home

हम इसे कैसे बेहतर बना सकते हैं?

close
chevron
इस आर्टिकल में गलत जानकारी दी हुई है.
chevron

हमें बताएं, क्या गलती थी.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
इस आर्टिकल में जरूरी जानकारी नहीं है.
chevron

हमें बताएं, क्या उपलब्ध नहीं है.

wanring-icon
ध्यान रखें कि यदि ये आपके लिए असुविधाजनक है, तो आपको ये जानकारी देने की जरूरत नहीं। माय ओपिनियन पर क्लिक करें और वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखें।
chevron
हम्म्म... मेरा एक सवाल है
chevron

हम निजी हेल्थ सलाह, निदान और इलाज नहीं दे सकते, पर हम आपकी सलाह जरूर जानना चाहेंगे। कृपया बॉक्स में लिखें।

wanring-icon
यदि आप कोई मेडिकल एमरजेंसी से जूझ रहे हैं, तो तुरंत लोकल एमरजेंसी सर्विस को कॉल करें या पास के एमरजेंसी रूम और केयर सेंटर जाएं।

लिंक कॉपी करें

नवजात शिशु के लिए 6 जरूरी हेल्थ चेकअप

नवजात शिशु के लिए 6 जरूरी हेल्थ चेकअप

अनामिका के घर में हाल ही में ही पहले बच्चे की किलकारियां गूंजी हैं। बच्चे को पहली बार गोद में लेकर वह और उसके पति बहुत खुश हैं। लेकिन, अनामिका के सास-ससुर जन्म के बाद चिंतित थें कि बच्चा बिलकुल ठीक है या नहीं। वह डॉक्टर से जानना चाहते हैं कि क्या कोई ऐसे परिक्षण यानी बेबी टेस्टिंग (Baby testing) है जिससे नवजात बच्चे में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का पता लगाया जा सके?

ऐसे कई पेरेंट्स हैं जो अपने बच्चे को लेकर इस तरह की चिंता से परेशान रहते हैं। इस बारे में डॉ माइकल सल्लुकी (अमेरिका) एक स्वास्थ्य वेबसाइट से बात करते हुए कहते हैं कि नवजात शिशु में स्क्रीनिंग से (New born baby testing) हेल्थ समस्याओं का पता लगाना आसान होता है। नवजात शिशु की स्क्रीनिंग (New born baby testing) एक चिकित्सीय प्रक्रिया है जहां नवजात शिशु को जन्म के 72 घंटे के भीतर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का पता लगाने के लिए जांच की जाती है। इसमें बच्चे को विभिन्न चयापचय विकार, रक्त रोग, आनुवांशिक विकारों के लिए परीक्षण किया जाता है। दुनिया के कई देशों में ये परीक्षण अनिवार्य हैं लेकिन, भारत में इन परीक्षणों की पेशकश केवल तभी दी जाती है जब माता-पिता उन्हें पूरा करना चाहते हैं। विडंबना यह भी है कि हर कोई इन परीक्षणों के बारे में नहीं जानता है।

यह भी पढ़ें : बच्चे को होने वाले फोड़े-फुंसियों का ऐसे करें इलाज

1. हियरिंग स्क्रीनिंग बेबी टेस्टिंग

यह कैसे किया जाता है ?

किसी भी हियरिंग डिसेबिलिटी के लिए नवजात शिशु का परीक्षण किया जाता है। डॉक्टर बच्चे के कान में एक इयरफोन लगाते हैं। फिर उनके मस्तिष्क की तरंगों को रिकॉर्ड करने के लिए उसके सिर पर निगरानी उपकरण लगाया जाता है। क्योंकि वह इयरफोन के माध्यम से भेजे गए ध्वनियों के प्रति अधिक प्रतिक्रिया करता है।

बच्चे को इसकी आवश्यकता क्यों?

क्योंकि जीवन के पहले कुछ महीनों में बच्चे में सुनने संबंधी परेशानियों का पता लगाना कठिन होता है। कई नवजात शिशु को इस परीक्षण की आवश्यकता होती है। यह किसी भी जन्मजात सुनवाई विकारों को रोकने में सहायक हो सकता है।

यह कब किया जाता है?

आमतौर पर जन्म के बाद पहले 72 से 48 घंटों में के भीतर।

साइड इफेक्ट:

इससे शिशु को किसी भी प्रकार का साइड इफेक्ट नहीं है ।

यह भी पढ़ें : जानें बच्चे के सर्दी जुकाम का इलाज कैसे करें

2. हेपेटाइटिस-बी बेबी टेस्टिंग

कैसे किया जाता है ?

हेपेटाइटिस-बी की जांच के लिए इंजेक्शन बच्चे की जांघ में इंजेक्ट किया जाता है।

शिशु को इसकी आवश्यकता क्यों है ?

प्रसव के दौरान मां और भ्रूण के रक्त के मिश्रण के कारण, हेपेटाइटिस बी से ग्रसित माताओं से शिशु के भी प्रभावित होने की संभावना रहती है। इसके बचाव के लिए तीन टीकाकरणों की एक श्रृंखला से इसके खतरों को कम किया जाता है।

यह भी पढ़ें: आंवला, अदरक और लहसुन बचा सकते हैं हेपेटाइटिस बी से आपकी जान

यह कब किया जाता है ?

हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव माताओं से पैदा होने वाले शिशुओं को वैक्सीन और एंटीसेरम मिलता है – इसमें संक्रमण से लड़ने वाले एंटीबॉडी होते हैं । इसे पैदा होने के 12 घंटों के भीतर शिशु को दे देना चाहिए।

साइड इफेक्ट:

इंजेक्शन से प्रभावित हिस्सों पर संभावित लालिमा या सूजन।

यह भी पढ़ें : नवजात शिशु को घर लाने से पहले इस तरह तैयार करें शिशु का घर

3. विटामिन-के बेबी टेस्टिंग

यह कैसे किया जाता है ?

रक्तस्राव (Bleeding) विकारों को रोकने के लिए जांघ में एक ‘विटामिन-के’ इंजेक्शन सभी नवजात शिशुओं को दिया जाता है।

शिशु को इसकी आवश्यकता क्यों है ?

हालांकि यह दुर्लभ है, 0.25% से 1.7% शिशु विटामिन के की कमी के साथ पैदा होते हैं। यह खून को ठीक से थक्का जमने से रोक सकता है, जिससे इन बच्चों को अत्यधिक रक्तस्राव होने का खतरा रहता है। परीक्षण करने और परिणामों की प्रतीक्षा करने के बजाय, डॉक्टर सावधानी से सभी नवजात शिशुओं को ‘विटामिन-के’ का इंजेक्शन देते हैं। इससे वीकेडीबी की संभावना काफी कम हो जाती है।

साइड इफेक्ट्स

आम तौर पर कोई नहीं। सभी इंजेक्शनों के साथ, हालांकि, संक्रमण का थोड़ा जोखिम है। कुछ माता-पिता सुई के बारे में कम चिंतित हैं क्योंकि वे पुरानी रिपोर्टों के बारे में हैं कि विटामिन-के और बचपन के ल्यूकेमिया के बीच संबंध हो सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने एक बयान जारी कर कहा कि एक टास्क फोर्स द्वारा किए गए शोध में विटामिन के इंजेक्शन और ल्यूकेमिया के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया।

यह भी पढ़ें : शिशु की आंखों में काजल लगाना सही या गलत?

4. मेटाबोलिक डिसऑर्डर स्क्रीनिंग बेबी टेस्टिंग

यह कैसे किया जाता है ?

आपके बच्चे की एड़ी सेब्लड सैंपल निकालकर टेस्टिंग के लिए लैब भेजा जाता है।

शिशु को इसकी आवश्यकता क्यों है ?

हालांकि मेटाबॉलिक संबंधी विकार मानसिक विकार, शारीरिक विकास में अवरूद्धऔर कई केस में मृत्यु का कारण बन सकती हैं। लेकिन, अगर जल्दी पकड़ लिया जाता है, तो इसको रोका जा सकता है। आपके बच्चे को अलग-अलग विकारों के लिए कहीं से भी जांच की जाएगी। उसे फेनिलकीटोन्यूरिया (ऐसी स्थिति जो शरीर के लिए कुछ खाद्य पदार्थों को पचाना मुश्किल बनाता है) की जांच की जाएगी। गैलेक्टोसिमिया (आनुवांशिक स्थिति जिसमें शरीर में एक निश्चित शर्करा को तोड़ने वाले एंजाइम की कमी होती है) और जन्मजात हाइपोथायरायडिज्म (एक अंडरएक्टिव थायरॉयड ग्रंथि के कारण होने वाली बीमारी) आदि की भी जांच की जाती है।

यह भी पढ़ें: हाइपोथायरॉयडिज्म होने पर क्या खाएं और क्या नहीं?

यह कब किया जाता है ?

जीवन के पहले 24 से 48 घंटों के भीतर।

साइड इफेक्ट्स

आमतौर पर कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होता। आपके बच्चे को अपनी एड़ी में हल्का सा दर्द महसूस हो सकता है। इंजेक्शन वाले पंचर एक पट्टी के साथ कवर किया गया होता है।

5. सिकल सेल एनीमिया बेबी टेस्टिंग

इसमें, लाल रक्त कोशिकाएं सही आकार में नहीं होती हैं। इसलिए सामान्य लाल रक्त कोशिका सही रूप में काम नहीं करती हैं। इसके कारण एनीमिया होने का खतरा बढ़ जाता है।

शिशु को इसकी आवश्यकता क्यों है ?

सिकल सेल रोग (एससीडी) ब्लड संबंधी विकार का एक समूह है जो आम तौर पर बच्चे को माता-पिता से विरासत में मिलता है। सबसे आम प्रकार को सिकल सेल एनीमिया के रूप में जाना जाता है। इसके कारण लाल रक्त कोशिकाओं में पाए जाने वाले ऑक्सीजन-वाहक प्रोटीनहीमोग्लोबिन में असामान्यता होती है। यह कुछ परिस्थितियों में एक कठोर, सिकल जैसा आकार का होता है। इसकी समस्याएं आम तौर पर लगभग 5 से 6 महीने की उम्र से शुरू होती हैं। बेबी टेस्टिंग से इस विकार का पता लगा कर समय से पहले इसे रोका जा सकता है।

साइड इफेक्ट्स

सामान्यतः नहीं होता।

6. जन्मजातअधिवृक्कीयअधिवृद्धि बेबी टेस्टिंग

एक आनुवंशिक विकार जो कोर्टिसोल और / या एल्डोस्टेरोन के परिणामस्वरूप एड्रेनल कॉर्टिकल कोशिकाओं का हाइपरप्लासिया होता है। यह एक अनुवांशिक विकार है, जहां जीन उत्परिवर्तन से गुजरता है। जिसके परिणामस्वरूप सेक्सस्टेरॉयड का कम उत्पादन होता है। नवजात शिशुओं में भी कई अलग-अलग तरह की शारीरिक परेशानी होती है

इन बेबी टेस्टिंग के करने का मुख्य मकसद किसी बीमारी का पता लगाना है, ताकि समय रहते इससे निपटा जा सके।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Baby Testing: 6 Essential Health Screenings for Your Newborn/https://www.parents.com/baby/care/pediatricians-medicine/5-essential-health-screenings-your-baby-needs/Accessed on 13/12/2019

Newborn Screening Tests/https://kidshealth.org/en/parents/newborn-screening-tests.html/Accessed on 13/12/2019

Newborn screening tests/https://medlineplus.gov/ency/article/007257.htm/Accessed on 13/12/2019

What disorders are included in newborn screening?/https://ghr.nlm.nih.gov/primer/newbornscreening/nbsdisorders/Accessed on 13/12/2019

What is newborn screening?/https://ghr.nlm.nih.gov/primer/newbornscreening/nbs/Accessed on 13/12/2019

लेखक की तस्वीर
Dr. Abhishek Kanade के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Nikhil Kumar द्वारा लिखित
अपडेटेड 17/10/2019
x