Vertigo : वर्टिगो क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

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अपडेट डेट जुलाई 30, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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परिचय

वर्टिगो क्या है?

वर्टिगो (Vertigo) शब्द से शायद आपको किसी अनजान बीमारी के बारे में ख्याल आ रहा होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। यह काफी सामान्य स्थिति है, जिसे हर किसी ने जीवन में कभी न कभी महसूस किया होगा। चलिए, हम आपको हिंदी में इसका मतलब बताते हैं, ताकि आप आसानी से समझ सकें। वर्टिगो को हिंदी में चक्कर आना कहते हैं। इसमें आपको ऐसा लगता है कि, जैसे आपके ऊपर मौजूद छत, चीज या आसमान घूमने लगा है और फिर आप अपना संतुलन खोकर गिर जाते हैं या फिर बेहोश हो जाते हैं। वर्टिगो या डिजीनेस (dizziness) किसी बीमारी या डिसऑर्डर का संकेत हो सकता है या फिर यह खुद ही एक वर्टिगीनस डिसऑर्डर हो सकता है।

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आसानी के लिए वर्टिगो को फ्रीक्वेंसी और कारण के आधार पर दो-दो भागों में बांटा गया है। जैसे-

  1. फ्रीक्वेंसी के आधार पर पहला एक्यूट वर्टिगो, जिसमें व्यक्ति को जिंदगी में कभी-कभी ही अचानक चक्कर आने लगते हैं। जो कि कमजोरी, थकान आदि कारणों की वजह से हो सकता है।
  2. फ्रीक्वेंसी के आधार पर दूसरा क्रॉनिक वर्टिगो, जिसमें चक्कर आने की समस्या लगातार चलती रहती है और काफी लंबे समय तक इससे परेशानी होती रहती है। जो कि किसी छुपी हुई बीमारी के कारण हो सकता है।
  3. कारण के आधार पर पहला पेरीफेरल वर्टिगो, मतलब इसके पीछे कान में होने वाली समस्या वजह है।
  4. कारण के आधार पर दूसरा सेंट्रल वर्टिगो, यानी इसके पीछे दिमाग व नर्वस सिस्टम से जुड़ी समस्या है।

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लक्षण

वर्टिगो के लक्षण क्या है?

वर्टिगो में या उसके साथ निम्नलिखित लक्षण दिख सकते हैं। जैसे-

  • घूमने का एहसास
  • असंतुलित होना
  • एक तरफ खींचे चले जाना
  • झुकाव का एहसास
  • बेहोश होने का एहसास
  • कान में आवाज सुनाई देना
  • उल्टी होना
  • जी मिचलाना
  • सिर दर्द
  • पसीना आना, आदि

ध्यान रखें कि, यह जरूरी नहीं है कि चक्कर आने पर हर किसी व्यक्ति में सभी लक्षण दिखाई दें या फिर जो लक्षण एक व्यक्ति में दिखाई दे रहे हैं, वह दूसरे में भी दिखाई दें। अगर, आपको इससे संबंधित लक्षणों के बारे में कोई सवाल या शंका है, तो अपने डॉक्टर से चर्चा करना न भूलें।

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कारण

वर्टिगो के पीछे कौन-से कारण होते हैं?

वर्टिगो के पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं। जैसे-

  1. गर्भावस्था में जी मिचलाना और चक्कर आना आम बात है। जो कि उस दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल चेंजेस की वजह से होता है।
  2. लैब्रिंथीटिस की वजह से भी वर्टिगो की समस्या हो सकती है। इनर ईयर लैब्रिंथ में इंफेक्शन की वजह से सूजन होने पर यह डिसऑर्डर होता है। इस जगह वेस्टीब्यूलोकोक्लिया नर्व (vestibulocochlear nerve) होती है, जो कि दिमाग को सिर घूमने या आवाज के बारे में संकेत देती है।
  3. वेस्टिब्यूलर न्यूराइटिस की वजह से भी चक्कर आ सकते हैं। यह समस्या वेस्टीब्यूलर नर्व में सूजन आने की वजह से होती है।
  4. कोलेस्टेटोमा एक गैरकैंसरीकृत स्किन ग्रोथ होती है, जो कि बार-बार इंफेक्शन होने के कारण मिडिल ईयर में विकसित होती है। जैसे ही यह बड़ी होकर ईयरड्रम के पीछे जाती है, यह मिडिल ईयर के बोनी स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा सकती है और बहरेपन और चक्कर आने का कारण बन सकती है।
  5. मेनियर डिजीज में आपके इनर ईयर में फ्लूड इकट्ठा होने लगता है, जिससे वर्टिगो के अटैक के साथ कानों में आवाज आना और बहरेपन की समस्या हो सकती है।
  6. बेनाइन पैरॉक्सिज्मल पोजिशनल वर्टिगो के कारण चक्कर आना सबसे आम है। दरअसल, हमारे इनर ईयर में मौजूद ओटोलिथ ऑर्गन में फ्लूड और कैल्शियम कार्बोनेट के क्रिस्टल के कुछ कण मौजूद होते हैं। जब किसी गतिविधि के दौरान ये क्रिस्टल विस्थापित होकर सेमीसर्कुलर कैनाल में गिर जाते हैं, तो दिमाग को व्यक्ति की पोजिशन के बारे में गलत जानकारी मिलती है और चक्कर आने लगते हैं।

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वर्टिगो के पीछे हो सकते हैं ये कारण भी

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निदान

वर्टिगो का पता कैसे लगाएं?

वर्टिगो का पता लगाने के लिए डॉक्टर शारीरिक टेस्ट जैसे- कब से चक्कर आ रहे हैं, मेडिकल हिस्ट्री और कैसा महसूस होता है आदि जानकारी लेने के अलावा निम्नलिखित टेस्ट कर सकता है। जैसे-

  1. रोमबर्ग टेस्ट (Romberg’s Test) में डॉक्टर रोगी को हाथों को अपनी दोनों तरफ सीधा लटकाकर अपने पैरों को आपस में मिलाकर आंख बंद करके खड़े होने के लिए कहता है। अगर व्यक्ति का संतुलन खोता है, तो यह सेंट्रल वर्टिगो की समस्या की तरफ इशारा हो सकता है।
  2. फुकुदा उंटरबर्गर टेस्ट (Fukuda Unterberger’s Test) में व्यक्ति से एक ही मार्क पर 30 सेकेंड के लिए आंख बंद करके कदमताल करवाई जाती है। अगर वह किसी एक साइड की तरफ झुकने लगता है, तो यह पेरीफेरल वर्टिगो की तरफ इशारा हो सकता है।
  3. हेड-थ्रस्ट टेस्ट (Head-Thrust Test) में आपको डॉक्टर की नाक की तरफ ध्यान लगाना होता है और फिर वह जल्दी से अपने सिर को एक तरफ घुमाता है और आपकी आंखों की प्रतिक्रिया जांचता है।
  4. सीटी स्कैन की मदद से डॉक्टर वर्टिगो के पीछे के असली कारण जैसे इनर ईयर का क्षतिग्रस्त होना आदि का पता लगा सकता है।

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रोकथाम और नियंत्रण

वर्टिगो को नियंत्रित कैसे करें?

चक्कर आने पर निम्नलिखित तरीके अपनाकर परेशानी को कम किया जा सकता है या फिर जीवनशैली में कुछ बदलाव की मदद से आराम प्राप्त किया जा सकता है। जैसे-

  • चक्कर आने पर शांत, अंधेरे कमरे में लेट जाएं।
  • चक्कर आने पर जितना जल्दी हो सके, बैठ जाएं।
  • चक्कर दिलाने वाली गतिविधियों को करते हुए सतर्क रहें और समय लेकर करें। जैसे- उठना, सिर घूमाना, ऊपर देखना इत्यादि।
  • किसी चीज को उठाने के लिए झुकने की जगह बैठकर उठाएं।
  • रात में उठते समय लाइट जलाकर उठें।
  • वर्टिगो से ग्रसित व्यक्ति को सीढ़ी का इस्तेमाल या ड्राइव नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा, ऊपर बताए गए तरीके डॉक्टरी मदद का विकल्प नहीं है।

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उपचार

वर्टिगो का इलाज कैसे किया जाता है?

वर्टिगो का इलाज उसके कारण पर निर्भर करता है। जैसे-

  1. वेस्टीब्यूलर रिहैबिलिटेशन की मदद से वेस्टीब्यूलर सिस्टम को मजबूत बनाना, ताकि दिमाग को शरीर की स्थिति और पोजिशन से संबंधित सही जानकारी व संकेत प्राप्त हो सके।
  2. कैनालिथ रिपोजिशनिंग मैन्योर में कुछ खास गतिविधि की मदद लेकर कैनाल में फंसे कैल्शियम डिपोजिट को इनर ईयर चेंबर में भेजना, ताकि वह शरीर द्वारा अवशोषित कर लिया जाए।
  3. सूजन या इंफेक्शन की वजह से होने वाली वर्टिगो की समस्या के लिए एंटीबायोटिक्स आदि दवाओं का सेवन करना।
  4. अगर किसी मामले में इनर ईयर की डैमेज दवाई या अन्य थेरिपी से ठीक नहीं हो रही है, तो सर्जरी की मदद लेना।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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