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Hypoparathyroidism : हायपोपैराथायराॅइडिज्म क्या है?

परिचय |लक्षण |कारण |जोखिम |उपचार |घरेलू उपचार
Hypoparathyroidism : हायपोपैराथायराॅइडिज्म क्या है?

परिचय

हायपोपैराथायराॅइडिज्म (Hypoparathyroidism) क्या है?

हायपोपैराथायराॅइडिज्म एक असामान्य बीमारी है जिसमें गले में स्थित मटर के आकार की थायराॅइड ग्रंथि में बहुत कम मात्रा में पैराथॉयराॅइड हार्मोन (पीटीएच) बनता है। यह पीटीएच हमारे शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस के स्तर को बैलेंस करने के लिए आवश्यक भूमिका निभाता है। शरीर में पैराथायरायड में पीटीएच कम मात्रा में बनने से शरीर और हड्डियों में असामान्य रूप से कैल्शियम की कमी होती जाती है, साथ ही रक्त में फास्फोरस की मात्रा बढ़ जाती है।

हमारा शरीर तंत्रिकाओं, मांसपेशियों और हृदय को काम करने के लिए कैल्शियम भेजता है। हायपोपैराथायराॅइडिज्म के कारण कैल्शियम का स्तर घटने से मांसपेशियों में ऐंठन, झुनझुनी, हृदय रोग होने के साथ ही व्यक्ति को दौरा भी पड़ सकता है। हालांकि सप्लिमेंट्स से कैल्शियम और फास्फोरस के स्तर को सामान्य बनाकर इस बीमारी का इलाज किया जा सकता है। अगर समस्या जल्दी बढ़ जाती है तो आपके लिए गंभीर स्थिति बन सकती है । इसलिए इसका समय रहते इलाज बहुत जरूरी है। इसके भी कुछ लक्षण होते हैं ,जिसे ध्यान देने पर आप इसकी शुरूआती स्थिति को समझ सकते हैं।

कितना सामान्य है हायपोपैराथायराॅइडिज्म (Hypoparathyroidism) होना?

हाइपो पैराथायरायडिज्म एक गंभीर बीमारी है। ये महिला और पुरुष दोनों में सामान प्रभाव डालता है। पूरी दुनिया में लाखों लोग हायपोपैराथायराॅइडिज्म से पीड़ित हैं। यह बीमारी किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है। इस बीमारी का प्रभाव बच्चों और महिलाओं में अधिक देखा गया है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में इस बीमारी के शुरूआती लक्षण कम दिखायी देते हैं, समय के साथ पैरा थायरायड ग्रंथि बड़ी हो जाती है। हायपोपैराथायराॅइडिज्म के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

ये भी पढ़ें : थायरॉइड और वजन में क्या है कनेक्शन? ऐसे करें वेट कम

लक्षण

हायपोपैराथायराॅइडिज्म के क्या लक्षण है? (Hypoparathyroidism Symptoms)

हाइपो पैराथायरायडिज्म शरीर के कई सिस्टम को प्रभावित करता है। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में कैल्शियम की कमी होने के कारण ये लक्षण सामने आने लगते हैं :

कभी-कभी कुछ लोगों में इसमें से कोई भी लक्षण शुरूवाती समय में सामने नहीं आते हैं और अचानक से कुछ समय के लिए दौरे पड़ने लगते है।

हाइपो पैराथायरायडिज्म से पीड़ित बच्चों में ये लक्षण सामने आते हैं :

हाइपो पैराथायरायडिज्म से पीड़ित व्यक्ति को मोतियाबिंद और चक्कर आने की समस्या भी हो सकती है।

हायपोथायरॉइडिज्म

मुझे डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

ऊपर बताएं गए लक्षणों में कोई भी लक्षण के सामने आने के बाद आप डॉक्टर से मिलें। हर किसी के शरीर पर हायपोपैराथायराॅइडिज्म अलग प्रभाव डाल सकता है। यदि इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को दौरा पड़ता हो या सांस लेने में तकलीफ हो तो ये हाइपो पैराथायरायडिज्म के गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है। इसलिए किसी भी परिस्थिति के लिए आप डॉक्टर से बात कर लें।

और पढ़ें : अस्थमा के लिए ज़िम्मेदार हो सकती हैं ये चीजें

कारण

हायपोपैराथायराॅइडिज्म होने के क्या कारण हैं? (Hypoparathyroidism Causes)

हायपोपैराथायराॅइडिज्म तब होता है जब पैराथायरायड ग्लैंड पर्याप्त मात्रा में पैराथायरायड हाॅर्मोन स्रावित नहीं करता है। गले में थायरायड ग्रंथि के पीछे चार छोटी पैराथायरायड ग्रंथि मौजूद होती है जो हार्मोन को स्रावित करने में मदद करती है। हाइपो पैराथायराडयिज्म निम्न कारणों से होता है :

1.रक्त में मैग्नीशियम का सामान्य स्तर पैराथायरायड हार्मोन को स्रावित करने में मदद करता है। मैग्नीशियम की मात्रा कम होने पर पैराथायरायड ग्रंथि के कार्य प्रभावित होते हैं और हायपोपैराथायराॅइडिज्म की समस्या हो जाती है।

2.पैराथायरायड ग्रंथि अचानक डैमेज होने या सर्जरी से बाहर निकाल दिए जाने के कारण भी हाइपो पैराथायरायडिज्म हो सकता है।

3.किसी व्यक्ति में जन्म से ही पैराथायरायड ग्रंथि का अभाव होता है या ग्रंथि सही तरीके से काम नहीं करती है। इसके अलावा हार्मोन उत्पन्न करने वाली अन्य ग्रंथियों की कमी के कारण भी हाइपो पैराथायरायडिज्म हो सकता है।

4.चेहरे और गर्दन का कैंसर रेडिएशन इलाज कराने से पैरा थायरायड ग्रंथि खराब हो जाती है, जिससे यह बीमारी होती है। इसके अलावा कभी कभी हाइपरथायरायडिज्म का रेडियोएक्टिव आयोडीन ट्रीटमेंट के कारण भी हाइपो पैराथायरायड की समस्या हो सकती है।

इसके अलावा ऑटोइम्यून डिजीज और जेनेटिक डिसऑर्डर के कारण भी हायपोपैराथायराॅइडिज्म की समस्या हो सकती है।

और पढ़ें : जानें ऑटोइम्यून बीमारी क्या है और इससे होने वाली 7 खतरनाक लाइलाज बीमारियां

जोखिम

हायपोपैराथायराॅइडिज्म के साथ मुझे क्या समस्याएं हो सकती हैं? (Hypoparathyroidism Complications)

हाइपो पैराथायरायडिज्म होने पर शरीर में कैल्शियम का स्तर घट जाता है जिससे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इस बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के हाथ की उंगलियों में ऐंठन और दर्द होता है। साथ ही सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। हाइपो पैराथायराडिज्म के कारण किडनी खराब हो सकती है और हार्ट फेल हो सकता है।

यह बीमारी बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को भी प्रभावित करती है। कभी-कभी व्यक्ति अचेत हो जाता है और उसे दौरे पड़ने शुरू हो जाते हैं। इसके अलावा मस्तिष्क में कैल्शियम जमा हो सकता है जिसके कारण बच्चा बेहोश भी हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

उपचार

यहां प्रदान की गई जानकारी को किसी भी मेडिकल सलाह के रूप ना समझें। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

हायपोपैराथायराॅइडिज्म का निदान कैसे किया जाता है? (Hypoparathyroidism Diagnosis)

हाइपो पैराथायरायड का पता लगाने के लिए डॉक्टर शरीर की जांच करते हैं और मरीज का पारिवारिक इतिहास भी देखते हैं। इस बीमारी को जानने के लिए कुछ टेस्ट कराए जाते हैं :

  • रक्त में कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम और पीटीएच का स्तर पता करने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है।
  • यूरिन में कैल्शियम की अतिरिक्त मात्रा पता करने के लिए मरीज को यूरिन टेस्ट कराना पड़ता है।
  • हृदय में इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी जानने के लिए इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईकेजी) टेस्ट किया जाता है।
  • यदि कैल्शियम की कमी से हड्डियां प्रभावित हो रही हों तो इसके लिए मरीज को एक्सरे और बोन डेंसिटी टेस्ट कराना पड़ता है।

बच्चों में हाइपो पैराथायरायड का पता लगाने के लिए डॉक्टर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास, दांतों के असामान्य विकास एवं दांत कमजोर होने की समस्या की जांच करते हैं। हालांकि बच्चों में इस बीमारी का पता लगाने में काफी समय लगता है।

जरूरत पड़ने पर डॉक्टर परिवार के अन्य सदस्यों में भी हाइपो पैराथायरायड की पुष्टि के लिए कुछ अन्य जांच करते हैं। इससे ये पता चलता है कि भविष्य में परिवार के और कौन लोग इस बीमारी के शिकार होंगे।

हायपोपैराथायराॅइडिज्म का इलाज कैसे होता है? (Hypoparathyroidism Treatment)

हाइपो पैराथायरायड के इलाज के कई विकल्प मौजूद हैं। इस बीमारी के इलाज का मुख्य उद्देश्य शरीर में कैल्शियम और खनिजों के उचित स्तर को बेहतर बनाना होता है। विल्सन डिजीज के लिए तीन तरह की मेडिकेशन की जाती है :

  1. सबसे पहले ब्लड में कैल्शियम के स्तर को बढ़ाने के लिए कैल्शियम कार्बोनेट की टैबलेट दी जाती है।
  2. शरीर में कैल्शियम की मात्रा को अवशोषित करने और फास्फोरस को खत्म करने के लिए विटामिन डी की उच्च खुराक कैल्किट्रॉयल) के रुप में दी जाती है।
  3. हाइपो पैराथायरायड की समस्या को कम करने के लिए पैराथायरायड हार्मोन के रुप में Natpara नाम की दवा दी जाती है। इस दवा का इंजेक्शन रोजाना दिन में एक बार लगवाना पड़ता है। इससे भविष्य में अस्थि कैंसर (ऑस्टियोसारकोमा) से बचाव होता है।

इसके अलावा मांसपेशियों में दर्द को कम करने के लिए कैल्शियम का इंजेक्शन दिया जाता है। यह हाइपो पैराथायरायडिज्म के लक्षणों को कम करके कैल्शियम को सीधे ब्लडस्ट्रीम में पहुंचाता है। साथ ही डॉक्टर डाइयूरेटिक भी लेने की सलाह देते हैं ताकि यूरिन से कैल्शियम की मात्रा को बाहर निकलने से रोका जा सके।

और पढ़ें: Thyroid Nodules : थायरॉइड नोड्यूल क्या है?

घरेलू उपचार

जीवनशैली में होने वाले बदलाव क्या हैं, जो मुझे हायपोपैराथायराॅइडिज्म (Hypoparathyroidism) को ठीक करने में मदद कर सकते हैं?

अगर आपको हाइपो पैराथायरायडिज्म है तो आपके डॉक्टर वह आहार बताएंगे जिसमें बहुत ही अधिक मात्रा में कैल्शियम और कम मात्रा में फास्फोरस पाया जाता हो। इसके साथ ही रोजाना 7 से 8 गिलास पानी पीने से भी शरीर में पोषक तत्वों बने रहते हैं और हाइपो पैराथायरायडिज्म के लक्षण कम होते हैं। वहीं, ऐसी मल्टीविटामिन्स का सेवन न करें, जिसमें फासफोरस की मात्रा पाई जाती हो। दिए गए निम्न फूड्स में कैल्शियम की अधिक मात्रा पाई जाती है:

  • बीन्स
  • बादाम
  • गहरे हरे रंग की पत्तेदार सब्जियां
  • डेयरी प्रोडक्ट
  • संतरे का जूस
  • ओट्स
  • खुबानी
  • आलूबुखारा

युक्त फूड्स शरीर में कैल्शियम के स्तर को कम करते हैं इसलिए ऐसे फूड्स से परहेज करना चाहिए। सॉफ्ट ड्रिंक, अंडा, रेड मीट, ब्रेड, पास्ता, कॉफी, एल्कोहल, तंबाकू आदि में अधिक मात्रा में फास्फोरस पाया जाता है। इन फूड्स का सेवन न करने से हाइपो पैराथायरायडिज्म के लक्षण घटते हैं। बच्चों को हाइपोथायरायडिज्म से बचाने के लिए समय समय पर दांतों की जांच करानी चाहिए और पोषक तत्वों से भरपूर आहार देना चाहिए।

इसके अलावा कम तनाव, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त फिजिकल एक्टिविटी और एक अच्छी जीवनशैली अपनाने से हाइपो पैराथायरायडिज्म के लक्षण काफी हद तक कम हो जाते हैं।अपनी डायड और सप्लीमेंट्स में किसी तरह का बदलाव करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें की आपके शरीर को कितनी मात्रा में पोषक तत्व और विटामिन की जरुरत है। अपनी मर्जी से विटामिन डी के किसी भी सप्लीमेंट का सेवन ना करें।

इस संबंध में आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि आपके स्वास्थ्य की स्थिति देख कर ही डॉक्टर आपको उपचार बता सकते हैं।

और पढ़ें : क्या ग्रीन-टी या कॉफी थायरॉइड पेशेंट्स के लिए फायदेमंद हो सकती है?

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Hypoparathyroidism https://medlineplus.gov/ency/article/000385.htm Accessed 19 March, 2020

Hypoparathyroidism  https://www.nhs.uk/conditions/hypoparathyroidism/ Accessed 19 March, 2020

Hypoparathyroidism https://www.webmd.com/women/hypoparathyroidism-rare Accessed 19 March, 2020

Hypoparathyroidism https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmed/28857066 Accessed 19 March, 2020

 

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Anoop Singh द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 28/04/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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