पर्पल नट सेज एक ऐसा पौधा है जो घास की तरह दिखता है। इसका वैज्ञानिक नाम साइप्रस रोटडंस (Cyperus rotundus) है। इसके कंद यानी गांठ को स्टार्च के स्रोत के रूप में खाया जाता है। दवा बनाने के लिए कंद और पौधे ऊपर के हिस्सों का भी उपयोग किया जाता है। लोग मधुमेह, दस्त और अपच जैसी स्थितियों के पारंपरिक उपचार (traditional treatment) के रूप में इस पौधे का उपयोग करते हैं। इसे त्वचा पर मुँहासे, रूसी और कई अन्य स्थितियों के लिए भी इस्तेमाल में लाते हैं।

पर्पल नट सेज एक एंटीऑक्सीडेंट है। यह रक्त शर्करा को कम कर सकता है और कुछ बैक्टीरिया के विकास को रोक सकता है। इसे कोको ग्रास (coco grass), जावा ग्रास (java grass), नट ग्रास (nut grass), नागरमोथा जैसे तमाम नामों से भी जाना जाता है।
डायबिटीज जैसे चयापचय संबंधी विकारों के डायट्री मैनेजमेंट में इस हर्ब का उपयोग किया जाता है। पौधे का अर्क एंजाइमों (α-amylase और α-glucosidase) को रोकता है जो कार्बोहाइड्रेट पाचन में मदद करते हैं। एक एनिमल स्टडी में पाया गया कि नट ग्रास के अर्क को लेने के बाद जानवरों के हाइपरग्लाइसेमिक टेस्ट में रक्त शर्करा के स्तर में गिरावट मिली। शोधकर्ताओं का मानना था कि ऐसा हर्ब की एंटीऑक्सिडेंट एक्टिविटी के कारण था।
मिर्गी रोग में पर्पल नट सेज (purple nut sedge) का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है। एक स्टडी की माने तो नट ग्रास मिर्गी के लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकती है क्योंकि इसमें एंटीकॉन्वेलसेंट और एंटीऑक्सिडेंट प्रॉपर्टीज होती हैं।
नट ग्रास के एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-रूमेटिक गुण जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होते हैं। एक एनिमल स्टडी की माने तो जड़ी बूटी नाइट्रिक ऑक्साइड और सुपरऑक्साइड के उत्पादन को रोकती है। ये दो ऐसे मेडिएटर्स हैं जो जैसे रूमेटाइड अर्थराइटिस (RA) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह एक क्रोनिक, ऑटोइम्यून, इंफ्लेमेशन वाली स्थिति है। इसके उपयोग से शरीर में सूजन को नियंत्रित करके स्थिति को बेहतर बनाने में मदद की जाती है।
हालांकि, इन कंडीशंस में इस जड़ी बूटी के उपयोग के लिए और अधिक रिसर्च की आवश्यकता है।
पर्पल नट सेज का सेवन ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित होता है। इसका एसेंशियल ऑइल त्वचा पर इस्तेमाल के लिए सम्भवतः सुरक्षित है। इसका उपयोग डॉक्टर की देखरेख में ही करें। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर या हर्बलिस्ट से सलाह लें।
यह जानने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय जानकारी नहीं है कि क्या गर्भवती या स्तनपान के दौरान पर्पल नट सेज का सेवन सुरक्षित है। इस्तेमाल से पहले इस विषय पर एक बार अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
पर्पल नट सेज ब्लड क्लॉटिंग को धीमा कर सकता है। यह रक्तस्राव विकार से ग्रस्त वाले लोगों में चोट या ब्लीडिंग के जोखिम को बढ़ा सकता है।
पर्पल नट सेज जड़ी-बूटी दिल की धड़कन को धीमा कर सकती है। यह उन लोगों में ज्यादातर देखने को मिल सकती है जिनको पहले से ही हृदय गति धीमी होने की समस्या है।
इस हर्ब के सेवन से ब्लड शुगर का स्तर कम हो सकता है। डायबिटीज ग्रस्त लोगों को अपने रक्त शर्करा के स्तर की बारीकी से निगरानी करनी चाहिए। यदि आप डायबिटीज पेशेंट हैं, तो पर्पल नट सेज के इस्तेमाल से पहले अपने डॉक्टर या हर्बलिस्ट से संपर्क जरूर करें।
पर्पल नट सेज से आंतों में “कंजेशन’ हो सकता है। इससे उन लोगों में समस्या हो सकती है जिनकी आंतों में किसी तरह की रुकावट है।
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इस जड़ी-बूटी के सेवन से पेट और आंतों में सेक्रेशन बढ़ सकता है। इससे पेट का अल्सर की स्थिति खराब हो सकती है।
यह कोको ग्रास फेफड़ों में फ्लूइड सेक्रेशन को बढ़ा सकती है। इससे फेफड़ों की स्थिति और खराब हो सकती है जैसे अस्थमा या वातस्फीति (emphysema)।
इसका सेवन सर्जरी के दौरान ब्लीडिंग या ब्लड शुगर के लेवल के साथ इंटरैक्ट कर सकती है। एक सर्जरी से कम से कम 2 सप्ताह पहले ही इसका का सेवन बंद कर देना चाहिए।
पर्पल नट सेज के इस्तेमाल से यूरिनरी ट्रैक्ट में स्राव बढ़ सकता है। इससे यूरिनरी ट्रैक्ट में रुकावट आ सकती है।
पर्पल नट सेज की उपयुक्त खुराक कई कारकों पर निर्भर करती है जैसे कि उपयोगकर्ता की आयु, स्वास्थ्य और अन्य स्वास्थ्य स्थितियां। अभी इस हर्ब के लिए खुराक की एक उपयुक्त सीमा निर्धारित करने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक डेटा मौजूद नहीं है। ध्यान रखें कि हर्बल उत्पाद हमेशा सुरक्षित नहीं होते हैं। प्रोडक्ट लेबल पर दिए गए निर्देशों का पालन करना सुनिश्चित करें और उपयोग करने से पहले अपने फार्मासिस्ट या आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।
यह निम्नलिखित रूपों में उपलब्ध है:
अगर आपका इससे जुड़ा किसी तरह का कोई सवाल है, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।
डिस्क्लेमर
हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।
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Current Version
07/07/2020
Shikha Patel द्वारा लिखित
के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड डॉ. पूजा दाफळ
Updated by: Niharika Jaiswal