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लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर के क्या होते हैं लक्षण और किन समस्याओं का करना पड़ता है सामना?

लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर के क्या होते हैं लक्षण और किन समस्याओं का करना पड़ता है सामना?

दिल के बारे में आपने बहुत से किस्से सुने होंगे लेकिन क्या दिल के फंक्शन के बारे में आप जानते हैं? भले ही दिल की बातें करना आसान काम हो, लेकिन हमारे शरीर में में दिल का फंक्शन बहुत कॉम्प्लीकेटेड होता है। बिना दिल के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। हार्ट हमारी तरह आठ से 12 घंटे नहीं बल्कि हर पल काम करता है। हार्ट की मसल्स 24/7 ऑक्सीजनेटेड ब्लड को पूरी बॉडी में पहुंचाने का काम करती है। हार्ट फेलियर की समस्या कई कारणों से हो सकती है। हेल्दी लाइफस्टाइल न होना, किसी बीमारी के कारण हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर के लक्षण (Left sided heart failure symptoms) क्या होते हैं, इसके बारे में जानकारी देंगे। जानिए हार्ट फेलियर के लिए कौन-सी कंडीशन जिम्मेदार हो सकती हैं और लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर (Left sided heart failure) के लक्षण क्या होते हैं।

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लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर (left sided heart failure symptoms)

लेफ्ट साइट हार्ट फेलियर सिस्टोलिक (Systolic) या फिर डायस्टोलिक (Diastolic) हो सकता है। सिस्टोलिक (Systolic) हार्ट फेलियर की समस्या तब होती है, जब लेफ्ट वेंट्रिकल पर्याप्त मात्रा में कॉन्ट्रेक्ट नहीं कर पाते हैं। डायस्टोलिक (Diastolic) हार्ट फेलियर की समस्या तब होती है, जब लेफ्ट वेंट्रिकल (Left ventricle) रिलेक्स नहीं कर पाता है और पूरी तरह से भर नहीं पाता है। दोनों ही तरह के लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर (Left sided heart failure) के कारण फेंफड़ों में रक्त न पाने की समस्या पैदा हो जाती है।

लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर एक प्रकार की हार्ट कंडीशन है, जहां हार्ट की बायी ओर की मसल्स की क्षमता कम हो जाती है और हार्ट शरीर को ठीक प्रकार से ब्लड पंप नहीं कर पाता है। लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर (Left sided heart failure) की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। जब इस प्रकार की समस्या होती है, तो ऐसे में हार्ट ऑक्सिजनेटेड ब्लड को लंग्स से हार्ट के लेफ्ट एट्रियम (Left atrium) में, बाएं वेंट्रिकल (Left ventricle) में और शरीर के माध्यम से पंप करने में असमर्थ होता है और हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

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लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर के लक्षण (Left sided heart failure symptoms)

लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर (Left sided heart failure) के लक्षण आमतौर पर नोटिस करना मुश्किल हो सकता है। समय के साथ ही लक्षण दिखने लगते हैं और ये लक्षण बड़ी समस्या भी पैदा कर सकते हैं। अगर आपको लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर (Left sided heart failure) के लक्षण दिखते हैं, तो बिना देरी किए आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए और साथ ही ट्रीटमेंट भी कराना चाहिए। अगर कॉम्प्लीकेशंस की जांच नहीं की जाती है, तो किडनी या फिर लिवर डिजीज और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।

  • रात में सांस की तकलीफ के कारण जागना (Awakening at night with shortness of breath)
  • एक्सरसाइज के दौरान ब्रीथिंग प्रॉब्लम (Shortness of breath during exercise)
  • लंबे समय से खांसी की समस्या (Chronic coughing)
  • कॉन्संट्रेट करने में दिक्कत (Difficulty concentrating)
  • थकान (Fatigue)
  • भूख न लगना (Lack of appetite)
  • अनियमित हार्टबीट ( irregular heartbeat)
  • अचानक से वजन बढ़ना (Sudden weight gain)
  • इंलार्ज्ड हार्ट (Enlarged heart)
  • हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure)
  • हाथ और पैरों में कम खून बहना (Less blood flowing to the arms and legs)

अगर आपको उपरोक्त लक्षण नजर आते हैं, तो इसका मतलब है कि आपको लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर (Left sided heart failure) की समस्या है। ऐसे आपको बीमारी के लक्षणों को इग्नोर करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए और बीमारी का इलाज भी करवाना चाहिए। समय पर बीमारी का ट्रीटमेंट कराकर आप खुद को भविषय में होने वाली गंभीर समस्या से बचाने का काम कर सकते हैं।

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हार्ट डिजीज के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें ये बायो डिजिटल वीडियो

लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर कैसे किया जाता है डायग्नोज? (Diagnosis of Left Side Heart Failure)

लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर (Left sided heart failure) डायग्नोज करने के लिए डॉक्टर पहले आपसे कुछ लक्षणों के बारे में जानकारी लेते हैं और फिर चेस्ट एक्स-रे (Chest X-ray), इकोकार्डियम (Echocardiogram), इलेक्ट्रोकार्डियम (Electrocardiogram), रेडियोन्यूक्वाइड इमेजिंग (Radionuclide imaging), ट्रेडमिल एक्सरसाइज टेस्ट आदि किए जाते हैं। इकोकार्डियम (Echocardiogram) की हेल्प से हार्ट चैम्बर और हार्ट वॉल्व की साउंड वेव के बारे में जानकारी मिलती है। वहीं इलेक्ट्रोकार्डियम (Electrocardiogram) की हेल्प से हार्ट की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी के साथ ही हार्ट डैमेज के बारे में भी जानकारी मिलती है। डॉक्टर टेस्ट की हेल्प से हार्ट रिदम प्रॉब्लम और उससे संबंधित बेहतर ट्रीटमेंट के बारे में जानकारी देते हैं। आप हार्ट स्पेशलिस्ट से लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर (Left sided heart failure) डायग्नोज के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

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लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर के कारण (Causes of left side heart failure)

लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर (Left sided heart failure) के कारणों में कुछ हेल्थ प्रॉब्लम्स शामिल हैं। हार्ट डिजीजी जैसे कि कोरोनरी आर्टरी डिजीज (coronary artery disease) या फिर हार्ट अटैक लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर (Left sided heart failure) का कारण बन सकते हैं। यहां हम आपको अन्य कारणों के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

अगर आप एल्कोहॉल का सेवन अधिक करते हैं या फिर कोकीन का इस्तेमाल करते हैं, तो इसे बंद कर दें। तंम्बाकू के साथ ही अन्य नशीले पदार्थ शरीर को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं। आपको इन्हें छोड़ने में समय लग सकता है लेकिन आप ऐसा कर सकते हैं। साथ ही अगर आपको उपरोक्त दी गई बीमारियों में से कोई हो, तो उसको लइलाज न छोड़ें और ट्रीटमेंट कराएं। ऐसा करने आप हार्ट से होने वाले खतरे को कम कर सकते हैं।

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लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर का ट्रीटमेंट (Left side heart failure treatment)

लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर (Left sided heart failure) के लक्षण दिखते ही डॉक्टर कुछ दवाएं लेने की सलाह देते हैं और साथ ही बेहतरह लाइफस्टाइल अपनाने के लिए भी कहते हैं। डॉक्टर शरीर में पोटैशियम की कमी को पूरा करने के लिए और बीपी को नॉर्मल रखने के लिए मेडिसिंस लेने की सलाह देंगे। साथ ही शरीर में अगर सूजन है, तो उसे भी कम किया जाता है। अगर शरीर में ब्लड क्लॉट जम रहे हैं, तो भी दवाइयों की मदद ली जा सकती है। कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए डॉक्टर दवाओं के साथ ही डायट में चिकनी चीजों को अवॉयड करने की सलाह देते हैं। अगर दवाओं की सहायता से लक्षणों में राहत नहीं मिलती है, तो डॉक्टर सर्जरी कराने की सलाह दे सकते हैं। इसमें डिवाइस इंप्लांट, हार्ट रिपेयर या फिर हार्ट ट्रांसप्लांट (Heart transplant) शामिल हो सकता है। पेसमेकर (Pacemaker) का इस्तेमाल दाएं और बाएं वेंट्रिकल को सामान्य रूप से कॉन्ट्रेक्ट करने में मदद करता है। इस उपकरण को मामूली सर्जरी के दौरान ट्रांसप्लांट किया जाता है।आप इस बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर से बचने के लिए लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव

कार्डियो एक्सरसाइज (cardio exercise), एरोबिक्स एक्सरसाइज, स्ट्रेंथ वर्क आदि को रोजाना अपनी दिनचर्या में शामिल करें। कम शारीरिक काम के कारण शरीर में तेजी से फैट बढ़ने लगता है और दिल की बीमारियां घर करने लगती हैं। साथ ही आपको निम्नलिखित बातों का ध्यान रखने की भी जरूरत है।

डायट प्लान बनाएं और खाने में उन फूड्स को शामिल करें जिनमें फैट कम हो।

  • चिंता या स्ट्रेस कई बीमारियों को दावत देता है, इसलिए इससे बचने की कोशिश करें।
  • देर रात तक काम करने से बचें। आप रोजाना का शेड्यूल तय करें और सुबह जल्दी उठें और जल्दी सो जाएं।
  • आप स्ट्रेस से राहत के लिए मेडिटेशन (Meditation) का सहारा भी ले सकते हैं।
  • अगर आपको एक साथ कई बीमारियां हैं, तो ट्रीटमेंट लेने में लापरवाही बिल्कुल भी न करें।
  • खाने में नमक और शुगर की मात्रा को संतुलित रखें।
  • समय पर हाय बीपी और शुगर टेस्ट जरूर कराएं। अगर कोई और बीमारी है, तो समय पर उसकी भी जांच कराएं।
  • हार्ट संबंधी बीमारी (Heart disease) किसी भी उम्र में हो सकती है, इसलिए आपको हमेशा सतर्क रहने की जरूरत है।

अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखेंगे, तो खुद को हार्ट डिजीज की समस्या से बचा सकते हैं। हेल्दी हार्ट के लिए लाइफस्टाइल में सुधार बहुत जरूरी है। अगर समस्या महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं और हार्ट की समस्या का ट्रीटमेंट कराएं। आप लेफ्ट साइड हार्ट फेलियर (Left sided heart failure) के बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें। स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 07/06/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड