Congestive heart failure : कंजेस्टिव हार्ट फेलियर क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

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अपडेट डेट सितम्बर 16, 2020 . 7 मिनट में पढ़ें
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मूल बातों को जानें

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर क्या है ?

हृदय की मांसपेशियों के कमजोर होने की वजह से दिल सही मात्रा में खून पंप करने में सक्षम नहीं रहता, जिसके कारण हार्ट फेलियर होने की सम्भावना बढ़ जाती है। इसके बहुत से हानिकारक प्रभाव भी हो सकते हैं जैसे :

  • हृदय की पम्पिंग क्षमता में गिरावट की वजह से शरीर को सही मात्रा में खून नहीं मिलेगा जिसकी वजह से बहुत सी परेशानियां हो सकती हैं।
  • हृदय में खून बहने के रास्ते में भी रूकावट आएगी, जिसकी वजह से हृदय की वाल्स में ज्यादा दबाव पड़ेगा।
  • हृदय में खिंचाव बढ़ेगा जिससे हृदय सही ढंग से काम कर सके।
  • इस स्थिति में किडनी के काम करने के तरीके में भी बदलाव आएगा। किडनी पर दबाव पड़ने से शरीर में कई जगहों पर सूजन आ जाती है।
  • कंजेस्टिव हार्ट फेलियर हृदय के दो हिस्सों में से किसी एक हिस्से में हो सकता है। ज्यादातर ये हृदय के बाएं हिस्से से शुरू होता है लेकिन सही तरीके से इलाज न होने पर ये दाएं ओर भी फैल सकता है। हार्ट फेलियर एक जानलेवा स्थिति है।

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कंजेस्टिव हार्ट फेलियर के प्रकार क्या है?

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है :

सिस्टोलिक हार्ट फेलियर (Systolic heart failure)

सिस्टोलिक हार्ट फेलियरतब होता है, जब बाईं ओर का निलय यानी कि वेंट्रिकल (ventricle) ब्लड को पंप करने में फेल हो जाता है। जिससे ब्लड दिल से शरीर मे नहीं जा पाता है, इसलिए इसे सिस्टोलिक हार्ट फेलियर कहते हैं।

डायस्टोलिक हार्ट फेलियर (Diastolic heart failure)

डायस्टोलिक हार्ट फेलियर को डायस्टोलिक डिसफंक्शन भी कहते हैं। इसमें बाईं ओर के वेंट्रिकल की मांसपेशियां जकड़ जाती हैं और ब्लड फ्लो बंद हो जाता है। जिससे हार्ट फेल हो जाता है।

हार्ट फेल होने के स्टेजेस कौन से हैं?

हार्ट फेल होने के चार चरण होते हैं :

स्टेज 1 : पहले चरण में आपको हार्ट फेल होने के कोई भी लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। ऐसे में आपको आपको सिर्फ हाई ब्लड प्रेशर और सीने में दर्द की समस्या होती है। कंजेस्टिव हार्ट फेलियर के इस चरण में आप लाइफस्टाइल में बदलाव कर के, दिल की दवाईयां लेकर औररेगुलर बॉडी चेकअप करा के स्वस्थ रह सकते हैं

स्टेज 2 : दूसरे चरण में छाती में परेशानी महसूस होती है और थकान होती है और सांस लेने में परेशानी होती है। जिसके लिए आपको डॉक्टर से मिलना चाहिए और अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव करना चाहिए। इसके अलावा दिल की दवाईयां और नियमित रूप से चेकअप कराना चाहिए।

स्टेज 3 : तीसरे चरण में छाती में दर्द के साथ ही, थकान, सांस लेने में परेशानी और शारीरिक गतिविधि बाधित होती है। इस स्टेज में परेशानियां बढ़ सकती हैं, इसलिए आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और समय रहते ही इलाज कराना चाहिए।

स्टेज 4 : चौथे चरण में छाती में दर्द के साथ किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि नहीं हो पाती है। इस स्टेज में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। ये आखिरी स्टेज मरीज के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसलिए अपने डॉक्टर से सभी तरह के जोखिमों के बारे में समझ लें।

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर होना कितनी आम समस्या है ?

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर वयस्क और बुजुर्गों में होना आम है लेकिन ऐसे बच्चे जिन्हे हृदय से जुड़ी कोई भी समस्या है उनमें भी हार्ट फेलियर हो सकता है।

और पढ़ें : हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट में क्या अंतर है ?

लक्षण

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर के लक्षण क्या है?

हार्ट फेलियर अचानक से नहीं होता इसके होने के संकेत आपको पहले ही मिल जाएंगे और समय रहते अगर हार्ट फेल होने का इलाज हो जाए तो संभवतः आप बच भी सकते हैं। हार्ट फेलियर के कुछ खास लक्षण इस प्रकार हैं :

इसके अलावा भी बहुत से लक्षण हो सकते हैं। और किसी भी सवाल के लिए अपने नजदीकी डॉक्टर से जरूर मिलें। जैसे ही लक्षण दिखाई दें आपको अपने डॉक्टर से मिलना चाहिए। सीने में दर्द होना , सांस उखड़ना , कफ में खून आना, बेहोशी होना, इनमें से किसी भी लक्षण के दिखने पर अपने डॉक्टर से जरूर मिलें।

और पढ़ें : जानें महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों की तुलना में कैसे अलग होते हैं?

कारण

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर के क्या कारण हो सकते हैं ?

हृदय की मांसपेशियों के खराब होने पर कंजेस्टिव हार्ट फेलियर हो सकता है। कुछ ऐसी बीमारियां जिनमें फेलियर होने की संभावना रहती है, जो निम्न हैं :

हाइपरटेंशन : हाइपरटेंशन का मतलब होता है हाई ब्लड प्रेशर, ऐसे में अक्सर देखा गया है कि हाई ब्लड प्रेशर के कारण हार्ट फेल होता है। हाई ब्लड प्रेशर में खून की नसें संकरी होती जाती है, जिससे आपके हार्ट से शरीर में ब्लड फ्लो धीमा हो सकता है। 

कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary artery disease) : कोरोनरी आर्टरी डिजीज में फैट के कारण कोरोनरी धमनी ब्लॉक हो सकती है, जिससे छोटी धमनियां दिल तक खून को पहुंचाती हैं। धमनियों के पतले होने के कापण ही कोरोनरी आर्टरी डिजीज होती है और इस स्थिति में धमनी डैमेज भी हो सकती है।

हार्ट वॉल्व डिजीज

दिन में मौजूद वॉल्व जो ब्लड को एक ही दिशा में भेजने का काम करता है। हार्ट वॉल्व डिजीज में दिल का वॉल्व खुलने बंद होने की प्रक्रिया रूक जाती है। हार्ट वॉल्व फेल होने के लक्षण में बेहोश होना, चक्कर आना, सांस लेने मे परेशानी होना आदि है। जिससे हार्ट फेल हो सकता है।

कार्डिओमायोपैथी

कार्डिओमायोपैथी में दिल में इंफेक्शन हो जाता है, जिसका प्रभाव धमनियों पर भी पड़ता है। दिल में इंफेक्शन का कारण स्मोकिंग और शराब का सेवन करना है। इससे दिल सही तरीके से काम नहीं कर पाता है, जिससे हार्ट फेल जैसी समस्या होती है।

कार्डियक एरिदमिया

कार्डियक एरिदमिया में हार्ट रेट असामान्य हो जाती है, जिससे दिल की धड़कनें काफी तेजी से धड़कती है। इस स्थिति में दिल को अतिरिक्त काम करना होता है, जिससे दिल कमजोर हो सकता है और हार्ट फेलियर हो सकता है।

इसके अलावा कुछ अन्य कारण भी होते हैं, जो निम्न हैं :

और पढ़ें : Heart rhythm disorder (Arrhythmia): हार्ट रिदम डिसऑर्डर क्या है?

जोखिम

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर के रिस्क फैक्टर क्या हैं?

बहुत से लक्षण हार्ट फेलियर के खतरे को बढ़ा सकते हैं जैसे कि :

  • कोरोनरी आर्टरी डिजीज : धमनियों का सकरा हो जाना जिससे कि ऑक्सीजिनेटेड खून हृदय तक नहीं पहुंच पाता और हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है।
  • हार्ट अटैक : हार्ट अटैक होने पर कार्डियक मांसपेशियां खराब हो जाएंगी और सही तरीके से काम नहीं करेंगी।
  • डायबिटीज : डायबिटीज होने पर भी हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ जाएगा और कोरोनरी आर्टरी डिजीज हो सकती है।
  • डायबिटीज की दवाएं : डायबिटीज की दवाएं जैसे कि रेजीग्लीटाजोन (Avandia) और पायोग्लीटाजोन (Actos) की वजह से हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए अपने डॉक्टर से पूछकर आप अपनी दवाएं बदलवा सकते हैं।
  • स्लीप एपनिया : अगर सोते समय आप सही से सांस नहीं ले पा रहे हैं तो भी आपको कंजेस्टिव हार्ट फेलियर हो सकता है।
  • अगर किसी को जन्म से ही हृदय की कोई बीमारी है तो भी आपको कंजेस्टिव हार्ट फेलियर हो सकता है।
  • वॉल्वुलर (valvular disease ) डिजीज के होने पर भी कंजेस्टिव हार्ट फेलियर हो सकता है।
  • संक्रमण : वायरल संक्रमण से भी हृदय रोग हो सकता है और कंजेस्टिव हार्ट फेलियर की संभावना बढ़ जाती है।
  • बहुत अधिक शराब पीने से भी कंजेस्टिव हार्ट फेलियर हो सकता है।
  • स्मोकिंग : बहुत ज्यादा स्मोकिंग करने से भी कंजेस्टिव हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ सकता है।
  • मोटापा : बहुत ज्यादा वजनदार लोगो को भी सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि बढ़ा हुआ वजन कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।
  • असामान्य दिल की धड़कनों की वजह से भी आपको कंजेस्टिव हार्ट फेलियर हो सकता है। हृदय की धड़कनों के बहुत तेज होने पर भी हृदय का काम बढ़ जाता है और हार्ट फेलियर हो सकता है।

और पढ़ें : मधुमेह और हृदय रोग का क्या है संबंध?

निदान और उपचार

यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं है। और अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से जरूर मिलें।

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर की जांच कैसे की जा सकती है ?

शरीर की जांच पर पैरों में सूजन, फेफड़ों में हीड्रोसेफलस ( Hydrocephalus ) देखा जा सकता है।

आगे की जानकारी के लिए डॉक्टर आपकेचेस्ट का एक्स-रे भी करवा सकते हैं जिससे पता लगाया जा सके कि हृदय और फेफड़ों में से कौनसा भाग प्रभावित है। इकोकार्डियोग्राम ( हृदय की साउंड वेव्स से काम करता है ) इससे हृदय के आकार और साइज का भी पता लगाया जा सकता है।

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर का इलाज कैसे किया जा सकता है ?

  • आपकी स्थिति के हिसाब से और आपकी बीमारी के स्टेज के अनुसार डॉक्टर आपका इलाज कर सकते हैं। आमतौर पर दवाओं और सर्जरी की मदद से आपका इलाज किया जा सकता है।

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर के इलाज के लिए बहुत सारी दवाएं हैं जैसे कि :

  • Angiotensin Converting Enzyme Inhibitor सकरी धमनियों को खोलने का काम करती हैं जिससे की खून का बहाव सही ढंग से हो सके। इसके अलावा किसी कारण से एंजियोटेनसिन इन्हीबिटर नहीं ले सकते तो आप वैसोडाइलेटर ले सकते हैं।
  • बीटा ब्लॉकर हाई ब्लड प्रेशर को कम करती है और हृदय की धड़कनों को नियंत्रित रखती है।
  • डाइयूरेटिक्स होने पर शरीर में पानी की कमी हो जाती है। कंजेस्टिव हार्ट फेलियर होने पर आपके शरीर में जरुरत से ज्यादा पानी होगा इसलिए उसे नियंत्रित करना बहुत आवश्यक है।

सर्जरी

अगर दवाएं काम नहीं आ रही है तो आपको सर्जरी भी करवानी पड़ सकती है। सर्जन आपको एंजियोप्लास्टी करवाने क लिए कह सकते हैं या फिर हार्ट वाल्व रिपेयर सर्जरी भी करवाई जा सकती है जिससे की वॉल्वस सही ढंग से खुले और बंद हो।

और पढ़ें : Heart Valve Replacement: हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट क्या है?

जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपचार

जीवनशैली में बदलाव या घरेलू उपचार क्या हैं जो कंजेस्टिव हार्ट फेलियर से बचाव करने में मदद कर सकते हैं?

नीचे बताए गए जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपचार आपको कंजेस्टिव हार्ट फेलियर से निपटने में मदद कर सकते हैं:

  • धूम्रपान बंद करें, धूम्रपान हृदय रोग का महत्त्वपूर्ण कारण है।
  • सेहतमंद खाना खाएं। ज्यादा नमक वाला खाना न खाएं इससे आपके हृदय को ज्यादा काम करना पड़ सकता है। आपके पैर, हाथ, पंजों और कलाइयों में सूजन भी आ सकती है।
  • अगर आपको हार्ट फेलियर का खतरा है तो आप निमोनिया और इन्फ्लुएंजा से बचने के लिए टीकाकरण जरूर करवा लें।
  • शराब न पिएं, अगर आप शराब ज्यादा पीते हैं तो आपकी दवाएं फायदा नहीं करेंगी और आपकी सेहत खराब हो सकती है।
  • डॉक्टर आपको तरल पदार्थ का सेवन एक सीमित मात्रा में ही करने की सलाह देते हैं।
  • तनाव न लें, क्योंकि इस स्थिति में आपके हृदय को जरुरत से ज्यादा काम करना पड़ सकता है जिससे आपके दिल की धड़कन बहुत तेज हो जाएगी।
  • अच्छी नींद लें, अगर आपको सोते समय सांस लेने में परेशानी हो रही है तो तकिये का प्रयोग करें। अगर बहुत खर्राटे आ रहे हैं या कोई और परेशानी हो रही है तो अपना चेक अप करवाए आपको स्लीप एपनिया ( Sleep Apnea ) हो सकता है।

और पढ़ें : हाइपरटेंशन से बचाव के लिए जरूरी है लाइफस्टाइल में ये बदलाव

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर में क्या खाना चाहिए?

कंजेस्टिव हार्ट फेलियर का रिस्क होने पर या हार्ट फेल होने के बाद आपको अपने डायट में बदलाव करने की जरूरत है। आपको निम्न चीजों का सेवन करना चाहिए :

हमें उम्मीद है कि अब आप कंजेस्टिव हार्ट फेलियर के बारे में समझ गए होंगे। इससे बचने के लिए आपको यहां बताई गई बातों को फॉलो करना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।  

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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