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व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स और व्हे प्रोटीन आइसोलेट : क्या है आपकी जरूरत?

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व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स और व्हे प्रोटीन आइसोलेट : क्या है आपकी जरूरत?

प्रोटीन, शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व, जिसके बिना शरीर का काम ठीक ढंग से चलना मुश्किल हो सकता है। वैसे तो हमारे भारतीय खाने को संतुलित आहार माना जाता है और इसमें सभी पोषक तत्वों को जगह दी गई है, लेकिन फिर भी कई बार प्रोटीन के मामले में हम पीछे रह जाते हैं। ऐसे में क्या किया जा सकता है? क्या प्रोटीन इंटेक को ध्यान में रखते हुए हेल्दी डायट और प्रोटीन सप्लिमेंट का सहारा लिया जा सकता है? इस जरूरी सवाल का जवाब पाने के लिए चलिए आगे बढ़ते हैं इस आर्टिकल के साथ! जिसमें हम जानेंगे दो प्रोटीन सप्लिमेंट, व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स और व्हे आइसोलेट (Isolate) में अंतर के बारे में।

व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स और व्हे आइसोलेट में अंतर (Whey Protein blends vs Whey isolates) जानने से पहले जान लेते हैं कि प्रोटीन सप्लिमेंट कौन-कौन से होते हैं!

तो चलिए, देर किस बात की!

व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स और व्हे आइसोलेट में अंतर : क्या हैं प्रोटीन सप्लिमेंट्स की किस्में? (Whey Protein blends vs Whey isolates)

प्रोटीन सप्लिमेंट्स में व्हे प्रोटीन (Whey protein) का इस्तेमाल आम तौर पर किया जाता है। चाहे फिर व्यक्ति जिम में वर्कआउट कर रहा हो, अपनी स्ट्रेंथ बढ़ाने की जद्दोजहद में लगा हुआ हो या फिर चाहे सिर्फ फिटनेस फ़्रीक हो, व्हे प्रोटीन वर्कआउट का सच्चा साथी साबित हो सकता है, लेकिन व्हे प्रोटीन की भी कई किस्में आपके लिए मौजूद हैं, जो आपकी जरूरत के मुताबिक बनी हैं। इनका इस्तेमाल आप अपनी सुविधा के अनुसार एक्सपर्ट की सलाह के बाद कर सकते हैं। व्हे प्रोटीन की किस्मों में नाम निम्न हैं।

  • व्हे प्रोटीन कॉन्सेंट्रेट (Whey Protein Concentrate)
  • व्हे प्रोटीन आइसोलेट (Whey Protein isolates)
  • व्हे प्रोटीन हायड्रोसिलेट्स या पेप्टाइड्स (Whey Protein Hydrolysates or Peptides)
  • व्हे प्रोटीन ब्लेंड (Whey Protein Blend)

व्हे प्रोटीन ब्लेंड और व्हे आइसोलेट्स व्हे प्रोटीन के ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले रूप हैं, आइए दोनों के बीच के अंतर और फायदों को समझते हैं।

और पढ़ें: कभी सोचा है कि उम्र के आधार पर आपके लिए कितना प्रोटीन रिकमंड किया जाता है?

व्हे आइसोलेट (Protein isolates) दे सकता है ये फायदे!

व्हे प्रोटीन सप्लिमेंट में व्हे आइसोलेट (Isolate) प्रोटीन एक प्योर फॉर्म माना जाता रहा है, क्योंकि न सिर्फ इसमें प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है, बल्कि फैट और लैक्टोज की मात्रा भी कम होती है। वजन के अनुसार इसमें 90 प्रतिशत तक प्रोटीन की मात्रा पाई जा सकती है। यही कारण है कि अन्य प्रोटीन की तुलना में इसके लिए आपको थोड़े ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं। व्हे प्रोटीन बॉडी में जल्दी अब्ज़ॉर्ब हो जाता है, यही वजह है कि व्हे प्रोटीन (Whey protein) का प्योरेस्ट फ़ॉर्म होने के नाते व्हे आइसोलेट जल्दी डायजेस्ट हो जाता है।

इसीलिए इसे पोस्ट वर्कआउट प्रोटीन सप्लिमेंट के तौर पर लिया जा सकता है। जाहिर है व्हे आइसोलेट के लिए आप ज्यादा एक्सेप्टेबल महसूस कर सकते हैं। लेकिन व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। इसके फायदे भी काफी यकीनी साबित हो सकते है। आइए जानते हैं कैसे!

व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स और व्हे आइसोलेट में अंतर (Whey Protein blends vs Whey isolates)
व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स और व्हे आइसोलेट में अंतर (Whey Protein blends vs Whey isolates)

व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स (Protein blends) के बारे में जानिए ये जरूरी बातें!

व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स, जिसमें आपको कई तरह के प्रोटीन सप्लिमेंट्स का ब्लेंड मिल सकता है। व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स विभिन्न प्रकार के व्हे प्रोटीन जैसे व्हे कॉन्सेंट्रेट, व्हे आइसोलेट और व्हे हायड्रोलिसेट्स का मिश्रण हो सकता है। यही कारण है कि इसमें आइसोलेट्स की तुलना में थोड़ा अधिक कार्बोहायड्रेट, फैट और थोड़ा कम प्रोटीन हो सकता है। प्रोटीन की यह वैरायटी आइसोलेट की तुलना में आपको कम कीमत में उपलब्ध हो जाती है।

अब तक हमने जाना व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स और व्हे आइसोलेट के अपने-अपने फायदों के बारे में, लेकिन अब बारी है प्रोटीन ब्लेंड्स और व्हे आइसोलेट में अंतर (Protein blends vs isolates) पहचानने की।

और पढ़ें: इन प्रोटीन फूड्स को अपने रूटीन में शामिल कर, प्रोटीन की जरूरतों को पूरा करने में मदद करें

Nutritionist Speaks: व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स और व्हे आइसोलेट में अंतर : समझ गए, तो मिल सकती है फिटनेस की चाबी!

व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स और व्हे आइसोलेट में अंतर

व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स और व्हे आइसोलेट में अंतर समझने के लिए जरूरी है ये जानना कि इन दोनों प्रोटीन सप्लिमेंट को बनाया कैसे जाता है?

व्हे प्रोटीन आइसोलेट को व्हे प्रोटीन कॉन्संट्रेट से अतिरिक्त फैट और कार्बोहायड्रेट को निकालकर बनाया जाता है। जबकि व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स का निर्माण कई तरह के प्रोटीन जैसे व्हे कॉन्सेंट्रेट, व्हे आइसोलेट और व्हे हायड्रोलिसेट्स से मिलाकर किया जाता है। हालांकि, दोनों ही व्हे प्रोटीन के प्रकार हैं। व्हे प्रोटीन आइसोलेट में व्हे प्रोटीन कॉन्संट्रेट की तुलना में प्रति ग्राम कम फैट, कोलेस्ट्रोल (Cholesterol) और कार्बोहायड्रेट (Carbohydrates) पाए जाते हैं।

ऑल-व्हे ब्लेंड्स के अलावा, अन्य प्रकार भी हैं जहां व्हे, केसीन, एग और कई अन्य प्रकार के प्रोटीन को एक साथ मिश्रित किया जाता है। प्रोटीन एक से अधिक सोर्स होने के कारण प्रोटीन ब्लेंड अधिक बैलेंस्ड एमिनो एसिड प्रोफाइल हो सकता है। इसके अलावा, तेज और धीमी गति से पचने वाले प्रोटीन का मिश्रण ब्लेंड को ‘एनीटाइम प्रोटीन’ का एक सुटेबल ऑप्शन बनाता है। व्हे और केसीन के मिश्रण से बना ब्लेंड सिंगल व्हे प्रोटीन की तुलना में अधिक फायदे प्रदान करता है। केसीन व्हे की तुलना में देर से पचने वाला प्रोटीन है।

और पढ़ें: व्हे प्रोटीन से जुड़े सभी मिथकों को दूर करेंगे, सही जानकारी से युक्त न्यूट्रिशिनिस्ट के ये जवाब

एक्सपर्ट की राय

इस बारे में और जानकारी देते हुए जानीमानी न्यूट्रिशनिस्ट, डायटिशियन और फिटनेस एक्सपर्ट मनीषा चोपड़ा ने बताया, “व्हे आइसोलेट्स और व्हे ब्लेंडेड प्रोटीन रिकवरी के लिए बेस्ट ऑप्शन साबित हो सकते हैं। आमतौर पर 100% व्हे आइसोलेट्स से बने व्हे प्रोटीन सप्लिमेंट्स में लैक्टोज, फैट और कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है और यह उन लोगों के लिए एक बढ़िया विकल्प है जो ऐसे किसी विकल्प की तलाश में हो और जिसे वे अपनी डायट के साथ अपना सकें। दूसरी तरफ ब्लेंड प्रोटीन विभिन्न प्रकार के प्रोटीन्स को कंबाइन करके बनाए जाते हैं ताकि कंज्यूमर को उन सभी के फायदे मिल सकें।

उदाहरण के लिए व्हे प्रोटीन आइसोलेट्स व्हे प्रोटीन का प्योर फॉर्म होते हैं, व्हे प्रोटीन पेप्टाइड्स या हायड्रोसिलेट्स प्री डाजेस्टेड हैं, केसीन स्लो डायजेस्टिंग है और एग प्रोटीन की बायोलॉजिकल वैल्यू हाय होती है। कोई भी व्यक्ति इनमें से कोई भी या ब्लेंड का ऑप्शन चुन सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह क्या खोज रहा है। व्हे आइसोलेटेड और ब्लेंडेड दोनों व्हे प्रोटीन की बायोलॉजिकल वैल्यू हाय है और ये कंप्लीट प्रोटीन हैं। ये बैलेंस्ड डायट और वर्कआउट डायट के साथ एक बढ़िया अतिरिक्त विकल्प हो सकते हैं।”

ये पढ़ने के बाद कहना गलत नहीं होगा कि दोनों ही तरह के प्रोटीन सप्लिमेंट अपने आप में कारगर साबित होते हैं। इसलिए अलग-अलग लोग इसे अपनी जरूरत के मुताबिक चुन सकते हैं।

जब भी बात आती है वर्कआउट की, तो मसल्स बिल्डिंग को तवज्जो दी जाती है। ऐसे में व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स और व्हे प्रोटीन आइसोलेट में अंतर इस बात से भी समझा जा सकता है कि इनमें से कौन सा प्रोटीन सप्लिमेंट मसल्स बिल्डिंग में मददगार साबित हो सकता है। आइए जानते हैं!

व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स और व्हे आइसोलेट में अंतर : मसल बिल्डिंग में कौन हो सकता है मददगार? ( Whey Protein blends vs Whey isolates)

व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स और व्हे आइसोलेट में अंतर तो अब तक हम समझ ही गए हैं, लेकिन मसल्स बिल्डिंग में हमारी मदद कौन कर सकता है, ये बात हमें एक्सपर्ट से बेहतर कौन बता सकता है। एक्सपर्ट मनीषा चोपड़ा के मुताबिक, “चूंकि व्हे आइसोलेट अधिक प्योर होता है, यह तेजी से एब्जॉर्ब होता है। जब इसे वर्कआउट के बाद लिया जाता है तो यह तेजी से एमिनो एसिड प्रदान करता है और मसल्स बिल्डिंग में मददगार होता है।

मसल बिल्डिंग/ रिबिल्डिंग और रिकवरी ऐसी प्रक्रिया है जो वर्कआउट के बाद 48 घंटे तक हो सकती है। इसलिए हमें पूरे दिन एमिनो एसिड की आवश्यकता हो सकती है ताकि पूरे दिन रिकवरी हो सके। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रोटीन रिच डायट लें और जो भी प्रोटीन आपके लिए कारगर हो उसका सेवन करें।

इस बात का ध्यान रखें कि आपका प्रत्येक दिन का प्रोटीन बैलेंस ठीक रहे। व्हे प्रोटीन आइसोलेट्स कम कार्ब्स और फैट के साथ एक उच्च गुणवत्ता वाला कंप्लीट प्रोटीन हैं इसलिए कुछ लोग इन्हें पसंद करते हैं। वहीं यह उन एथलीट्स के लिए भी फायदेमंद हो सकता है जो कॉम्पिटिशन की तैयारी कर रहे होते हैं और फैट/कार्ब के हर एक ग्राम को मॉनिटर करते हैं। आइसोलेट/या कोई भी प्रोटीन लेने और इसके तेजी से अवशोषण से मसल बिल्डिंग या रिकवरी पर सीधा प्रभाव नहीं पड़ता है।

हालांकि, व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स भी मसल बिल्डिंग में मददगार होते हैं। मसल रिकवरी प्रॉसेस 24X7 और इंटेंस वर्कआउट के बाद कई दिनों तक होती है। ब्लेंड्स फास्ट और स्लो डायजेस्टिंग प्रोटीन्स का मिक्स हो सकते हैं इसलिए लोगों को लग सकता है कि ये आइसोलेट्स जितने प्रभावी नहीं होते। क्योंकि लोगों के मन में यह एक मिथ है कि रिकवरी वर्कआउट के तुरंत बाद होती है इसलिए फास्ट डायजेस्टिंग प्रोटीन्स को सेवन वर्कआउट के तुरंत बाद करना चाहिए। जो कि गलत जानकारी है।

जिम जाने वाले लोग वर्कआउट के बाद 30 मिनट के अंदर प्रोटीन शेक कंप्लसरी समझते हैं। जबकि प्रोटीन शेक लेना का सबसे अच्छा वह है जब आपको इसे लेना अच्छा लगे। इसलिए ये दोनों ही वर्कआउट में मददगार हो सकते हैं। आप अपने वर्कआउट के टाइप, बॉडी और बजट के हिसाब से इनका चयन कर सकते हैं। इसके लिए आप मेडिकल प्रोफेशन की भी सलाह ले सकते हैं।

ये भी जान लें

बता दें कि बॉडी में प्रोटीन का पाचन तब से ही शुरू हो जाता है जब आप प्रोटीन फूड्स या सप्लिमेंट्स को चबाना शुरू करते हैं। स्लाइवा में एमाइलेज और लाइपेज नामक दो एंजाइम होते हैं। वे ज्यादातर कार्बोहाइड्रेट और फैट को ब्रेक डाउन करतें हैं। एक बार जब एक प्रोटीन सोर्स आपके पेट में पहुंच जाता है, तो हाइड्रोक्लोरिक एसिड और प्रोटीज नामक एंजाइम इसे एमिनो एसिड की छोटी श्रृंखलाओं में तोड़ देते हैं, भले ही वह आइसोलेट हों |

जैसा कि आपने जाना आपके गोल को अचीव करने के लिए व्हे प्रोटीन (Whey protein) एक कंप्लीट प्रोटीन सप्लिमेंट माना जाता है। लेकिन यदि आप हाय क्वालिटी और कॉस्ट इफेक्टिव प्रोडक्ट का चयन करना चाहते हैं, तो आप व्हे प्रोटीन ब्लेंड्स (Best protein blends) का ऑप्शन चुन सकते हैं। वहीं यदि आप वर्कआउट के बाद प्रोटीन के प्योर फ़ॉर्म का सेवन करना चाहते हैं, तो आप व्हे प्रोटीन आइसोलेट (Isolate) का चयन कर सकते हैं।

प्रोटीन की जरूरत हर व्यक्ति को हर उम्र में पड़ती है, लेकिन जब बात प्रोटीन की जरूरत को पूरा करने की होती है, तो व्हे प्रोटीन (Whey protein) आपकी पूरी मदद कर सकता है। आप एक्सपर्ट की सलाह लेकर अपनी जरूरत के मुताबिक प्रोटीन सप्लिमेंट का चुनाव कर सकते हैं। ये आपकी मसल्स बिल्डिंग (Muscle Building) से लेकर स्ट्रेंथ बिल्डिंग में आपका साथ दे सकता है। तो आप क्या सोचते हैं, आपके लिए व्हे प्रोटीन सप्लिमेंट का कौन सा प्रकार कारगर साबित होगा? हमें बताएं।

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
Sayali Chaudhari के द्वारा मेडिकली रिव्यूड