Peach: आड़ू क्या है?

By Medically reviewed by Dr. Shruthi Shridhar

परिचय

आड़ू (Peach) क्या है ?

आड़ू को पारसी सेब भी कहा जाता है। ये एक स्वादिष्ट लोकप्रिय फल है। सबसे पहले इसकी खेती चीन में की गई थी लेकिन, आज इसे दुनियाभर में उगाया जाता है। भारत में इसकी खेती कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल में की जाती है। औषधिय गुणों से समृद्ध आड़ू एक रसीला फल है। बाहर से ये पीले रंद का होता है और इसके अंदर कठोर बीज होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, मिनरल और फाइबर पाए जाते हैं जो हमारे शरीर को कई तरह से लाभ पहुंचाते हैं। इसमें मौजूद न्यूट्रिएंट्स शरीर के जख्मों को भरने से लेकर इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसका प्रयोग जैम, जेली और चटनी बनाने के लिए भी किया जाता है।

आड़ू का उपयोग किस लिए किया जाता है?

 एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर:

आड़ू कई विटामिन, मिनरल और अन्य गुणकारी पोषक तत्वों से भरपूर है। इसमें विटामिन-ए, विटामिन-सी, विटामिन-ई, पोटैशियम, मैंगनीज, नियासिन और फॉस्फोरस शामिल होते हैं। जो हमें कई बीमारियों से दूर रखने में मदद करते हैं। ये जितना फ्रेश और पका हुआ होता है उतने ही ज्यादा इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट शामिल होते हैं। एक शोध के अनुसार, स्वस्थ पुरुषों को जब ताजे आड़ू से निकाला जूस दिया गया तो आधे घंटे के अंदर एंटी-ऑक्सिडेंट क्रियाओं को काम करते देखा गया। 

इम्यून सिस्टम को बनाए मजबूत:

आड़ू में अच्छी मात्रा में विटामिन-सी होता है जो, एंटी-ऑक्सीडेंट की तरह काम करता है। ये हमारे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करता है। पीच के फूल भी डाइजेशन के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। चाइनीज दवाइयों में इनका इस्तेमाल डाइजेस्टिव डिसऑर्डर के लिए किया जाता है। जानवरों पर किए गए एक शोध के अनुसार, पीच के फूलों में कुछ कंपाउंड ऐसे होते हैं जो पेट की जिद्दी चर्बी को कम करने के साथ कब्ज की परेशानी दूर करने में मदद करती है।

किडनी के लिए लाभदायक:

आड़ू में पाए जाने वाला पोटैशियम हमारी किडनी के स्वास्थ के लिए अच्छा होता है। यह यूरिनरी ब्लैडर के लिए एक क्लींजिंग एजेंट की तरह काम करता है। इससे किडनी संबंधित परेशानियां कोसों दूर रहती हैं। 

दिल को बनाए स्वस्थ:

आड़ू से दिल संबंधित बीमारियां जैसे कोरोनरी ह्दय रोग और स्ट्रोक होने की संभावना कम होती है। इसमें पोटैशियम, आयरन और फ्लोराइड जैसे जरूरी खनिज होते हैं जो, ह्दय गति और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखते हैं। 

आंखों के लिए वरदान:

आड़ू आंखों को स्वस्थ रखने के साथ उनकी विजन पॉवर को बढ़ाने का काम करता है। इसमें विटामिन-ए, सी और कैरोटीनॉयड्स पाए जाते हैं जो, ग्लॉकोमा को पास भी नहीं भटकने देते। इसके अलावा विटामिन-ए रेटिना को स्वस्थ रखने में बहुत मदद करता है।

कैंसर से बचाव:

आड़ू में एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो, कैंसर से तो बचाते ही हैं साथ ही कुछ अध्ययनों में इस बात की पुष्टि हुई है कि ये कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट से बचने की क्षमता को भी बढ़ाते हैं।

वजन को करे कम:

आड़ू में भरपूर मात्रा में न्यूट्रिएंट्स के अलावा 80% पानी पाया जाता है। इसमें कैलोरी की मात्रा बेहद कम होती है। ये वजन को कम करने में मददगार है।

दांतों और हड्डियों को बनाए मजबूत:

आड़ू में फॉस्फोरस के साथ कैल्शियम भी होता है जो, हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है। इसके अलावा ये शरीर में मौजूद टिश्यू को मेंटेन और रिपेयर करता है। 

इन बीमारियों को भी करता है दूर:

  • कफ
  • क्रोनिक ब्रोंकाइटिस
  • कोलेस्ट्रॉल को करे नियंत्रित
  • हड्डियों को बनाए मजबूत
  • मस्तिष्क को करे बेहतर
  • बुढ़ापे को रखे दूर
  • तनाव
  • शरीर से विषाक्त पदार्थों को करे दूर

 कैसे काम करता है आड़ू?

यूएसडीए डेटा के अनुसार, आड़ू में बहुत सारे न्यूट्रिएंट्स होते हैं जो हमारी सेहत को बनाए रखने में मदद करते हैं। ये पोटेशियम, विटामिन-ए, बीटा-कैरोटीन और विटामिन्स का स्त्रोत है। इसके साथ ही इसमें विटामिन-ई, विटामिन-के, विटामिन-बी1, विटामिन-बी2, विटामिन-बी3, विटामिन-बी6 और फोलेट भी पाया जाता है। इसमें  मिनिरल्स जैसे कैल्शियम, मैग्नीजीयम, आयरन, फॉस्फोरस, जिंक और कॉपर भी शामिल होते हैं। एक मीडियम साइज आड़ू में 59 कैलोरी 0 कोलेस्ट्रॉल होता है।

यूएस डिपार्टमेंट ऑफ ऐग्रिकल्चर में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, आड़ू में फिनोलिक और कैरोटिनॉइड (carotenoid) जैसे तत्व होते हैं जो कैंसर से बचाव में मदद करते हैं।

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उपयोग

कितना सुरक्षित है आड़ू का उपयोग ?

  • सीमित मात्रा में आड़ू का सेवन सेफ होता है। इसका अधिक सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। पुरुषों मे इसको अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से कोलोरेक्टल कैंसर(colorectal cancer) होने की संभावना होती है। इसको जरूरत से ज्यादा खाने से पेट में ब्लोटिंग की परेशानी हो सकती है।
  • इसमें सैलिसिलेट(salicylates) और एमिग्डालिन(amygdalin) नामक कंपाउंड होते हैं, जो कुछ लोगों में एलर्जी की प्रतिक्रिया का कारण बन सकते हैं।
  • हाई शुगर वाले लोग इसका सेवन डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद ही करें।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान इसका सेवन फायदेमंद होता है लेकिन, डॉक्टर से परामर्श के बाद ही इसका सेवन करें। बहुत ज्यादा मात्रा में इसका सेवन करना मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसमें अधिक मात्रा में फोलिक एसिड होता है जिससे पेट में दर्द, डायरिया, स्किन रैशेज, उल्टी और पेट खराब जैसी परेशानियां हो सकती हैं।
  • आड़ू के बीजों का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इनमें साइनाइड होता है। जिन उत्पादों में इसके के बीज हो उन्हें लेने से पहले एक बार अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।

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साइड इफेक्ट्स

आड़ू से मुझे क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं?

  • मुंह, होठों और जीभ में लाली या सूजन आना
  • गले में सूजन
  • पेट में दर्द
  • सांस लेने में परेशानी
  • मतली
  • दस्त
  • चक्कर आना

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डोजेज

आड़ू को लेने की सही खुराक क्या है ?

इस हर्बल सप्लिमेंट की खुराक हर मरीज के लिए अलग हो सकती है। आपके द्वारा ली जाने वाली खुराक आपकी उम्र, स्वास्थ्य और अन्य कई चीजों पर निर्भर करती है। हर्बल सप्लिमेंट हमेशा सुरक्षित नहीं होते हैं। इसलिए सही खुराक की जानकारी के लिए हर्बलिस्ट या डॉक्टर से चर्चा करें।

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उपलब्ध

किन रूपों में उपलब्ध है?

  • पीच टिंचर
  • पीच इंफ्यूजन
  • पीच टी
  • पीच जूस
  • पीच एक फल के तौर पर
  • आड़ू के फूल, पत्तियां और छाल का भी कई बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

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रिव्यू की तारीख सितम्बर 20, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया अक्टूबर 21, 2019