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टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ ऐसे हो सकती है प्रभावित, ध्यान देना है जरूरी!

टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ ऐसे हो सकती है प्रभावित, ध्यान देना है जरूरी!

हेल्दी शरीर के साथ-साथ हेल्दी दिमाग भी बेहद जरूरी है, खासतौर पर तब जब आप किसी लाइफस्टाइल डिजीज से जूझ रहे होन। लाइफस्टाइल डिजीज की बात करें, तो डायबिटीज इनमें से एक मानी जाती है। डायबिटीज की समस्या में आपको आपके शरीर का ध्यान तो रखना ही पड़ता है, लेकिन आपको मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने की भी जरूरत पड़ती है। खासतौर पर तब, जब आप टाइप वन डायबिटीज (Type 1 diabetes) से जूझ रहे हों। टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ (Mental health in Type 1 diabetes) का आपको अधिक ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है। इसका कारण क्या है, आइए जानते हैं। लेकिन इससे पहले जानते हैं डायबिटीज से जुड़ी ये जरूरी जानकारी।

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डायबिटीज की समस्या ऐसे करती है घर!

डायबिटीज (Type 1 diabetes) की दिक्कत तब होती है, जब आपके शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। जब भी आप भोजन करते हैं, तो शरीर उसे शुगर में तोड़ देता है और शरीर की कोशिकाएं ऊर्जा के लिए इसका उपयोग करती हैं। इस उपयोग के लिए पैंक्रियाज को इंसुलिन का उत्पादन करने की जरूरत पड़ती है। जब आप मधुमेह के शिकार होते हैं, तो पैंक्रियाज या तो बेहद कम मात्रा में इंसुलिन पैदा करती है, या इंसुलिन पैदा करना बंद कर देती है। क्योंकि शरीर इसका प्रभावी ढंग से इस्तेमाल नहीं कर पाता, इसलिए व्यक्ति डायबिटीज का शिकार हो जाता है। लेकिन डायबटीज की आहट उसके लक्षणों से पहचानी जा सकती है। इसका इसके लिए आपको कुछ लक्षणों पर ध्यान देने की जरूरत पड़ती है।

क्या हैं डायबिटीज के लक्षण?

डायबिटीज की समस्या में शरीर आपको कुछ सिम्टम्स देता है। यह सिम्टम्स यानी कि लक्षण आप को समझने होते हैं। डायबिटीज के लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं –

  • बार-बार यूरिनेशन होना
  • बार-बार प्यास लगना
  • बहुत भूख लगना
  • अत्यधिक थकान
  • धुंधला दिखना
  • किसी चोट को ठीक होने में ज्यादा समय लगना
  • लगातार घटता वजन (टाइप1)
  • हाथ / पैर में झुनझुनी या दर्द (टाइप 2)

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यदि आप इन लक्षणों को महसूस करते हैं, तो आपको जल्द से जल्द अपना ब्लड शुगर लेवल मापने की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा कुछ ऐसे लक्षण भी हैं, जो जिसके चलते आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इन लक्षणों में हैं –

  • बहुत ज्यादा उल्टी, मतली, चक्कर या कमजोरी महसूस होना
  • बहुत ज्यादा प्यास लगना या बार-बार पेट दर्द के साथ पेशाब होना
  • सांस तेज होना या सांस फूलना

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर जरूरी टेस्ट करने के बाद आपको डायबिटीज के लिए आवश्यक मेडिसिन प्रिसक्राइब कर सकते हैं। इन दवाइयों की मदद से आप जल्द से जल्द डायबिटीज को कंट्रोल में ला सकते हैं। जैसा कि आपने जाना, डायबिटीज की समस्या में आपको कई तकलीफें उठानी पड़ सकती हैं। इसलिए टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ (Mental health in Type 1 diabetes) पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ (Mental health) किस तरह प्रभावित होती है।

टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ : क्यों ध्यान देना है जरूरी? (Mental health in Type 1 diabetes)

टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ (Mental health in Type 1 diabetes)

टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ (Mental health) का खास ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है, क्योंकि टाइप वन डायबिटीज (Type 1 diabetes) से ग्रसित व्यक्ति जल्दी मानसिक समस्याओं से ग्रस्त हो सकता है, जिसमें डायबिटीज डिस्ट्रेस, डिप्रेशन, एंग्जायटी और ईटिंग डिसऑर्डर इत्यादि शामिल है। यह कुछ इस तरह के डिसऑर्डर हैं, जिन से बाहर निकलना आसान नहीं है। इसलिए टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ (Mental health in Type 1 diabetes) का खास ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है। आइए जानते हैं टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ को किस तरह संभाला जा सकता है।

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टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ : ऐसे संभाली जा सकती है स्थिति!

अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार डायबिटीज की समस्या में व्यक्ति कुछ तरीकों से अपनी मेंटल हेल्थ को मैनेज कर सकता है, जिसमें परिवार का सपोर्ट, मेंटल हेल्थ (Mental health) के लिए से जुड़ी जानकारी, डिप्रेशन की पहचान इत्यादि बातें जरूरी मानी जाती है।

टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ : पारिवारिक सपोर्ट है महत्वपूर्ण (Mental health in Type 1 diabetes)

टाइप वन डायबिटीज (Type 1 diabetes) से ग्रसित व्यक्ति के लिए शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है, इसी जद्दोजहद में कई बार व्यक्ति परेशान हो सकता है। टाइप वन डायबिटीज ठीक होना लगभग नामुमकिन है, इसलिए व्यक्ति को ताउम्र इस समस्या से जूझना पड़ता है। इसलिए परिवार का इमोशनल सपोर्ट व्यक्ति के लिए बेहद मायने रखता है। टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ (Mental health in Type 1 diabetes) का ध्यान रखने के लिए डायबिटिक व्यक्ति ऐसे लोगों से मिल जुल सकता है, जो पहले से ही टाइप वन डायबिटीज को बैलेंस बनाए हुए हैं। साथ ही जो अपनी मेंटल हेल्थ को बेहतर रूप से मैनेज कर सकते हैं। डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति को रोजाना अपने खानपान में कार्बोहायड्रेट का ध्यान रखने के अलावा, ब्लड ग्लूकोज नापने और इमोशनल इमबैलेंस का सामना करना पड़ता है, जिसकी वजह से टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ (Mental health) पर सीधा प्रभाव पड़ता है। यही वजह है कि परिवार का इमोशनल सपोर्ट व्यक्ति को इस समस्या को मैनेज करने में मदद कर सकता है।

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टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ : इन समस्याओं से पड़ सकता है पाला

टाइप वन डायबिटीज (Type 1 diabetes) में व्यक्ति को रोजाना ब्लड ग्लूकोज लेवल चेक करना पड़ता है, साथ ही साथ इंसुलिन के डोज लेने पड़ते हैं। साथ हाई साथ अपने खानपान पर बारीकी से निगरानी रखनी पड़ती है, जिससे उसकी शारीरिक हेल्थ तो ठीक रहती है, लेकिन इसका प्रभाव मानसिक हेल्थ पर बुरा पड़ता है। इसलिए टाइप वन डायबिटीज में व्यक्ति को अपनी मेंटल हेल्थ (Mental health) पर ध्यान देने की जरूरत पड़ती है। जो व्यक्ति टाइप वन डायबिटीज में अपने शारीरिक हेल्थ को बनाए रखने की जद्दोजहद में लगा रहता है, कई बार लगातार यह काम करने पर वह परेशान हो सकता है, जिसे डायबिटीज बर्नआउट का नाम दिया जाता है। जिसकी वजह से व्यक्ति को यह समस्याएं हो सकती है –

  • एंगर इशू
  • डिनायल
  • डिप्रेशन

खास तौर पर टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ (Mental health in Type 1 diabetes) के अंतर्गत व्यक्ति को डिप्रेशन की समस्या होती है, जिसमें कई बार डायबिटिक न्यूरोपैथी का हाथ होता है। डिप्रेशन के कारण डायबिटीज में कॉम्प्लिकेशन का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए डायबिटीज और डिप्रेशन का सीधा ताल्लुक माना जाता है। टाइप वन डायबिटीज (Type 1 diabetes) में डिप्रेशन की बात करें, तो व्यक्ति में इस तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं –

इन लक्षणों के दिखाई देने पर व्यक्ति को अपना खास ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है, इसलिए समय रहते सायकोलॉजिस्ट या साइकियाट्रिस्ट से संपर्क करना जरूरी माना जाता है। टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ (Mental health in Type 1 diabetes) का ध्यान रखने के लिए व्यक्ति को साइकोलॉजिकल सेशन लेने की भी जरूरत पड़ सकती है, इसलिए परिवार के सपोर्ट के साथ व्यक्ति इन सेशन के जरिए अपनी मेंटल हेल्थ (Mental health) सुधार सकता है।

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टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ : इस तरह मिल सकती है मदद

टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ (Mental health in Type 1 diabetes) का ध्यान रखने के लिए आपको मेटाबॉलिक कंट्रोल, फिटनेस लेवल बढ़ाने और वेट लॉस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत पड़ती है। जब आपकी लाइफस्टाइल बेहतर होती है, तो आपकी मेंटल हेल्थ समय के साथ बेहतर होती चली जाती है। साथ ही साथ साइकोथेरेपी और कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी की मदद से टाइप वन डायबिटीज (Type 1 diabetes) है मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाया जा सकता है। साथ ही साथ यदि व्यक्ति को टाइप वन डायबिटीज में मेंटल हेल्थ (Mental health) से जुड़ी समस्याएं हो रही है, तो लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ-साथ कुछ दवाओं का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जो डिप्रेशन से संबंधित लक्षणों पर बेहद कारगर साबित होती हैं।

डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए जिस तरह आप डॉक्टर से संपर्क में बने रहते हैं, उसी तरह मेंटल हेल्थ (Mental health) का ध्यान रखने के लिए आपको डॉक्टर से संपर्क में रहना चाहिए। साथ हाई साथ आपको अपने खान-पान की आदतों में सुधार करके एक्सरसाइज करना चाहिए, जिससे आपके शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य पर भी पॉजिटिव प्रभाव पड़े। इसलिए समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप करवाएं और बिहेवियरल थेरेपी लेने से पीछे ना हटें।

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड