युवाओं में आत्महत्या के बढ़ते स्तर का कारण क्या है?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट June 16, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
अब शेयर करें

देश में युवाओं में आत्महत्या का बढ़ता स्तर अंदर से हिला देने वाला है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में खुदकुशी करने वालों में सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2018 में खुदकुशी से जुड़े आंकड़े दिए गए हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, आत्महत्या की घटनाओं में 15 साल में 23 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 में एक लाख 33 हजार से ज्यादा लोगों ने खुदकुशी की, जबकि 2000 में ये आंकड़ा केवल एक लाख आठ हजार के करीब था।

आत्महत्या करने वालों में 33 प्रतिशत की उम्र 30 से 45 साल के बीच थी, जबकि आत्महत्या करने वाले करीब 32 प्रतिशत लोगों की उम्र 18 साल से 30 साल के बीच थी। युवाओं में आत्महत्या के कारण क्या हैं और इससे बचने का क्या समाधान किया जाना चाहिए जानते हैं।

युवाओं में सुसाइड का प्रयास करने का क्या कारण हैं?

युवा होना अपने आप में एक तनावपूर्ण समय होता है। वे बड़े बदलावों से गुजर रहे होते हैं। शरीर में बदलाव, विचारों में बदलाव और भावनाओं में बदलाव शामिल हैं। तनाव, भ्रम, भय और संदेह की मजबूत भावनाएं एक किशोर की समस्या को सुलझाने और निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं। वह सफल होने के लिए दबाव भी महसूस कर सकता है। कुछ और भी कारण हैं जो युवाओं में आत्महत्या के कदम उठाने के लिए उकसा सकते हैं।

ये समस्याएं कुछ युवाओं को बहुत कठिन या शर्मनाक लग सकती है और आत्महत्या एक समाधान की तरह लग सकता है।

और पढ़ेंः ब्रेकअप के बाद कैसे रखे खुद को खुश

“सुसाइड इन चिल्ड्रन एंड एडोलेंसेंट्स Suicide in Children and Adolescents (Child Behavior and Development) किताब के हवाले से- एक दोस्त, एक सहयोगी, एक रिश्तेदार या एक मरीज की आत्महत्या से मौत एक विनाशकारी अनुभव हो सकता है। जब कोई आत्मघाती व्यवहार प्रदर्शित करता है या आत्म-हत्या करता है खासकर एक बच्चा या किशोर तो ये बात और अधिक सोचनीय हो जाती है। युवाओं में आत्महत्या के मामलों में  पिछले तीन दशकों में नाटकीय रूप से वृद्धि  हुई है और ऐसा  लगातार हो रहा है। नवीनतम आत्मघाती रिपोर्टों के अनुसार, आत्महत्या, किशोरों और युवा वयस्कों में मृत्यु का दूसरा कारण है”।

और पढ़ें : क्या गुस्से में आकर कुछ गलत करना एंगर एंजायटी है?

युवाओं में आत्महत्या को उकसाने वाले कारक

और पढ़ें : चिंता और निराशा दूर करने का अचूक तरीका है गार्डनिंग

युवाओं में आत्महत्या के चेतावनी संकेत क्या हैं?

युवाओं में सुसाइड के कई चेतावनी संकेत हैं।

  • खाने और सोने की आदतों में बदलाव
  • सामान्य गतिविधियों में अरुचि का पैदा होना
  • मित्रों और परिवार के सदस्यों से अलगाव
  • शराब और नशीली दवाओं का उपयोग
  • किसी की व्यक्तिगत उपस्थिति की उपेक्षा करना
  • अनावश्यक जोखिम लेना
  • मौत और मरने का जुनून
  • अधिकतर शारीरिक शिकायतें अक्सर भावनात्मक कष्ट से जुड़ी होती हैं, जैसे कि पेट में दर्द, सिरदर्द और अत्यधिक मानसिक थकान
  • स्कूल जाने में मन ना लगना
  • ऊबना
  • ध्यान केंद्रित करने में समस्याएं
  • मरने की इच्छा का होना
  • प्रशंसा की प्रतिक्रिया का अभाव

ध्यान रखें कि हर किसी युवा में आत्महत्या के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों की इन स्थितियों के बारे में आसानी से पता लगाया जा सकता है, जबकि कुछ लोग अपनी स्थितियों के बारे में कोई बात नहीं करते हैं। वे आमतौर पर अपनी भावनाओं को किसी से शेयर नहीं करते हैं

खुद की मदद ऐसे करें

अगर आपको आत्महत्या जैसे ख्याल आ रहे हैं, लेकिन आप खुद को तुरंत नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते हैं तोः

  • अपने बेस्ट फ्रेंड, पार्टनर या परिवार के सदस्य से भावनाओं को शेयर करें।
  • हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें।
  • अपने मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से बात करें। उनसे मिलने का समय निर्धारित करें।
  • ध्यान रखें कि आत्महत्या के विचार अपने आप नहीं बदल सकते हैं, इसलिए उचित मदद लें।

युवाओं में आत्महत्या के सारे लक्षण ऊपर नहीं बताए गए हैं। अगर आपको इसके लक्षणों के बारे में कोई सवाल है, तो इस बारे में अपने डॉक्टर से बात करें।

और पढ़ें: बच्चों का पढ़ाई में मन न लगना और उनकी मेंटल हेल्थ में है कनेक्शन

युवाओं में आत्महत्या का निदान कैसे किया जाता है?

हमेशा ऐसे बयानों, विचारों, व्यवहारों या योजनाओं को बहुत गंभीरता से लें। कोई भी किशोर जो सुसाइड के विचार व्यक्त करता है, उसे अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए। आत्महत्या के बारे में अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के साथ बात करें और एक आपातकालीन योजना लिखें।

कोई भी किशोर जिसने आत्महत्या करने की कोशिश की है, उसके जीवन की स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानने के लिए पहले एक शारीरिक जांच करानी चाहिए। उसे तब तक मानसिक उपचार प्राप्त करना चाहिए जब तक कि वह स्थिर न हो जाए।

और पढ़ें: खुश रहने का तरीका क्या है? जानिए खुशी और सेहत का संबंध

युवाओं में आत्महत्या को रोकने के लिए इलाज कैसे किया जाता है?

उपचार आपके बच्चे के लक्षणों, आयु और सामान्य स्वास्थ्य पर निर्भर करेगा। यह इस पर भी निर्भर करेगा कि हालत कितनी गंभीर है। उपचार में शामिल हैं:

व्यक्तिगत चिकित्सा

इस उपचार में माता-पिता एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि आवश्यक है तो बच्चे के साथ अस्पताल में रहें। इससे बच्चे को एक पर्यवेक्षित और सुरक्षित वातावरण मिलता है।

और पढ़ें : सनकीपन क्या है, महिलाओं और पुरुषों में क्या अलग होता है पागलपन ?

ये छोटे-छोटे बदलाव मददगार साबित होंगे

जीवनशैली में कुछ बदलाव करके युवाओं में आत्महत्या की प्रवत्ति को कम किया जा सकता है। ये उपाय निम्न प्रकार हैं:

  • युवाओं को शराब और ड्रग्स के सेवन से बचना चाहिए क्योंकि ये नशीले पदार्थ आत्मघाती विचारों को बढ़ावा देते हैं।
  • हर हफ्ते कम से कम तीन बार, नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए। शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने से मस्तिष्क के कुछ अच्छे केमिकल का उत्पादन तेज होता है जो आपको खुशी का अनुभव कराते हैं।
  • कभी भी आत्मघाती भावनाओं को पूरी तरह से खुद से सुलझाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। जब भी मन में आत्महत्या के विचार आए तो इसके बारे में किसी से बात करें। ऐसे कई संगठन और सहायता समूह हैं जो आत्मघाती विचारों का सामना करने में आपकी सहायता कर सकते हैं।
  • नींद कम लेना युवाओं में आत्महत्या के विचारों को बढ़ावा दे सकता है। कम से कम छह से आठ घंटे की नींद लें। अगर आपको सोने में परेशानी हो रही है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करें।
  • अपने डॉक्टर के निर्देशानुसार दवाएं लें। बिना अपने डॉक्टर के निर्देश के आपको अपनी दवा के खुराक में बदलाव नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी आत्महत्या की भावनाएं वापस आ सकती हैं।
  • डॉक्टर द्वारा थेरिपी के लिए दिए गए समय पर उनसे मिलने जाएं।
  • चेतावनी के संकेतों पर ध्यान दें।

आत्महत्या के चेतावनी संकेतों को समझकर आत्मघाती प्रयास को रोका जा सकता है। अपने दोस्तों के साथ खुला संवाद रखने से जरूरत पड़ने पर वे आपकी सहायता कर सकते हैं। दवाओं और बंदूकों को युवाओं और किशोरों से दूर रखें। किसी भी मानसिक या मादक द्रव्यों के सेवन की लत लगने से रोकें। अपने किशोर का समर्थन करें और उसका मनोबल बढ़ाते रहें।

हैलो स्वास्थ्य का न्यूजलेटर प्राप्त करें

मधुमेह, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, कैंसर और भी बहुत कुछ...
सब्सक्राइब' पर क्लिक करके मैं सभी नियमों व शर्तों तथा गोपनीयता नीति को स्वीकार करता/करती हूं। मैं हैलो स्वास्थ्य से भविष्य में मिलने वाले ईमेल को भी स्वीकार करता/करती हूं और जानता/जानती हूं कि मैं हैलो स्वास्थ्य के सब्सक्रिप्शन को किसी भी समय बंद कर सकता/सकती हूं।

अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो उसको बेहतर ढंग से समझने के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें। ।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

Was this article helpful for you ?
happy unhappy
सूत्र

शायद आपको यह भी अच्छा लगे

ऑनलाइन स्कूलिंग से बच्चों की मेंटल हेल्थ पर पड़ता है पॉजिटिव इफेक्ट, जानिए कैसे

ऑनलाइन स्कूलिंग या क्लासेस करने से शरीर को असुविधा महसूस हो सकती है लेकिन ऑनस्कूल के कारण बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। Child’s Mental Health

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Bhawana Awasthi

इस दिवाली घर में जलाएं अरोमा कैंडल्स, जगमगाहट के साथ आपको मिलेंगे इसके हेल्थ बेनिफिट्स भी

इस दिवाली में अरोमा कैंडल से घर को करें रोशन करें। ऐसा करने से अच्छी खुशबू के साथ ही आपको रिलेक्स भी महसूस होगा। इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए अरोमा कैंडल के फायदे।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Bhawana Awasthi

वर्ल्ड कॉलेज स्टूडेंट्स डे: क्यों होता है कॉलेज स्टूडेंट्स में डिप्रेशन?

कॉलेज स्टूडेंट्स में डिप्रेशन के कारण, कॉलेज डिप्रेशन (college depression) कोई स्पेसिफिक टर्म नहीं है। यह सामान्य अवसाद ही है जो कॉलेज के दिनों में स्टूडेंट्स में होता है।

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shikha Patel

लाफ्टर थेरेपी : हंसो, हंसाओं और डिप्रेशन को दूर भगाओं

लाफ्टर थेरेपी क्या है? लाफ्टर थेरेपी एक प्रकार की चिकित्सा है जो दर्द और तनाव को दूर करने के लिए ह्यूमर का उपयोग करती है। इसका उपयोग मेंटल स्ट्रेस (mental stress) के साथ-साथ कैंसर जैसी गंभीर बीमारी...

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shikha Patel
मेंटल हेल्थ, मूड डिसऑर्डर्स September 8, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें

Recommended for you

स्वास्थ्य

स्वास्थ्य को जानें, स्वास्थ्य को पहचानें – क्योंकि स्वास्थ्य से ही सब कुछ है!

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया AnuSharma
प्रकाशित हुआ February 22, 2021 . 8 मिनट में पढ़ें
पुरुषों की मेंटल हेल्थ बिगाड़ने वाले कारण/ Men's Mental Health

पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारणों के बारे में जान लें, ताकि देखभाल करना हो जाए आसान

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Manjari Khare
प्रकाशित हुआ February 15, 2021 . 6 मिनट में पढ़ें
एजिंग माइंड, Ageing Mind

उम्र बढ़ने के साथ घबराएं नहीं, आपका दृढ़ निश्चय एजिंग माइंड को देगा मात

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Bhawana Awasthi
प्रकाशित हुआ January 11, 2021 . 11 मिनट में पढ़ें
लॉकडाउन के दौरान मेंटल स्ट्रेंस

लॉकडाउन के असर के बाद इस नए साल पर अपने मानसिक स्वास्थ्य को कैसे फिट रखें?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Niharika Jaiswal
प्रकाशित हुआ December 29, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें