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गर्भावस्था की पहली तिमाही में अपनाएं ये प्रेग्नेंसी डायट प्लान

गर्भावस्था की पहली तिमाही में अपनाएं ये प्रेग्नेंसी डायट प्लान

प्रग्नेंसी की खबर मिलने के बाद महिलाओं के मन में प्रेग्नेंसी डायट प्लान को लेकर कई सवाल आते हैं। खाना तो हम सभी रोज खाते हैं लेकिन, प्रेग्नेंसी डायट प्लान थोड़ा अलग होता है। इस समय मां के साथ ही होने वाले बच्चे को भी पूरा पोषण चाहिए होता है। प्रेग्नेंसी डायट प्लान पर अगर ध्यान दिया जाए तो मां और होने वाला बच्चा दोनों ही स्वस्थ्य रहते हैं। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हैलो स्वास्थ्य आपको प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में डायट प्लान कैसा होना चाहिए जानकारी दे रहा है। प्रेग्नेंसी डायट प्लान को फॉलो करने से मां के साथ-साथ बच्चा भी तंदरुस्त होता है।

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पहली तिमाही में कैसा हो प्रेग्नेंसी डायट प्लान? (First Trimester Diet Plan)

प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में आपको 300 कैलोरी एक्स्ट्रा चाहिए होती है। साथ ही 15 से 20 ग्राम रोजाना प्रोटीन की आवश्यकता होती है। कई बार शरीर की जरूरत के हिसाब से या फिर मेडिकल कंडिशन की वजह से ये आकड़ा अलग भी हो सकता है। आपको कैलोरी लेने के साथ ही उसे बर्न करने के बारे में भी सोचना चाहिए। प्लेट में 50 % फल और सब्जियाें को शामिल करें। 25 % प्रोटीन भी आपको लेना है। चार टेबलस्पून फैट रोजाना लिया जाना चाहिए। अपनी प्रेग्नेंसी डायट प्लान में प्रोटीन को शामिल करें।

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पहली तिमाही में डायट प्लान : ये फूड प्रदान करते हैं प्रोटीन (Protein rich food items)

प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में डायट प्लान करते समय आपको अधिक सावधानी की जरूरत है। प्रेग्नेंसी की शुरूआत में महिलाओं को बहुत से फूड की महक पसंद नहीं आती है। वॉमिटिंग के कारण ज्यादातर चीजों को खाने की इच्छा भी नहीं होती है। ऐसे में खाने में पौष्टिक आहार को शामिल करना बहुत जरूरी हो जाता है। दाल, बींस, पनीर, दूध, मछली, अंडे, मांस, टोफू, और नट्स जैसे खाद्य पदार्थ प्रोटीन का एक समृद्ध स्रोत हैं। गर्भावस्था के दौरान ये खाद्य पदार्थ आपके बच्चे के विकास के लिए बहुत जरूरी है। प्रेग्नेंसी डायट प्लान में इन प्रोटीन फूड्स को शामिल करें।

साबुत अनाज (Whole grain)

मल्टीग्रेन चपाती, गेहूं का पास्ता, दलिया, गेहूं की रोटी और भूरे चावल को डायट में शामिल करें। कार्बोहाइड्रेट लेने के लिए ऐसे अनाज का प्रयोग करना आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा रहेगा। प्रेग्नेंसी डायट प्लान में साबुत अनाज को जोड़े। ये आपके साथ-साथ आपके पेट में पल रहे बच्चे के लिए भी अच्छा है।

डायट में डेयरी प्रोडक्ट्स को करें शामिल (Add dairy products in your diet)

प्रेग्नेंसी डायट प्लान में डेयरी प्रोडक्ट चुनते समय दही, दूध और पनीर को शामिल करना दोनों के लिए अच्छा विकल्प है। ये आपके बच्चे की हड्डियों के लिए आवश्यक कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन डी प्रदान करते हैं। प्रेग्नेंसी डायट प्लान में डेयरी प्रोडक्ट शामिल करें जो कैल्शियम देता है। बच्चे की हड्डियों के विकास के लिए कैल्शियम बहुत जरूरी है इसलिए मां का डेयरी प्रोडक्ट खाना हमेशा फायदेमंद होता है।

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प्रेग्नेंसी डायट प्लान में फल और सब्जियां जोड़ें (Add fruits and vegetables in pregnancy diet)

अगर प्रग्नेंसी के दौरान आपका वेट बहुत बढ़ गया है तो कोशिश करें कि सब्जियों को तलने की बजाय उबाल कर खाएं। विभिन्न फल और सब्जियां फाइबर, विटामिन और खनिजों में समृद्ध होते हैं। इनमे कैलोरी भी कम होती है। उबाल कर सब्जियां खाने से आप बिना कुछ एक्स्ट्रा जोड़ें सब्जी के सभी पोषक तत्व ले सकें। प्रेग्नेंसी के दौरान अगर आपको कुछ सब्जियां खाने से मतली आती है तो उसे अलग-अलग तरह से बना कर खाएं। सब्जियां और फल छोड़ना आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है।

फल- प्रेग्नेंसी में दिन में तीन से चार बार फलों का सेवन करें। इसमें कम से कम एक सिट्रस फ्रूट को जरूर शामिल करें। सिट्रस फ्रूट विटामिन सी से भरपूर होता है। एक दिन में एक कप से ज्यादा मौसमी का जूस न लें। एक संतरा या सेब का सेवन करें। आधा केला, एक चौथाई कप ड्राय फ्रूट को डायट में शामिल करें।

सब्जियां- दिन में तीन से पांच बार सब्जी का सेवन करें। न्युट्रिएंट्स से भरपूर सब्जियों से अपनी प्लेट को भर लें। सब्जियों में ब्रोकली, पालक, गाजर, स्वीट पोटेटो, पंपकिन, कॉर्न, यैलो पेपर, टमाटर, रेड पेपर आदि को शामिल करें।

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पहली तिमाही के दौरान प्रेग्नेंसी डायट प्लान में सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व में फोलिक एसिड, आयरन और विटामिन बी 6 जरूरी होता है।

  • फोलिक एसिड बच्चे को न्यूरल ट्यूब डिसऑर्डर जैसे कि स्पाइना बिफिडा (spina bifida) और अन्य जन्म के विकारों जैसे कि क्लेफ्ट पैलेट (cleft palate) से बचाता है। इसलिए प्रेग्नेंसी डायट प्लान में फोलिक एसिड को जोड़ें।
  • स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने के लिए आयरन आवश्यक होता है। ये आपके शरीर के चारों ओर ऑक्सिजन ले जाने का काम करता है। पर्याप्त आयरन न होने से आपको थका हुआ महसूस हो सकता है इसलिए प्रेग्नेंसी डायट प्लान में आयरन की मात्रा ठीक ढ़ंग से लें। आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया भारत में आम है इसलिए यह पोषक तत्व पूरे गर्भावस्था में महत्वपूर्ण है।
  • मॉर्निंग सिकनेस के कारण आपको बेचैनी लग सकती है। साथ ही ज्यादा खाने का मन भी नहीं करेगा। विटामिन बी 6 मतली को कम करने में मदद कर सकता है। प्रेग्नेंसी डायट प्लान में विटामिन बी 6 का सेवल करें ये आपको प्रेग्नेंसी की सबसे सामान्य परेशानी से बचाता है। एक साथ ज्यादा खाना न खाएं। हर कुछ घंटे में थोड़ा बहुत खाने की कोशिश करें। न तो ज्यादा देर तक खुद को भूखा रखें और न ही एक साथ ज्यादा खाना खाएं। इसके अलावा स्पाइसी और फैटी फूड को एवॉइड करें। इससे सीने में जलन और पेट में तकलीफ की शिकायत हो सकती है।

और पढ़ें : पीएमएस और प्रेग्नेंसी के लक्षण में क्या अंतर है?

इन मेडिकल कंडिशन में रखें ध्यान (Keep in mind these medical conditions)

अगर आपको पहले से किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या है तो प्रेग्नेंसी डायट प्लान करते समय इस बात का ध्यान जरूर रखें कि आपको किसी चीज से एलर्जी तो नहीं है। अगर आपको डायबिटीज की समस्या है तो आपको पहले से निश्चित करना होगा कि कौन सा फूड अवॉयड करना है। हाइड्रेटेड रहने के लिए दिन में करीब आठ से 12 गिलास पानी जरूर पिएं।

आपको कुछ बातें ध्यान रखने की जरूरत है (Take care of these things)

प्रेग्नेंसी डायट प्लान में फल और सब्जियों को शामिल करते वक्त इस बात ध्यान रखें कि आजकल सभी सीजन में लगभग सभी सब्जियां और फल मिल जाते हैं। आपको ये सोचने कि जरूरत नहीं है कि इस सीजन में फलां चीज नहीं मिलेगी। वैसे भी कहा जाता है कि मौसमी फल या सब्जियां शरीर के लिए लाभकारी होते हैं। अगर कुछ नहीं भी मिल रहा है तो उसकी जगह सीजन फल या सब्जियों को स्थान दिया जा सकता है। इससे आपको समान न्यूट्रिएंट्स ही मिलेंगे। कई बार सिंगल फूड से ही आपको कई प्रकार का पोषण मिल जाएगा। उदाहरण के लिए दाल में अच्छी मात्रा में फॉलिक एसिड, ओमेगा 3 फैटी एसिड और आयरन की अच्छी मात्रा पाई जाता है। जो लोग वेजीटेरियन है, उनके लिए ये अच्छा स्त्रोत है। चाहे तो पहली तिमाही के लिए एक प्रकार का फूड, वहीं दूसरी तिमाही के लिए अलग प्रकार का फूड अपना सकती हैं। इसके लिए आप डायटीशियन की मदद ले सकती हैं।

प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही में डायट प्लान क्या होना चाहिए, ये तो आपने जान लिया। आपको इस बारे में भी जानकारी होनी चाहिए कि प्रेग्नेंसी के दौरान क्या नहीं खाना चाहिए। प्रेग्नेंसी के दौरान आपके ऐसे फूड बिल्कुल नहीं खाने चाहिए जिनसे आपको एलर्जी या किसी प्रकार की दिक्कत महसूस होती हो। साथ ही प्रेग्नेंसी में मछली का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए। मछली में मरकरी पाया जाता है जो बच्चे के स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं होता है। साथ ही पैक्ड फूड को पूरी तरह से न कह दें तो बेहतर होगा। प्रेग्नेंसी के दौरान घर का बना पौष्टिक आहार खाएं। बाहरी फूड खाना आपके हाजमे के लिए भी ठीक नहीं है। वहीं मैदे से बने आइटम्स न ही खाएं तो बेहतर होगा। महिलाओं को प्रेग्नेंसी में कब्ज की समस्या का सामना भी करना पड़ जाता है। ऐसे में जरूरी है कि फाइबर युक्त आहार को भी खाने में शामिल करें।

और पढ़ें: गर्भधारण के लिए सेक्स ही काफी नहीं, ये फैक्टर भी हैं जरूरी

प्रेग्नेंसी के पहले तीन महीने बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान पोषण का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। यहां बताई गई टिप्स को फॉलो करके आप एक बेहतर प्रेग्नेंसी डायट प्लान कर सकते हैं। फिर भी कोई डायट अपनाने से पहले डायटीशियन से संपर्क करें। उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में प्रेग्नेंसी डायट प्लान से जुड़ी जानकारी दी गई है। इस लेख से जुड़ा आपका कोई प्रश्न है तो आप कमेंट सेक्शन में पूछ सकते हैं।

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ड्यू डेट कैलक्युलेटर

अपनी नियत तारीख का पता लगाने के लिए इस कैलक्युलेटर का उपयोग करें। यह सिर्फ एक अनुमान है - इसकी गैरेंटी नहीं है! अधिकांश महिलाएं, लेकिन सभी नहीं, इस तिथि सीमा से पहले या बाद में एक सप्ताह के भीतर अपने शिशुओं को डिलीवर करेंगी।

सायकल लेंथ

28 दिन

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Healthy Eating During Pregnancy: https://foodinsight.org/healthy-eating-during-pregnancy/ Accessed August 21, 2020

PRENATAL NUTRITION: https://www.med.umich.edu/pfans/_pdf/hetm-2017/0417-prenatalnutrition.pdf Accessed August 21, 2020

Pregnancy week by week: https://www.mayoclinic.org/healthy-lifestyle/pregnancy-week-by-week/in-depth/pregnancy-nutrition/art-20045082 Accessed August 21, 2020

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Changes in dietary intake from the first to the second trimester of pregnancy: https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC1488723/ Accessed August 21, 2020

लेखक की तस्वीर
Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 25/11/2020 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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