घायल डिस्क की वजह से दर्द हो सकता है। डिस्कोग्राम एक एक्स-रे प्रक्रिया है जो यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि कोई विशेष डिस्क दर्द का कारण है। डिस्कोग्राम उत्तेजक परीक्षण है जो दर्द को खत्म करने की बजाय फिर से उत्पन्न करता है। डिस्कोग्राम के दौरान दर्द उत्पन्न होने से डॉक्टर को यह निर्धारित करने में मदद मिलती है कि दर्द का कारण किसी विशेष डिस्क में लगी चोट है या नहीं।

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डिस्कोग्राम एक इनवेसिव टेस्ट है जो आमतौर पर पीठ दर्द की शुरुआत में इसके मूल्यांकन के लिए नहीं किया जाता है। डॉक्टर डिस्कोग्राम टेस्ट की सलाह देगा यदि दवा और फिजिकल थेरेपी के बाद भी पीठ दर्द बरकरार है।
कुछ डॉक्टर स्पाइनल फ्यूजन सर्जरी से पहले डिस्कोग्राम टेस्ट यह पता लगाने के लिए करता है कि किस डिस्क को निकालने की जरूरत है। हालांकि, डिस्कोग्राम टेस्ट हमेशा दर्द पैदा करने वाले डिस्क का पता लगाने में मददगार नहीं होता। कई डॉक्टर इसकी बजाय समस्या पैदा करने वाली डिस्क का पता लगाने और उपचार में मदद के लिए MRI और CT स्कैन पर भरोसा करते हैं।
निम्नलिखित शारीरिक परेशानी होने पर डिस्कोग्राम टेस्ट किया जा सकता है। जैसे:-
इन ऊपर बताई गई शारीरिक परेशानी पर इस टेस्ट की जरूरत पड़ सकती है।
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यह टेस्ट आमतौर पर सुरक्षित है, मगर इसमें कुछ जोखिम और और जटिलताएं शामिल हैं।
प्रक्रिया के पहले आपको खून पतला करने वाली दवाएं लेनी बंद करनी होगी। डॉक्टर आपको बताएगा कि कौन सी दवा लेनी है। टेस्ट की सुबह डॉक्टर आपको कुछ भी खाने और पीने से मना करेगा।
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डिस्कोग्राम क्लिनिक या हॉस्पिटल में किया जाता है जहां इमेजिंग उपकरण हो। आपको वहां 3 घंटे रुकना पड़ेगा, क्योंकि टेस्ट में ही 30 से 60 मिनट लगते हैं, टेस्ट में लगने वाला समय इस बात पर निर्भर करता हैकि कितने डिस्क का टेस्ट किया जाना है।
प्रक्रिया के दौरान हालांकि आप बेहोश नहीं होते हैं, लेकिन आपको आराम महसूस हो इसके लिए डॉक्टर नसों के जरिए सिडेटिव देगा। इंफेक्शन से बचने के लिए आपको एंटीबायोटिक भी दिया जा सकता है।
परीक्षण टेबल पर आपको पेट के बल या करवट लेकर लेटना होगा। आपकी स्किन साफ करने के बाद डॉक्टर सुन्न करने के लिए इंजेक्शन देगा ताकि डिस्कोग्राम के दौरान सुई लगाने से दर्द महसूस न हो। डॉक्टर शरीर के अंदर सुई की स्थिति का पता लगाने के लिए इमेजिंग तकनीक (फ्लोरोस्कोपी) का इस्तेमाल करता है। फ्लोरोस्कोपी सुई को सुरक्षित व सटीक तरीके से डिस्क के बीच में जांच के लिए पहुंचने में मदद करता है। इसके बाद डिस्क में कॉन्ट्रास्ट डाई इंजेक्ट की जाती है और एक एक्स-रे या सीटी स्कैन की मदद से यह देखा जाता है कि डाई फैली या नहीं।
यदि डाई डिस्क के केंद्र में रहती है तो इसका मतलब है कि डिस्क सामान्य है। यदि डाई डिस्क के केंद्र से बाहर फैल जाती है तो इसका मतलब है कि डिस्क में कुछ बदलाव हुए हैं। यह बदलाव दर्द का कारण हो भी सकते हैं और नहीं भी।
आमतौर पर यदि डिस्क की वजह से आपको पीठ दर्द हो रहा है तो इंजेक्शन लगाते समय भी आपको वैसा ही दर्द होगा जैसा रोजाना होता है। यदि डिस्क सामान्य है तो इंजेक्शन लगाते समय थोड़ा दर्द होगा। डिस्कोग्राम के दौरान आपको दर्द का मूल्यांकन करने के लिए कहा जाएगा।
ऑब्जर्वेशन के लिए आपको 30 से 60 मिनट तक प्रक्रिया कक्ष में ही रहना होगा। उसके बाद आप घर जा सकते हैं, लेकिन खुद गाड़ी नहीं चला सकते।
प्रक्रिया के बाद कुछ घंटों तक सुई लगाने वाली जगह या पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना सामान्य है। उस हिस्से पर 20 मिनट तक आइस पैक लगाने से राहत मिलेगी। आपको 24 घंटे तक पीठ को सूखा रखना होगा।
यदि आपको तेज पीठ दर्द होता है या प्रक्रिया के एक या दो हफ्ते बाद बुखार आता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डिस्कोग्राम टेस्ट से जुड़े किसी सवाल और इसे बेहतर तरीके से समझने के लिए कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
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टेस्ट की छवियों और प्रक्रिया के दौरान आपने दर्द के बारे में जो जानकारी दी है उसके आधार पर डॉक्टर पीठ दर्द के कारणों की समीक्षा करेगा। इस जानकारी की मदद से डॉक्टर आपको उपचार के लिए दिशा-निर्देश देगा या फिर सर्जरी की तैयारी करेगा।
डॉक्टर आमतौर पर सिर्फ डिस्कोग्राम टेस्ट के परिणाम पर भरोसा नहीं करते हैं क्योंकि डिस्क के वेयर एंड टियर बदलाव से दर्द नहीं होगा। साथ ही डिस्कोग्राम के दौरान होने वाले दर्द में भी विविधता होती है। आमतौर पर पीठ दर्द के इलाज की योजना बनाने के लिए डिस्कोग्राम के परिणाम का इस्तेमाल दूसरे टेस्ट जैसे MRI या CT स्कैन और शारीरिक परीक्षण के साथ किया जाता है।
क्या इसके साइड इफेक्ट्स या रिस्क भी हो सकते हैं?
इस टेस्ट का नकारात्मक प्रभाव तो नहीं पड़ता है लेकिन, कभी-कभी कुछ लोगों को निम्नलिखित शारीरिक परेशानी हो सकती है। जैसे:
हमेशा लें एक्सपर्ट की सलाह
आपका डॉक्टर इमेज रिव्यू कर उससे जानकारी हासिल कर सकता है। दर्द से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकता है। वहीं बैक पेन की पिन प्वाइंट को पा कर सकते हैं। डॉक्टर जांच के अनुसार सर्जरी और इलाज की प्रक्रिया बताते हैं। बता दें कि डॉक्टर पूरी तरह से डिस्कोग्राम पर भरोसा नहीं करते हैं, क्योंकि कई मामलों में डिस्क के इधर-उधर होने की वजह से दर्द नहीं होता है। वहीं यह जांच अलग अलग लोगों पर वैरी करती है।
ऊपर बताई गई शारीरिक परेशानी हो सकती है। इसलिए अगर आपको ऐसी कोई भी परेशानी महसूस हो तो डॉक्टर से संपर्क करें। इसके साथ ही यह ध्यान रखना आवश्यक है की डिस्कोग्राफर प्रक्रिया अलग-अलग भी हो सकती है। सभी लैब और अस्पताल के आधार पर डिस्कोग्राम टेस्ट की सामान्य सीमा अलग-अलग हो सकती है। परीक्षण परिणाम से जुड़े किसी भी सवाल के लिए कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी तरह की चिकित्सा सलाह, निदान और उपचार प्रदान नहीं करता है।
डिस्क्लेमर
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Current Version
13/05/2021
Kanchan Singh द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील
Updated by: Toshini Rathod