ये 5 बातें बताती हैं डिप्रेशन और उदासी में अंतर

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट June 16, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
अब शेयर करें

थोड़ी सी भी उदासी होने के बाद अक्सर लोग खुद को डिप्रेशन में समझने लगते हैं। ब्रेकअप हुआ तो डिप्रेशन, ऑफिस में कोई दिक्कत हुई तो डिप्रेशन या कोई अन्य पारिवारिक। हर चीज को डिप्रेशन से जोड़कर देखना सही नहीं होता है। दरअसल, डिप्रेशन और उदासी में अंतर होता है। डिप्रेशन की शुरुआत भले ही उदासी से हो सकती है लेकिन, इसमें एक बड़ा अंतर है। किसी को सलाह देने से पहले आप भी डिप्रेशन और उदासी में अंतर को समझ लें।

डिप्रेशन और उदासी में अंतर?

डिप्रेशन और उदासी में अंतर 1.  क्या आप अभी भी अपनी मनपसंद चीजों को इंजॉय करते हैं?

उदासी: दुखी होने से पहले आपको जो चीजें बहुत पसंद थीं अगर वह आज भी आपको खुशी देता है, इसका मतलब है कि आपको डिप्रेशन नहीं है। हालांकि एकदम से आप इनसे खुश नहीं हो सकते लेकिन, इनमें एक बार इंवोल्व होने के बाद आप भले ही कुछ देर के लिए लेकिन अपना दुख भूल जाते हैं।

डिप्रेशन: तनाव में रहते हुए व्यक्ति उन चीजों से भी खुश नहीं होता जिन्हें, कभी वह पसंद किया करता था। यदि आपको घूमना—फिरना अच्छा लगता था या दोस्तों के साथ क्रिकेट या फूटबॉल खेलना अच्छा लगता था तो डिप्रेशन में व्यक्ति इन चीजों से भी दूर हो जाता है।

डिप्रेशन और उदासी में अंतर 2. क्या आप किसी एक विशेष कारण से ही परेशान हैं?

उदासी: ऐसे मामले में उदासी और मानसिक तनाव में अंतर करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। उदासी किसी भी कारण से हो सकती है, किसी करीबी की मौत, घर से दूरी आदि। तनाव से अलग इसमें बस यह है कि कुछ वक्त के बाद यह ठीक हो जाती है या कम हो जाती है।

डिप्रेशन: तनाव भी किसी एक विशेष कारण से हो सकता है या फिर अकारण भी हो सकता है। तनाव वाला व्यक्ति किसी भी नेगेटिव इवेंट में बहुत खराब तरह से पेश आता है। ऐसे लोगों के लिए छोटी से छोटी घटना भी बहुत दर्दनाक हो जाती है।

और पढ़ें: समझें पैनिक अटैक (Panic attack) और एंग्जायटी अटैक (Anxiety attack) में अंतर

डिप्रेशन और उदासी में अंतर 3. क्या आप पहले की ही तरह खाना—पीना और सोना कर रहे हैं?

उदासी: किसी भी अनहोनी घटना के बाद यदि आपको भूख—प्यास सही से लग रही है, आप काम के लिए बाहर भी जा रहे हैं या आपकी नींद में भी कोई परेशानी नहीं है तो आप डिप्रेस नहीं हैं।

डिप्रेशन: तनाव में आने के बाद आपकी भूख—प्यास, उठने—सोने आदि में बदलाव हो जाता है। यह भी हो सकता है कि आपको नींद ही न आए या आप पूरा दिन या रात सोएं ही ना। किसी भी चीज का कोई फायदा नहीं है, बस इस सोच के कारण ही यह बदलाव होता है।

डिप्रेशन और उदासी में अंतर 4. क्या आप खुद को सजा देने या खुद को बुरा—भला कहते रहते हैं?

उदासी:  कई बार एक्सपेक्टेशन के मुताबिक काम नहीं हो पाने के कारण आप खुद को कोसने लगते हैं। कई बार किसी घटना के लिए भी आप खुद को बुरा—भला कहने लगते हैं या आप खुद को ही दोषी मान लेते हैं। उदासी में ऐसा होता है पर डिप्रेशन के इतर आप इनपर ही अटके नहीं रहते हैं। इसके कारण आप हर चीज को नहीं कोसते।

डिप्रेशन: इसमें आप खुद को हद पार करके सजा देने की सोचते हैं। इसमें खुदकुशी भी जुड़ी है। आप खुद को नाकाबिल, बुरा कहकर बार—बार कोसते रहते हैं।

और पढ़ें: हर्बल बाथ के फायदे: बॉडी रिलैक्स से लेकर मेंटल स्ट्रेस तक

डिप्रेशन और उदासी में अंतर 5. क्या आपके मूड में बदलाव आता है?

उदासी: उदासी हमेशा नहीं बनी रहती। ऐसे कई मौके आते हैं जब आप उदासी को भूलकर खुश हो जाते हैं।

डिप्रेशन: जब मोडरेट डिप्रेशन होता है तब दिन भर आपका मूड लो होता है। सिवियर डिप्रेशन में आप लगातार बेहद डिप्रे​श महसूस करते हैं। यह दिन या रात के अनुसार नहीं बदलते।

ऊपर बताई गई डिप्रेशन और उदासी में अंतर से यह समझना आसान हो सकता है की व्यक्ति उदास है डिप्रेस्ड है।

उदासी और डिप्रेशन के इलाज में भी है अंतर

उदासी को आप खुद से भी सुलझा सकते हैं। अगर आप उदास हैं तो किसी करीबी से बात करें, अच्छा खाएं, नींद पूरी करने पर ध्यान दें। कुछ वक्त बाद आपकी उदासी गायब हो जाएगी। डिप्रेशन को दूर कर पाना थोड़ा मुश्किल होता  डिप्रेशन से कई मानसिक विकार जुड़े हुए हैं। इसलिए डिप्रेशन को ठीक करने के लिए विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया जाता है। डिप्रेशन में हैं या कोई करीबी डिप्रेशन में है तो डॉक्टर से मिलकर सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

और पढ़ें- डिप्रेशन (Depression) होने पर दिखाई ​देते हैं ये 7 लक्षण

डॉक्टर से कब मिलें?

डिप्रेशन और उदासी में अंतर सझने के बाद डिप्रेशन से पीड़ित लोगों को समझा जा सकता है। इसलिए निम्नलिखित लक्षण नजर आने पर डॉक्टर से संपर्क करें। इन लक्षणों में शामिल है:-

  • अगर कोई व्यक्ति ज्यादा सोता है या फिर नींद नहीं आना 
  • किसी से मिलने की इच्छा न होना
  • मन में हमेशा नकारात्मक विचारधारा होना
  • खुशी के मौकों पर भी दुखी ही रहना
  • किसी के सवाल का जवाब चिढ़कर या झल्लाकर जवाब देना
  • अकेले रहना ज्यादा पसंद करना
  • हमेशा थका हुआ महसूस करना
  • वजन अचानक बढ़ जाना या तेजी से कम हो जाना
  • सिरदर्द और हमेशा बॉडी पेन की शिकायत करना
  • मांसपेशियों में दर्द महसूस होना
  • खाने की इच्छा न होना या बहुत ज्यादा खाना खाना

इन ऊपर बताई गई लक्षणों के साथ-साथ अगर व्यक्ति खुद को बार—बार अपने आपको ​कोसने लगे हैं या आप जिंदगी को जीना ही नहीं चाहते तो डॉक्टर से मिल लें। अगर आपको लगता है कि आप खुद को चोट पहुंचा सकते हैं या सुसाइड कर सकते हैं, तो तुरंत लोकल एमरजेंसी नंबर पर कॉल करें। क्योंकि अगर डिप्रेशन की समस्या ज्यादा है, तो व्यक्ति निम्नलिखित कदम भी उठा सकता है। जैसे-

और पढ़ें- पार्टनर को डिप्रेशन से निकालने के लिए जरूरी है पहले अवसाद के लक्षणों को समझना

डिप्रेशन और उदासी में अंतर होता है। उदासी कुछ वक्त बाद खत्म हो जाती है लेकिन, डिप्रेशन को दोस्त नहीं डॉक्टर ही खत्म करने में मदद कर सकता है। इसलिए अगर आपके घर में कोई डिप्रेशन के शिकार हैं या आप डिप्रेशन और उदासी में अंतर नहीं समझ पा रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें। इससे जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

Was this article helpful for you ?
happy unhappy
सूत्र

शायद आपको यह भी अच्छा लगे

उम्र बढ़ने के साथ घबराएं नहीं, आपका दृढ़ निश्चय एजिंग माइंड को देगा मात

एजिंग माइंड के कारण महिलाओं और पुरुषों को मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उम्र बढ़ने के साथ ही महिलाओं और पुरुषों में भूलने की बीमारी, डिप्रेशन, चिंता आदि विकार नजर आने लगते हैं। Ageing mind

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Bhawana Awasthi

लॉकडाउन के असर के बाद इस नए साल पर अपने मानसिक स्वास्थ्य को कैसे फिट रखें?

इस लॉकडाउन में लोगों की मेंटल हेल्थ पर काफी प्रभाव पड़ा है। जिससे अभी तक लोग ठीक से निकल नहीं पाए हैं। लेकिन लोगों को अपने अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Niharika Jaiswal

ऑनलाइन स्कूलिंग से बच्चों की मेंटल हेल्थ पर पड़ता है पॉजिटिव इफेक्ट, जानिए कैसे

ऑनलाइन स्कूलिंग या क्लासेस करने से शरीर को असुविधा महसूस हो सकती है लेकिन ऑनस्कूल के कारण बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। Child’s Mental Health

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Bhawana Awasthi

इस दिवाली घर में जलाएं अरोमा कैंडल्स, जगमगाहट के साथ आपको मिलेंगे इसके हेल्थ बेनिफिट्स भी

इस दिवाली में अरोमा कैंडल से घर को करें रोशन करें। ऐसा करने से अच्छी खुशबू के साथ ही आपको रिलेक्स भी महसूस होगा। इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए अरोमा कैंडल के फायदे।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Bhawana Awasthi

Recommended for you

मूड डिसऑर्डर्स

मूड डिसऑर्डर के बारे में हर छोटी- बड़ी जानकारी पाएं यहां

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया AnuSharma
प्रकाशित हुआ February 27, 2021 . 7 मिनट में पढ़ें
स्वास्थ्य

स्वास्थ्य को जानें, स्वास्थ्य को पहचानें – क्योंकि स्वास्थ्य से ही सब कुछ है!

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया AnuSharma
प्रकाशित हुआ February 22, 2021 . 8 मिनट में पढ़ें
पुरुषों की मेंटल हेल्थ बिगाड़ने वाले कारण/ Men's Mental Health

पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारणों के बारे में जान लें, ताकि देखभाल करना हो जाए आसान

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Manjari Khare
प्रकाशित हुआ February 15, 2021 . 6 मिनट में पढ़ें
डिप्रेशन के लिए होम्योपैथिक ट्रीटमेंट, depression ke liye homeopathy treatment

डिप्रेशन को छूमंतर करने के लिए लें होम्योपैथी का सहारा

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Bhawana Awasthi
प्रकाशित हुआ January 19, 2021 . 4 मिनट में पढ़ें