जानिए डायबिटीज के प्रकार, लक्षण, कारण और उपचार विधि

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Update Date मई 21, 2020
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डायबिटीज (Diabetes) क्या है?

डायबिटीज को चिकित्सिक भाषा में डायबिटीज मेलिटस कहते हैं| यह मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बहुत पुरानी और आम बीमारी है| डायबिटीज में, आपका शरीर इंसुलिन नाम के हॉर्मोन को बनाने और उसे इस्तेमाल करने की क्षमता खो देता है| डायबिटीज की बीमारी होने पर आपके शरीर में ग्लूकोज की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाती है| यह स्तिथि आगे चल कर आंखों, किडनी, नसों और दिल से संबंधित गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकती है|

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डायबिटीज के प्रकार 

डायबिटीज के प्रकार तीन होते हैं, जिन्हें टाइप 1, टाइप 2, और जेस्टेशनल डायबिटीज कहा जाता है|

टाइप 1 डायबिटीज

  • टाइप 1 डायबिटीज या जुवेनाइल डायबिटीज एक तरह का ऑटोइम्यून विकार है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम आंतों पर अटैक करता है, जिसके कारण शरीर में इंसुलिन की कमी हो जाती है और रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है|
  • अगर आप टाइप 1 डायबिटीज के शिकार हैं तो इसके लक्षण कम उम्र यानी बचपन से ही नजर आने लगते हैं|
  • टाइप 1 डायबिटीज का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है| एक्सपर्ट्स का कहना है कि टाइप 1 डायबिटीज विरासती और पर्यावरणीय कारकों के संयोजन से होती है|

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आपको टाइप 1 डायबिटीज का खतरा हो सकता है अगर-

  • आपके माता-पिता या भाई-बहन में से किसी को टाइप 1 डायबिटीज की बीमारी है|
  • वायरल बीमारी के संपर्क में जल्दी आने जैसी परिस्थितियां होती हैं|
  • डायबिटीज ऑटोएंटीबॉडीज की उपस्थिति|
  • विटामिन-डी कि कमी, बच्चों को कम उम्र से ही गाय का दूध पिलाना और 4 महीने से कम उम्र में डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ जैसे सीरियल्स खिलाना| 
  • यह टाइप 1 डायबिटीज का सीधा कारण तो नहीं हैं लेकिन यह उसके खतरे को बढ़ाते हैं|
  • फिनलैंड और स्वीडन जैसे देशों में टाइप 1 डायबिटीज के खतरे बहुत ज्यादा हैं|

टाइप 2 डायबिटीज

टाइप 2 डायबिटीज, डायबिटीज की बहुत आम प्रकार है जिसमें डायबिटीज के तमाम प्रकारों से जुड़े 90 से 95 प्रतिशत लोग इस केटेगरी में आते हैं| यह बीमारी ज्यादातर वयस्कता के बाद शरीर में अपनी जगह बनती है| आजकल, मोटापा बढ़ने के कारण युवाओं और बच्चों में भी टाइप 2 डायबिटीज आम हो रही है| ऐसा मुमकिन है कि आपको भी टाइप 2 डायबिटीज हो लेकिन आप इस बात से बेखबर हों|

टाइप 2 डायबिटीज में आपके सेल्स इंसुलिन प्रतिरोधी हो जाते हैं और आपका अग्न्याशय (पैंक्रिया) जरुरत के मुताबिक इंसुलिन नहीं बना पाता| आपके सेल्स को ऊर्जा के लिए शकर की जरुरत होती है लेकिन इस स्तिथि में चीनी का निर्माण सेल्स के बजाय रक्तप्रवाह में होता है|

यह क्यों होता है इसका यकीनी उत्तर नहीं है, लेकिन डॉक्टरों का मन्ना है कि इसमें जेनेटिक्स (विरासत) और पर्यावरण अहम किरदार निभाते हैं| मोटापा इस बीमारी का सबसे मुख्य कारण है, लेकिन टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित हर शख्स मोटा नहीं होता|

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डायबिटीज के प्रकार और भी हैं

जेस्टेशनल डायबिटीज:

डायबिटीज के प्रकार में जेस्टेशनल डायबिटीज, डायबिटीज की वह है जो केवल गर्भवती महिलाओं को होती है| यह बीमारी गर्भवती महिला के साथ-साथ गर्भ में पलने वाले बच्चे को भी प्रभावित करती है| जेस्टेशनल डायबिटीज आमतौर पर डिलीवरी के बाद खत्म हो जाती है|

अन्य डायबिटीज के प्रकार में विरासत में मिलना, सर्जरी या दवाओं के कारण होना, कुपोषण के जरिए होना, इंफेक्शन और दूसरी बिमारियों के नतीजे में होने वाली डायबिटीज शामिल हैं|

डायबिटीज इन्सिपिडस:

डायबिटीज के प्रकार में यह नाम से ऊपर बताई गई डायबिटीज के प्रकार से मिलती-जुलती है लेकिन दरअसल यह किडनी में पानी न रुक पाने के कारण होती है| यह बहुत कम आम है और डायबिटीज के प्रकार का आसानी से इलाज किया जा सकता है|

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जानें, क्यों है आपको डायबिटीज?

अपनी बीमारी का कारण जानने के लिए आपको चाहिए कि इस बात का ज्ञान रखें कि आपका शरीर किस प्रकार से ग्लूकोस का निर्माण करता है|

ग्लूकोस मेटाबोलिज्म:

ग्लूकोस शरीर, खासतौर पर आपके दिमाग के सेल्स और मसल्स की ऊर्जा की जरुरत को पूरा करता है| ग्लूकोस की प्राप्ति आप जो खाना खाते हैं के अलावा आपके लिवर और ग्लाइकोजन से होती है| अगर आपने अच्छी तरह से खाना न खाया हो और आपके रक्त में ग्लूकोस की मात्रा बहुत कम हो तो आप का लिवर ग्लाइकोजन के जरिए ग्लूकोस तैयार करेगा जो आपके खून में शुगर के स्तर को बैलेंस कर सकेगा| इसके बाद यह ग्लूकोस पुरे शरीर के सेल्स में पहुंचाया जाएगा| लेकिन, आपके सेल्स में इंसुलिन नाम के हॉर्मोन की गैर-मौजूदगी में ग्लूकोस को सेल्स तक पहुंचाना मुश्किल हो जाएगा| इंसुलिन ग्लूकोस को आपके सेल्स तक पहुंचाने का काम करता है और खून में ग्लूकोस के लेवल को बढ़ने से रोकता है| फिर, चूंकि आपके खून में ग्लूकोस कम हो चूका है, पैंक्रियास के जरिए इन्सुलिन बनना भी कम हो जाएगा|

ऐसे में ग्लूकोस मेटाबोलिज्म में कोई भी असामान्यता ग्लूकोस को सेल्स तक पहुंचा कर ऊर्जा दे सकती है| जिसके कारण ग्लूकोस आपके रक्त में ही रह जाएगा| यह असंतुलन समय के साथ-साथ और बिगड़ सकता है और रक्त में ग्लूकोस की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ सकती है, इस स्तिथि को हाइपरगलाईशेमिया के नाम से जाना जाता है|

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डायबिटीज के क्या लक्षण होते हैं?

डायबिटीज के प्रकार के आम लक्षण यह हो सकते हैं:

  • बार-बार प्यास लगना जिसे पॉलीडीप्स्या कहते हैं|
  • ज्यादा पेशाब होना, अक्सर हर एक घंटे पर| इस स्तिथि को पॉल्यूरिया कहते हैं|
  • बिना किसी कारण के वजन घटना|
  • जल्दी थकावट महसूस होना|

ऐसे भी कुछ लक्षण हैं जो व्यक्तिगत रूप से किसी को महसूस हो सकते हैं और किसी को नहीं| जिनमें शामिल हैं:

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डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?

आप ऊपर बताए गए डायबिटीज के प्रकार के लक्षणों को महसूस करते हों तो आपको डॉक्टर के पास चेकअप के लिए जाना चाहिए| इसके अलावा इन स्तिथियों में आपको फौरी तौर पर डॉक्टर की जरुरत पड़ सकती है:

डायबिटीज के प्रकार का इलाज कैसे किया जाए?

  • डायबिटीज के प्रकार, टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के लिए आपको खून में शुगर का स्तर नियंत्रण में रखने के लिए ख़ास डाइट की जररूत होगी| आपको खाने का रूटीन बनाना होगा और स्नैक्स रोजाना एक ही समय पर लेना होगा| 
  • आपको अपने खून का शुगर लेवल बार-बार जांचने की जरुरत होगी और डायबिटीज बढ़ने या घटने के लक्षणों पर ध्यान देना होगा| डॉक्टर आपको इंसुलिन के इंजेक्शन के बारे में समझा देगा जिससे आप दिन में 2 से 3 बार खुद घर पर ही इंजेक्शन ले सकेंगे|
  • डॉक्टर आपको एक्सरसाइज के जरिए खून में शकर का स्तर नियंत्रण करने के तरीके सुझा सकता है|
  • आप को खुद भी अपनी सेहत का ध्यान रखना बहुत जरुरी है, आगे समस्याओं से बचने के लिए आंखों की जांच भी करवा लेनी चाहिए|
  • हालाँकि, टाइप 1 डायबिटीज का इलाज नहीं किया जा सकता, टाइप २ डायबिटीज को जीवन शैली में बदलाव ला कर नियंत्रण करने की कोशिश की जा सकती है|

इस आर्टिकल में हमने आपको डायबिटीज के प्रकार से संबंधित जरूरी बातों को बताने की कोशिश की है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस बीमारी से जुड़े किसी अन्य सवाल का जवाब जानना है, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्सर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे। अपना ध्यान रखिए और स्वस्थ रहिए।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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