रेयर स्लीप डिसऑर्डर : कहीं आप इनमें से किसी का शिकार तो नहीं

By Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar

आपका दिन अच्छा रहे और आप दिन भर ऊर्जा महसूस करें, इसके लिए जरूरी है कि आपकी रात की नींद ठीक से पूरी हो जाए। नींद पूरी होगी तो आप अगले दिन एनर्जेटिक भी महसूस करेंगे, आपके सारे काम भी अच्छी तरह होंगे और आप स्वस्थ भी रहेंगे। लेकिन वहीं जब नींद डिस्टर्ब होने लगती है तो आपका पूरा स्वास्थ्य बिगड़ जाता है। अच्छी नींद, अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। पर जब नींद की ही बीमारियां होने लगें तो शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ हमारा मानसिक स्वास्थ्य भी इससे प्रभावित होने लगता है। कई वजहों से हमें सोने की ऐसी बीमारियां होने लगती हैं, जिनके बारे में हम नहीं जानते हैं। इस आर्टिकल में आप जानेंगे ऐसे ही स्लीप डिसॉर्डर के बारे में। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में स्लीप डिसऑर्डर के बारे में विस्तार से जानेंगे। जानेंगे कि स्लीप डिसॉर्डर क्यों होते हैं और ये कितने प्रकार के होते हैं।

इतने प्रकार के होते हैं स्लीप डिसऑर्डर (Sleep Disorder)

क्लीन-लेवीन सिंड्रोम (KLS) 

छुट्टी वाले दिन ज्यादा सोना हर किसी को पसंद होगा, लेकिन सोचिए अगर आप दिन के 24 घंटे सोते ही रहें या फिर हफ्तों आपको जागने का मन न करे? इसे क्लीन-लेवीन सिंड्रोम कहते हैं। यह ऐसी स्थिति है जिसमें आपको दिन-रात का पता नहीं चलेगा और आप लम्बे समय तक सोते रहेंगे। सुनने में ये अजीब लगेगा लेकिन उठने पर कई बार आप भूल चुके होंगे कि आप कहां सोए थे। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो ये लक्षण क्लीन-लेवीन सिंड्रोम के हो सकते हैं।

इस डिसॉर्डर के लक्षण क्या हैं?

पुरुषों या लड़कों में ये समस्या अधिक होती है और इसके लक्षण आठ वर्ष के आसपास दिखने लगते हैं। अगर आपको ऐसा कोई डिसऑर्डर है तो इसमें आप सो कर उठने पर बहुत ज्यादा खाएंगे, साथ ही सेक्शुअल डिजायर (Sexual Desire) में भी वृद्धि होगी। आमतौर पर सोने के बाद हल्का और ऊर्जावान महसूस करते हैं लेकिन इस तरह की नींद के बाद आपको थकान और सिर दर्द होगा। 

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इस बीमारी को स्लीपिंग ब्यूटी सिंड्रोम (Sleeping beauty syndrome) भी कहा जाता है। ऑक्सफोर्ड की  “ब्रेन” नामक जर्नल के मुताबिक दो तिहाई मरीजों में ये बीमारी संक्रमण की वजह से होती है। मेडिकल साइंस के आधार पर इसका इलाज लिथियम की निर्धारित मात्रा है। 

सोते समय पैरालिसिस होना (स्लीप पैरालिसिस- Sleep Paralysis)

ये स्थिति कई बार आपको डरावना एहसास दे सकती है।  इस स्थिति में आपको सोते समय पैरालिसिस होगा। इस समय आप आसपास की परिस्थितयों को समझ पाएंगें लेकिन स्थिति के हिसाब प्रतिक्रिया नहीं दे पाएंगें। जो लोग इस स्थिति से गुजरते हैं उन्हें डर, घबराहट और सांस उखड़ने का एहसास होगा। ऐसी घटना को अक्सर लोग अलौकिक घटना या भूत-प्रेत से जोड़कर देखते हैं।

ये घटना अजीब तो है लेकिन लगभग 50 प्रतिशत लोग पूरे जीवन में एक बार इस स्थिति से जरूर गुजरते हैं और 4 प्रतिशत लोगों में इस स्थिति से पांच बार गुजरते हैं। ज्यादातर लोग इस स्थिति से पांच या 10 सेकंड्स के अंदर उभर जाते हैं। लेकिन तुरंत उभरने के बाद सोना थोड़ा मुश्किल होगा। 

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स्लीप बिहेवियर डिसऑर्डर (Sleep Behaviour Disorder)

इस बीमारी के  समय आप पूरी तरह से पेरेलाइज नहीं होंगे लेकिन आपको आधी नींद में अजीब सपने दिखाई देंगे। जो भी सपने आप देखेंगे कई बार आप उसी तरह से काम करने लगेंगे। कई बार आप चिल्लाने लगेंगे, सपनों में आप कई बार ऐसी चीजें दिखाई देंगी जिनकी वजह से आप खुद को और दूसरों को हानि पहुंचा सकते हैं। इस स्थिति से गुजरने वाले मरीज अक्सर और बीमारियों से भी पीड़ित होते हैं।  पार्किंसन डिजीज, डेमेन्शिआ और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से पीड़ित मरीजों में ये स्थिति देखी जा सकती है।

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एक्सप्लोडिंग हेड सिंड्रोम (Exploding Head Syndrome)

ये स्थिति किसी साइंस फिक्शन में दिखाई गई बीमारी की तरह लगती है। इसमें आपको ऐसी आवाजें सुनाई देंगी जो असल में आसपास नहीं है। जैसे कि बम फूटने की या फिर गोलियों और पटाखों की आवाज। इन अजीब आवाजों की वजह से आपको सोने में परेशानी होगी और घबराहट का एहसास होगा। ये अपने आप में कोई बीमारी नहीं है लेकिन इस बीमारी की वजह से आपको नींद आने में परेशानी हो सकती है। इस परिस्थिति को स्लीप ऑनसेट इंसोम्निया कहेंगे।

फेटल फेमिलियल इंसोम्निया (Fatal Familial Insomnia)

क्या आपको पता है कि लम्बे समय तक न सो पाने से आपकी जान भी जा सकती है। इस स्थिति की शुरुआत कई कारणों से हो सकती है।  बहुत ज्यादा कैफीन लेने से या फिर बहुत ज्यादा तनाव लेने से भी नींद न आने की समस्या हो सकती है। ऐसा लंबे समय तक होने पर आपको नींद आना बंद हो जाएगी।  बहुत दिनों तक ऐसा होने पर आपको कभी-भी नींद नहीं आएगी जिससे आपका मस्तिष्क थक जाएगा और ये जानलेवा स्थिति का रूप ले सकता है। ऐसी परिस्थिति में आपके दिल की धड़कनें और  ब्लड प्रेशर बढ़ जाएगा।  

कोमा और जान जानें का खतरा

मेडिकल साइंस में अभी तक इस बीमारी का कोई निर्धारित इलाज नहीं है। हालांकि कुछ लक्षणों का निवारण किया जा सकता है लेकिन पूरी तरह से इससे उभर पाना लगभग नामुमकिन है। ये बीमारी छह महीने से तीन सालों तक रहेगी और अगर हालात नहीं सुधरते हैं तो आप कोमा में जा सकते हैं। कई बार इस स्थिति में होने पर जान भी जा सकती है। 

नींद न आने पर, नींद ज्यादा आने पर, नींद के दौरान अजीब सपने आना, सोते समय चलना या फिर सोने के बाद भी शरीर में दर्द होना या फिर असहजता का एहसास होने पर डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। इन सभी स्थितियों के होने पर आपके शरीर पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है।

तो अगर आपको लगता है कि आपको ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी है तो हो सकता है कि आप किसी स्लीप डिसऑर्डर से पीड़ित हों। ऐसा होने पर आप डॉक्टर की सलाह जरूर लें, ताकि समय रहते इस समस्या का इलाज हो सके। उम्मीद है आपको हमारा ये आर्टिकल पसंद आया होगा और इस विषय से जुड़ी जरूरी जानकारियां आपको मिल गई होंगी। लेकिन अगर आपके मन में इससे जुड़े कोई और भी सवाल हैं, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सभी सवालों के जवाब देने की पूरी कोशिश करेंगे। साथ ही इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा शेयर भी करें।

इस स्थिति से जुड़ी किसी भी जानकारी या सवाल के लिए अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। 

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