डायबिटिक रेटिनोपैथी: आंखों की इस समस्या की स्टेजेस कौन-सी हैं? कैसे करें इसे नियंत्रित

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट अगस्त 13, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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डायबिटिक रेटिनोपैथी डायबिटीज में होने वाली ऐसी समस्या है जिसका प्रभाव रोगी की आंखों पर पड़ता है। यह समस्या आंख के पीछे स्थित, लाइट के प्रति संवेदनशील ऊतक (जिसे रेटिना कहा जाता है) के ब्लड वेसल को होने वाले नुकसान के कारण होती है। शुरुआत में डायबिटिक रेटिनोपैथी के रोगी को बहुत हल्के या न के बराबर लक्षण दिखाई देते हैं। लेकिन, बाद में यह अंधापन का कारण भी बन सकती है। यह स्थिति टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज दोनों में दिखाई दी जा सकती है। रोगी में जितने अधिक समय तक डायबिटीज की समस्या होगी और ब्लड शुगर जितनी कम नियंत्रित होगी,उतनी ही अधिक आंखों की समस्याएं होने की संभावना बनी रहेगी। पाएं, डायबिटिक रेटिनोपैथी स्टेजेस और इसके बारे में अन्य जानकारी विस्तार से।

डायबिटिक रेटिनोपैथी के लक्षण

डायबिटिक रेटिनोपैथी से दोनों आंखें प्रभावित हो सकती हैं। डायबिटिक रेटिनोपैथी स्टेजेस के बारे में जानने से पहले इसके लक्षणों के बारे में जानना आवश्यक है। डायबिटिक रेटिनोपैथी के शुरुआती स्टेज में हो सकता है कि रोगी को कोई भी लक्षण दिखाई न दें। लेकिन, जैसे-जैसे यह स्थिति आगे बढ़ती है इसके लक्षण कुछ इस तरह के हो सकते हैं: 

  • दृष्टि में स्पॉट या गहरी तार जैसा कुछ तैरते हुए नजर आना।
  • धुंधली दृष्टि
  • दृष्टि में उतार चढ़ाव (Fluctuating vision)
  • रंगों को देखने में समस्या 
  • दृष्टि में गहरे या खाली क्षेत्र दिखाई देना
  • बिल्कुल भी न दिखाई देना

और पढ़ें: जानें क्या है डायबिटिक न्यूरोपैथी, आखिर क्यों होती है यह बीमारी?

डायबिटिक रेटिनोपैथी स्टेजेस कौन से हैं

डायबिटिक रेटिनोपैथी के चार मुख्य स्टेजेस हैं। जानिए इनके बारे में: 

माइल्ड नॉनप्रोलिफेरेटिव रेटिनोपैथी(Mild Nonproliferative Retinopathy)

डायबिटिक रेटिनोपैथी स्टेजेस में से यह शुरुआती स्टेज है। इस स्टेज पर, आंखों में माइक्रोन्यूरिस्म हो सकती है। जो यह रेटिना के छोटे ब्लड वेसल में गुब्बारे जैसी सूजन है। माइक्रोन्यूरिस्म आंखों में से लीक भी हो सकते हैं। इस स्टेज में रोगी को हर साल डाईलेटेड आइ टेस्ट करना चाहिए। हालांकि इस पहली स्टेज के रोगी में अगले एक साल में समस्या के गंभीर होने की संभावना  5% रहती है। इस स्टेज पर दृष्टि अधिक प्रभावित नहीं होती लेकिन इस बात का पूरा जोखिम रहता है कि भविष्य में आपकी दृष्टि को नुकसान हो। इस स्टेज में रोगी को उपचार की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन, इसमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि समस्या बदतर न हो जाए।

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मॉडरेट नॉनप्रोलिफेरेटिव रेटिनोपैथी (Moderate Nonproliferative Retinopathy)

डायबिटिक रेटिनोपैथी स्टेजेस में से तीसरी स्टेज में आंख के ब्लड वेसल सूज जाते हैं। जिससे रेटिना को ठीक से पोषण प्रदान नहीं कर पाती। इस स्टेज में ब्लड वेसल पूरी तरह से ब्लॉक हो सकते हैं। इन परिवर्तनों से रेटिना में दृष्टि पर असर पड़ता है। यही नहीं, इन बदलावों के कारण डायबिटिक मैक्यूलर एडिमा भी हो सकता है। यह तब होता है जब आपके रेटिना के एक हिस्से में रक्त और अन्य तरल पदार्थ का निर्माण होता है, जिसे मैक्युला कहा जाता है। मैक्युला सीधे और आगे की दृष्टि के लिए महत्वपूर्ण है। जब यह सूज जाता है, तो यह आपके दृष्टि के इस महत्वपूर्ण हिस्से में समस्या पैदा कर सकता है। क्योंकि, मैक्युला तेज और स्पष्ट दृष्टि के लिए महत्वपूर्ण है, ऐसे में डायबिटिक मैक्यूलर एडिमा दृष्टि परिवर्तन का कारण भी बन सकता है। 

वास्तव में, डायबिटिक मैक्यूलर एडिमा सबसे आम कारण है जिससे डायबिटिक रेटिनोपैथी से पीड़ित रोगी दृष्टि में परिवर्तन को महसूस करते हैं। हालांकि डायबिटिक मैक्यूलर एडिमा डायबिटिक रेटिनोपैथी के किसी भी चरण में हो सकता है, लेकिन इसके बढ़ने से डायबिटिक रेटिनोपैथी के बदतर होने की संभावना बढ़ जाती है।

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गंभीर नॉनप्रोलिफेरेटिव रेटिनोपैथी (Severe Nonproliferative Retinopathy)

डायबिटिक रेटिनोपैथी स्टेजेस की तीसरी स्टेज है गंभीर नॉनप्रोलिफेरेटिव रेटिनोपैथी। इस स्टेज में आंख को पोषण देने वाले ब्लड वेसल की बढ़ती संख्या अवरुद्ध हो जाती है। जिससे रेटिना के कई क्षेत्र को उनकी रक्त आपूर्ति से वंचित रह जाते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि रेटिना को नए रक्त वेसल्स बढ़ने का संकेत दिया जाता है। इसके साथ ही रेटिना के ये क्षेत्र पोषण के लिए नए ब्लड वेसल्स को बढ़ाने के लिए शरीर में संकेत भेजते हैं। अगर यह ब्लड वेसल पूरी तरह से बंद हो जाते हैं, तो इसे मैक्यूलर इस्किमिया कहा जाता है। इस स्थिति में काले धब्बों के साथ दृष्टि धुंधली हो सकती है।

अगर कोई व्यक्ति इस स्टेज तक पहुंच गया है, तो इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि वो अपनी दृष्टि दे। हालांकि, सही उपचार दृष्टि के नुकसान को रोकने में सक्षम हो सकता है। लेकिन, अगर  आप पहले से ही दृष्टि खो चुके हैं, तो इसके वापस आने की संभावना कम या न के बराबर होती है।

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प्रोलिफेरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी (Proliferative Diabetic Retinopathy)

डायबिटिक रेटिनोपैथी स्टेजेस की यह चौथी स्टेज एक एडवांस स्टेज है, जिसमें पोषण के लिए रेटिना द्वारा भेजे गए संकेत नए ब्लड वेसलस के विकास को गति प्रदान करते हैं। ये नए ब्लड वेसल असामान्य और नाजुक होते हैं। यह रेटिना और स्पष्ट विटेरस जेल की सतह के साथ बढ़ते हैं, जो आंख के अंदर की खली जगह को भरते हैं। क्योंकि ये ब्लड वेसल नाजुक होते हैं, इसलिए इनमें रिसाव या खून बहना भी शुरू हो सकता हैं। नतीजतन, स्कार टिश्यू बन सकता है, और रेटिना भी अलग हो सकता है। अगर रेटिना अलग हो जाता है तो दृष्टि में धब्बे आना, अचानक तेज रोशनी दिखना या बिलकुल भी दिखाई न देना जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

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डायबिटिक रेटिनोपैथी से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

डायबिटिक रेटिनोपैथी को रोकने का सबसे बेहतरीन तरीका है। अपनी डायबिटीज को नियंत्रित रखना चाहिए। इसका अर्थ है कि आपको अपने ब्लड शुगर लेवल को सामान्य रखना चाहिए। यह तरीका केवल डायबिटिक रेटिनोपैथी ही नहीं बल्कि कई अन्य समस्याओं को दूर करने में भी प्रभावी है। ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए आप यह उपाय अपनाएं:

  • ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए अपने खाने-पीने का खास ध्यान रखें। इसके लिए आप डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं।
  • शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान दें। नियमित रूप से व्यायाम, योग या ध्यान करें। कम से कम दिन में तीस मिनट निकाल कर सैर अवश्य करें।
  • तनाव और डिप्रेशन से बचे।और अपनी नींद भी पूरी करें।
  • अगर आपका वजन अधिक है तो उसे कम करें। वजन कम करने के लिए भी आप अपने डॉक्टर या किसी विशेषज्ञ की मदद ले सकते हैं। 
  • डॉक्टर के बताएं अनुसार इंसुलिन और डायबिटीज की दवाईयां नियमित रूप से लें।
  • नियमित रूप से अपनी आंखों की जांच कराएं

अगर आपको डायबिटीज के साथ-साथ हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल भी है। तो इससे आप में डायबिटीज रेटिनोपैथी का जोखिम अधिक बढ़ सकता है। ऐसे में ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करके आप अपनी आंखों की समस्या का जोखिम कम कर सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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