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थायरॉइडाइटिस (thyroiditis) क्या है?

थायरॉइडाइटिस (thyroiditis) क्या है?
कितना सामान्य है थायरॉइडाइटिस?|जानें क्या हैं थायरॉइडाइटिस के लक्षण?|कब मिलें डॉक्टर से?|किस वजह से होता है थायरॉइडाइटिस?|किन लोगों को होता है थायरॉइडाइटिस का खतरा?|कैसे थायरॉइडाइटिस का पता चलता है?|थायरॉइडाइटिस ठीक करने के लिए जीवनशैली में करें ये बदलाव

कितना सामान्य है थायरॉइडाइटिस?

जब थायराइॅड ग्रंथि में समस्या होने से उसमें सूजन आ जाती है, तो उसे थायरॉइडाइटिस कहते हैं। थायारॉइड ग्रंथि हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने के साथ-साथ कई जरूरी काम करती है। इसमें सूजन आने से थायरॉइड बढ़ सकता है जिसे हायपरोइडिज्म (hyperthyroidism) कहते हैं या कम हो सकता है जिसे हायपोथायरोडिज्म (hypothyroidism) कहते हैं। सबसे सामान्य थायरॉइडाइटिस है थायरॉइड हैशीमोटो की समस्या। ये बीमारी हर उम्रवर्ग के लोगों को हो सकती है। हालांकि, पुरुषों से ज्यादा यह महिलाओं में ज्यादा होती है। महिलाओं में इसके होने की संभावना 10 गुना अधिक होती है।

जानें क्या हैं थायरॉइडाइटिस के लक्षण?

थायरॉइडाइटिस के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि बीमारी किस हद तक बढ़ चुकी है। शुरुआती अवस्था में थायरॉइड ग्रंथि में सूजन, कभी-कभी दर्द, कसवाट, आंख और मुंह सूखना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

वहीं इसके लक्षण हायपरथायरोडिज्म की लक्षणों से भी मिलते-जुलते हैं। जैसे वजन और भूख में कमी, दस्त, असामान्य पीरियड्स, दिल की धड़कन तेज होना, चिंता आदि।

नोट- उपरोक्त के अलावा कई अन्य लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। अगर आपको लक्षणों को लेकर कोई संशय है तो कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें।

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कब मिलें डॉक्टर से?

थायरॉइड ग्रंथि हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म के साथ कई जरूरी गतिविधियों को नियंत्रित करती है ऐसे में आपको डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए जब –

– कोई महिला मां बनने वाली हो, स्तनपान करना शुरू कर रही हो या मां बनने की तैयारी कर रही हो।

– आपके सीने में दर्द हो या किसी थायरॉइड थेरेपी की वजह से दिल की धड़कन असमान्य हो जाए।

– अचानक तेज बुखार और तबियत बिगड़ जाए

– ट्रीटमेंट के बावजूद आप थका हुआ महसूस करते हों

किस वजह से होता है थायरॉइडाइटिस?

– यूं तो थायरॉइडाइटिस होने के कई कारण हैं हालांकि सबसे प्रमुख कारण है जब हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक प्रणाली हमारे थायरॉइड सेल्स और ग्रंथि पर हमला कर देती है। डॉक्टर्स आजतक इस बात का पता नहीं कर सके हैं कि हमारी रोगप्रतिरोधक प्रणाली थायरॉइड ग्रंथि पर क्यों हमला करती है। कुछ वैज्ञानिकों का मत है इसके पीछे कुछ वायरस और बैक्टीरिया हो सकते हैं, वहीं कुछ इसे अनुवांशिक मानते हैं।

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किन लोगों को होता है थायरॉइडाइटिस का खतरा?

लिंग : महिलाएं हैशीमोटो थायरॉइडाइटिस Hashimoto’s thyroiditis का ज्यादा शिकार होती हैं।

उम्र : हैशीमोटो थायरॉइडाइटिस किसी भी उम्र में हो सकता है पर अधेड़ उम्र के लोगों को ज्यादा खतरा होता है7

अनुवांशिक: अगर आपके परिवार में किसी को इस तरह की बीमारी है, तो आप भी खतरे में हैं।

कैसे थायरॉइडाइटिस का पता चलता है?

डॉक्टर्स सबसे पहले शारीरिक जांच करने के बाद खून में शुगर की मात्रा की जांच करते हैं। इन जांचों में थायरॉइड उत्तेजक हार्मोन (TSH) और थायरॉइड एंटीबॉडीज का स्तर देखा जाता है। इसके अलावा रेडियोएक्टिव आयोडीन एब्सॉर्पशन (Raiu) नामक स्कैन भी किया जाता है।

हॉर्मोन्स की जांच : इसके अलावा थायरॉइड और पीयूष ग्रंथि द्वारा बनाए जाने वाले हॉर्मोन्स की जांच भी ब्लड टेस्ट के माध्यम से की जाती है।

एंटीबॉडीज टेस्ट : क्योंकि हैशीमोटो डिसीज एक ऑटोइम्यून डिसॉर्डर है इसलिए खून की जांच में असमान्य एंटीबॉडीज का स्तर भी देखा जात है। डॉक्टर थायरॉइड पेरॉक्साइड नामक एंटीबॉडी की जांच भी करते हैं।

कैसे होता है थायरॉइडाइटिस का इलाज?

थायरॉइड हार्मोन के मामले में इलाज जिंदगीभर तक चलता है। हैशीमोटो से प्रभावित लोगों को लीवोथायरॉक्सिन levothyroxine नामक हॉर्मोन दिया जाता है, जिससे कम हुए हॉर्मोन की भरपाई की जा सके। वहीं, साइलेंट थायरॉइडाइटिस कई बार अपने-आप या कुछ दवाईयों से ही ठीक हो जाता है।

यह भी पढ़ें : Aldosterone Test : एल्डोस्टेरोन टेस्ट क्या है?

थायरॉइडाइटिस ठीक करने के लिए जीवनशैली में करें ये बदलाव

– थायरॉइडाइटिस में बदलाव होते रहते हैं। कई बार ये हायपरथायरोडिज्म से हायपोथायरोडिज्म में बदल सकता है। ऐसे में बार-बार डॉक्टर से चेकअप कराएं।

– अपने थायरॉइड के बारे में जानें, वो किस प्रकार का है और उसके अनुरूप जीवन जिएं।

– थायरॉइड की दवाईं गलती से भी न भूलें।

हाइपरथायरॉडिज्म में परहेज

इसमें थायराइॅड ग्लैंड बहुत ज्यादा सक्रिय हो जाती है। T3, T4 हॉर्मोन जरूरत से ज्यादा मात्रा में निकलकर ब्लड में घुलने लगते हैं। इस हालत में शरीर का वजन अचानक कम हो जाता है। मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, भूख ज्यादा लगती है, ठीक से नींद नहीं आती है और स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। डॉक्टरों की मानें तो कुछ खास चीजों को खाने से थाइरॉइड (हाइपरथायरॉडिज्म) बढ़ जाता है। ऐसे में यह जान लेना जरूरी है कि हाइपरथायरॉडिज्म के दौरान किन चीजें को खाने से परहेज करना चाहिए।

आयोडीन वाला खाना: थायरॉइड ग्रंथियां हमारे शरीर से आयोडीन लेकर थायरॉइड हार्मोन पैदा करती हैं इसलिए, हाइपरथायरॉडिज्म है तो आयोडीन की अधिकता वाली खाने-पीने की चीजों से दूरी बनाए रखें। सी-फूड और आयोडीन वाले नमक को पूरी तरह नजरअंदाज करें।

शुगर फूड: हाइपरथायरॉडिज्म से ग्रस्त लोगों को गन्ना, हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इनमें मौजूद कैलोरी और शुगर से ब्लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। हाई ब्लड प्रेशर, हाइपर थायरॉइड वालों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। सॉफ्ट ड्रिंक, पैन केक, जैम/जेली, कुकीज, केक, पेस्ट्रीज, कैंडीज आदि का सेवन न करें।

नमक: नमक से थायरॉइड ग्रंथि ज्यादा प्रभावित होती है इसलिए, हाइपरथायरॉडिज्म से ग्रसित लोगों को ज्यादा नमक का खाना नजरअंदाज करना चाहिए। समुद्री शैवाल, कैल्प और कोई सी-फूड न लें। जिन खाद्य पदार्थों में आयोडीन ज्यादा होता है, हाइपरथायरॉडिज्म से ग्रसित लोगों को ऐसो चीज का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

फैटी मिल्क: हाइपरथायरॉडिज्म में शुद्ध दूध का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसको डाइजेस्ट करना मुश्किल होता है। मलाई या क्रीम निकाला हुआ दूध लें जो कि पचाने में आसान और स्वास्थ्यकर होता है।

कॉफी: कॉफी को भी नजरअंदाज करना चाहिए। इनसे थाइरॉक्सिन ज्यादा पैदा होता है। यदि आप पहले से ही हाइपरथायरॉडिज्म से पीड़ित हैं तो आपको कॉफी, शुगर और अन्य उत्तेजक पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। इनकी बजाय आप पानी और फ्रूट जूस ले सकते हैं।

रेड मीट: रेड मीट में कोलेस्ट्रॉल और फैट की अधिकता होती है इसलिए हाइपरथायरॉडिज्म में इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इससे दिल की बीमारियां और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा रहता है। इसकी मात्रा कम करने से हाइपरथायरॉडिज्म के लक्षण भी कम होते हैं।

एल्कोहॉल: एल्कोहॉल यानी शराब, बियर आदि का प्रभाव शरीर के एनर्जी लेवल पर बुरा पड़ता है। इससे थायरॉइड ग्रस्त लोगों की नींद में दिक्कत की शिकायत और बढ़ जाती है।

अगर आपको अपनी समस्या को लेकर कोई सवाल हैं, तो कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श लेना ना भूलें।

हैलो हेल्थ ग्रुप Hello Health Group किसी भी तरह के चिकित्सा परामर्श और इलाज नहीं देता है।

और पढ़ें : Albumin Test : एल्बुमिन टेस्ट क्या है?

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Hashimoto’s thyroiditis: What you need to know – https://www.medicalnewstoday.com/articles/266780.php – accessed on 07/01/2020

What Is Hashimoto’s Thyroiditis? – https://www.everydayhealth.com/hashimotos-thyroiditis/guide/ – accessed on 07/01/2020

Hashimoto’s Thyroiditis Directory – https://www.webmd.com/women/hashimotos-thyroiditis-directory – accessed on 07/01/2020

Hashimoto’s disease – https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/hashimotos-disease/symptoms-causes/syc-20351855 – accessed on 07/01/2020

 

 

 

लेखक की तस्वीर
Dr. Pooja Bhardwaj के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Piyush Singh Rajput द्वारा लिखित
अपडेटेड 10/07/2019
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