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परस्थेसिया (Paresthesia) यानी हाथों और पैरों में सुन्नता का एहसास, क्या है ये कंडिशन जानिए

    परस्थेसिया (Paresthesia) यानी हाथों और पैरों में सुन्नता का एहसास, क्या है ये कंडिशन जानिए

    परस्थेसिया (Paresthesia) सुन्नता या जलन का एहसास है जो अक्सर हाथ, हथेली, पैर और तलवों में होता है, लेकिन यह शरीर में कहीं भी हो सकता है। यह चुभन या वैसा ही एहसास है जो एक व्यक्ति को लंबे समय तक एक पैर को मोड़कर रखने से होता है। आमतौर पर यह एक अस्थाई सनसनी है। ऐसा तब होता है जब नर्व पर प्रेशर आता है। जब दबाव कम हो जाता है, बेचैनी दूर हो जाती है। कुछ लोगों में परस्थेसिया क्रोनिक या लॉन्ग टर्म के लिए होता है जो किसी गंभीर नर्व इंजरी या कंडिशन की तरफ इशारा हो सकता है।

    परस्थेसिया के कारण क्या हैं? (Paresthesia Causes)

    क्रोनिक परस्थेसिया के कई कारण हैं। जिसमें निम्न शामिल हैं।

    • स्ट्रोक
    • मल्टीपल स्क्लेरोसिस (Multiple sclerosis)
    • रीढ़ की हड्डी या मस्तिष्क में ट्यूमर
    • विटामिन डी या अन्य विटामिन के उच्च स्तर
    • डायबिटीज
    • फायब्रोमाल्जिया (Fibromyalgia)
    • हाय ब्लड प्रेशर
    • संक्रमण
    • नर्व इंजरी
    • सिकुड़ी हुई नर्व

    जब आसपास के ऊतकों द्वारा बहुत अधिक दबाव डाला जाता है, तो नस दब जाती है। यह दबाव उस नर्व द्वारा सप्लाई किए गए क्षेत्र में परस्थेसिया का कारण बनता है, और इसका कार्य बाधित होता है। दबी हुई नस शरीर में कहीं भी हो सकती है, जैसे कि चेहरा, गर्दन, कलाई या पीठ। लोअर स्पाइन में हर्निएटेड डिस्क (Herniated disk) प्रभावित हिस्से के पीठ, पैर या तलवों में दर्द पैदा कर सकती है। कार्पल टनल सिंड्रोम (Carpal tunnel syndrome) कलाई में एक दबी हुई नस होती है जो उंगलियों में सुन्नता और झुनझुनी का कारण बनती है।

    परस्थेसिया के लक्षण (Paresthesia symptoms)

    दबी हुई नस या परस्थेसिया (Paresthesia) के लक्षणों में निम्न शामिल हैं।

    लक्षण स्थिर या रुक-रुक कर हो सकते हैं। आमतौर पर, ये संवेदनाएं प्रभावित क्षेत्र में होती हैं, लेकिन ये बाहर की ओर फैल सकती हैं।

    किन लोगों को परस्थेसिया (Paresthesia) होने का जोखिम अधिक होता है?

    परस्थेसिया किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ फैक्टर्स पिंच नर्व के रिस्क को बढ़ाने का काम करते हैं। जो निम्न हैं।

    जेंडर (Gender)

    महिलाओं को कार्पल टनल सिंड्रोम होने की संभावना अधिक होती है, संभवत: जिसका कारण संकरी नर्व कैनाल है।

    मोटापा (Obesity)

    अतिरिक्त वजन नसों पर दबाव डाल सकता है। जिससे इस परेशानी का खतरा बढ़ सकता है।

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    गर्भावस्था (Pregnancy)

    गर्भावस्था से संबंधित वजन और पानी का बढ़ना नसों पर सूजन और दबाव पैदा कर सकता है। जो कि रिस्क को बढ़ा सकता है।

    थायरॉइड रोग (Thyroid disease)

    यह एक व्यक्ति को कार्पल टनल सिंड्रोम के खतरे में डालता है। इसलिए इसे रिस्क फैक्टर्स माना जाता है।

    डायबिटीज (Diabetes)

    डायबिटीज होने से नर्व और टिशू डैमेज हो सकते हैं और इस कंडिशन का खतरा बढ़ सकता है।

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    रुमेटॉइड अर्थराइटिस (Rheumatoid arthritis)

    यह सूजन का कारण बनता है, जो जोड़ों में नसों को भी संकुचित कर सकता है और परस्थेसिया (Paresthesia) के जोखिम को बढ़ा सकता है।

    लंबे समय तक बिस्तर पर आराम (Bed rest)

    लंबे समय तक लेटने से नर्व कंप्रेशन हो सकता है और परस्थेसिया (Paresthesia) का खतरा बढ़ सकता है।

    अति प्रयोग (Over use)

    जो लोग ऐसे काम करते हैं जिसमें एक ही हाथ, पैर और कोहनी के मोशन को बार-बार दोहराना पड़ता है उनमें परस्थेसिया का अधिक होता है। किसी भी व्यक्ति को नस दबने की परेशानी सकती है, और अधिकांश लोगों को किसी न किसी बिंदु पर परस्थेसिया (Paresthesia) का अनुभव हुआ होगा।

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    परस्थेसिया का निदान (Paresthesia Diagnosis)

    परस्थेसिया का निदान करने के लिए, डॉक्टर पहले मेडिकल हिस्ट्री पूछते हैं। मेडिकल हिस्ट्री जानने के बाद वे मरीज के लक्षणों की जानकारी लेते हैं। इसके बाद, डॉक्टर संभावित रूप से शारीरिक परीक्षण करेंगे और निष्कर्षों के आधार पर, अन्य परीक्षणों की सिफारिश कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं।

    • नर्व कंडक्शन स्टडी (Nerve conduction study) : यह मापता है कि मांसपेशियों में नर्व इमप्लसेस कितनी तेजी से ट्रैवल करते हैं।
    • इलेक्ट्रोमायोग्राफी (Electromyography) : नर्व्स और मसल्स के आपस में इंटरेक्शन के बीच की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को देखने के लिए यह टेस्ट किया जाता है।
    • मेग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (Magnetic resonance imaging) : इसका उपयोग शरीर के विभिन्न हिस्सों को अधिक बेहतर ढंग से देखने के लिए किया जा सकता है। ताकि बीमारी का पता लगाया जा सके।
    • अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) : शरीर की इमेजेस लेने और देखने के लिए उपयोग किया जाता है। इसे छोटे हिस्सों में होने वाले नर्व कंप्रेशन या डैमेज को देखने के लिए के लिए भी उपयोग किया जा सकता है, जैसे कि कार्पल टनल सिंड्रोम।

    डॉक्टर मरीज के लक्षणों और स्थिति के आधार पर टेस्ट रिकमंड करते हैं। ऊपर बताए गए टेस्ट के रिजल्ट के आधार पर दूसरे टेस्ट भी लिखे जा सकते हैं।

    परस्थेसिया का इलाज कैसे किया जा सकता है? (Paresthesia treatment)

    परस्थेसिया का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है। अगर इसका कारण कोई अंडरलाइन कंडिशन है तो उसका इलाज करने पर इस कंडिशन का इलाज भी हो जाएगा।

    आराम

    परस्थेसिया

    दबी हुई नस के लिए कई बार डॉक्टर आराम करने की सिफारिश करते हैं। साथ ही नर्व कंप्रेशन का कारण बनने वाली एक्टिविटीज को रोकना भी जरूरी है ताकि टिशूज हील हो सकें। इसके लिए कई बार उस जगह के मूवमेंट को रोकने के लिए उसे बांध दिया जाता है। हालांकि लंबे समय त बंधे रहने से दूसरी परेशानियां भी हो सकती हैं, इसलिए हमें डॉक्टर के निर्देशों को फॉलो करना सही होगा।

    फिजिकल थेरिपी

    प्रभावित नर्व के आसपास की मांसपेशियों में ताकत बढ़ाने के लिए फिजिकल थेरिपी का उपयोग किया जा सकता है। मजबूत मांसपेशियां नर्व कंप्रेशन को दूर करने और इसे फिर से होने से रोकने में मदद कर सकती हैं। फिट मांसपेशियां लचीलेपन, मोशन के रेंज और गतिशीलता में भी सुधार कर सकती हैं।

    दवाएं

    कुछ दवाएं, जैसे कि आईबुप्रोफेन (Ibuprofen) और नेप्रोक्सन सोडियम (Naproxen sodium) और यहां तक कि प्रभावित क्षेत्र में स्टेरॉयड इंजेक्शन (Steroid injections) दर्द को दूर करने और सूजन को कम करने के लिए दिए जा सकते हैं।

    फाइब्रोमायल्गिया (Fibromyalgia) के कारण लंबे समय तक रहने वाले परस्थेसिया (Paresthesia) के लिए, प्रीगैबलिन (Pregabalin) या डुलोक्सेटीन (Duloxetine) सहित दवाएं उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन इनका उपयोग डॉक्टर की सलाह पर ही करें। अपने मर्जी से किसी भी दवा का सेवन न करें।

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    सर्जरी

    यदि इन उपचारों से लक्षणों से राहत नहीं मिलती है, तो दबी हुई नस पर दबाव को कम करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। सर्जरी कार्पल लिगामेंट को रिलीज करने, बोन स्पर को हटाने, या पीठ में हर्नियेटेड डिस्क का हिस्सा भी हो सकता है। सर्जरी का प्रकार एक व्यक्ति द्वारा अनुभव किए जा रहे विशिष्ट लक्षणों के साथ-साथ उनके कारणों पर निर्भर करेगा।

    उम्मीद करते हैं कि आपको परस्थेसिया (Paresthesia) से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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    Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 16/06/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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