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ड्रीम फीडिंग क्या है? जानिए इसके फायदे और नुकसान

ड्रीम फीडिंग क्या है? जानिए इसके फायदे और नुकसान

नीता शाह 5 महीने के बच्चे की मां है। अपने शिशु की स्तनपान की आदत से वे काफी थक जाती थी, रात में उन्हें 4-5 बार शिशु को दूध पिलाना पड़ता है। जिसका उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर होने लगा। वह अपनी एक सहेली से मिली जो दो बच्चों की मां है और यह जानना चाहा कि उसने दो बच्चों को किस तरह संभाला। नीता की सहेली शैली ने बताया कि उसकी तरह ही पहले बच्चे के समय वह भी बहुत परेशान थी, लेकिन दूसरे बच्चे के समय उसे एक मैजिकल फीडिंग रूटीन पता चला जिसे ड्रीम फीड कहते हैं। इसकी बदौलत वह बच्चे को ठीक से स्तनपान कराने के साथ ही अपनी नींद और सेहत का भी पूरा ध्यान रख पाती थी। शैली ने नीता को ड्रीम फीडिंग के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए बाल रोग विशेषज्ञ से मिलने के लिए राजी कर लिया।

डॉक्टर से मिलने के बाद नीता समझ गई कि ड्रीम फीडिंग क्या है और शिशु को ड्रीम फीडिंग कराने के लिए क्या करने की जरूरत है। दो महीने बाद जब नीता और शैली एक-दूसरे से मिले तो नीता बहुत खुश थी और शैली को उसके शानदार आइडिया के लिए धन्यवाद कह रही थी। स्तनपान करने वाले बच्चों को रात में चैन की नींद सुलाने के लिएड्रीम फीड बेहतरीन तरकीब है। चलिए जानते हैं यह क्या है और कैसे काम करती है।

ड्रीम फीडिंग क्या है?

ड्रीम फीडिंग का मतलब है बच्चे को नींद में स्तनपान कराना। ड्रीम फीड आमतौर पर रात के 10 या 11 बजे सोने से पहले किया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि बच्चे का पेट भरा रहे और वह लंबे समय तक या सुबह तक चैन से सो सके। हालांकि ड्रीम फीडिंग जन्म लेने के तुरंत बाद और एक हफ्ता तक ठीक से काम नहीं करता है, लेकिन एक सप्ताह के बाद ड्रीम फीडिंग की मदद ली जा सकती है।

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ड्रीम फीड कैसे काम करती है?

यदि आप ड्रीम फीडिंग के फायदे लेना चाहती हैं, तो बच्चे को नियमति समय पर सुलाना होगा। रात को 10 या 11 बजे बच्चे को धीरे से उठाकर अपने ब्रेस्ट के पास ले जाएं, ध्यान रहे कि आप उसे जगाएं नहीं। स्तन के पास ले जाने पर बच्चा अपने आप दूध पीने लगता है। बच्चे की नींद में बाधा न आए इसलिए उसे उठाते समय लाइट न जलाएं और न ही लोरी गाए। यदि बहुत जरूरी न हो, तो डायपर भी न बदलें। शिशु को स्तनपान कराने के बाद उसे धीरे से बिस्तर पर सुला दें और कमरे में शांति व अंधेरा बनाए रखें। कुछ बच्चों पर यह तरकीब अच्छी तरह काम करती है, जबकि कुछ पर काम नहीं करती।

ऐसे में कुछ समय दें और ड्रीम फीड्स को बार-बार ट्राई करते रहें, जब तक कि आपको और आपके शिशु को इसकी आदत न पड़ जाए। कुछ बच्चे ड्रीम फीड के दौरान पेट भरकर दूध पी लेते हैं और आराम से सुबह तक सोते हैं, जबकि कुछ ड्रीम फीडिंग के समय उठ जाते हैं और फिर जल्दी नहीं सोते। साथ ही कुछ बच्चे अच्छी तरह ड्रीम फीड कराने के बाद भी रात को कई बार उठ जाते हैं और इस तरह ड्रीम फीड सफल नहीं हो पाती।

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आपको ड्रीम फीडिंग की शुरुआत कब करनी चाहिए?

ड्रीम फीड किसी भी उम्र के बच्चे के लिए काम कर सकती है और जब तक यह काम कर रहा है आप इसे जारी रख सकते हैं। 8 महीने की उम्र से बच्चे को ड्रीम फीडिंग कराई जा सकती है, क्योंकि इस उम्र में ज्यादातर बच्चे बिना भूख महसूस किए रातभर सोते हैं। चूंकि उनका पेट बढ़ता है इसलिए वह सोने से पहले पर्याप्त दूध पी लेते हैं। आपका शिशु स्वस्थ है और उसे पोषण के लिए रात को अतिरिक्त स्तनपान की जरूरत है या नहीं यह जानने के लिए डॉक्टर से परामर्श करें।

और पढ़ें: बच्चाें में हेल्दी फूड हैबिट‌्स को डेवलप करने के टिप्स

ड्रीम फीडिंग कैसे आपकी मदद करती है?

बच्चा जब ड्रीम फीडिंग के साथ सहज हो जाता है तो आप पूरी रात चैन से सो सकती हैं और आपको बीच में उसे स्तनपान कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

ड्रीम फीडिंग के फायदे:-

  1. ड्रीम फीडिंग से बच्चे का पेट रात में भी भरा रहता है और वह बार-बार उठता नहीं है। जिससे मां की नींद भी पूरी हो जाती है।
  2. शिशु के स्लीपिंग टाइम पर भी उसे दूध पिलाना आसान होता है

नवजात शिशु ज्यादा सोता है इसलिए भी ड्रीम फीडिंग लाभकारी माना जाता है, लेकिन इसके भी कुछ नुकसान हो सकते हैं।

ड्रीम फीडिंग के चैलेंज-

  • ड्रीम फीडिंग के बावजूद शिशु कई बार जागता है। शिशु सिर्फ भूख लगने पर ही नहीं बल्कि कई अन्य कारण जैसे बच्चे का डायपर गीला होने की स्थिति में भी जाग सकता है या जाग सकती है।
  • कुछ बच्चे ड्रीम फीडिंग के बाद तुरंत जाग भी जाते हैं।
  • ड्रीम फीडिंग की वजह से बच्चे को कई बार ज्यादा भूख भी नहीं लगती है।
  • कभी-कभी ड्रीम फीडिंग के दौरान भी शिशु जाग सकता है।
  • नवजात शिशुओं के लिए ड्रीम फीडिंग का विकल्प ठीक है, लेकिन बच्चे के बड़े होने के साथ-साथ ड्रीम फीडिंग टेक्निक नहीं अपनाई जा सकती है।

और पढ़ें: ब्रेस्ट मिल्क बाथ से शिशु को बचा सकते हैं एक्जिमा, सोरायसिस जैसी बीमारियों से, दूसरे भी हैं फायदे

ड्रीम फीडिंग कब बंद करना चाहिए?

यदि आप शिशु को मिड नाइट में दूध पिलाती हैं या शिशु को उसी समय दूध पीने की आदत है, तो ड्रीम फीडिंग की अवधि को धीरे-धीरे 15 मिनट बढ़ाते जाएं। इसी तरह आप इसे धीरे-धीरे बंद भी कर सकती हैं। आपका शिशु जब 8 से 9 महीने का हो जाए तो आप ड्रीम फीडिंग बंद कर सकती हैं।

ड्रीम फीडिंग से जुड़ी अहम जानकारी क्या है?

  • ड्रीम फीडिंग करवाने के बाद एक से दो मिनट तक ध्यान रखें कि बच्चे का पेट दबा हुआ न हो।
  • बच्चे को सिर्फ समय के अनुसार ही दूध नहीं पिलाएं बल्कि अगर उसे भूख लगती है तो उसे फीड करवाएं।
  • ड्रीम फीडिंग के तुरंत बाद डायपर चेंज करने की आदत न डालें। ऐसा करने से शिशु जाग जाएगा। इसलिए ड्रीम फीडिंग के पहले डायपर की जांच कर लें

अगर आप ड्रीम फीडिंग से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

 

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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लेखक की तस्वीर
Kanchan Singh द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 11/08/2020 को
Dr. Shruthi Shridhar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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