Warts: मस्सा क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

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अपडेट डेट जुलाई 17, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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परिचय

मस्सा क्या होता है?

मस्से को वार्ट्स (Warts) कहा जाता है, जो कि त्वचा का एक गैर-कैंसरीकृत (बिनाइन) विकास होता है। यह शरीर के किसी भी हिस्से में किसी भी आकार या प्रकार का हो सकता है, जिसके पीछे की मुख्य वजह एक वायरस होता है। मस्से संक्रामक होते हैं और काफी आम होते हैं। अधिकतर लोगों को जिंदगी में कभी न कभी शरीर के किसी हिस्से में मस्सा हुआ होगा, लेकिन यह ज्यादातर बच्चों व किशोरों में देखा जाता है। अधिकतर मस्से हानिकारक नहीं होते हैं व दर्द या किसी तरह की असहजता का कारण नहीं बनते हैं और कुछ हफ्तों से लेकर महीनों के भीतर खुद ही चले जाते हैं। हालांकि, यह दिखने में भद्दे या आपके शारीरिक आकर्षण को कम कर सकते हैं। इसके अलावा, कुछ मस्से परमानेंट भी हो सकते हैं, जो जिंदगी भर आपके साथ रहते हैं और दर्द व असहजता का भी कारण बन सकते हैं। मस्से कई प्रकार के हो सकते हैं, जैसे-

सामान्य मस्सा

सामान्य मस्से वह स्किन ग्रोथ होती है, जो एक छोटी फुंसी के आकार से लेकर मटर के दाने के बराबर हो सकती है। यह थोड़े सख्त और रफ हो सकते हैं। सामान्य मस्से अक्सर हथेली के पीछे, उंगलियों, नाखूनों के पास की त्वचा और तलवों में देखने को मिलते हैं।

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फ्लैट वार्ट्स

इस प्रकार के मस्से आकार में छोटे होते हैं और कभी-कभी इनका रंग हल्का भूरा भी हो सकता है। यह आमतौर पर, चेहरे पर विकसित होते हैं, खासकर माथे और गालों पर। लेकिन, इसके अलावा यह हाथों और लोअर आर्म्स पर भी विकसित हो सकते हैं।

प्लांटर वार्ट्स

प्लांटर वार्ट्स अधिकतर टखनों और तलवों में विकसित होते हैं और यह आकार में थोड़े बड़े हो सकते हैं। इसके अलावा, आपके तलवे आपका पूरा शारीरिक भार उठाते हैं, जिस वजह से इस प्रकार के मस्से शरीर के बाहर निकलने की जगह अंदर दबते रहते हैं और चलने-फिरने में दर्द कर सकते हैं। इस प्रकार के मस्सों का इलाज होने में भी दिक्कत होती है।

जेनिटल वार्ट्स

जेनिटल वार्ट्स छोटे, सख्त और रफ सतह वाले होते हैं। यह सेक्शुअली ट्रांसमिटिड होते हैं और आपके जेनिटल एरिया को ही प्रभावित करते हैं। यह आपके प्यूबिक एरिया, जांघों के बीच में और वजायना या एनल कैनाल के अंदर भी हो सकते हैं।

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मोजेक वार्ट्स

इस प्रकार के मस्से सफेद रंग के होते हैं और सुई की नोंक के बराबर होते हैं। यह टखनों की हड्डी या पंजों के नीचे विकसित हो सकते हैं और तलवों का बड़ा हिस्सा कवर कर सकते हैं। यह प्लांटर वार्ट्स के मुकाबले ज्यादा चपटे होते हैं और चलने पर मुश्किल ही दर्द करते हैं।

फिलीफॉर्म वार्ट्स

इस प्रकार के मस्से धागे जैसे और नुकीले दिखते हैं। यह अक्सर चेहरे पर विकसित होते हैं और कभी-कभी छोटे ब्रश की तरह दिखते हैं और परेशानी का कारण बन सकते हैं।

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लक्षण

मस्से के लक्षण क्या होते हैं?

मस्से के लक्षण उसके प्रकार के ऊपर निर्भर करते हैं, जिनकी मदद से उनका प्रकार निर्धारित किया जाता है। जैसे-

  • त्वचा पर एक छोटा उभार (बंप) दिखना
  • रफ या स्मूथ सतह वाला उभार
  • त्वचा में उभार के साथ सख्त और प्रेशर महसूस होना
  • उभार के साथ दर्द होना
  • 1 से 10 मिलीमीटर का उभार
  • अकेला या समूह में निकला बंप
  • आमतौर पर चेहरे, हाथ, घुटनों और तलवों के आसपास हुआ बंप
  • खुजलीदार उभार
  • पेनिस, वजायना, एनस के अंदर या आसपास उभार होना

हमेशा ध्यान रखें कि, मस्सों के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। मस्सों की उचित पहचान के लिए डॉक्टर से चर्चा करें।

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कारण

मस्सा होने का कारण क्या है?

मस्सा ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) के कारण होता है। जिससे हमारे शरीर में केराटिन का उत्पादन तेजी से होने लगता है, जो कि त्वचा की ऊपरी सतह में मौजूद हार्ड प्रोटीन होता है। एचपीवी के विभिन्न स्ट्रेन विभिन्न प्रकार के मस्सों का कारण बन सकते हैं। इसके साथ यह संक्रामक होते हैं, इसलिए यह संक्रमित चीजों के संपर्क में आने से भी फैल सकते हैं। जैसे- मस्से को खरोंचना या काटना या चेहरे या पैर पर शेविंग के दौरान मस्सा कटने पर इससे निकलने वाला द्रव किसी दूसरी सतह या दूसरे व्यक्ति को लगना। हर किसी का इम्यून सिस्टम वायरस के खिलाफ अलग-अलग प्रतिक्रिया देता है और यह बच्चों में ज्यादातर इसलिए होता है, क्योंकि बच्चों का इम्यून सिस्टम इस वायरस के खिलाफ इतना मजबूत नहीं होता है

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निदान

मस्सों का पता कैसे चलता है?

आम तरह के मस्सों और उनके प्रकार के बारे में आसानी से पता किया जा सकता है, जिसके लिए शारीरिक जांच की जाती है। इसमें फिजीकली आपके मस्से को देखकर उसके प्रकार का पता लगाया जाता है। हालांकि, कुछ मामलों में बायोप्सी की मदद भी ली जाती है। लेकिन, अगर आपको कोई शंका या सवाल है, तो अपने डॉक्टर से चर्चा करें।

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रोकथाम व नियंत्रण

मस्सों को नियंत्रित कैसे किया जाता है?

मस्सों को नियंत्रित करने या उससे बचाव करने के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाने चाहिए। जैसे-

  1. दूसरों का तौलिया, कपड़े या पर्सनल आइटम का इस्तेमाल न करें।
  2. दूसरे लोगों की जुराबें या जूते इस्तेमाल न करें।
  3. दूसरे लोगों के मस्सों को न छूएं।
  4. मस्सों को न खरोंचे, इससे वह फैल सकते हैं।
  5. शॉवर या टॉयलेट आदि में जूते या चप्पल पहनकर जाएं।
  6. मस्सों से प्रभावित जगह पर मौजूद बालों में ब्रश, शेव या हेयर क्लिपिंग न करें।
  7. स्विमिंग करने से पहले अपने मस्सों को वाटरप्रूफ तरीके से कवर करें और जिम में जुराब या दस्ताने पहनकर व्यायाम करें।
  8. मस्सों से प्रभावित नाखून को काटने वाले औजार से स्वस्थ नाखूनों को न काटें।
  9. मस्सों के आसपास के नाखून न खाएं
  10. मस्सा छूने के बाद हाथों को अच्छी तरह धोएं और हाथों को सूखा रखें।

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उपचार

मस्सों का उपचार कैसे किया जाता है?

मस्सों का उपचार करने के लिए घरेलू उपायों के साथ-साथ डॉक्टर की मदद भी ली जा सकती है। जैसे-

घरेलू उपाय

  1. मस्सा की समस्या को खत्म करने के लिए आप घर पर फ्रीजिंग ट्रीटमेंट कर सकते हैं, लेकिन इससे यह सुनिश्चित नहीं होता कि, यह कभी वापस नहीं होगा। इसके लिए ओवर-द-काउंटर स्प्रे लेकर आए, जिसमें डाइमिथाइल ईथर और प्रोपेन का मिक्सचर होता है और उसे मस्से पर छिड़कें। इससे वह उतर जाएगा।
  2. मस्से को पानी में करीब 15 मिनट तक भिगोएं और फिर सैलिसाइलिक एसिड मौजूद वाला पैच लगाएं। यह उपचार आपको कुछ हफ्तों तक रोजाना करना होगा।
  3. इसके अलावा आप मस्सा हटाने के लिए डक्ट टेप का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए मस्से को कुछ दिनों तक डक्ट टेप से ढककर रखें और फिर पानी में भीगोकर उसे मसलकर हटाएं। हालांकि, यह उपचार आपको कई बार करना पड़ सकता है।

इन घरेलू उपायों की प्रभावशीलता के लिए डॉक्टर से संपर्क जरूर करें और इनके उपयोग से पहले डॉक्टर से पर्याप्त जानकारी जरूर लें।

डॉक्टर की मदद

मस्से से राहत पाने के लिए आप डॉक्टर की मदद भी ले सकते हैं। जिसमें वह आपके मस्से को फ्रीज करने के लिए लिक्विड नाइट्रोजन का इस्तेमाल कर सकता है और यह ट्रीटमेंट एक से ज्यादा बार करवाना पड़ सकता है, जिससे थोड़ा दर्द भी हो सकता है। इसके अलावा, डॉक्टर सर्जरी की मदद से भी मस्से को हटा सकता है।

डॉक्टर द्वारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले अन्य विकल्प

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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