रेयर स्लीप डिसऑर्डर : कहीं आप इनमें से किसी का शिकार तो नहीं

By Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar

अच्छी नींद, अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। पर जब नींद की ही बीमारियां होने लगें तो शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी इससे प्रभावित होने लगता है। कई वजहों से हमें सोने की ऐसी बीमारियां होने लगती हैं, जिनके बारे में हम नहीं जानते हैं। इस आर्टिकल में आप जानेंगे ऐसे ही डिसॉर्डर्स के बारे में। 

क्लीन-लेवीन सिंड्रोम (KLS)

छुट्टी वाले दिन ज्यादा सोना हर किसी को पसंद होगा, लेकिन सोचिए अगर आप दिन के 24 घंटे सोते ही रहें या फिर हफ्तों आपको जागने का मन न करे? इसे क्लीन-लेवीन सिंड्रोम कहते हैं। यह ऐसी स्थिति है जिसमें आपको दिन-रात का पता नहीं चलेगा और आप लम्बे समय तक सोते रहेंगे। सुनने में ये अजीब लगेगा लेकिन उठने पर कई बार आप भूल चुके होंगे कि आप कहां सोए थे। 

इस डिसॉर्डर के लक्षण

पुरुषों या लड़कों में ये समस्या अधिक होती है और इसके लक्षण आठ वर्ष के आसपास दिखने लगते हैं। सो कर उठने पर आप बहुत ज्यादा खाएंगे , साथ ही सेक्सुअल डिजायर में भी वृद्धि होगी। आमतौर पर सोने के बाद हल्का और ऊर्जावान महसूस करते हैं लेकिन इस तरह की नींद के बाद आपको थकान और सिर दर्द होगा। 

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इस बीमारी को स्लीपिंग ब्यूटी सिंड्रोम भी कहा जाता है। ऑक्सफोर्ड की  “ब्रेन” नामक जर्नल के मुताबिक दो तिहाई मरीजों में ये बीमारी संक्रमण की वजह से होती है। मेडिकल साइंस के आधार पर इसका इलाज लिथियम की निर्धारित मात्रा है। 

सोते समय पैरालिसिस होना (स्लीप पैरालिसिस- Sleep Paralysis)

ये स्थिति कई बार आपको डरावना एहसास दे सकती है।  इस स्थिति में आपको सोते समय पैरालिसिस होगा। इस समय आप आसपास की परिस्थितयों को समझ पाएंगें लेकिन स्थिति के हिसाब प्रतिक्रिया नहीं दे पाएंगें। जो लोग इस स्थिति से गुजरते हैं उन्हें डर, घबराहट और सांस उखड़ने का एहसास होगा। ऐसी घटना को अक्सर लोग अलौकिक घटना या भूत-प्रेत से जोड़कर देखते हैं।

ये घटना अजीब तो है लेकिन लगभग 50 प्रतिशत लोग पूरे जीवन में एक बार इस स्थिति से जरूर गुजरते हैं और 4 प्रतिशत लोगों में इस स्थिति से पांच बार गुजरते हैं। ज्यादातर लोग इस स्थिति से पांच या 10 सेकंड्स के अंदर उभर जाते हैं। लेकिन तुरंत उभरने के बाद सोना थोड़ा मुश्किल होगा। 

स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर

इस बीमारी के  समय आप पूरी तरह से पेरैलाइज नहीं होंगे लेकिन आपको आधी नींद में अजीब सपने दिखाई देंगे। जो भी सपने आप देखेंगे कई बार आप उसी तरह से काम करने लगेंगे। कई बार आप चिल्लाने लगेंगे, सपनों में आप कई बार ऐसी चीजें दिखाई देंगी जिनकी वजह से आप खुद को और दूसरों को हानि पहुंचा सकते हैं। इस स्थिति से गुजरने वाले मरीज अक्सर और बीमारियों से भी पीड़ित होते हैं।  पार्किंसन डिजीज, डेमेन्शिआ और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से पीड़ित मरीजों में ये स्थिति देखि जा सकती है।

एक्सप्लोडिंग हेड सिंड्रोम

ये स्थिति किसी साइंस फिक्शन में दिखाई गई बीमारी की तरह लगती है। इसमें आपको ऐसी आवाजें सुनाई देंगी जो असल में आसपास नहीं है। जैसे कि बम फूटने की या फिर गोलियों और पटाखों की आवाज। इन अजीब आवाजों की वजह से आपको सोने में परेशानी होगी और घबराहट का एहसास होगा। ये अपने आप में कोई बीमारी नहीं है लेकिन इस बीमारी की वजह से आपको नींद आने में परेशानी हो सकती है। इस परिस्थिति को स्लीप ऑनसेट इंसोम्निया कहेंगे।

फेटल फेमिलियल इंसोम्निया

क्या आपको पता है कि लम्बे समय तक न सो पाने से आपकी जान भी जा सकती है। इस स्थिति की शुरुआत कई कारणों से हो सकती है।  बहुत ज्यादा कैफीन लेने से या फिर बहुत ज्यादा तनाव लेने से भी नींद न आने की समस्या हो सकती है। ऐसा लंबे समय तक होने पर आपको नींद आना बंद हो जाएगी।  बहुत दिनों तक ऐसा होने पर आपको कभी-भी नींद नहीं आएगी जिससे आपका मस्तिष्क थक जाएगा और ये जानलेवा स्थिति का रूप ले सकता है। ऐसी परिस्थिति में आपके दिल की धड़कनें और  ब्लड प्रेशर बढ़ जाएगा। 

कोमा और जान जानें का खतरा

मेडिकल साइंस में अभी तक इस बीमारी का कोई निर्धारित इलाज नहीं है। हालांकि कुछ लक्षणों का निवारण किया जा सकता है लेकिन पूरी तरह से इससे उभर पाना लगभग नामुमकिन है। ये बीमारी छह महीने से तीन सालों तक रहेगी और अगर हालात नहीं सुधरते हैं तो आप कोमा में जा सकते हैं। कई बार इस स्थिति में होने पर जान भी जा सकती है। 

नींद न आने पर, नींद ज्यादा आने पर, नींद के दौरान अजीब सपने आना, सोते समय चलना या फिर सोने के बाद भी शरीर में दर्द होना या फिर असहजता का एहसास होने पर डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। 

इन सभी स्थितियों के होने पर आपके शरीर पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है। 

इस स्थिति से जुड़ी किसी भी जानकारी या सवाल के लिए अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। 

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी चिकित्सा परामर्श, जांच और इलाज की सलाह नहीं देता है। 

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