तनाव से बढ़ सकता है सेकेंड अटैक और स्ट्रोक का खतरा!
तनाव, आज के समय में हजारों बीमारियों का कार है, फिर चाहें वो डायबिटीज हो, ब्लड प्रेशर की दिक्कत हो या हार्ट की प्राॅब्ल्म। आज हम यहां बात करेंगे तनाव के हार्ट पेशेंट में सेकेंड हार्ट अटैक के बढ़ते खतरे के बारे में। जिन लोगों को एक हार्ट अटैक पड़ चुका है, उनमें तनाव दूसरे हार्ट अटैक का कारण भी बन सकता है। तनाव केवल अटैक ही नहीं बल्कि स्ट्रोक के रिस्क (Risk of stroke) को भी बढ़ाती है। कई बार तो मरीज की अटैक के बाद (After Attack) जान तो बच जाती है, लेकिन उनके शरीर का कोई अंग प्रभावित हो जाता है। जिसके बाद मरीज किसी दूसरे व्यक्ति पर आधारित हो जाता है। तनाव से अटैक और स्ट्रोक (Attacks and strokes due to stress) का खतरा बहुत अधिक जाता है। पहले अटैक के बाद मरीज को कुछ खास बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। कोशिश करें कि स्ट्रेस ज्यादा न लें, क्योंकि तनाव से अटैक और स्ट्रोक (Attacks and strokes due to stress) खतरा तो हाेता ही है, साथ में जान का खतरा भी बढ़ जाता है।

तनाव से अटैक और स्ट्रोक (Attacks and strokes due to stress)का बढ़ता खतरा: दोनों में संबंध
जैसा कि तनाव से अटैक और स्ट्रोक खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इन मरीजों को अपने लाइफस्टाइल और खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तनाव का स्ट्रोक और अटैक से बहुत गहरा संबंध है। मस्तिष्क में स्ट्रोक या हार्ट अटैक की कंडीशन (Heart Attack Condition) तब होती है, जब ऑक्सिजन की आपूर्ति हो जाती है। जिस कारण मस्तिष्क में रक्त का रिसाव, मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनी में थक्का या मस्तिष्क को ऑक्सिजन की आपूर्ति और हदय में ऑक्सिजन की आपूर्ति होने लगती है। तनाव जब बहुत अत्यधिक हो जाता है, तब इसका प्रभाव सबसे पहले हार्ट (Heart) और ब्रेन (Brain) पर ही पड़ता है।
तनाव से अटैक और स्ट्रोक: वर्क लाइफ स्ट्रेस भी है एक कारण
स्ट्रोक और अटैक का खतरा किसी भी व्यक्ति को कहीं भी और कभी हो सकता है। तनाव से अटैक और स्ट्रोक के खतरे से बचने के लिए जरूरी है कि आप स्ट्रेस (Stress) से पहले बचें। जो इसके होने का सबसे बड़ा कारण है। फिर चाहें वो प्रोफेशनल लाइफ में हो या पर्सनल लाइफ के स्ट्रेस से हो। हर किसी को स्ट्रेस मैनेज करना आना चाहिए। इसके लिए आप अपने घर वालों और दोस्तों की मदद भी ले सकते हैं। बहुत ज्यादा जरूरत पड़ने पर आप प्रोफेशनल काउंसलर से मिलें और थेरिपी (Therapy) लें।
जब बॉडी स्ट्रेस में होता है, तो क्या होता है?
जब हम तनाव (Stress) लेते हैं, तो इसका प्रभाव सबसे पहले शरीर व अन्य हिस्सों पर भी पड़ता है। इस वजह से स्ट्रोक और अटैक का खतरा (Risk of Attack) बढ़ जाता है। आइए यहां जानते हैं कुछ ऐसे फैक्टर्स के बारे में, जिसके कारण तनाव से अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है, साथ ही कैसे तनाव का असर शरीर पर पड़ता है, जिनमें शामिल हैं:
- तंत्रिका तंत्र – अधिक एड्रेनालाईन और कोर्टिसोल का निमार्ण होता है, जो रक्तचाप (Blood Pressure) को बढ़ाता है और डायबिटीज के रिस्क को भी बढ़ाता है।
- मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम – लंबे समय तक मांसपेशियों का संकुचन सिरदर्द (Headache) का कारण बनता है, जैसे कि माइग्रेन (Migraine), और शरीर में दर्द (Body pain)।
- श्वसन प्रणाली – सांस लेने की दर में वृद्धि के कारण हायपरवेंटिलेशन और पैनिक अटैक (Panic Attack) होता है।
- कार्डियोवास्कुलर सिस्टम – कोरोनरी धमनियों में सूजन (Swelling) और हृदय गति में वृद्धि के कारण दिल का दौरा पड़ने का अधिक खतरा होता है।
- गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम – भोजन, शराब, तंबाकू की खपत में वृद्धि जिसके कारण एसिड, मतली, उल्टी, कब्ज, दस्त, और कई समस्याएं हो सकती हैं।
तनाव के लक्षण (Stress Symptoms)
जब किसी व्यक्ति में तनाव और स्ट्रेस अधिक होने लगता है, ताे उसमें इस तरह के लक्षण नजर आने लगते हैं, जिसे समय रहते रोकना बहुत जरूरी है। इन लक्षणों को ध्यान देने पर आप तनाव से अटैक और स्ट्रोक के खतरे से बच सकते हैं।
- सामान्य से ज्यादा भाेजन करना, यानि कि भूख बहुत लगना
- मूड स्विंग होना
- अधिक बेचैनी महसूस करना
- ठीक से नींद न आने की समस्या
- याददाश्त का कमजोर होना यानि कि भूलने की समस्या होना
- जरुरत से ज्यादा शराब पीना
- बहुत जल्दी थकान महसूस करना
- निराशा वाली बात करना
- परिवार और दोस्तों से ज्यादा बात न करना, दूरी बनाकर रखना
- किसी काम में मन न लगना
- पसंद की चीजों में भी मन न लगना
तनाव से अटैक और स्ट्रोक: ज्यादा तनाव लेने से होने वाले नुकसान
- हमारा इम्यून सिस्टम (Immune system) और हृदय (Heart) को नुकसान पहुंच सकता है।
- गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
- उम्र कम हो जाती है।
- सेक्स लाइफ खराब हो सकती है।
क्या करें
तनाव से अटैक और स्ट्रोक के खतरे से बचने के लिए पहले इन संकेतों को पहचानना और तनाव को दूर करने के लिए सचेत प्रयास करना ही एकमात्र रास्ता है। पर मानसिक स्तर पर, निम्नलिखित सुझाव और संकेत जीवन के प्रति दृष्टिकोण को बदलने में बहुत मदद करते हैं। इसलिए भी जरूरी है कि आप हर तरह से फिट रहें।
- स्वयं पर अधिक ध्यान दें: अपने मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक के बारे स्वास्थ्य। सर्वोत्तम संभव तरीके से उन्हें सुधारने के तरीके और समाधान खोजें।अपने खान पर विशेष ध्यान दें, डायट में हरी सब्जियों को शामिल करें, जैसे कि पालक, गाजर, मेथी, चौराई, सरसो और लौकी आदि।
- एंटी ऑक्सिडेंट फूड्स भी जरूर लेना चाहिए आपको।
- रोज एक फल का सेवन जरूरी करें।
- खाली समय में कुछ भी निगेटिव न सोचें। कोशिश करें कि कुछ न कुछ करते रहें, किसी से बात भी कर सकते हैं। एंग्जायटी और अकेलापन सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। जब भी आपको ऐसा महसूस हो किसी से बात करें। अगर आप किसी से सामने बैठकर अपनी बात करेंगे तो आपको मन हल्का महसूस होगा और आपकी परेशानी भी कम होगी।