कमल का फूल आप सबने देखा ही होगा, यह फूल न सिर्फ बेहद खूबसूरत होता है, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर होता है। कीचड़ में खिलने वाला कमल का फूल हल्के गुलाबी रंग का और बेहद आकर्षक होता है। हिंदू धर्म के अनुसार यह फूल देवी लक्ष्मी का प्रिय है, तभी तो अक्सर गौर किया होगा कि दिवाली के मौके पर देवी लक्ष्मी की पूजा के समय यह फूल अवश्य चढ़ाया जाता है।

कमल के फूल को कई अन्य नामों से भी जाना जाता है, जैसे, लोटस, इंडियन लोटस, चाईनीज वाटर लिली, पिंक वाटर लिली, सेक्रेड लोटस, नीलोफर, पंकज, सरोज, पद्म आदि। इसका साइंटिफिक नाम है नीलंबियन न्यूसिफ़ेरा (Nelumbo nucifera)। कमल के फूल, बीज और जड़ आदि का इस्तेमाल आयुर्वेदिक और एलोपैथी दवाइयों में किया जाता है। वैसे तो ज्यादातर कमल के फूल सफेद और हल्के गुलाबी रंग के होते हैं, मगर इसके अलावा नीले, लाल और जामुनी रंग के भी फूल होते हैं। वैसे तो कमल के फूल से लेकर जड़ तक बहुत उपयोगी होते हैं, लेकिन ज्यादातर इसके बीज से दवाईयां बनाई जाती है। ब्लीडिंग रोकने और डायरिया में कमल के फूल के बीजों का इस्तेमाल किया जाता है।
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कमल के फूल से लेकर जड़ और बीज तक का उपयोग कई तरह की बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है।
कमल के बीज– इसके बीज में फॉस्फोरस, पोटैशियम, कैल्शियम, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट्स होता है। कमल के बीज दिमाग को रिलैक्स करता है और यह हाई ब्लड प्रेशर और डायरिया के उपचार में काम आता है। इसके अलावा कमल का बीज किडनी, इंटेस्टाइन, पेट और हृदय को सही तरीके से काम करने में मदद करता है और यह अनिद्रा और बेचैनी की समस्या को भी दूर करता है। बीज का पाउडर बनाकर इसे शहद के साथ खाने से कफ से राहत मिलती है।
कमल का फूल– गर्मियों में होने वाले हीट स्ट्रोक और ब्लड क्लॉटिंग दूर करने में कमल का फूल बहुत उपयोगी होता है। कमल के फूल की चाय बनाकर पी सकते हैं। कमल की पंखुड़ियां सूजन और प्यास की समस्या को दूर करने में मददगार है। इस फूल में कैल्शियम और आयरन की भरपूर मात्रा होती है।
कमल के पत्ते– पेट की बीमारियों और ब्लड क्लॉटिंग को रोकने में कमल के पत्ते उपयोगी होते हैं। चूंकि पत्ते बहुत बड़े साइज के होते हैं, तो इसका इस्तेमाल आप खाने को ढकने के लिए भी कर सकते हैं। पुराने जमाने में बुखार होने पर शरीर का तापमान कम करने के लिए मरीज के पूरे शरीर को कमल के पत्ते में लपेट दिया जाता था। कमल के पत्ते ब्लड लिपिड्स को कम करते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को ठीक रखते हैं। वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक मशरूम पॉइजनिंग होने पर कमल के पौधे के किसी भी हिस्से का इस्तेमाल करके इसका उपचार किया जा सकता है।
कमल का तना– इसका तना किडनी और हृद्य के लिए फायदेमंद होती है। चूंकि कमल के तने में एस्ट्रीजेंट प्रॉपर्टीज़ होती है इसलिए इसका इस्तेमाल बार-बार पेशाब की समस्या, प्रीमेच्योर इज्याकुलेशन और यूट्रस ब्लीडिंग की समस्या दूर करने के लिए किया जाता है।
कमल की जड़ें– इसकी जड़ों में भी एस्ट्रीजेंट होता है और यह रक्तस्राव के लक्षणों को कंट्रोल करने में बहुत कारगर है। इसमें मौजूद औषधीय गुण मानव शरीर से हानिकारक टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद करते हैं। इसके अलावा यह शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने, कोशिकाओं को दोबारा बनने, पुरुषों में स्पर्म काउंट बढ़ाने और पेट को सही तरीके से काम करने में मदद करता है। कमल की जड़ की सब्जी भी बनाई जाती है। यह लो कैलोरी रूट वेजीटेबल है 100 ग्राम जड़ में 74 कैलोरी होती है। साथ ही यह डायटरी फाइबर का भी अच्छा स्रोत है। 100 ग्राम जड़ के सेवन से 4.9 ग्राम या 13% डायटरी फाइबर की आपूर्ति होती है।
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कमल का फूल न सिर्फ सेहत के लिए अच्छा होता है, बल्कि यह स्किन के लिए भी बेहतरीन टॉनिक का काम करता है । यह आपकी त्वचा को ग्लोइंग और जवां बनाए रखने में मदद करता है ।
जवां और चमकदार त्वचा– कमल में एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो आपकी स्किन एंटी एजिंग का काम करता है और त्वचा को ग्लोइंग बनाता है। कोरियन जर्नल ऑफ केमकिल इंजीनियरिंग में छपी एक रिसर्च के मुताबिक, कमल का फूल और इसके पत्तों में मौजूद गुण त्वचा को लचीला बनाते हैं, स्किन सेल्स को मज़बूत करते हैं, झुर्रियां कम करते हैं और चेहरे पर निखार लाने में मदद करते हैं ।
त्वचा की लालिमा और इरिटेशन कम करते हैं– कमल के फूल में मौजूद एंटी इन्फ्लामैटरी गुण त्वचा को आराम पहुंचाते हैं और लालिमा और इरिटेशन की समस्या को दूर करते हैं। इसमें विटामिन ए भी होता है जो घाव को जल्दी ठीक करने और सूजन कम करने में मदद करता है।
अतिरिक्त ऑयल को कंट्रोल करता है- त्वचा पर बनने वाले अतिरिक्त ऑयल को कंट्रोल करने में कमल का फूल बहुत मददगार होता है, खासतौर पर जब इसे ग्रीन टी के साथ इस्तेमाल किया जाता है तो यह सीबम प्रोडक्शन को कंट्रोल करके त्वचा को बैलेंस करता है। ऑयली और मुंहासे वाली स्किन के लिए यह बहुत फायदेमंद है। यह पोर्स को बंद होने से रोकता है और मुंहासों को कंट्रोल करता है।
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इसके अलावा आप आयुर्वेदिक ब्यूटी रेमेडीज के बारे में अरोमा थेरिपिस्ट व कॉस्मेटोलॉजिस्ट पूजा नागदेव से इस वीडियो में जानें-
हर चीज के फायदे और नुकसान होते हैं, इसलिए किसी चीज के इस्तेमाल से पहले आपको उसके फायदों के साथ ही साइड इफेक्ट के बारे में भी पता होना चाहिए। वैसे तो कमल के ढेरों फायदे हैं, लेकिन कुछ स्थितियों में इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिएः
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कमल की कितनी मात्रा का सेवन करना सुरक्षित है यह कई कारकों पर निर्भर करता है जैसे व्यक्ति की उम्र, सेहत और अन्य स्थितियां। फिलहाल कमल की सही खुराक के संबंध में कोई वैज्ञानिक रुप से प्रमाणित जानकारी नहीं है। इस बात का ध्यान रखें कि नैचुरल प्रोड्क्टस की सही खुराक बहुत ज़रूरी होती है, इसलिए इसके इस्तेमाल से पहले पैकेट पर दी गई जानकारी पढ़ने के साथ ही अपने डॉक्टर या हर्बल एक्सपर्ट्स से सलाह अवश्य लें।
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अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर
हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।
Accessed on 24 june 2020
Ethno-medicinal uses and pharmacological activities of lotus
http://www.plantsjournal.com/vol2Issue6/Issue_nov_2014/7.1.pdf
Effect of Nelumbo Nucifera Rhizome Extract on Blood Sugar Level in Rats
https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/9421256/
Herb: Sacred Water Lotus
http://www.naturalmedicinalherbs.net/include/searchherb.php?herbsearch=Nelumbo+nucifera&x=0&y=0
Benefits of Lotus Flower in Skincare
LOTUS
https://www.rxlist.com/lotus/supplements.htm
Health Benefits Of Sacred Lotus Flower (Nelumbo Nucifera)
https://www.livealittlelonger.com/health-benefits-of-sacred-lotus-flower-nelumbo-nucifera/
Current Version
25/06/2020
Kanchan Singh द्वारा लिखित
के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड डॉ. पूजा दाफळ
Updated by: Mousumi dutta