मानसिक तनाव के प्रकार को समझकर करें उसका इलाज

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट अक्टूबर 14, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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अकसर हम तनाव को लेकर बहुत सारी सलाह सुनते हैं। जैसे स्वस्थ आहार खाएं, डायरी रखें या अधिक नींद लें। कम वेतन, काम का बोझ, व्यस्त जीवन और बिना बात का हंगामा तनाव के मुख्य कारण हैं। स्ट्रेस का एक प्रमुख कारण है कि “अगर घर में कोई कठिनाई है, तो आप उसे कार्यालय में लाते हैं। यह आपके पेशेवर तनाव के साथ मिक्स हो जाता है। ध्यान ना रखने पर ये मिक्स स्ट्रेस मैनेजमेंट से बाहर हो सकता है। तनाव आगे गंभीर होने पर आपके रिश्तों को प्रभावित करता है। आज इस लेख में हम मानसिक तनाव के प्रकार के बारे में बात करेंगे।

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तनाव (स्ट्रेस) क्या है?

कुछ हासिल करने के लिए परेशानी या चिंता करना निश्चित रूप से आपको अपने लक्ष्य की ओर ले जाता है, लेकिन अगर आप अपने जीवन में मानसिक तनाव हर समय महसूस करते हैं तो यह एक अच्छा संकेत नहीं है। मेंटल स्ट्रेस का असर जब दैनिक कार्यों पर पड़ने लगे तो आपको सावधान होने की आवश्यकता है। बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेना मानसिक बीमारी का मूल कारण बन सकता है। मानसिक तनाव या स्ट्रेस भी तन और मन दोनों पर बुरा असर डालता है जिससे कई शारीरिक और मानसिक बीमारियां जन्म लेती हैं।

मानसिक तनाव के प्रकार

मानसिक तनाव के प्रकार में तीन प्रकार के तनावों की पहचान की गई है। जैसे-

तीव्र तनाव (Chronic stress) स्ट्रेस के प्रकार में एक

मानसिक तनाव के प्रकार में से एक क्रोनिक स्ट्रेस है जो थोड़े समय के लिए होता है। हाल ही में हुई घटनाओं, या आगामी समय में आने वाली समस्याओं के दबाव के बारे में अधिक सोचने के कारण अक्सर तीव्र तनाव होता है। उदाहरण के लिए, यदि आप हाल ही में एक ऐसे किसी काम में शामिल हुए हैं जो आपको परेशान कर रहा है या उसकी समय सीमा निकट हो और काम पूरा ना हुआ है, तो आपको तीव्र तनाव ट्रिगर कर सकता है। हालांकि, इनका समाधान हो जाने पर तनाव खुद ब खुद दूर हो जाता है।

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मानसिक तनाव के प्रकार में दीर्घकालिक क्रोनिक तनाव

इस तनाव के दौरान आपको लंबे समय तक सिरदर्द और पेट की तकलीफ का सामना करना पड़ता हैं। हालांकि, लंबी अवधि के बाद यही तनाव तीव्र तनाव के रूप में बार-बार होने लगता है तो ये लक्षण हानिकारक हो सकते हैं।

मानसिक तनाव के प्रकार: एपिसोडिक तीव्र तनाव

जो लोग अक्सर तीव्र तनाव का अनुभव करते हैं या जिन्हें जीवन में स्ट्रेस बार-बार ट्रिगर करता है। उन्हें एपिसोडिक तीव्र तनाव होने की प्रबल संभावना होती है। बहुत अधिक प्रतिबद्धताओं वाले व्यक्तियों में एपिसोडिक तनाव के लक्षण सामने आने लगते हैं, जिसमें चिड़चिड़ापन और तनावग्रस्त होने की प्रवृत्ति शामिल है। यह चिड़चिड़ापन रिश्तों को प्रभावित कर सकता है। लगातार बहुत अधिक चिंता करने वालों को भी ये तनाव अपनी चपेट में ले सकता है।

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अपने तनाव संकेतों को पहचानें

“तनाव के दौरान अपने शारीरिक संकेतों” को पहचानने के लिए खुद को प्रशिक्षित करें। शायद आपकी गर्दन अकड़ जाती है, आपके पेट में दर्द होता है, या आपकी हथेलियों से पसीना आता है। आपके शरीर के अंदर क्या हो रहा है, ये सभी लक्षण आपके तनाव का कारण हो सकते है।  “जिस मिनट आप तनाव महसूस करने लगते हैं, आपकी नाड़ी दौड़ जाती है, आपका दिल तेजी से धड़कने लगता और शरीर में हाॅर्मोन (कोर्टिसोल और एड्रेनालीन सहित) रिलीज हो जाते हैं। यदि आप अपने अंदर के संकेतों को पहचान सकते हैं तो उन्हें अनदेखा करने के बजाय आपको सही उपचार की तरफ खुद को फोकस करना चाहिए।

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इसे तनाव न समझें

ज्यादातर ऑफिस में लोगों का रक्तचाप (blood pressure) काम करते समय बढ़ जाता है क्योंकि बॉस या सहकर्मी कुछ महत्वपूर्ण काम करने का एक्सट्रा बरडन दे देते हैं। आप सफल होना चाहते हैं। ऐसी स्थिती में तनाव पैदा होना जाहिर सी बात है। अत्यधिक वर्क लोड के दौरान आप परेशान करने वाली बातों को खुद से कही और शिफ्ट करें और काम को “आगे बढ़ने का एक अवसर के रूप में देखे। “अपना ध्यान बढ़ाएं और वास्तव में किसी भी समस्या को खुद पर हावी होने ना दें।

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अपने आप से बात करें

जब आप तनाव में होते हैं, तो आपके अंदर की आवाज तेज, डरावनी हो जाती है। यह आपको बताता है: “मैं बहुत गुस्से में हूं,” या “मैं ऐसा कभी नहीं कर पाऊंगा।” इस नकारात्मक आवाज को खुद से दूर रखने के लिए  “अपने आप से लॉजिकल और शांत स्वर में बात करें। इस स्थिती में खुद के अंदर सकारात्मकता को इंजेक्ट करने की कोशिश करें”। जैसे खुद से “कुछ ऐसा कहो,‘ मेरे पास अतीत में इस तरह का एक असाइनमेंट था और मैं सफल रहा। मैं इसे भी संभाल सकता हूं। ऐसी बाते आपका मनोबल बढ़ाती है और आपको कमजोर होने और स्ट्रेस में आने से रोकती है।

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तनाव से दूर रहने के लिए छोड़ दें ये अदातें

आजकल बहुत-से लोगों का रुटीन दिन में सोना ओर रात में जगने का हो गया है। यह तनाव का मुख्य कारण बन गया है। इसका बुरा प्रभाव सीधा आपकी सेहत पर पढ़ता है। डॉक्टर भी आपको यही सलाह देते हैं कि रिटीन ऐसा बनाएं, जिसमें देर रात तक जागते न रहना पड़े।

रात भर जागने से ब्रेन को दोगुना काम करना पडता है। इस वजह से मानसिक और शारीरिक रूप से थकान और तनाव हो जाता है। सुबह देर से उठने पर खान-पान का रुटीन भी इतना बिगड़ जाता है और बॉडी क्लॉक उल्टी हो जाती है। सुबह का नाश्ता दोपहर में और दोपहर का खाना शाम को खाने की वजह से शरीर पर दुष्प्रभाव पढ़ते हैं।

आजकल के युवा परिवार के साथ समय बिताने की बजाय अपने फोन या टीवी देखने में बिजी रहते हैं। कोई भी आदत ज्यादा हो जाए, तो अवसाद पहुंचाने का कारण बन जाती है। यदि दिल की बात दिल में रहे और किसी से उसको डिस्कस ना करें, तो घुटन होने लगती है, यह भी तनाव का एक मुख्य कारण होता है। इसलिए सबको अपने जीवन में एक ऐसा साथी रखना चाहिए, जिसके साथ हम अपना सुख-दुख बांट सकें।

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शराब और स्मोकिंग करना भी हमारे तनाव को बढ़ाता है। जबकि आज के युवा इसको स्ट्रेस रिलीफ समझते हैं। स्मोकिंग करने से आपके लंग्स खराब होते हैं और दिल की धड़कन पर भी असर पड़ता है, जिससे तनाव पैदा होता है।

आज के आधुनिक युग में आप पाएंगे कि हर एक व्यक्ति किसी न किसी तरह तनाव ग्रस्त होता है। इसकी चपेट में बच्चे, बूढ़े और जवान सब शामिल हैं। यह एक ऐसी बीमारी बन गई है, जिससे बाहर निकलना मानो नामुमकिन सा हो गया है। इसका मुख्य कारण लोगों की बढ़ती हुई जरूरते हैं। जिनको पूरा न करने की वजह से वह इतने हताश हो जाते हैं।

योग और सैर न करने की आदत भी तनाव पैदा करती है। हमें स्वस्थ रहने के लिए रोजाना योग ओर सैर करनी चाहिए। योग करने से शरीर स्वस्थ रहता है और मन शांत महसूस करता है। यह तनाव को कम करके आत्मविश्वास को बढ़ाता है।

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तीन गहरी सांस लें

तनाव को कम करने के लिए गहरी सांस लेना कमाल की सरल रणनीति है। “जब आप चिंतित महसूस करते हैं, तो आपकी सांस छोटी और अधिक अनियमित होने लगती है। पेट का ध्यान रखते हुए तीन बड़ी सांसें लेना और छोड़ना आपके पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम के लिए अच्छा है। आप ऐसा तब भी कर सकते हैं जब आप अपने कंधों को नीचे कर रहे हों, अपनी गर्दन को घुमा रहे हों, या अपने कंधों को घुमा रहे हों। गहरी सांस लेने से तनाव के लक्षणों को कम करने में मदद मिलती है। किसी भी मानसिक तनाव के प्रकार से बचने के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज भी की जा सकती है।

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 एक सूची बनाना

आपको महत्वपूर्ण कार्यों को प्राथमिकता देने वाली टू-डू लिस्ट बनानी चाहिए। एक तरह से ये तनाव से मुकाबला करने का दूसरा तरीका है। “लेखन का कार्य मन को केंद्रित करता है। आपको जो कुछ भी करने की जरूरत है उसे लिखें और उस पर अमल करने की कोशिश करें। मानसिक तनाव के प्रकार में से आपको किसी भी तरह का स्ट्रेस होने पर यह उपाय काफी कारगर साबित होगा। अगर तनवा बढ़ता जा रहा है तो ऐसे में दवा लेने की सलाह डॉक्टर दे सकते हैं।

हर किसी को कुछ खास लोगों पर भरोसा करने की जरूरत है, जिन्हें वे दबाव महसूस होने पर बुला सकते हैं। ऐसे व्यक्ति का चयन सावधानी से करें। आप ऐसे इंसान से अपना संर्पक हमेशा बनाए रखे। जिसके सामने आप दिल खोल कर अपनी बात कह सके और जो आपके प्रश्नों का हल खोजने में आपकी मदद कर सके।

उम्मीद है कि आपको मानसिक तनाव के प्रकार पर आधारित यह लेख पसंद आया होगा। इस विषय से जुड़ा कोई भी सवाल या सुझाव है, तो आप हमसे कमेंट बॉक्स के जरिए साझा कर सकते हैं।

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