Enlarged Prostate: प्रोस्टेट का बढ़ना क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

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अपडेट डेट अक्टूबर 18, 2020 . 8 मिनट में पढ़ें
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परिचय

एनलार्ज्ड प्रोस्टेट क्या है?

प्रोस्टेट पुरुषों के रिप्रोडक्टिव सिस्टम में एक छोटी और मस्कुलर ग्रंथि होती है। यह आपके यूरेथ्रा के इर्द-गिर्द मौजूद होती है और आपके वीर्य के अधिकतर तरल पदार्थ का निर्माण करती है। जब आपको सेक्शुअल क्लाइमैक्स प्राप्त होता है, तो यही ग्रंथि उस समय फ्लूड और सीमन को पेनिस में आगे की तरफ धकेलती है। लेकिन, कई कारणों की वजह से पुरुषों में मौजूद प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ जाती है, जिसे एनलार्ज्ड प्रोस्टेट या बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (Benign Prostatic Hyperplasia) कहते हैं। इसके कारण शरीर में कुछ लक्षण दिख सकते हैं और समय के साथ यह लक्षण गंभीर होकर शारीरिक समस्याओं का कारण भी बन सकते हैं।

प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने का मुख्य कारण इसमें मौजूद कोशिकाओं का तेजी से बढ़ना होता है। इस प्रक्रिया में तेजी से बनने वाली सेल्स प्रोस्टेट ग्लैंड को बढ़ा देती हैं और यूरेथ्रा जो कि आपका मूत्रमार्ग होता है, को दबा देती है और पेशाब के निकलने की प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हालांकि, प्रोस्टेट ग्रंथि में यह बढ़ोतरी प्रोस्टेट कैंसर की तरह नहीं होती और न ही प्रोस्टेट कैंसर का खतरा बढ़ाती है। हालांकि, इससे शरीर पर प्रभाव पड़ता है और काफी कम मामलों में इसके कारण यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, ब्लैडर स्टोन और ब्लैडर डैमेज, किडनी डैमेज जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।

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लक्षण

प्रोस्टेट बढ़ने के लक्षण क्या होते हैं?

पुरुषों में बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया होने पर निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं। जैसे-

  • पेशाब निकलने की रफ्तार में कमी
  • यूरिन लीकेज
  • पेशाब के करने के बाद भी ड्रिब्बलिंग होना
  • पेशाब के लिए पर्याप्त प्रेशर न बन पाना
  • रात में दो या उससे ज्यादा बार पेशाब आना
  • ब्लैडर खाली होने में समस्या
  • पेशाब करते समय दर्द
  • एकदम तेजी से पेशाब महसूस होना
  • पेशाब में खून आना

आपको बता दें कि, प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने से सभी को ऊपर बताए गए लक्षणों का सामना नहीं करना पड़ता। हर मरीज में इसके अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं और यह लक्षण किसी अन्य कारण की वजह से भी दिख सकते हैं। अगर, आपको एनलार्ज्ड प्रोस्टेट के लक्षणों से जुड़े कुछ सवाल या शंका है, तो अपने डॉक्टर से चर्चा करें।

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डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए

अगर आपको पेशाब संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में विचार-विमर्श करें। भले ही आपको मूत्राशय संबंधी लक्षण परेशान न कर रहे हों, लेकिन फिर भी समस्या के पीछे छिपे कारण का पता लगाना बेहद जरूरी होता है। पेशाब की समस्या को बिना इलाज के छोड़ने से मूत्राशय में रूकावट आ सकती है। अगर आप पेशाब करने में समस्या या अक्षमता का सामना कर रहे हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

कारण

प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने का कारण क्या है?

डॉक्टर और विशेषज्ञ अभी तक पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने के सटीक कारण का पता नहीं लगा पाए हैं। हालांकि, यह माना जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ यह भी बढ़ता जाता है। एक अनुमान के मुताबिक, 40 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों की प्रोस्टेट ग्रंथि में थोड़ी बहुत बढ़ोतरी होती ही है और 80 वर्ष से अधिक उम्र के 90 प्रतिशत पुरुषों में यह कंडीशन होती है। क्योंकि, यौवनावस्था में प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार दोगुना हो जाता है और 25 वर्ष की उम्र के आसपास से दोबारा बढ़ना शुरू कर देती है। कुछ पुरुषों में यह जीवनभर बढ़ता रहता है।

इसके अलावा, यह देखा गया है कि, जिन पुरुषों में यौवनावस्था से पहले ही किसी कारणवश, उदाहरण के लिए प्रोस्टेट कैंसर की वजह से टेस्टिकल्स हटा दिए जाते हैं, उनमें यह समस्या देखने को नहीं मिलती है। इसके साथ ही, कई वैज्ञानिक शोध में यह सामने आया है कि, सक्रिय मेल हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन के स्तर में गिरावट के कारण पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन और एस्ट्रोजन का अनुपात बिगड़ जाता है, जिससे प्रोस्टेट की कोशिकाओं के विकसित होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसके अलावा, कुछ शोध में यह पाया गया है कि, जिन पुरुषों में डीएचटी हार्मोन (डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरॉन) का उत्पादन नहीं होता, उनमें प्रोस्टेट ग्रंथि नहीं बढ़ती है। जिस वजह से बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया के पीछे डीएचटी हार्मोन को भी वजह माना जाता है।

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जोखिम कारक

प्रोस्टेट बढ़ना के जोखिम कारक क्या हैं?

रोग

अध्ययनों के अनुसार डायबिटीज और हृदय रोगियों में प्रोस्टेट बढ़ने का खतरा अधिक होता है। साथ ही ऐसा बीटा ब्लॉकर दवाओं का सेवन करने वाले पुरुषों में भी हो सकता है।

फैमिली हिस्ट्री

परिवार के किसी अन्य सदस्य जैसे पिता या भाई को प्रोस्टेट की समस्या होने पर आप में भी इसके होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में आपको प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने का जोखिम अन्य पुरुषों के मुकाबले अधिक होता है।

उम्र

प्रोस्टेट बढ़ने के लक्षण और संकेत 40 वर्ष से कम उम्र वाले पुरुषों में बेहद कम दिखाई देते हैं। करीब एक-तिहाई (1/3) पुरुषों में मध्यम से गंभीर लक्षण 60 की उम्र में महसूस होते हैं और आधों को 80 की उम्र में।

जीवनशैली

मोटापे के कारण प्रोस्टेट के बढ़ने का खतरा अधिक हो जाता है। जबकि व्यायाम की मदद से इसके जोखिम को कम किया जा सकता है।

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निदान

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प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने का पता कैसे चलता है?

बढ़ी हुई प्रोस्टेट ग्रंथि की जांच के लिए डॉक्टर सबसे पहले आपकी शारीरिक जांच कर सकता है, जिसके साथ ही वह आपकी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में भी पूछ सकता है। इस शारीरिक जांच में रेक्टल एग्जामिनेशन शामिल होता है, जिसकी मदद से प्रोस्टेट के अनुमानित आकार का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा निम्नलिखित टेस्ट की भी मदद ली जा सकती है। जैसे-

  • किडनी के रोग की जांच करने के लिए ब्लड टेस्ट।
  • इन लक्षणों के पीछे के इंफेक्शन या अन्य कारणों की जांच के लिए यूरिन टेस्ट ।
  • प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजेन (पीएसए) ब्लड टेस्ट किया जा सकता है। जिसमें पीएसए लेवल के उच्च होने का मतलब प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ा होना होता है।
  • कैंसर की आशंका को खत्म करने के लिए बायोप्सी।
  • ब्लैडर अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है, जिसमें यह देखा जाता है कि आपका ब्लैडर पूरी तरह खाली हो पा रहा है या नहीं।
  • प्रोस्टेट के आकार की जांच करने के लिए विभिन्न तरह के अल्ट्रासाउंड।
  • यूरिन फ्लो टेस्ट की मदद से पेशाब करने की गति और प्रेशर की जांच।
  • ब्लैडर फंक्शन को जांचने के लिए यूरोडायनेमिक टेस्टिंग।
  • सिस्टोयूरेथ्रोस्कॉपी की मदद से प्रोस्टेट, यूरेथ्रा और ब्लैडर की अंदरुनी स्थिति की जांच।
  • इंट्रावेनस पाइलोग्राफी या यूरोग्राफी की मदद से पूरे यूरिनरी सिस्टम का एक्सरे लेना।

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जटिलताएं

प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने की जटिलताएं

ज्यादातर पुरुष प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने के लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि शुरुआती चरणों में इसकी पहचान करके इलाज करवाने से खतरनाक जोखिमों और जटिलताओं से बचा जा सकता है। यदि आपको प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने के लक्षण या संकेत दिखाई देते हैं तो तुरंत अपने डॉक्टर को संपर्क करें। जिन पुरुषों में प्रोस्टेट का बढ़ना लंबे समय से शामिल होता है उनमें

  • मूत्राशय की पथरी
    मूत्राशय में रक्तस्राव
  • मूत्र मार्ग में संक्रमण (यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन)
  • किडनी को नुकसान पहुंचना
  • अचानक पेशाब करने की क्षमता खो देना

कुछ मामलों में मूत्राशय की समस्याएं प्रोस्टेट के बढ़ने के कारण इतनी अधिक गंभीर हो जाती हैं कि व्यक्ति के ब्लैडर से पेशाब बिलकुल भी पास नहीं हो पाता है। इसे ब्लैडर में रूकावट आना कहा जाता है। यह बेहद खतरनाक हो सकता है क्योंकि ब्लैडर में रुका पेशाब मूत्राशय में संक्रमण का कारण बन सकता है। जिससे किडनी को भी क्षति पहुंच सकती है।

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रोकथाम और नियंत्रण

प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने को नियंत्रित कैसे किया जा सकता है?

प्रोस्टेट ग्रंथि को उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा जोड़ा जाता है, इसलिए इसके लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए आपको जीवनशैली में बदलाव जैसे तरीकों का इस्तेमाल करना पड़ेगा।

  • ओवर द काउंटर डिकंजेस्टेंट या एंटीहिस्टामाइन दवाइयों का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे ब्लैडर को खाली होने में परेशानी होती है।
  • पेशाब का प्रेशर बनने पर जल्द से जल्द पेशाब कर आएं।
  • शराब या कैफीन का सेवन बंद करें।
  • स्ट्रेस लेने से भी यह समस्या बढ़ सकती है। इसलिए तनाव न लें।
  • शरीर को गर्म रखें। क्योंकि, शरीर ठंडा रहने से यह लक्षण ज्यादा परेशान कर सकते हैं।
  • रोजाना और नियमित रूप से व्यायाम करें, जिससे लक्षणों में कमी आएगी।
  • अपनी पेल्विक मसल्स को मजबूत बनाने के लिए कीगल एक्सरसाइज का नियमित अभ्यास करें।

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इलाज

प्रोस्टेट के बढ़ाने का इलाज क्या है?

बढ़ी हुई प्रोस्टेट ग्रंथि का उपचार व लक्षण नियंत्रित करने के लिए जीवनशैली में बदलाव के अलावा कुछ अन्य ट्रीटमेंट की भी आवश्यकता हो सकती है। जैसे-

दवाएं

अल्फा-1 ब्लॉकर्स

अगर आपकी प्रोस्टेट ग्रंथि हल्की से मध्यम बढ़ी हुई है, तो डॉक्टर आपको डोक्साजोसिन, प्राजोसिन जैसी अल्फा-1 ब्लॉकर्स, डुटास्टेराइड या फिनास्टेराइड जैसी प्रोस्टेट ग्लैंड द्वारा उत्पादित हार्मोन के स्तर को नियंत्रित करने वाली दवाएं या एंटीबायोटिक्स का सेवन करने के लिए कह सकते हैं।

हॉर्मोन रिडक्शन मेडिकेशन

इस प्रकार की दवाएं प्रोस्टेट ग्रंथि द्वारा उत्पादित होने वाले हॉर्मोन के स्तर को कम करने में मदद करती हैं। आमतौर पर इस स्थिति के लिए डुटास्टेरीड (Dutasteride) और फिनास्टेराइड (finasteride) लेने की सलाह दी जाती है।

यह दोनों दवाएं टेस्टोस्टेरॉन के स्तर को कम कर देती हैं जिसकी मदद से पेशाब के बहाव में सुधार आता है और प्रोस्टेट छोटा होने लगता है। हालांकि, इस प्रकार की दवाओं के कुछ गंभीर दुष्प्रभाव भी हो सकते है। जैसे कि बांझपन और कामोत्तेजना में कमी।

एंटीबायोटिक्स

एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल तब किया जाता है जब आपका प्रोस्टेट बैक्टीरिया के कारण क्षतिग्रस्त होने लगता है। एंटीबायोटिक्स की मदद से बैक्टीरियल प्रोस्टेटाइटिस का इलाज करवाने से प्रोस्टेट ग्रंथि के लक्षणों में सुधार आता है और साथी ही सूजन भी कम होने लगती है। हालांकि, अगर आपके प्रोस्टेटाइटिस का कारण बैक्टीरिया नहीं बल्कि कुछ और है तो एंटीबायोटिक दवाएं इसके इलाज में कारगर साबित नहीं होंगी।

 5-अल्फा रिडक्टेस इनहिबिटर (5-Alpha reductase inhibitors)
यह दवा पुरुषों में मौजूद हॉर्मोन डिहाइड्रोटेस्टोस्टेरॉन (Dihydrotestosterone) के स्तर को कम करके प्रोस्टेट के बढ़ने को रोकने में मदद करती हैं। यह दवा इलाज की प्रकिया में अल्फा ब्लॉकर के मुकाबले लंबा समय लगाती हैं, लेकिन तीन महीनों के बाद पेशाब के बहाव में सुधार आने लगता है।
इन ड्रग्स की मदद से पेशाब न करने की क्षमता के जोखिम को कम किया जा सकता है। 5-अल्फा रिडक्टेस इनहिबिटर के इस्तेमाल से प्रोस्टेट सर्जरी की संभावना भी कम हो जाती है। आपको परिणाम देखने के लिए इनका 6 से 12 महीनों तक इस्तेमाल करना पड़ सकता है। 5-अल्फा रिडक्टेस इनहिबिटर के इस्तेमाल के कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। जैसे कि कामोत्तेजना और स्पर्म काउंट में कमी आना व लिंग के उत्तेजित होने में समस्या उत्पन्न होना। इस प्रकार के साइड इफेक्ट्स आमतौर पर हल्के होते हैं और दवा का इस्तेमाल रोकने पर अपने आप चले जाते हैं।

प्रोस्टेट बढ़ने के कम इनवेसिव वाले इलाज और सर्जरी

जब दवाएं काम नहीं आती हैं तो प्रोस्टेट बढ़ने के लक्षणों को कम करने के लिए कई प्रकार की प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे कई प्रकार के इलाज हैं जिनमें हीट एनर्जी की मदद से प्रोस्टेट को कम करने में मदद मिलती है। तो चलिए जानते हैं इनके बारे में –

प्रोस्टेटिक स्टेंट (Prostatic stents)

कुछ मामलों में मूत्रमार्ग को खुला रखने के लिए उसमें स्टेंट (लोहे की पतली डंडी) को डाला जाता है। यह भी एक आउटपेशंट प्रक्रिया होती है जिसमें मरीज को अस्पताल रहने की जरूरत नहीं होती है। आमतौर पर स्टेंट का इस्तेमाल उन पुरुषों के लिए किया जाता है जो दवाओं के सेवन से इनकार कर देते हैं या किसी समस्या के कारण उनका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। ज्यादातर डॉक्टरों के अनुसार स्टेंट एक अच्छा विकल्प नहीं माना जाता है।

प्रोस्टेटिक स्टेंट के कुछ गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इसके साथ ही कुछ पुरुषों में इसकी मदद से कोई सुधार नहीं आता है। कुछ परिस्थितियों में स्टेंट अपनी जगह बदल लेता है जिसके कारण स्थिति और गंभीर हो सकती है।

ट्रांसयूरेथरल माइक्रोवेव थर्मोथेरेपी (Transurethral microwave thermotherapy)

इस थेरेपी में कंप्यूटर द्वारा हीट वेव पैदा की जाती हैं जिससे बढ़े हुए प्रोस्टेट की कोशिकाओं को नष्ट किया जा सके। इस प्रक्रिया के दौरान मूत्रमार्ग को सुरक्षित रखने के लिए कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। ट्रांसयूरेथरल माइक्रोवेव थर्मोथेरेपी में सामान्य एनेस्थीसिया और पेन मेडिकेशन का इस्तेमाल किया जाता है।

ट्रांसयूरेथरल नीडल एब्लेशन (Transurethral needle ablation)
इस प्रकिया को भी पेशाब के बहाव में सुधार लाने और प्रोस्टेट के लक्षणों को कम करने के लिए पौरुष ग्रंथि की कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। इस थेरेपी को करने के लिए प्रोस्टेट में एक सुई डाली जाती है जो हाई फ्रीक्वेंसी रेडियोवेव की मदद से कोशिकाओं तक हीट पहुंचाती है जिससे वह नष्ट होने लगती हैं। इस प्रकिया में आपको अस्पताल में रहने की जरूरत नहीं होती है।
ओपन प्रोस्टेट सर्जरी (Prostatectomy)
जब ट्रांसयूरेथरल प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है तो ओपन सर्जरी का विकल्प चुना जाता है। इसमें पेट के ऊपरी हिस्से में चीरा लगाया जाता है। इसकी मदद से सर्जन प्रोस्टेट के ऊतकों को हटा पाते हैं। आमतौर पर ओपन प्रोस्टेट सर्जरी को प्रोस्टेट ग्रंथि के अत्यधिक बढ़ने पर इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा यदि ब्लैडर को क्षति पहुंचने, मूत्राशय में पथरी होने या मूत्रमार्ग के संकुचित होने पर इसका उपयोग किया जाता है। प्रोस्टेट के अंदरूनी भाग को निकाल दिया जाता है। इस सर्जरी के बाद मरीज को रिकवर होने में कुछ हफ्तों से महीनो तक का समय लग सकता है। 
लेजर सर्जरी
इस प्रक्रिया में हाई एनर्जी वाली लेजर की मदद से बढ़े हुए प्रोस्टेट के ऊतकों को नष्ट कर दिया जाता है। इसे सामान्य एनेस्थीसिया में किया जाता है और इसके बाद मरीज को अस्पताल में रात भर के लिए रुकना पड़ सकता है।लेजर सर्जरी की मदद से लक्षण से तुरंत आराम मिलता है, लेकिन इसके बावजूद भी कई पुरुषों को कुछ हफ्तों तक पेशाब करते समय दर्द का सामना कर पड़ता है। आमतौर पर इस प्रक्रिया के कारण रक्तस्राव कम होता है।
प्रोस्टेट बढ़ने की स्थिति को हमेशा इलाज की जरूरत नहीं होती है। कुछ मामलों में डॉक्टर के रोजाना चेक की मदद से भी इसके लक्षणों को पहचाना जा सकता है और जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपायों से इसे बढ़ने से रोका जा सकता है।लाइफस्टाइल में बदलाव, मेडिकेशन और सर्जरी सभी इसके लक्षणों को कम करने का एक कारगर इलाज है। आपके डॉक्टर आपके साथ मिलकर एक बेहतर ट्रीटमेंट प्लान तैयार करेंगे जिनकी मदद से आपके जीवन को स्वस्थ बनाया जा सके और लक्षण कम होने लगें। इसीलिए डॉक्टर से अपने लक्षणों के बारे में हमेशा बात करनी चाहिए, भले ही वह बेहद हल्के क्यों न हों।
अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें। 

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