थायरॉइडाइटिस (thyroiditis) क्या है?

By Medically reviewed by Dr. Pooja Bhardwaj

कितना सामान्य है थायरॉइडाइटिस?

जब थायराइॅड ग्रंथि में समस्या होने से उसमें सूजन आ जाती है, तो उसे थायरॉइडाइटिस कहते हैं। थायारॉइड ग्रंथि हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने के साथ-साथ कई जरूरी काम करती है। इसमें सूजन आने से थायरॉइड बढ़ सकता है जिसे (hyperthyroidism) कहते हैं या कम हो सकता है जिसे (hypothyroidism) कहते हैं। सबसे सामान्य थायरॉइडाइटिस है थायरॉइड हैशीमोटो की समस्या। ये बीमारी हर उम्रवर्ग के लोगों को हो सकती है। हालांकि, पुरुषों से ज्यादा यह महिलाओं में ज्यादा होती है। महिलाओं में इसके होने की संभावना 10 गुना अधिक होती है।

जानें क्या हैं थायरॉइडाइटिस के लक्षण?

थायरॉइडाइटिस के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि बीमारी किस हद तक बढ़ चुकी है। शुरुआती अवस्था में थायरॉइड ग्रंथि में सूजन, कभी-कभी दर्द, कसवाट, आंख और मुंह सूखना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

वहीं इसके लक्षण हायपरथायरोडिज्म की लक्षणों से भी मिलते-जुलते हैं। जैसे वजन और भूख में कमी, दस्त, असामान्य पीरियड्स, दिल की धड़कन तेज होना, चिंता आदि।

नोट- उपरोक्त के अलावा कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। अगर आपको लक्षणों को लेकर कोई संशय है तो कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें।

कब मिलें डॉक्टर से?

थायरॉइड ग्रंथि हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म के साथ कई जरूरी गतिविधियों को नियंत्रित करती है ऐसे में आपको डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए जब –

– कोई महिला मां बनने वाली हो, स्तनपान करना शुरू कर रही हो या मां बनने की तैयारी कर रही हो।

– आपके सीने में दर्द हो या किसी थायरॉइड थेरेपी की वजह से दिल की धड़कन असमान्य हो जाए।

– अचानक तेज बुखार और तबियत बिगड़ जाए

– ट्रीटमेंट के बावजूद आप थका हुआ महसूस करते हों

किस वजह से होता है थायरॉइडाइटिस?

– यूं तो थायरॉइडाइटिस होने के कई कारण हैं हालांकि सबसे प्रमुख कारण है जब हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक प्रणाली हमारे थायरॉइड सेल्स और ग्रंथि पर हमला कर देती है। डॉक्टर्स आजतक इस बात का पता नहीं कर सके हैं कि हमारी रोगप्रतिरोधक प्रणाली थायरॉइड ग्रंथि पर क्यों हमला करती है। कुछ वैज्ञानिकों का मत है इसके पीछे कुछ वायरस और बैक्टीरिया हो सकते हैं, वहीं कुछ इसे अनुवांशिक मानते हैं।

किन लोगों को होता है थायरॉइडाइटिस का खतरा?

लिंग : महिलाएं हैशीमोटो थायरॉइडाइटिस Hashimoto’s thyroiditis का ज्यादा शिकार होती हैं।

उम्र : हैशीमोटो थायरॉइडाइटिस  किसी भी उम्र में हो सकता है पर अधेड़ उम्र के लोगों को ज्यादा खतरा होता है7

अनुवांशिक:  अगर आपके परिवार में किसी को इस तरह की बीमारी है, तो आप भी खतरे में हैं।

कैसे थायरॉइडाइटिस का पता चलता है?

डॉक्टर्स सबसे पहले शारीरिक जांच करने के बाद खून में शुगर की मात्रा की जांच करते हैं। इन जांचों में थायरॉइड उत्तेजक हार्मोन (TSH) और थायरॉइड एंटीबॉडीज का स्तर देखा जाता है। इसके अलावा रेडियोएक्टिव आयोडीन एब्सॉर्पशन (Raiu) नामक स्कैन भी किया जाता है।

हार्मोन्स की जांच : इसके अलावा थायरॉइड और पीयूष ग्रंथि द्वारा बनाए जाने वाले हार्मोन्स की जांच भी ब्लड टेस्ट के माध्यम से की जाती है।

एंटीबॉडीज टेस्ट : क्योंकि हैशीमोटो डिसीज एक ऑटोइम्यून  डिसॉर्डर है इसलिए खून की जांच में असमान्य एंटीबॉडीज का स्तर भी देखा जात है। डॉक्टर थायरॉइड पेरॉक्साइड नामक एंटीबॉडी की जांच भी करते हैं।

कैसे होता है थायरॉइडाइटिस का इलाज?

थायरॉइड हार्मोन के मामले में इलाज जिंदगीभर तक चलता है।  हैशीमोटो से प्रभावित लोगों को लीवोथायरॉक्सिन levothyroxine नामक हार्मोन दिया जाता है जिससे कम हुए हार्मोन की भरपाई की जा सके। वहीं, साइलेंट थायरॉइडाइटिस कई बार अपने-आप या कुछ दवाईयों से ही ठीक हो जाता है।

थायरॉइडाइटिस ठीक करने के लिए जीवनशैली में करें ये बदलाव

– थायरॉइडाइटिस में बदलाव होते रहते हैं। कई बार ये हायपरथायरोडिज्म से हायपोथायरोडिज्म में बदल सकता है। ऐसे में बार-बार डॉक्टर से चेकअप कराएं।

– अपने थायरॉइड के बारे में जानें, वो किस प्रकार का है और उसके अनुरूप जीवन जिएं।

– थायरॉइड की दवाईं गलती से भी न भूलें।

अगर आपको अपनी समस्या को लेकर कोई सवाल हैं, तो कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श लेना ना भूलें।

हैलो हेल्थ ग्रुप Hello Health Group किसी भी तरह के चिकित्सा परामर्श और इलाज नहीं देता है।

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रिव्यू की तारीख अगस्त 6, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया अगस्त 6, 2019

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