इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग (Implantation Bleeding) क्या होती है?

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Update Date जून 30, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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कैलिफोर्निया में सेंट जॉन हेल्थ सेंटर के डॉ शेरी रॉस कहते हैं कि, ”इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग काफी हद तक सामान्य है और लगभग 25 प्रतिशत गर्भधारण में ऐसा होता है। कई मामलों में यह गर्भावस्था का पहला संकेत भी हो सकता है।

जब निषेचित अंडा महिला के गर्भाशय के अस्तर से जुड़ जाता है तब आरोपण रक्तस्राव यानी इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग का होना माना जाता है। आमतौर पर यह गर्भवती होने वाली महिलाओं के पीरियड्स आने के समय होता है। हालांकि, इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग पीरियड्स के दौरान होने वाली ब्लीडिंग से हल्की होती है। आपको यह जानना चाहिए कि कुछ महिलाओं को आरोपण रक्तस्राव का अनुभव नहीं होता है तो कई महिलाएं इसे नोटिस नहीं कर पाती हैं। ऐसे में कभी-कभी यह भी एहसास नहीं हो पाता कि वे गर्भवती हैं। इस आर्टिकल में हम आपको इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग के कारण, इसके संकेत और यह पीरियड्स से कैसे अलग है? इसके बारे में पता रहे हैं। 

और पढ़ें: पीएमएस और प्रेग्नेंसी के लक्षण में क्या अंतर है?

इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग के क्या लक्षण (Implantation Bleeding) हो सकते हैं?

इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग के दौरान होने वाले रक्तस्राव और मासिक धर्म के लक्षणों में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। इसके लक्षण गर्भावस्था के जैसे ही होते हैं। जिसमें योनि से ब्लीडिंग आने पर यह पहचाना जाता है कि यह इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग है। सामान्यतः यदि योनि से भूरा या गुलाबी अथवा गहरे रंग का ब्लड या स्पॉट निकले तो इसे इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग का लक्षण समझा जाता है।

इसके अलावा निम्नलिखित लक्षण भी इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग के हो सकते हैं:

  • पेट में हल्का और भारी दर्द होना– प्रेग्नेंसी के लक्षणों में पेट में दर्द होना भी शामिल है, लेकिन अगर दर्द हद से ज्यादा हो तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।
  • मूड स्विंग होना-  मूड स्विंग को प्रेग्नेंसी का लक्षण माना जाता है, लेकिन बार-बार मूड खराब होने पर इस बात का ध्यान रखें कि कहीं या डिप्रेशन के लक्षण तो नहीं है।
  • सिर दर्द– कभी-कभी इस दौरान सिर दर्द भी होता है।
  • लगातार कुछ समय तक योनि से चिपचिपा पदार्थ निकलना- वजायनल डिस्चार्ज को भी गर्भावस्था का लक्षण शुरुआती लक्षण माना जाता है।
  • योनि से हल्का खून निकलना और फिर बंद होना
  • बॉडी टेम्प्रेचर का बढ़ जाना
  • योनि में सेंसिटिविटी महसूस होना
  • चक्कर आना– चक्कर आना भी गर्भावस्था का लक्षण माना जाता है।
  • जी मिचलाना-जी मिचलाना या मतली गर्भावस्था का दूसरा सबसे मुख्य संकेत होता है। यह आमतौर पर फर्टिलाइजेशन करने के दो हफ्तों के बाद महसूस होता है और पहली तिमाही तक रह सकता है। कई महिलाओं को पूरे समय तक जी मिचलाना और उल्टी जैसी समस्याएं रह सकती हैं।
  • पीरियड्स से पहले या दौरान योनि से थिक ब्राउन लिक्विड का निकलना।

और पढ़ें: सिजेरियन डिलिवरी के बाद क्यों होता है सिर दर्द? ऐसे कर सकते हैं इलाज

इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग (Implantation Bleeding) में ब्लड का कलर

आमतौर पर मासिक धर्म के दौरान तीन से पांच दिनों तक ब्लीडिंग रहती है। जो शुरुआत में ज्यादा होती है और फिर कम हो जाती है। इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग के दौरान रिसने वाला ब्लड आमतौर पर गहरे भूरे या काले रंग का होता है। जिसका मतलब होता है कि यह पुराना ब्लड है। हालांकि, कभी-कभी यह गुलाबी रंग का भी हो सकता है।

महिलाओं के लिए आरोपण रक्तस्राव (Implantation Bleeding) और रेगुलर पीरियड्स के बीच के अंतर को पहचानना मुश्किल होता है, क्योंकि लक्षण कई बार सामान्य से अलग हो सकते हैं।

रेगुलर पीरियड और इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग के बीच अंतर इस प्रकार हैं:

नॉर्मल/रेगुलर पीरियड्स में होने वाला रक्तस्राव

  • यह अमूमन तीन से सात दिनों तक रहता है जिसमें दो से तीन दिनों तक गाढ़ा लाल खून आता रहता है।
  • शुरुआत में ज्यादा ब्लीडिंग (रक्तस्राव) होती है और अंत होने तक कम हो जाती है।
  • नॉर्मल पीरियड्स में ब्लीडिंग से पहले गर्भाशय में ऐंठन होती है और यह दो से तीन दिनों तक रह सकता है।

और पढ़ें: पीरियड्स के दौरान योनि में जलन क्यों होती है? जानिए इसके कारण और इलाज

इम्प्लांटेशन के बाद होने वाला रक्तस्राव

  • आरोपण के दौरान आमतौर पर ब्लीडिंग 24 से 48 घंटे से अधिक नहीं रहती है।
  • ब्लीडिंग बहुत हल्की होती है और इसमें आमतौर पर भूरा, गुलाबी, या काले रंग का ब्लड निकलता है।
  • गर्भाशय में ऐंठन कम हो जाती है।

यह कितने दिनों तक रह सकता है?

डॉ शेरी रॉस बताते हैं कि एक रेगुलर पीरियड्स के विपरीत, इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग बहुत कम समय तक रहती है। यह आमतौर पर 24 से 48 घंटों से ज्यादा समय तक नहीं रहती। यह निषेचित अंडे को गर्भाशय के अस्तर में प्रत्यारोपित होने में लगने वाला समय है।

डॉ रॉस इसकी टाइमलाइन को इस प्रकार समझाते हैं:

  • दिन 1: पीरियड्स का पहला दिन
  • दिन 14 से 16: ऑव्युलेशन होता है
  • दिन 18 से 20: निषेचन (Fertilisation) होता है
  • दिन 24 से 26: अंडे आरोपित होते हैं और इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग लगभग 2 से 7 दिनों के लिए होती है।

और पढ़ें: पहली बार पीरियड्स होने पर ऐसे रखें अपनी बच्ची का ख्याल

मुझे कब चिंता करनी चाहिए?

गर्भावस्था के दौरान होने वाली ब्लीडिंग्स (इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग) कई महिलाओं में असामान्य तरीके से होती है। डॉक्टर इसे बहुत गंभीरता से लेते हैं और गर्भवती महिलाओं को इसकी रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

यदि ब्लीडिंग देर रात से हो रही है और लगातार और काफी मात्रा में ब्लड निकल रहा है तो अपने डॉक्टर से परामर्श लें। किसी भी इमरजेंसी जैसी स्थिति में इसके इवैलुएशन के लिए आपको इमरजेंसी वार्ड में जाना पड़ सकता है।

इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग (Implantation Bleeding) होने पर टेस्ट कब करवाना चाहिए?

अब तो आप समझ गए होंगे कि इम्प्लांटेशन के दौरान होने वाली ब्लीडिंग कई बार गर्भवती होने का संकेत होती है। हालांकि, यदि आप इस समय प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाती हैं तो हो सकता है कि टेस्ट रिजल्ट नेगेटिव आए। इसलिए अमेरिकन प्रेग्नेंसी एसोसिएशन के अनुसार ब्लींडिंग व स्पॉटिंग बंद होने के तीन दिन बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाना चाहिए।

इसके अलावा प्रेग्नेंसी टेस्ट के रिजल्ट को सटीक रूप से प्राप्त करने के लिए पीरियड्स ना आने के एक हफ्ते के बाद टेस्ट करवाना चाहिए। आप थोड़ा पहले भी टेस्ट करवा सकती हैं। हमेशा एक हफ्ते के बाद टेस्ट करवाना बेहतर होता है और पुष्टि के लिए टेस्ट को बाद करना चाहिए।

हम उम्मीद करते हैं कि इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग पर लिखा गया यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। वैसे तो इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग से घबराने की जरूरत नहीं है। गर्भावस्था के दौरान ऐसा होता ही है, लेकिन अगर ब्लीडिंग बहुत ज्यादा और लगातार हो रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान और उपचार प्रदान नहीं करता। 

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