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सांस फूलना: इस परेशानी से छुटकारा दिलाएंगे ये टिप्स

सांस फूलना: इस परेशानी से छुटकारा दिलाएंगे ये टिप्स

जीवन और शरीर की बुनियादी जरूरतों में से सांस लेना एक प्रमुख प्रक्रिया है। इसके बिना हम जिंदगी की संभावनाओं की कल्पना भी नहीं कर सकते। इसी वजह से, श्वास प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाले फेफड़ों की समस्या (Lung Disease), सांस लेने में दिक्कत या सांस फूलना (Shortness of Breath) एक बड़ी और गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। जो कि जानलेवा साबित हो सकती है। अगर आपको भी सीढ़ियां चढ़ते हुए, कोई काम करते हुए या बात करते हुए ही सांस फूलने लगती है, तो आपको डिस्पनिया (Dyspnea) यानि श्वास रोग हो सकता है। सांस फूलना क्या है जानें यहां…

सांस फूलना आखिर क्या है?

सांस फूलने की दिक्कत आपको कई वजह से हो सकती है। इसके पीछे फेफड़ों की बीमारी के साथ दिल की बीमारी या अन्य परेशानी हो सकती है।

और पढ़ेंः गर्भनिरोधक दवा से शिशु को हो सकती है सांस की परेशानी, और भी हैं नुकसान

फेफड़ों के रोग की वजह से सांस फूलना

सांस फूलना कई कारणों से हो सकता है। फेफड़ों की कई बीमारी की वजह से आपको सांस फूलने की समस्या हो सकती है और इनमें से अधिकतर स्थितियों में आपको इमरजेंसी चिकित्सा सहायता की जरूरत होती है।

निमोनिया की वजह से सांस फूलना

निमोनिया की वजह से फेफड़ों में सूजन और एक फ्लूड का संग्रहण होने लगता है। सांस फूलना इसके कारण भी हो सकता है। यह एक लंग इंफेक्शन है और शरीर में इसके बढ़ने का खतरा होता है। निमोनिया होने पर आपको जल्द ही मेडिकल असिस्टेंस की जरूरत होती है, ताकि इसे बढ़ने से रोका जा सके। क्योंकि, एकबार निमोनिया की समस्या बढ़ जाने पर आपको काफी ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। निमोनिया के लक्षणों में खांसी, पसीना, बुखार, सिहरन, सांस फूलने की बीमारी आदि शामिल होते हैं।

अस्थमा की वजह से सांस फूलना

अस्थमा की समस्या एक गंभीर श्वास रोग है। जिसमें समय-समय पर अस्थमा के अटैक भी पड़ सकते हैं। इन अटैक में रोगी को सांस लेने में काफी परेशानी होने लगती है, जिस वजह से उसे तुरंत चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, अस्थमा में मरीज के फेफड़ों में सूजन हो जाती है और विंड पाइप (Wind Pipe) संकरी हो जाती है, जिसके कारण पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन शरीर में नहीं जा पाता और मरीज को सांस फूलने लगता है। अस्थमा की वजह से आपको सांस फूलना, सांस लेने में घरघराहट की आवाज आना, छाती में जकड़न आदि शारीरिक समस्याएं शामिल हो सकती है।

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पल्मनरी एंबोलिज्म (Pulmonary Embolism) के कारण सांस फूलना

पल्मनरी एंबोलिज्म के अंदर फेफड़ों की तरफ जाने वाली एक या एक से ज्यादा रक्त वाहिका अवरोधित हो सकती है। आमतौर पर, यह अवरोध शरीर के किसी अन्य अंग में विकसित हुए ब्लड क्लॉट के यहां पहुंच जाने की वजह से होता है। जो कि एक जानलेवा स्थिति हो सकती है, जिसमें तुरंत मेडिकल असिस्टेंट की जरूरत होती है। इस समस्या में सांस फूलने की समस्या, पैर में सूजन, छाती में दर्द, खांसी, सांसों के साथ घरघराहट की आवाज, चक्कर आना, बेहोश होना आदि लक्षण दिख सकते हैं।

एपिग्लॉटिस (Epiglottitis) के कारण सांस की नली सिकुड़ना

जब किसी संक्रमण की वजह से विंड पाइप के इर्दगिर्द मौजूद टिश्यू में सूजन आ जाती है, तो एपिग्लॉटिस की समस्या हो जाती है। यह समस्या भी जानलेवा साबित हो सकती है, जिसमें तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। इस बीमारी में बुखार, गले में दर्द, त्वचा का नीला पड़ना, सांस फूलने या निगलने में तकलीफ आदि परेशानियां हो सकती हैं।

दिल की बीमारी की वजह से सांस फूलना

कई बार सांस फूलने की समस्या आपकी दिल की समस्या की वजह से भी हो सकती है। क्योंकि, जब आपके दिल में समस्या आती है, तो दिल को दूसरे अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। जिस वजह से उसे, अधिक ऑक्सीजन की जरूरत होती है और आपको सांस फूलने लगता है।

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कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary artery disease) के कारण सांस फूलना

कोरोनरी आर्टरी डिजीज की वजह से दिल को रक्त पहुंचाने वाली रक्त वाहिका सख्त या संकरी हो जाती है। जिससे दिल तक जाने वाला ब्लड फ्लो कम हो जाता है और इस कारण हार्ट मसल डैमेज हो जाती है। इसमें चेस्ट पेन और हार्ट अटैक भी आ सकता है।

जन्मजात दिल की बीमारी (Congenital Heart Disease) की वजह से सांस फूलना

जब आनुवांशिक तरीके से आपके दिल का आकार या कार्यक्षमता में कमी आती है, तो उसे जन्मजात दिल की बीमारी कहा जाता है। इस समस्या में भी सांस लेने में दिक्कत या सांस फूलने की तकलीफ और असामान्य धड़कन हो जाती है।

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर (Congestive Heart Failure) के कारण सांस फूलना

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर के अंतर्गत दिल की मसल्स कमजोर हो जाती हैं और शरीर के अन्य अंगों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता है। जिस वजह से फेफड़े भी सही से कार्य नहीं कर पाते हैं और शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। इस समस्या की वजह से हार्ट अटैक या हार्ट के वाल्व में भी समस्या हो सकती है।

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बुखार में सांस फूलना

बुखार में शरीर का तापमान काफी बढ़ जाता है और मेटाबॉलिज्म को ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत होती है। ऑक्सीजन की ज्यादा जरूरत की वजह से सांसें भारी होने लगती हैं। शरीर की गर्मी को कम करने और शारीरिक तापमान को सामान्य लाने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है। आमतौर पर, बुखार में भारी गतिविधि करने के दौरान सांस फूलने लगता है।

इंफेक्शन के कारण सांस फूलना

कई संक्रमण की वजह से सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। हालांकि, इनमें से अधिकतर संक्रमण गंभीर नहीं होते, लेकिन अगर आपको ज्यादा समय तक तकलीफ हो रही है, तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। इन संक्रमणों में साइनस इंफेक्शन, सामान्य जुकाम, इंफ्लुएंजा, ब्रोंकाइटिस आदि शामिल हैं।

श्वास प्रणाली में रुकावट के कारण सांस फूलना

जब हमारी श्वास प्रणाली में बाहरी तत्व आ जाने या किसी और वजह से कोई रुकावट आ जाती है, तो चोकिंग की स्थिति हो जाती है और सांस नहीं आती। यह चोकिंग पार्शियल या फुल हो सकती है यानि इस रुकावट से आपकी श्वास प्रणाली को कोई हिस्सा जैसे गला या विंड पाइप आधा या पूरी तरह से ब्लॉक हो सकता है। इस स्थिति में आपको तुरंत ही डॉक्टर के पास जाना चाहिए। इस समस्या में सांस फूलने की दिक्कत, चक्कर, बुखार, सांस में घरघराहट या सीटी की आवाज आना, गले या छाती में जलन आदि परेशानियां भी झेलनी पड़ सकती है।

एलर्जी की वजह से सांस फूलना

कई बार परागण या धूल जैसे एलर्जन सांस द्वारा शरीर में दाखिल हो जाने पर रेस्पेरेटरी एलर्जी हो जाती है। जिससे आपकी विंड पाइप या गला अत्यंत संवेदनशील हो जाता है। इसकी वजह से सांस में घरघराहट या सीटी की आवाज आना, आंखों से पानी आना, फेफड़े या गले में जलन, सांसों का भारी होना आदि दिक्कतें हो सकती हैं।

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चिंता (Anxiety) के कारण सांस फूलना

चिंता के कारण आपके शरीर के सभी अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित हो जाती है, जिसमें फेफड़े और दिमाग भी शामिल है। इस स्थिति में सांसें भारी हो सकती है और यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है। लेकिन, आप इस पर आसानी से काबू भी पा सकते हैं। इसके लिए आपको सांस फूलने या सांसों के भारी होने पर गहरी और लंबी सांसें लेनी चाहिए। इससे राहत मिल सकती है।

एनीमिया के कारण सांस फूलना

हमारे शरीर में रेड ब्लड सेल्स यानि आरबीसी ऑक्सीजन को सभी अंगों तक पहुंचाती हैं। जिसके लिए, आयरन की पर्याप्त मात्रा का होना बहुत जरूरी होता है। लेकिन, कई बार अस्वस्थ खानपान और बेकार जीवनशैली की वजह से हम पर्याप्त आयरन का सेवन नहीं कर पाते हैं, तो एनीमिया की शिकायत हो जाती है। इस वजह से भी शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता और सांस फूलने की तकलीफ हो सकती है। इस समस्या में चेस्ट पेन, थकान, कमजोरी और चक्कर भी आ सकते हैं।

योगा और एक्सरसाइज से कंट्रोल करें सांस फूलना

सांस फूलने की समस्या में राहत पाने के लिए या उसे दूर करने के लिए आप कुछ एक्सरसाइज या योगा की मदद ले सकते हं। ये एक्सरसाइज या योगा आपके दिल और फेफड़ों को आराम देती हैं और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन प्रदान करने में मदद करती हैं।

सांस की एक्सरसाइज

अगर आपको सांस फूलने की समस्या हो रही है, तो आप तुरंत राहत पाने के लिए इस एक्सरसाइज का उपयोग कर सकते हैं। इस एक्सरसाइज को करने से आपके फेफड़ों में रुकी हुई सांस भी बाहर निकल आती है और आपकी सांसों की गति सामान्य हो जाती है। इस एक्सरसाइज की मदद से कोई भी शारीरिक गतिविधि की वजह से सांस फूलने या तेज सांसें चलने की समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है। एक्सरसाइज को करने के लिए अपनी गर्दन और कंधों को ढीला छोड़िए। अब मुंह को बंद करके नाक के द्वारा गहरी सांस लीजिए, इसके बाद अपने होठों को इस तरह गोल बनाइए कि जैसे आप सीटी बजा रहे हों। अब सांस को धीरे-धीरे बाहर छोड़िए। इस प्रक्रिया को चार-पांच बार करने से आराम मिलता है।

आगे की तरफ झुक कर बैठना

अगर आपकी सांसें भारी चल रही हैं, तो किसी कुर्सी पर बैठ जाइए। अब तलवों को अच्छी तरह जमीन पर टिका लें और छाती को आगे की तरफ झुकाएं। इस स्थिति में अपनी कोहनियों को आराम देने के लिए घुटनों पर टिकाएं और हथेलियों पर ठुड्डी को रखें। अब गर्दन और कंधों को ढीला छोड़कर गहरी सांस लें।

सहारा लेकर खड़ा होना

अगर कहीं बैठने की जगह नहीं है और आपको सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो अपने आसपास मौजूद किसी भी दीवार का सहारा लेकर खड़े हो जाएं। मतलब, अपनी कमर और कूल्हों को दीवार पर टिका लें। अपने पैरों को कंधों के जितना खोल लें और हथेलियों को जांघों पर टिका लें। अब कंधों को ढीला छोड़कर आगे की तरफ झुकाएं और गहरी सांस लें। इस अवस्था में सांस लेने में आसानी होगी और सांस फूलने की समस्या ठीक होगी।

टेबल और कुर्सी की मदद लेकर बैठना

अगर आपके पास कुर्सी और टेबल दोनों हैं, तो कुर्सी पर बैठ जाएं और अपने पैरों को कंधों के जितना खोल लीजिए। अब छाती और सिर को सामने की तरफ टेबल पर टिका लें। अपने कंधों और गर्दन को ढीला छोड़ दें और गहरी सांस लें। इससे सांस फूलने की परेशानी ठीक होगी।

सांस चढ़ने के लिए डायफ्राग्मेटिक ब्रीदिंग एक्सरसाइज

सांस चढ़ने की स्थिति में डायफ्राग्मेटिक ब्रीदिंग एक्सरसाइज की मदद ले सकते हैं। इस एक्सरसाइज को करने के लिए एक कुर्सी पर बैठकर तलवों को कंधों के जितना खोल लें। अब कंधों, गर्दन और सिर को ढीला छोड़ दें। अपने एक हाथ को पेट पर रखें और नाक के द्वारा धीरे-धीरे सांस लें। आपको लगेगा कि आपका पेट फूल रहा है । अब सांस छोड़ते हुए पेट को अंदर की तरफ खींचे। लेकिन सांस छोड़ते हुए अपने होठों को गोल बनाकर थोड़ा सा दबाव डालें। इस एक्सरसाइज को पांच मिनट तक करें।

सांस फूलने के लिए योगा

आप सांस फूलने की समस्या को दूर करने के लिए नियमित योगा कर सकते हैं। माना जाता है कि प्राणायाम करने से फेफड़े मजबूत होते हैं और श्वास प्रणाली सही तरह से कार्य करती है। इस योगा को करने के लिए जमीन पर चौकड़ी मारकर बैठ जाएं। अब अपनी कमर, गर्दन और सिर को सीध कर लें और दोनों हाथों को घुटनों पर टिका लें। इसके बाद अब सीधा हाथ उठाकर अपनी नाक का बायां नाकछिद्र बंद कर लें और दाएं नाकछिद्र से सांस लें। अब दायां नाकछिद्र बंद करके बायें नाकछिद्र से सांस छोड़ें। अब इसी प्रक्रिया को उल्टा दोहराएं। इसी योगा को 10 मिनट तक रोजाना करें।

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सांस की तकलीफ के लिए भाप लें

गर्म और नमीदार हवा को अंदर लेने से साइनस या श्वास प्रणाली की रुकावटें दूर हो सकती हैं। इसके लिए, आप खोलते हुए पानी को एक बड़े बर्तन में कर लें। अब बर्तन के ऊपर सिर करके बैठ जाएं और अपने सिर और बर्तन के आसपास तौलिए से ढक लें। ताकि पूरी स्टीम आपको मिल पाए। आप पानी में मेंथॉल की कुछ बूंदें डालकर भी भाप ले सकते हैं।

एलर्जी की दवाइयां

सांस फूलना कई बार एलर्जी की वजह से भी हो सकता है। इस स्थिति में आपको एलर्जी दूर करने वाली दवाओं का सेवन करना चाहिए या फिर डॉक्टर को दिखाना चाहिए। ताकि डॉक्टर एलर्जी को कम करके सांस फूलने की समस्या को दूर कर सके।

सांस फूलने की समस्या के लिए शारीरिक एक्सरसाइज

सांस फूलना कई कारणों से हो सकता है। इस समस्या से राहत पाने के लिए आप कुछ शारीरिक एक्सरसाइज भी कर सकते हैं। जिससे आपकी मसल्स मजबूत होती हैं और कार्यक्षमता सही होती है। लेकिन, कोई भी शारीरिक एक्सरसाइज करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें। आइए, जानते हैं कि इसमें कौन सी शारीरिक एक्सरसाइज शामिल हैं।

लेकिन एक्सरसाइज करने के लिए अपने शरीर पर अतिरिक्त दबाव न डालें। जिससे नतीजे नकारात्मक हो सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं, तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Breathing difficulty – https://medlineplus.gov/ency/article/003075.htm – Accessed on 16/1/2020

Breathing problems and exercise – https://www.betterhealth.vic.gov.au/health/HealthyLiving/breathing-problems-and-exercise – Accessed on 16/1/2020

Breathlessness/https://www.blf.org.uk/support-for-you/breathlessness/ Accessed on 20th May 2021

Shortness of breath/https://www.mayoclinic.org/symptoms/shortness-of-breath/basics/causes/sym-20050890/Accessed on 20th May 2021

Signs and symptoms of breathlessness/https://www.cancerresearchuk.org/about-cancer/coping/physically/breathing-problems/breathlessness-signs-symptoms/Accessed on 20th May 2021

लेखक की तस्वीर
Surender aggarwal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 20/05/2021 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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