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Gut and Anxiety: गट और एंग्जायटी का आपस में क्या है कनेक्शन? जानिए हेल्दी गट्स एवं एंग्जायटी से जुड़े टिप्स!

    Gut and Anxiety: गट और एंग्जायटी का आपस में क्या है कनेक्शन? जानिए हेल्दी गट्स एवं एंग्जायटी से जुड़े टिप्स!

    स्वस्थ्य रहने के लिए सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य का भी स्वस्थ्य रहना जरूरी है। शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, दोनों में से अगर कोई के भी परेशानी शुरू हो जाए तो समझिए आपकी समस्या शुरू। इसलिए आज हेल्दी गट और एंग्जायटी (Healthy Gut and Anxiety) से जुड़ी जानकारी आपके साथ शेयर करेंगे और इनदोनों से जुड़ी रिसर्च रिपोर्ट्स क्या कहती है ये भी समझेंगे।

    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (World Health Organization) द्वारा पब्लिश की गई रिपोर्ट पर गौर करें, तो पुरे विश्व में 264 मिलियन लोग डिप्रेशन के शिकार हैं। वहीं डब्लूएचओ का यह भी कहना है कि डिप्रेशन एक तरह का सामान्य मानसिक विकार है, लेकिन जब डिप्रेशन की समस्या सामान्य से ज्यादा बढ़ने लगे, तो यह परेशानी गंभीर मानसिक परेशानियों की ओर करती है। वैसे अगर आपके मन में यह सवाल उठ रहा है कि एंग्जायटी की वजह से भी मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंच सकता है, तो हां। एंग्जायटी की समस्या अगर ज्यादा दिनों तक बनी रहे तो मेंटल हेल्थ को नुकसान पहुंच सकता है।

    • गट क्या है?
    • एंग्जाइटी क्या है?
    • गट और एंग्जायटी का क्या है आपसी कनेक्शन?
    • गट को स्वस्थ्य बनाये रखने के लिए क्या करें?
    • एंग्जाइटी से बचाव के लिए क्या करें?

    चलिए अब गट और एंग्जायटी (Gut and Anxiety) से जुड़े इन सवालों का जवाब जानते हैं।

    और पढ़ें : Nervous Stomach: कहीं नर्वस स्टमक का कारण तनाव तो नहीं? क्यों हो सकता स्टमक नर्वस?

    गट क्या है? (About Gut)

    गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट (Gastrointestinal tract) को गट कहा जाता है, यह एक लंबी ट्यूब है जो मुंह से शुरू होती है और एनस (Anus) तक जाती है। इसमें लाखों बैक्टीरिया, कवक या परजीवी रहते हैं। इन सबको माइक्रोबायोम कहा जाता है। आमतौर पर अन्नप्रणाली (Esophagus), पेट (Stomach) और इंटेस्टायन (Intestine) सभी एक साथ काम करते हैं ताकि हमें खाना खाने और पचाने में कोई समस्या न हो। “गट हेल्थ” को हम गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट में मौजूद बैक्टीरिया के फंक्शन और बैलेंस के अनुसार परिभाषित कर सकते है।

    एंग्जाइटी क्या है? (About Anxiety)

    एंग्जाइटी यानी चिंता अगर कुछ बातों के लिए चिंता होती है जैसे किसी नए जगह पर जाना, नए कामकाज की शुरुआत करना या किसी परीक्षा में हिस्सा लेना तो ऐसी स्थिति में चिंता होना स्वाभाविक है। शायद ऐसी स्थिति आपको कठिन परिश्रम के लिए प्रेरित कर सकती है, लेकिन भविष्य में क्या होगा या भविष्य की बातों से जुड़ी परेशानियां अगर लगातार मन में घर कर ले तो ऐसी स्थिति चिंता का कारण बन सकती है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि अपनी एंग्जाइटी (Anxiety) को कम करने के लिए एल्कोहॉल का सेवन करना अच्छा होता है, जबकि यह धारणा पूरी तरह से गलत है।

    और पढ़ें : Herbs and Supplements for Acid Reflux: जानिए एसिड रिफ्लक्स में हर्ब्स और सप्लिमेंट्स के बारे में यहां!

    हेल्दी गट और एंग्जायटी (Gut and Anxiety): गट और एंग्जायटी का क्या है आपसी कनेक्शन?

    गट और एंग्जायटी (Gut and Anxiety)

    नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन (National Center for Biotechnology Information), सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (Center for Disease Control and Prevention), दि डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ, स्टेट गवर्नमेंट ऑफ विक्टोरिया, ऑस्ट्रेलिया (The Department of Health, State Government of Victoria, Australia) एवं अन्य रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार ब्रेन (Brain) और सेंट्रल नर्वस सिस्टम (Central nervous system) का बॉडी पर अत्यधिक कंट्रोल होता है, लेकिन गट का अपना भी ब्रेन होता है जिसे एंटरिक नर्वस सिस्टम (Enteric Nervous System [ENS]) कहते हैं। एंटरिक नर्वस सिस्टम का ब्रेन के बाहरी हिस्से में मौजूद नर्वस जो गट से जुड़े होते हैं और इन दोनों का आपसी कम्युनिकेशन रहता है। अब ऐसे में अगर एंग्जायटी की समस्या शुरू हो जाए तो इससे गट पर बुरा प्रभाव सकता है। इसलिए गट और एंग्जायटी की समस्या बचने के लिए हेल्दी डायजेशन जरूरी है।

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    गट और एंग्जायटी (Gut and Anxiety): गट को स्वस्थ्य बनाये रखने के लिए क्या करें? (Tips for Healthy Gut)

    गट को स्वस्थ्य बनाने के लिए निम्नलिखित टिप्स को फॉलो किया जा सकता है। जैसे:

    • अपने लंच (Lunch) या डिनर (Dinner) को छोटे-छोटे मील में डिवाइड करें या एक बार में ज्यादा खाने की आदत फोलो ना करें।
    • समय पर सोने (Sleep) की आदत डालें। बेहतर होगा समय पर सोने और जल्दी जागने की आदत डालें।
    • रोजाना एक्सरसाइज (Workout), योगासन (Yoga) या टहलने (Walking) को अपने रूटीन में शामिल करें।
    • बॉडी को फिजिकली एक्टिव रखें। इसलिए फिजिकली एक्टिव (Physically active) रहें।
    • खाने को अच्छी तरह से चबा कर खाएं और तेजी से नहीं खाएं।
    • खाने के तुरंत बाद पानी (Water) का सेवन ना करें।
    • सोने के दो से ढ़ाई घंटे पहले डिनर (Dinner) करें।
    • खाने के तुरंत बाद ना सोएं।
    • ढ़ीले कपड़े पहनें।
    • पानी (Water) एवं तरल पदार्थों का सेवन करें।
    • जरूरत से ज्यादा ना खाएं।
    • हमेशा ताजा खाना खाएं।
    • डिनर के वक्त थोड़ा कम खाएं।
    • अपने डेली डायट में हेल्दी फैट (Healthy fat), दूध (Milk), दही (Curd) को शामिल करें।
    • चीनी की जगह गुड़ या किशमिश का सेवन करें।

    नोट: अच्छे डायजेशन के लिए जंक फूड (Junk food) एवं तैलीय चीजों (Oily food) से दूरी बनायें।

    इन आसान से टिप्स को अगर दैनिक जीवन में शामिल किया जाए तो इससे गट के साथ-साथ अन्य तकलीफों से भी बचाव में मदद मिल सकती है। इसलिए इनका पालन जरूर करें।

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    गट और एंग्जायटी (Gut and Anxiety): एंग्जाइटी से बचाव के लिए क्या करें? (Tips to manage anxiety)

    • कैफीन (Caffeine) और एल्कोहॉल (Alcohol) का सेवन ना करने या कम से कम करें।
    • रोजाना नींद (Sleep) पूरी करें।
    • रेग्यूलर एक्सरसाइज (Exercise) या योग करें।
    • ब्रीदिंग एक्सरसाइज (Breathing exercises) जरूर करें।
    • नियमित रूप से मेडिटेशन (Meditation) करें।
    • अपनी हॉब्बीज (Hobbies) और पसंदीदा एक्टिविटी (Activities) को जरूर करें।
    • स्मोकिंग (Smoking) ना करें
    • हेल्दी फूड हैबिट्स (Healthy Food Habits) को अपने दिनचर्या में शामिल करें।
    • हेल्दी लाइफस्टाइल (Healthy Lifestyle) फॉलो करें।

    इन टिप्स को फॉलो कर एंग्जाइटी से बचाव में मदद मिल सकती है।

    नोट: अगर यहां बताये गए टिप्स से फायदा ना होने पर डॉक्टर से कंसल्टेशन में देरी ना करें, क्योंकि अगर ज्यादा वक्त लिया जाए तो इससे फिजिकल और मेंटल दोनों प्रॉब्लम शुरू हो सकती है और ये स्थिति गंभीर रूप भी ले सकती है।

    और पढ़ें : Foods To Avoid With IBS: आईबीएस से बचने के लिए इन फूड्स को हटा दें डायट से!

    अगर आप डायजेस्टिव सिस्टम (Digestive System) या गट और एंग्जायटी (Gut and Anxiety) से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। हैलो स्वास्थ्य के हेल्थ एक्सपर्ट आपके सवालों का जवाब जल्द से जल्द देने की कोशिश करेंगे। अगर आप डायजेस्टिव सिस्टम (Digestive system) की समस्या से पीड़ित हैं, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा, क्योंकि डॉक्टर पेशेंट की हेल्थ कंडिशन (Health Condition) को समझकर और बीमारी की गंभीरता को ध्यान में रखकर इलाज करते हैं।

    शारीरिक बीमारी हो या मानसिक परेशानी दोनों से ही दूर रहें। इस बदलते वक्त में तनाव की वजह से कई शारीरिक समस्या अपने आप मनुष्य को शरीर को अपना आशियाना बना लेती है। जबकि इन स्थिति से अपने आपको बचाये रखें। जानिए मेंटल हेल्थ को हेल्दी रखने के लिए मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल दिल्ली के मेंटल हेल्थ डिपार्टमेंट के डायरेक्टर एवं हेड डॉ. समीर मल्होत्रा की क्या है राय इस नीचे 👇 दिए लिंक में।

    हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

    सूत्र

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    Anxiety/https://www.healthdirect.gov.au/anxiety/Accessed on 11/07/2022

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    Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 12/07/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड