Diabetes: डायबिटीज रोग क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

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अपडेट डेट सितम्बर 4, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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डायबिटीज (Diabetes) क्या है?

डायबिटीज रोग एक ऐसी स्थिति है जिसमें रोगी के शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है।

डायबिटीज रोग के मुख्यतः दो प्रकार होते हैं :

टाइप 1:

डायबिटीज रोग का यह प्रकार आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) पर हमला करता है और इंसुलिन का उत्पादन करने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देता है।

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टाइप 2:

डायबिटीज रोग के इस प्रकार में आपका शरीर पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता है या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के साथ कोई रिएक्शन नहीं देती हैं। हाई ब्लड शुगर वाले मरीजों को आमतौर पर बार-बार टॉयलेट जाने की जरूरत महसूस होती है और उन्हें जल्दी-जल्दी भूख और प्यास लगती है।

डायबिटीज रोग कितनी आम है?

डायबिटीज रोग होना बेहद सामान्य है। जोखिम कारकों को कम करके डायबिटीज रोग को रोका जा सकता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया अपने डॉक्टर से चर्चा करें।

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डायबिटीज के लक्षण क्या हैं?

इसके कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं :

  • बार-बार यूरिनेशन होना
  • बार-बार प्यास लगना
  • बहुत भूख लगना
  • अत्यधिक थकान
  • धुंधला दिखना
  • किसी चोट को ठीक होने में ज्यादा समय लगना
  • लगातार घटता वजन (टाइप1)
  • हाथ / पैर में झुनझुनी या दर्द (टाइप 2)

टाइप 2 डायबिटीज रोग वाले रोगियों में लक्षण बहुत ही कम होते हैं। हो सकता है ऊपर दिए गए लक्षणों में कुछ लक्षण शामिल न हो। यदि आपको किसी भी लक्षण के बारे में कोई शंका है, तो कृपया डॉक्टर से परामर्श करें।

और पढ़ें : Diabetes insipidus : डायबिटीज इंसिपिडस क्या है ?

मुझे अपने डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपको निम्न में से कोई भी लक्षण खुद में मिलते हैं, तो आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:

टाइप 1 डायबिटीज रोग मात्र कुछ हफ्तों या दिनों में ही विकसित हो सकती है।

डायबिटीज रोग किन कारणों से होती है?

जब भोजन पच जाता है और ब्लड स्ट्रीम में प्रवेश करता है, तो इंसुलिन नामक हार्मोन खून और कोशिकाओं से ग्लूकोज को बाहर पहुंचाता है। ग्लूकोज का कार्य शरीर के अंदर भोजन को एनर्जी में बदलने का होता है। यदि ग्लूकोज को बाहर करने के लिए शरीर में पर्याप्त इंसुलिन नहीं है या इंसुलिन का उत्पादन ठीक से नहीं होता है, तो शरीर को भोजन से एनर्जी बनाने में कठिनाई होती है। इसकी वजह से आपके शरीर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। इस स्थिति को डायबिटीज रोग कहा जाता है।

और पढ़ें : बढ़ती उम्र और बढ़ता हुआ डायबिटीज का खतरा

किन कारणों से डायबिटीज रोग का खतरा बढ़ जाता है?

जो लोग 40 साल से अधिक उम्र के हैं, उन्हें मधुमेह आसानी से हो सकता है। इसके अलावा, जो अधिक वजन वाले हैं, धूम्रपान करते हैं या उनके परिवार में किसी को मधुमेह है तो ऐसे लोगों को डायबिटीज रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।

डायबिटीज रोग का निदान कैसे किया जाता है?

किसी मरीज का मेटाबॉलिज्म सामान्य है या उसे प्री-डायबिटीज रोग या मधुमेह है, इसका पता डॉक्टर निम्नलिखित परीक्षणों से लगा सकते हैं-

  • ए1सी (A1C) टेस्ट 
  • एफ.पी.जी (FPG) (फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज) टेस्ट
  • ओ.जी.टी.टी (OGTT) (ओरल ग्‍लूकोज टॉलरेंस टेस्‍ट)
  • hbA1c टेस्ट

और पढ़ें : जानें कैसे स्वेट सेंसर (Sweat Sensor) करेगा डायबिटीज की पहचान

डायबिटीज रोग (Diabetes) का इलाज कैसे किया जाता है?

टाइप 1:

टाइप 1 डायबिटीज रोग रोगियों को शुगर लेवल नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन लेना चाहिए और यह केवल इंजेक्शन या इंसुलिन पंप (एक छोटी डिवाइस जो लगातार शरीर में इंसुलिन पहुंचाता है) के द्वारा दिया जा सकता है।

टाइप 2:

  • हेल्दी खाना खाएं
  • शारीरिक गतिविधियां बढ़ाएं ।
  • ब्लड के शुगर लेवल को नियंत्रित करने के लिए दवा लें ।
  • पैंक्रियास द्वारा इंसुलिन का उत्पादन बढ़ाने वाली दवाएं-क्लोरप्रोपामाइड (chlorpropamide), ग्लिमेपिराइड (Glimepiride), ग्लिपीजाइड (glipizide) और रेपागलिनाइड (repaglinide)
  • ड्रग्स जो आंतों के द्वारा शुगर का इंटेक कम करते हैं- अकार्बोस (acarbose) और मिग्लिटोल (miglitol)
  • ड्रग्स जो शरीर में इंसुलिन के उपयोग को सुधारते हैं-पियोग्लीटाजोन (pioglitazone) और रोसिग्लिटाजोन (rosiglitazone)
  • ड्रग्स जो लिवर द्वारा शुगर उत्पादन को कम कर देते हैं और इंसुलिन प्रतिरोध में सुधार करते हैं-मेटफोर्मिन (metformin)
  • ड्रग्स जो पैंक्रियास (अग्न्याशय) या रक्त स्तर द्वारा इंसुलिन का उत्पादन बढ़ाते हैं या लिवर के शुगर प्रोडक्शन को कम करते हैं- एल्बिग्लूटाइड (albiglutide) (alogliptin), ड्युलाग्लूटाइड (dulaglutide), लिनाग्लिप्टिन (linagliptin), एक्सेनटाइड (exenatide), लीराग्लूटाइड (liraglutide)
  • ड्रग्स जो किडनी द्वारा ग्लूकोज को दोबारा अवशोषण से रोकते हैं और यूरिन में ग्लूकोज के उत्सर्जन को बढ़ाते हैं, जिसे सोडियम-ग्लूकोज कोट्रांसपोर्टर 2 (SGLT2) (sodium-glucose cotransporter 2) इन्हिबिटर्स कहा जाता है।

और पढ़ें : क्या है नाता विटामिन-डी का डायबिटीज से?

जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपचार

  • स्वस्थ भोजन, नियमित व्यायाम और अपने ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित रखने के लिए नियमित ब्लड टेस्ट कराएं।
  • आप बी.एम.आई कैलक्यूलेटर के हिसाब से वजन संतुलित रखें।
  • टाइप 1 डायबिटीज रोग के रोगी जीवन भर नियमित इंसुलिन इंजेक्शन ले सकते हैं।
  • टाइप 2 डायबिटीज रोग के रोगियों को दवा की जरूरत पड़ सकती है।
  • डायबिटीज के प्रकार, टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के लिए आपको खून में शुगर का स्तर नियंत्रण में रखने के लिए ख़ास डाइट की जररूत होगी| आपको खाने का रूटीन बनाना होगा और स्नैक्स रोजाना एक ही समय पर लेना होगा| 
  • आपको अपने खून का शुगर लेवल बार-बार जांचने की जरुरत होगी और डायबिटीज बढ़ने या घटने के लक्षणों पर ध्यान देना होगा| डॉक्टर आपको इंसुलिन के इंजेक्शन के बारे में समझा देगा जिससे आप दिन में 2 से 3 बार खुद घर पर ही इंजेक्शन ले सकेंगे|
  • डॉक्टर आपको एक्सरसाइज के जरिए खून में शकर का स्तर नियंत्रण करने के तरीके सुझा सकता है|
  • आप को खुद भी अपनी सेहत का ध्यान रखना बहुत जरुरी है, आगे समस्याओं से बचने के लिए आंखों की जांच भी करवा लेनी चाहिए|
  • हालांकि, टाइप 1 डायबिटीज का इलाज नहीं किया जा सकता, टाइप 2 डायबिटीज को जीवन शैली में बदलाव ला कर नियंत्रण करने की कोशिश की जा सकती है|

इस आर्टिकल में हमने आपको डायबिटीज रोग से संबंधित जरूरी बातों को बताने की कोशिश की है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस बीमारी से जुड़े किसी अन्य सवाल का जवाब जानना है, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्सर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे। अपना ध्यान रखिए और स्वस्थ रहिए।

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