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बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए सख्त रवैया अपनाना कितना सही

बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए सख्त रवैया अपनाना कितना सही

नखरे और बदमाशियां करना बच्चों की फितरत में शामिल होता है। ऐसे में माता-पिता को ये सीखने की जरूरत होती है कि वे कैसे बच्चे के व्यवहार को सकारात्मक रूप से हैंडल करें। इसके अलावा पेरेंट्स को बच्चों को अनुशासन सिखाने की भी जरूरत होती है। हालांकि, यह इतना आसान नहीं होता है, जितना लगता है। बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए बहुत धैर्य की जरूरत होती है। जब बात बच्चों के नखरों वाले व्यवहार से निपटने की होती है तो कई बार पेरेंट्स अपना आपा खो बैठते हैं, जोकि सही तरीका नहीं है।

साइकोलॉजी टुडे के अपने अंश में डॉ ड्रेक्सलर ने माता-पिता को बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए उन्हें डराने या उनमें भय उत्पन्न करने की बजाय उनसे जुड़ने और चर्चा करने की सलाह दी है। पेरेंटिंग के दौरान बच्चों को अनुशासन सिखाने को एक कला माना जाता है, जो कि हमारे व्यवहार पर निर्भर करता है। इस बात को लेकर एक विचार भी बताया गया है वो यह कि बच्चे कभी भी बुरे नहीं होते। अच्छे और बुरे बस व्यवहार होते हैं। बच्चों को डांटने और मारने के बिना भी बुरा व्यवहार करने से रोका जा सकता है और अच्छा व्यवहार करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। जो लोग खुद अनुशासित रहते हैं वे बच्चों को अनुशासन सिखाने को लेकर भी कोई अनदेखी नहीं करते हैं। वे हमेशा बच्चों को समझाने और सीखाने में मदद करते हैं। बच्चों को अनुशासन सिखाने का मतलब है कि वे हर परिस्थिति को शांत और सम्मानजनक तरीके से हैंडल करना सीखाना।

सकारात्मक अनुशासन में कई अलग-अलग तकनीकें शामिल हैं, जो पेरेंट्स के लिए अपने बच्चों के व्यवहार का निर्माण करने के लिए एक अधिक प्रभावी तरीका साबित हो सकती हैं।

और पढ़ें : बच्चे को डिसिप्लिन सिखाने के 7 टिप्स

बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए क्या करें

“स्वस्थ और सकारात्मक अनुशासन की चाबी हमारा दृष्टिकोण है।” लैंसबरी (लेखक, नो बैड किड्स: टोडलर डिसिप्लिन विदाउट शेम) अपनी वेबसाइट एलीवेटिंग चाइल्ड केयर में लिखते हैं कि कैसे आप बच्चों के नखरों से निपटने के लिए अधिक सकारात्मक अनुशासन के लिए वातावरण सेट कर सकते हैं।

बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए दिनचर्या तय करें

बच्चे का रुटीन सेट करने से आपको बच्चे में प्रैक्टिकल व्यवहार निर्धारित करने में मदद मिलती है। सबसे पहले अपने बच्चे से इस बारे में बात करें। आप उनके रुटीन में जो बदलाव करना चाहते हैं उस बारे में उनसे चर्चा करें। उनकी दिनचर्या में थोड़ा सा बदलाव होने पर उनके उनके व्यवहार में परिवर्तन होना लाजमी है। अगर वो थका हुआ महसूस कर रहे हैं तो इन सभी चीजों के लिए तैयार रहें और उसी अनुसार अपनी प्रतिक्रिया दें।

बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए नकारात्मक सोच को रोकें

सभी माता-पिता चिंता करते हैं कि कहीं उनका बच्चा बिगड़ तो नहीं रहा या गलत संगत में तो नहीं पड़ गया है। सकारात्मक अनुशासन को लेकर लैंसबरी कहते हैं कि बच्चे आपकी चिंता को महसूस कर सकते हैं, तो इसे लेकर चिंतित होने की बजाय, अपने बच्चे के व्यवहार के बारे में कुछ करें। बच्चे को किसी भी तरह का टैग देने से बचें। जैसे कई मां बाप अपने बच्चे को गुस्सैल बताते हैं, तो कोई अपने बच्चों को चिड़चिड़ा बताता है। शब्दों का उन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

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बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए बोलने के टोन का रखें ध्यान

लैंसबरी बताते हैं कि आपकी टोन आत्मविश्वास से भरी और कमांडिंग होनी चाहिए, न कि गुस्से और डर पैदा करने वाली। आपका बच्चा आपकी चिंता और गलतफहमी को समझता है और अगर आप खुद नियम नहीं फॉलो करेंगे, तो उसे भी अनुशासित नहीं रख सकेंगे।

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बच्चाें के सामने शर्त न रखें

“मैं तुम्हें अब प्यार नहीं करता” या “अगर तुम मुझसे प्यार करते हो, तो तुम ऐसा नहीं करोगे” इस तरह के वाक्यों का प्रयोग करने से बचें। इन वाक्यों से लगता है जैसे बच्चे के लिए यह आपका शर्त के साथ प्यार है। बच्चों को अनुशासन में रखने के लिए एक सीमा निर्धारित करें। उनसे बातचीत करके भी आप उनकी मदद कर सकते हैं।

हर बार डांट-फटकार लगाने से बचें

अधिकांश टॉडलर्स को किसी-न-किसी रूप में सजा की आवश्यकता होती है, साथ ही अनुशासन की आवश्यकता भी होती है। लैंसबरी ने कहा है कि, “टॉडलर अपने व्यवहार के लिए आपके द्वारा मिलने वाली प्रतिकाओं के अनुभव से अच्छा अनुशासन सीखते हैं।” जब बच्चे दुर्व्यवहार करते हैं, तो उन्हें प्यार से समझाएं। जब बच्चों की हर गलतियों पर आप डांट-फटकार लगाते हैं तो इससे बच्चों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। बच्चों और आपके बीच भावनात्मक स्तर की दूरी बन सकती है। इसलिए कभी-कभी लंबी डांट लगाने से बेहतर यह होगा कि उनके साथ बैठकर बात करने की कोशिश करें।

बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए उचित परिणाम चुनें

बच्चों की हर गलतियों को नजरअंदाज नहीं किया सकता। इसलिए उनके व्यवहार पर नजर रखें। समय निकाल कर उनके व्यवहार के बारे में उनसे बात करें। बच्चों को यह समझाना चाहिए कि पेरेंट्स उनके भले के लिए उनकी केयर करते हैं।

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बच्चे को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने दें

जब आपका बच्चा बड़ा हो रहा हो तो वह विरोधी भावनाएं महसूस कर सकता है। अपने बच्चे के क्रोध, निराशा, भ्रम, थकावट या निराशा को महसूस करें। उसकी भावनाओं को स्वीकार करें और उसका भावनात्मक साथ देते रहें।

बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए खुद भी रहें अनुशासित

बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए जरूरी है कि आप खुद भी अनुशासित रहें। अगर आप खुद अनुशासन से नहीं रहेंगे तो बच्चा भी आपको ही फॉलो करेगा और आपकी बताई गई बातें या आपके बनाएं गए रूल्स को फॉलो नहीं करेगा। उदाहरण के लिए इसे ऐसे समझ सकते हैं कि आप खुद सोकर जल्दी नहीं उठते हैं और उसे जल्दी उठने के लिए कहते हैं।

बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए पूरे परिवार का एकमत होना जरूरी

बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए जरूरी है कि पूरा परिवार एकमत हो। इसका मतलब है कि अगर गलती करने पर घर को कोई सदस्य बच्चे को डांट रहा है, तो पूरा परिवार एकमत होना चाहिए और इस समय किसी को बच्चे का बचाव नहीं करना चाहिए। ऐसे में यदि कोई बच्चे का बचाव करता है कि बच्चा दोबारा गलती करने पर भी अपेक्षा करता है कि कोई उसका बचाव करेगा।

इन बताई गई बातों को भी कर सकते हैं फॉलो

  • अपने बच्चे की तरह सोचें : यह स्वभाविक है कि यदि आपका बच्चा कुछ ज्यादा ही उछलकूद मचाए तो इससे आप थोड़ा परेशान हो सकते हैं। ऐसा भी हो सकता है कि आपके घर की सुंदर दिवारों को अपने क्रेयॉन से रंग सकते हैं। या फिर आप घर के पीछे बाड़े में कीचड़ से लथपथ होकर खेलते नजर आ सकते हैं, जिसे धोने में आपको थोड़ी मशक्कत करनी पड़ सकती है। लेकिन आप कोशिश करें कि आप भी बच्चों की ही तरह सोचें। वो मस्ती के लिए क्या करते हैं, वह सोचें। बच्चे अपने आसपास की चीजों को देखने, समझने और सीखने के लिए उछल-कूद मचाते हैं। ऐसे में आप उन्हें वो करने से रोकें नहीं बल्कि आप उन्हें वो करने दें जो वह कर रहे हैं, इसके बाद वो खुद दूसरी जगह जाएंगे। आप उन्हें वो करने दें और गाइड करें। यदि वो दीवार पर रंग से लिख रहा है तो आप शीट लेकर जाए और खुद ड्राइंग करते हुए बच्चे को ड्राइंग करने के लिए आमंत्रित करें।
  • बच्चों को एक्सप्लोर करने में करें मदद : आपके बच्चे हो या किसी और के बच्चे, सभी घूमना व नई-नई चीजें देखना खूब पसंद करते हैं। उनकी ख्वाइश होती है कि सूर्य की रौशनी के नीचे जितनी भी चीजें हैं उन्हें छूकर देख सकें। लेकिन आप उन्हें यही सब करने से रोकते हैं। इस कारण आप फ्रस्टेशन का शिकार होते हैं। बल्कि आपकी कोशिश होनी चाहिए कि जिसे छूना बच्चों के लिए सुरक्षित है उन्हें वैसा करने देना चाहिए और जिसे छूने से उन्हें दिक्कत हो सकती है उसे उन्हें नहीं छूने देना चाहिए। ताकि उन्हें चोट न लगे। बच्चों को इस बीच यह भी बताएं कि गर्म वस्तु और ठंडी वस्तु में क्या अंतर है, कौन सी चीज को छूना उनके लिए सुरक्षित तो कौन सी चीज को छूना असुरक्षित है।
  • लिमिट्स सेट करें : मैंने तुम्हे बताया था… मैंने तुम्हें बताया था… बार-बार में ऐसे शब्दों का प्रयोग बच्चों के सामने नहीं करना चाहिए। उदाहरण के तौर पर मान लें आपका बच्चा आपकी पालतू बिल्ली के फर को खींच रहा है, तो आप प्यार से उसके हाथों को हटाकर बताएं कि जब भी वो ऐसा करता है इससे बिल्ली को चोट व दर्द का एहसास होता है। बच्चों को यह शिक्षा दें कि उनके लिए चाकू, कैंची जैसी चीजें कितनी खतरनाक होती हैं, इसलिए उन्हें अलमारी में बंद कर रखा जाता है। ऐसा कर बच्चों को सही ज्ञान दिया जा सकता है, जिससे उन्हें चोट भी नहीं लगेगी और वो चीजों को समझ सकेंगे।
  • बच्चों को दें पर्याप्त समय : यदि आपका बच्चा बार-बार शरारत से बाज नहीं आ रहा है तो आप उसे पर्याप्त समय दें। उसे कोई बोरिंग जगह पर छोड़ दें जैसे कि कोई कुर्सी या फिर हॉल का फ्लोर। बच्चे को वहां पर बैठाकर उसे शांत होने तक का समय दें। बच्चा यदि दो साल का है तो एक मिनट, तीन साल का है तो दो से तीन मिनट ऐसे कर उन्हें समय दें। उस जगह पर लाकर कुछ रिस्पॉन्स न करें, जबतक समय पूरा नहीं हो जाता। जब आपका बच्चा शांत हो जाए तो उसे विस्तारपूर्वक बताए कि उसने क्या गलती की और आपने ऐसा क्यों किया। उसे सही व गलत के भेद को बताए। बच्चों को समझाने के लिए कभी न मारे, बल्कि सही तरीके से समझाए। यदि आप उन्हें सिखाने के लिए मारते हैं तो इससे नकारात्मक भाव उत्पन्न होते हैं।

ध्यान देने योग्य बातें

बच्चे के डिसिप्लिन सिखाने के लिए जरूरी है कि आप कई चीजों का बैलेंस बनाकर चलें। आप दिमाग में एक बात रखें कि आपको गुस्सा नहीं करना है, तभी बच्चे का अच्छे से विकास संभव होगा। आप खुद को शांत बनाए रखना सीखना होगा, बच्चों को समस्या की जानकारी देकर उनमें अच्छी आदते डालनी होगी। ऐसा कर वो भविष्य में उस प्रकार की गलतियों को नहीं दोहराएंगे।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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लेखक की तस्वीर
Dr. Shruthi Shridhar के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Nikhil Kumar द्वारा लिखित
अपडेटेड 06/10/2019
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