एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के पहले जानते हैं कि एंटीबायोटिक क्या होती हैं?

एंटीबायोटिक- एंटीबायोटिक बैक्टीरिया के खिलाफ सक्रिय रोगाणुरोधी पदार्थ का एक प्रकार है। यह जीवाणु संक्रमण से लड़ने के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रकार का जीवाणुरोधी एजेंट है, और इस तरह के संक्रमण के उपचार और रोकथाम में एंटीबायोटिक दवाओं का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। एंटीबायोटिक या तो बैक्टीरिया को मार सकते हैं या इनकी वृद्धि को रोक सकते हैं।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस उस स्थिति को कहते हैं जब बैक्टीरिया उन दवाइयों के प्रति अनुकूलित हो जाते हैं जो उन्हें मारने के लिए बनाई गई हैं। इसका मतलब है कि बैक्टीरिया मरते नहीं है और लगातार बढ़ते जाते हैं। एंटीबॉयोटिक रेजिस्टेंस बैक्टीरिया के कारण होने वाले इंफेक्शन का इलाज करना कभी-कभी काफी मुश्किल हो जाता है और कई बार इसका इलाज करना असंभव होने लगता है। ज्यादातर मामलों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के मरीज को मेडिकल सुविधाओं का सहारा लेना पड़ता है। लंबे समय तक हॉस्पिटल में एडमिट रहने के साथ ही मौत का भी सामना करना पड़ सकता है।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का यह मतलब नहीं है कि बॉडी एंटीबायोटिक के खिलाफ रेजिस्टेंट हो गई है बल्कि बैक्टीरिया उन ड्रग्स के प्रति रेजिस्टेंट हो गए हैं जो उन्हें मारने के लिए बनाई गई थी।
दुनियाभर में एंटीबायोटिक्स का उपयोग और प्रिस्क्रिप्शन को चेंज करने की जरूरत है। अगर नई मेडिसिन डेवलप होती हैं तो विहेवियर चेंज के बिना एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस वैसा ही बना रहेगा। विहेवियर चेंज इंफेक्शन को रोकने के लिए टीकाकरण, हाथ धोना, सेफ सेक्स और अच्छी फूड हाइजीन को शामिल करना चाहिए।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की तरह ही एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस भी होता है। इसमें माइक्रोऑगेर्निज्म जैसे कि बैक्टीरिया, पैरासाइट, वायरस और फंगी एंटीमाइक्रोबियल ड्रग (एंटीबायोटिक, एंटीफंगल, एंटीवायरल्स, एंटीमलेरियाज और एंथेलमिनटिक्स) के संपर्क में आने पर चेंज हो जाते हैं। ये एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस डेवलप कर लेते हैं। इन्हें ‘सुपरबग्स’ कहा जाता है। इसका परिणाम यह होता है कि दवाइयां इंफेक्शन पर असर नहीं करती। जिससे दूसरों को भी इंफेक्शन फैलने का खतरा बड़ जाता है।
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एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस किसी भी इंसान को किसी भी स्टेज पर प्रभावित कर सकता है।एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बैक्टीरिया से होने वाला इंफेक्शन आपकी पूरी बॉडी को अफेक्ट कर सकता है। ये बहुत सारे लक्षणों का कारण बन सकते हैं, लेकिन सिर्फ कुछ लक्षणों को देखकर यह नहीं कहा जा सकता है कि यह इंफेक्शन एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बैक्टीरिया के कारण हुआ है। इसका सबसे सामान्य लक्षण मरीज पर दवा का असर नहीं होना है। साथ ही ट्रीटमेंट में स्टेंडर्ड एंटीबायोटिक्स का उपयोग करने पर भी मरीज का ठीक न होना भी इसका लक्षण है।
हर साल अमेरिका में लगभग 30 लाख लोग एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बैक्टीरिया या फंगी से इंफेक्ट होते हैं और 35000 से ज्यादा लोग मरते हैं। कोई भी रेजिस्टेंस इंफेक्शन के रिस्क को अवॉइड नहीं कर सकता, लेकिन जो लोग क्रोनिक इलनेस का शिकार होते हैं उनको रिस्क ज्यादा होता है। अगर एंटीबायोटिक्स दवाएं अपनी इफेक्टिवनेस खो देती हैं तो इंफेक्शन का इलाज मुश्किल हो जाएगा। एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस तब होता है जब बैक्टीरिया का इलाज एंटीबायोटिक के द्वारा किया जाता है। इसमें दवाइयां ज्यादातर जर्म को मार देती है, लेकिन कीटाणुओं का छोटा ग्रुप सरवाइव कर सकता है। ऐसा निम्न कारणों से हो सकता है।
जब बैक्टीरिया रेजिस्टेंस हो जाते हैं तो ओरिजनल एंटीबायोटिक्स उन्हें मार नहीं पाती। ये जर्म ग्रो होते हैं और फैलते हैं। कई बार ये दूसरे बैक्टीरिया से मिलकर उनमें भी रेजिस्टेंस फैला देते हैं।
कभी भी या हमेशा एंटीबायोटिक का यूज करना एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का कारण बन सकता है। ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस में वृद्धि एंटीबायोटिक के संपर्क में आने वाले कीटाणुओं और उन कीटाणुओं के रेजिस्टेंस मेकेनिज्म के प्रसार से होती है। हालांकि, बहुत अधिक एंटीबायोटिक दवाओं का अनावश्यक रूप से और दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे इन महत्वपूर्ण दवाओं की उपयोगिता को खतरा है।
कई बार लोग एंटीबायोटिक्स का उपयोग करते हैं जब उन्हें इनकी जरूरत नहीं होती। उदाहरण के लिए एंटीबायोटिक्स वायरस पर काम नहीं करती। बैक्टीरिया की तरह, वायरस रोगाणु होते हैं जो आपके शरीर पर आक्रमण कर सकते हैं और संक्रमण का कारण बन सकते हैं। जुकाम या फ्लू एक प्रकार का वायरस है। इन मामलों में एंटीबायोटिक लेने से बीमारी का इलाज नहीं होता है। यह वास्तव में एंटीबायोटिक प्रतिरोध के लिए जोखिम उठा सकता है।
आपकी डोज में लिखी गई सभी एंटीबायोटिक न लेने से भी रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है। यदि आप इसे बहुत जल्दी लेना बंद कर देते हैं, तो आप सभी जीवाणुओं को नहीं मार सकते। शेष रोगाणु प्रतिरोधी हो सकते हैं।
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इसका पता लगाने के लिए आपका हेल्थकेयर प्रोवाइडर आपके इंफेक्टेड टिशू का सेंपल ले सकता है और उसे लेब में भेज सकता है। इसके बाद इंफेक्शन के प्रकार के बारे में पता लगाया जा सकता है। टेस्ट में यह भी पता चल सकता है कि कौन से एंटीबायोटिक्स बैक्टीरिया को मारेंगी। आपको एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट इंफेक्शन हो सकता है अगर आप स्टेंटर्ड एंटीबायोटिक्स के ट्रीटमेंट के बाद भी ठीक नहीं होते हैं।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट एंटीबायोटिक्स का मिसयूज और ओवरडोज लेने से बढ़ता है। इसके साथ ही अगर इसकी रोकथाम और नियंत्रण ठीक से न किया जाए तो इसकी संभावना और बढ़ जाती है। इसकी रोकथाम के लिए हर स्तर पर कदम उठाने होंगे।
आम आदमी –एक आम इंसान इस बैक्टीरियल रेजिस्टेंस को रोकने के निम्न बातों को फॉलो कर सकता है।
हेल्थ केयर प्रोफेशनल – एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के प्रसार को रोकने और नियंत्रित करने के लिए, स्वास्थ्य पेशेवर निम्न काम कर सकते हैं:
कृषि क्षेत्र- एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को रोकने और नियंत्रित करने के लिए, कृषि क्षेत्र कर निम्न बातों को फॉलो कर सकता है:
इसका ट्रीटमेंट व्यक्ति के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है। आपका डॉक्टर आपको दूसरी एंटीबायोटिक दे सकता है जो इंफेक्शन से लड़ सके, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं और इससे साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं साथ ही रेजिस्टेंट की संभावना भी बढ़ सकती है, लेकिन कुछ मामलों में आपको डॉक्टर के पास कोई ऑप्शन नहीं बचता।
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हमें उम्मीद है कि अब आप एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के बारे में समझ गए होंगे। इससे बचने के लिए आपको यहां बताई गई बातों को फॉलो करना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान और उपचार प्रदान नहीं करता।
डिस्क्लेमर
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Current Version
11/06/2020
Manjari Khare द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील
Updated by: shalu