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भविष्य में संभव हो सकता है डायबिटीज का इलाज, जानें क्या कहती है रिसर्च

भविष्य में संभव हो सकता है डायबिटीज का इलाज, जानें क्या कहती है रिसर्च

विश्व भर में जहां 46.3 करोड़ से भी ज्यादा लोग डायबिटीज की बीमारी से पीड़ित हो, वहां ये सवाल लाजमी हो जाता है कि क्या डायबिटीज का इलाज संभव है? डायबिटीज का इलाज (Diabetes treatment) कैसे हो सकता है और इसके लिए किए गए प्रयासों के बारे में हाल के बरसों में काफी कुछ लिखा गया है। डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है और डायबिटीज का इलाज ना हो पाने पर हेल्थ को कई सारे रिस्क हो सकते हैं, जैसे- डायबिटीज (Diabetes) की वजह से आंख, किडनी, नर्वस सिस्टम और शरीर के अन्य अंगों में भी समस्या हो सकती है। डायबिटीज का इलाज अभी मिला नहीं है, लेकिन जल्द इसका इलाज इजात करने की उम्मीद है। फिलहाल डॉक्टर और साइंटिस्ट द्वारा किए गए रिसर्च के बारे में बात करते हैं। लेकिन उससे पहले जानते हैं कि डायबिटीज क्या है?

डायबिटीज क्या है और इसके होने का कराण क्या है? (Diabetes & its cause)

डायबिटीज को शुगर या मधुमेह भी कहा जाता है। डायबिटीज में शरीर में मौजूद इंसुलिन हॉर्मोन (Insulin hormone) की मात्रा कम हो जाती है। इंसुलिन एक प्रकार का हॉर्मोन है, जो भोजन को ऊर्जा में बदलने में मदद करता है। डायबिटीज में इंसुलिन का उत्पादन बहुत कम या नहीं होता है। जिससे ऊर्जा की सही मात्रा कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाती। इस वजह से खून में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है। यही कारण है कि डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति हमेशा थकावट का अनुभव करता है।

डायबिटीज के तीन मुख्य प्रकार होते हैं

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और पढें : क्या है डायबिटिक मैकुलर एडिमा, क्यों होती है यह बीमारी, इसके लक्षण, बचाव और ट्रीटमेंट जानने के लिए पढ़ें

डायबिटीज का इलाज (Diabetes treatment) और उससे संबंधित रिसर्च

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अभी कुछ महत्वपूर्ण रिसर्च चल रही हैं, जो कि एक सकारात्मक नतीजे तक पहुंच सकती है, आइए जानते हैं इन रिसर्च के बारे में :

स्टेम सेल (Stem cell) ट्रीटमेंट से डायबिटीज का इलाज

टाइप 1 डायबिटीज में शरीर में इंसुलिन का उत्पादन बंद हो जाता है, जिसका कारण अनुवांशिक या आपकी लाइफस्टाइल हो सकती है। स्टेम सेल थेरिपी में टाइप 1 डायबिटीज के खराब सेल्स को निकाल कर इंसुलिन बनाने वाली सेल्स (पाचनग्रंथि की कोशिकाएं) को शरीर में लगाया जाता है। टाइप 2 डायबिटीज के लिए स्टेम सेल ट्रीटमेंट कारगर नहीं है, लेकिन ये थेरिपी डायबिटीज के लक्षणों को कम कर सकती है। रिसर्च के दौरान किए गए इलाज और उसकी प्रक्रिया में बहुत जटिलताओं का सामना करना पड़ा, इसलिए अभी तक स्टेम सेल थेरिपी डायबिटीज का इलाज करने में सफल नहीं हो पाई है।

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आइलेट सेल ट्रांसप्लांटेशन (Islet cell transplantation) से डायबिटीज का इलाज

आइलेट सेल ट्रांसप्लांटेशन क्या है?

आइलेट सेल ट्रांसप्लांटेशन थेरिपी टाइप 1 डायबिटीज के लिए उपयोगी मानी गई है। आइलेट सेल पाचनग्रंथि में मौजूद होते हैं, जिसमें कई तरह के हॉर्मोन होते हैं। इनमें से एक होता है – बीटा सेल्स जो की इंसुलिन बनाने का काम करती है। जब शरीर में शुगर लेवल बढ़ता है तो शरीर का इम्यून सिस्टम खुद ही लिवर के बीटा सेल्स को नष्ट करने लगता है। ऐसे में टाइप 1 डायबिटीज के मरीज इंसुलिन का डोज लेते हैं। लेकिन टाइप 1 डायबिटीज के सभी मरीजों के लिए ये इंसुलिन डोज कारगर नहीं होती है। ऐसे में जो डायबिटिक लोग हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) से प्रभावित होते हैं, उनमें ये सेल ट्रांसप्लांटेशन (Cell Transplantation) किया जा सकता है।

कैसे होता है आइलेट सेल ट्रांसप्लांटेशन?

आइलेट सेल ट्रांसप्लांटेशन के लिए एंजाइम्स की मदद से आइलेट को मृत व्यक्ति के शरीर के पाचनग्रंथि या लिवर से अलग कर लिया जाता है। इस प्रक्रिया में मरीज के पेट के ऊपरी भाग में चीरा कर के एक पतला ट्यूब लगाया जाता है, जिसे कैथिटर (Catheter) कहते हैं। कैथिटर की मदद से आइलेट्स को धीरे से लिवर में डाला जाता है। दो हफ्ते में नई ब्लड वेसेल्स (Blood vessels) का निर्माण हो जाता है। ये ब्लड वेसेल्स नई लगाई गई आइलेट को बाकि ब्लड वेसल्स से जोड़ देती हैं। जिसके बाद नई आइलेट सेल फिर से इंसुलिन बनाना शुरू कर देती है।

ट्रांसप्लांटेशन के फायदे क्या हैं? (Benefits of Islet cell transplantation)

आइलेट सेल ट्रांसप्लांटेशन के बाद मरीज को निम्न फायदे मिलते हैं :

  • शरीर में ब्लड शुगर लेवल और ग्लूकोज का लेवल का नियंत्रित रहता है
  • इंसुलिन का उपयोग कम हो जाना
  • हाइपोग्लेसीमीया (Hypoglycemia) का रिस्क कम हो जाना

और पढें : डायबिटीज होने पर शरीर में कौन-सी परेशानियाँ होती हैं?

आइलेट सेल ट्रांसप्लांटेशन कितना सफल है?

आइलेट सेल ट्रांसप्लांटेशन अभी फेज 3 क्लीनिकल ट्रायल पर है। नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के द्वारा प्रायोजित किए गए क्लीनिकल आइलेट ट्रांसप्लांटेशन कॉन्सोर्टियम (Clinical Islet Transplantation Consortium) कार्यक्रम के तहत इस पर काम जारी है। फेज 3 क्लीनिकल ट्रायल, में इसे काफी हद तक सफल माना गया है। इस ट्रायल में ये भी पाया गया है कि आइलेट सेल ट्रांसप्लांटेशन के बाद काफी मरीजों को इंसुलिन लेने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

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डायबिटीज को कैसे करें कंट्रोल? (Tips to control Diabetes)

जैसा कि हम देख चुके हैं कि डायबिटीज का इलाज (Diabetes treatment) अभी तक नहीं मिल पाया है, ऐसे में ये जरुरी हो जाता है कि डायबिटीज को नियंत्रित रखा जाए। डायबिटीज के मरीज अपनी लाइफस्टाइल में बदलाव कर के एक सामान्य जीवन जी सकते हैं :

दवाओं (Medication) को सही समय से लेना

खून में ग्लूकोज की सही मात्रा बनाए रखने के लिए ये जरूरी है कि दवाइयां सही समय पर ली जाएं। डॉक्टर खून में मौजूद ग्लूकोज और शुगर लेवल के रिपोर्ट को देख कर उसके अनुसार दवा और डायट बता सकते हैं।

व्यायाम (Workout) करना

व्यायाम वजन कम करने में मदद करता है। ये इंसुलिन में सेंसिटिविटी बढ़ा सकता है। इंसुलिन में सेंसिटिविटी बढ़ने से कोशिकाएं खून में मौजूद शुगर का इस्तेमाल कर पाते हैं। इसके अलावा मांसपेशियां शुगर का इस्तेमाल एक्सरसाइज के दौरान एनर्जी बनाए रखने के लिए करती हैं।

कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate) का सेवन कम मात्रा में करें

कार्बोहाइड्रेट का सेवन ज्यादा मात्रा में करने से खून में शुगर लेवल बढ़ सकता है। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन (American Diabetes Association (ADA) के अनुसार कार्बोहाइड्रेट को नियंत्रण में रखने का सबसे अच्छा तरीका है, कैलोरी की गणना करना। कुछ शोध ये भी कहते हैं कि कैलोरी की गणना से आप अपने डायट (Diet) को सही तरह से प्लान कर सकते हैं।

डायट में फाइबर (Fiber) को शामिल करें

फाइबर पाचन क्रिया के लिए काफी फायदेमंद होता है। फाइबर (Fiber) शरीर में मौजूद ब्लड शुगर लेवल को संतुलित करने में सक्षम होता है। फाइबर का स्रोत हरी सब्जियां, फल, फलियां और अनाज है। इसके साथ ही फाइबर टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) में शुगर को नियंत्रित कर सकता है। लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (LGI) वाला भोजन टाइप 1 डायबिटीज (Type 1 Diabetes) और टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) में शुगर लेवल को कम कर सकते हैं। लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले भोजन में सीफूड, मांस, अंडे, ओट्स, बार्ले, बींस, दाल, शकरकंद, मक्का आदि शामिल है।

और पढें : डायबिटीज का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? जानिए दवा और प्रभाव

पानी (Water) ज्यादा मात्रा पिएं

एक व्यस्क व्यक्ति को दिन में 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए। पानी शरीर से अधिक शुगर को निकाल कर शरीर को स्फूर्ति देता है। एक रिपोर्ट के अनुसार सही मात्रा में पानी पीने वाले लोगों में हाय ब्लड शुगर (High blood sugar) के होने की संभावना बहुत कम होती है।

ज्यादा ना खाएं, छोटे मील्स (Meals) लें

थोड़ी-थोड़ी देर में खाने की आदत डालें। एक साथ ज्यादा खाना खाने से खाना पचने में परेशानी हो सकती है। वहीं, जब खाना थोड़े-थोड़े हिस्सोंं में लेंगे तो पाचन में आसानी होती है। ये आदत वजन को नियंत्रित रखने में भी काफी लाभकारी है।

8 घंटे की नींद (Sleep) लें

अच्छे और स्वस्थ शरीर के लिए अच्छी नींद बहुत ही जरुरी होती है। नींद की कमी होने पर व्यक्ति का ब्लड शुगर प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अच्छी नींद प्रतिरोधक शक्ति को भी बढ़ाने का काम करती है।

डायबिटीज के मरीज के लिए बहुत जरुरी है कि ऊपर बताई गई सारी बातों को नियमित रूप से अपनी दिनचर्या में शामिल करें। साथ ही ये जरुरी है कि डॉक्टर के पास समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच जरूर कराएं, क्योंकि डायबिटीज का इलाज (Diabetes treatment) नहीं है लेकिन एहतियात तो है। इस विषय में अधिक जानकारी के लिए आपअपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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बीएमआई कैलक्युलेटर

अपने बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की जांच करने के लिए इस कैलक्युलेटर का उपयोग करें और पता करें कि क्या आपका वजन हेल्दी है। आप इस उपकरण का उपयोग अपने बच्चे के बीएमआई की जांच के लिए भी कर सकते हैं।

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महिला

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सूत्र

 

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Mishita sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 18/08/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड