नहीं पा रही थी

मैं ने सपने में भी नहीं सोच था कि मुझे इस तरह की समस्या हो सकती है, उस समय मैं बीमार तो एक महीने से ही थी और जर्नल फिजिश्यन को दिखाया तो वो मेरा पीसीओडी और सर्दी-जुकाम का इलाज कर रहें थें। डॉक्टरों को भी नहीं लग रहा था कि ऐसा होगा। लेकिन मुझे कुछ आराम नहीं मिल रहा था। ठंड का मौसम था और ऐसे में ठंड भी मुझे और भी ज्यादा लगने लगी थी । किसी भी डॉक्टर ने मेरे तो एमआरआई टेस्ट के लिए सलाह नहीं दी थी, सिर दर्द की वजह डॉक्टर को माइग्रेन और स्ट्रेस लग रहा था। लेकिन मेरी बहन ने अपनी तरफ से जिद किया कि एक बार एमआरआई टेस्ट करवा कर देख लेते हैं, खुद की तस्लली के लिए। लेकिन जब रिपोर्ट आई तो हम में कुछ भी समझ नहीं पा रहे थें कि हुआ क्या है। जब डॉक्टरों को दिखाया तो उन्होंने बोला कि सही समय में पता चल गया, यदि एक साल और निकल जाता तो शायद सर्जरी के बाद भी मेरा बचना मुश्किल होता ।

आंखों की रोशनी जा सकती थी

टयूमर की बात तो मैंने स्वीकार कर लिया था लेकिन आज से 6 महीने पहले जब मैंने रेग्यूलर चैकअप की तौर पर एमआरआई करवाया तो रिपोर्ट में आया कि टयूमर का साइज इतना बड़ा हो गया है कि जिसकी वजह से मेरी ऑप्टिक नर्व दब रही है और मेरे आंखों की रोशनी जा सकती है। यह एक ऐसी समस्या है जिसका कोई इलाज भी नहीं है। आप्टिक चैश्मा नर्व के डैमेज होने पर उसे दोबारा ठीक भी नहीं किया जा सकता है। उस समय मैं बहुत ज्यादा निराश हो गई थी, जैसे लग रहा था कि मेरी जिंदगी में कुछ नहीं बचा और आंखों की रोशनी चली गई तो पूरी उम्र कैसे कटेगी। मैं ने सबसे बात करना, मोबाइल और सोशल मीडिया का यूज करना सब छोड़ दिया था। ऐसा लग रहा था कि आने वाले समय में ये सब मेरी जीवन का हिस्सा नहीं होगा। रात को सोते समय भी ऐसा डर हो गया था मेरे कि सुबह उठने के बाद मेरी आंखों की रोशनी होगी कि नहीं। डॉक्टर ने सर्जरी के लिए बोल दिया था, सच बोलू तो बस मन में यही ख्याल आ रहा था कि अगर दोबारा जिंदगी मिले तो आंखों की रोशनी के साथ मिले, नहीं तो वहीं पर ही दम तोड़ दूं। लेकिन मैं शुक्रगुजार हो अपने डॉक्टर का जो मेरी रिपाेर्ट देखकर ये नहीं कह पा रहे थें कि क्या होगा, पर ये दिलासा जरूरी दे रहे थें कि कुछ नहीं होने देंगे वो मुझे। उनके ट्रीटमेंट से बिना सर्जरी के आज मैं ठीक हो रही हूं। उस समय मेरा ऑफिस जाना भी बदं हो गया था, कुछ भी मेरे पास नॉर्मल लाइफ जैसा नहीं था। बिन सर्जरी के ठीक करने के लिए न्यूरोलॉजिस्ट, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और आई स्पेशलिस्ट मिलकर मेरा ट्रीटमेंट कर रहे हैं। समय-समय पर वे मेरे सभी टेस्ट करवाते रहते हैं, हांलाकि इन सभी डॉक्टरों को दिखाते-दिखाते और सभी टेस्ट करवाते-करवाते मैं थक जाती हूं, क्योंकि इसके लिए कई दिन अस्पताल के चक्कर मुझे लगाने पड़ते हैं।

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मुझे होने वाली समस्याएं

जैसे कि ये पिट्यूटरी ग्लैंडट्यूमर जुड़ा ट्यूमर है तो इसमें प्रौलक्टीन नामक हॉर्मोन बढ़ने लगता है, जिसके कारण कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं, मुझे जो समस्या होती थी वो हैं

प्रोलैक्टिन हाॅर्मोन के कारण पीसीओडी की समस्या

क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि दस लोगों के बीच आपके आत्मविश्वास के कम होने का कारण, आपका मोटापा हो। लगभग एक वर्ष पहले मेरा कुछ ऐसा ही अनुभव रहा था। जब मोटापाग्रस्त होने के कारण खुद को लेकर मेरा मनोबल काफी कम हो गया था। जोकि मेरे लिए तनाव का एक बड़ा कारण बन गया था। जिस पर मैंने अब काबू पा लिया है। आज के समय में मोटापा हमारे बीच एक अहम और चिंताजनक विषय बन गया है। हम यह भी कह सकते हैं कि आधुनिक जीवनशैली के बड़े दुष्प्रभावों में मोटापा भी एक है। इसके चपेट में हम तेजी से आ रहें है। मोटापाग्रस्त होने पर हमें कवेल कई तरह की शारीरिक समस्याओं का ही सामना नहीं करना पड़ता बल्कि मानसिक परेशानियों से भी गुजरना पड़ता है, क्योंकि यह बात सच है कि हमारा अत्यधिक वजन यानी मोटापा हमारे आत्मविश्वास को घटाता है।

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एंडोक्राइनोलॉजिस्ट के अनसार मेरी लाइफस्टाइल

अपने बढ़ते वजन की समस्या को लेकर मैं एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से मिली और उन्होनें कुछ टैस्ट करवाएं तो पता चला कि ये सारा खेल मेरे शरीर में हो रहे हार्मोनल असंतुलन के कारण है। जोकि पीसीओडी की समस्या के रूप सामने आया। हार्मोनल असंतुलन की समस्या का कारण डॉक्टर ने बिगड़ी हुई जीवनशैली बाताया। डॉक्टर्स की माने तो आज के समय में लोगों की लाइफस्टाइल काफी खराब हो रखी है, जिसके चलते कई लोगों में ओबेसिटी, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी कई लाइफस्टाइल डिजीज के लोग शिकार हो रहे हैं। हार्मोनल समस्या से अगर वजन बढ़ रहा है तो उसे नियंत्रित करना काफी मुश्किल होता है। इसके लिए सबसे पहले डॉक्टर ने मुझे अपनी लाइफस्टाइल को सुधारने की सलाह दी, जिसके बाद मैंने अपने जीवनशैली में कई तरह के बदलाव किए और अपने बढ़ते हुए वजन को घटाया, जोकि आसान नहीं था लेकिन बदलाव जरूरी था, जैसे कि—

इस समस्या से निकलने के लिए सबसे पहले मैंने अपने अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित यानी एक टाइम टेबल सैट किया। अपने सोने व उठने का और खाने व पीने का समय निर्धारित किया। अच्छे स्वास्थ के लिए दिनभर में कम से कम 7- 8 घंटे की स्वस्थ नींद लिए बहुत जरूरी है। नींद पूरी होने पर शरीर में एनर्जी का लैवेल अच्छा बना रहता है।

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डॉक्टर के सलहानुसार फिट रहने के लिए हर व्यक्ति के लिए रोज कम से कम 20 मिनट की वॉक जरूरी है। जिसे मैंने भी अपने दिनचार्या में शामिल किया। इसके अलावा नियमित रूप से कोई न कोई एक्टिविटी या एक्सरसाइज करते रहना चाहिए। एक्सरसाइज के रूप में मैं ने लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना शुरू किया। सप्ताह में 2 से 3 बार स्विमिंग करती हूं। इसके अलावा स्ट्रेचिंग को भी अपनाया। स्ट्रेचिंग से बॉडी की स्ट्रेंथ बढ़ जाती है।

वजन को कम करने में हमारे खान—पान की महत्वूपर्ण भमिका होती है। डॉक्टर की सलाहाुनसार अपने खानपान में कई तरह के तरह बदलाव किए और दिनभर में सिर्फ 1200 कैलोरी की डाइट लेती हूं। अपने डाइट को दिन भर पांच भागों में बाट दिया। इससे मेटाबॉलिज्म सुचारू रूप से काम करता है। अपनी डाइट में अधिकतर हरी सब्जियां, सलाद, ओट्स और हाई प्रोटीन डाइट युक्त खादपदार्थ लेती हूं।

शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए दिनभर में 3—4 लीटर पानी पीना आवश्यक है। उचित मात्रा में पानी पीने से शरीर से बैक्टीरिया भी बाहर निकल जाते हैं और साथ ही हमारे अंदर का सिस्टम भी क्लीन हो जाता है और हल्कापन महसूस होता है।

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 08/06/2020 को
डॉ. पूजा दाफळ के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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