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Diabetic Eye Disease: मधुमेह संबंधी नेत्र रोग क्या है? जानें कारण, लक्षण और उपाय

मधुमेह संबंधी नेत्र रोग क्या है?|मधुमेह संबंधी नेत्र रोग के लक्षण क्या हैं?|मधुमेह संबंधी नेत्र रोग के कारण क्या हैं?|मधुमेह संबंधी नेत्र रोग के जोखिम क्या हैं?|मधुमेह संबंधी नेत्र रोग के उपचार क्या है?
Diabetic Eye Disease: मधुमेह संबंधी नेत्र रोग क्या है? जानें कारण, लक्षण और उपाय

मधुमेह संबंधी नेत्र रोग क्या है?

आमतौर पर किसी व्यक्ति को नेत्र से संबंधित कई परेशानियां हो सकती है, परन्तु कई नेत्र समस्याएं मधुमेह अर्थात डायबिटीज से भी उत्पन्न हो सकती है। जिन लोगों को डायबिटीज यानी मधुमेह की समस्या होती है, उन्हें आंखों संबंधि समस्याओ का सामना भी करना पड़ सकता है। इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए कि मुधुमेह संबंधी नेत्र रोग (Diabetic Eye Disease) क्या है और किस तरह के लक्षण इस बीमारी में नजर आते हैं।

मधुमेह नेत्र रोग (Diabetic Eye Disease) में शामिल हैं

मधुमेह रेटिनोपैथी,
• डायबिटिक मैक्युलर एडिमा,
मोतियाबिंद की समस्या
•ग्लोकोमा (आंख का रोग)

ज्यादातर इस समस्या का सामना उन लोगों को करना पड़ सकता है, जिन्हें टाइप 1 या टाइप 2 मधुमेह है। यदि आपको डायबिटीज लम्बे समय से है और आपका ब्लड शुगर भी नियंत्रित नहीं है, तो सम्भवता इसका असर आपकी आंखों पर पड़ सकता है।

मधुमेह से जुड़ी अन्य नेत्र की समस्याएं क्या हैं?

डायबिटीज होने पर आपको दृष्टि में परेशानी हो सकती है, चाहे फिर आपको किसी प्रकार का मधुमेह नेत्र रोग ना हो।

यदि आपके ब्लड शुगर का स्तर अस्थिर है, तो यह आपकी आंख के लेंस के आकार को प्रभावित कर सकता है, जिससे आपकी दृष्टि धुंधली हो सकती है। ब्लड शुगर के स्थिर होने के बाद आपकी दृष्टि वापस सामान्य हो जाती है। चश्मे का नंबर जांचने से पहले अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने की कोशिश करें। ऐसा करने से आइ स्पेशलिस्ट को आपको सही चश्मे का नंबर प्रदान करने में मदद मिलती है।

और पढ़ें : Hidradenitis suppurativa: जानें हाइड्राडेनिटिस सुप्पुरातीव क्या है?

मधुमेह संबंधी नेत्र रोग के लक्षण क्या हैं?

अक्सर मधुमेह संबंधी नेत्र रोग (Diabetic Eye Disease) के शुरुआती लक्षण नहीं होते हैं। आपको कोई दर्द नहीं होता है और आपकी दृष्टि में भी कोई बदलाव नहीं आते है। शुरुआती समय में आपकी आंखों के अंदर क्षति बढ़ने लगती है, विशेष रूप से मधुमेह रेटिनोपैथी में।

कुछ लक्षण निम्नलिखित हो सकते हैं:

• धुंधली या तरंगमय (वेवी)दृष्टि
• बार-बार बदलती दृष्टि
• अंधेरे क्षेत्रों में दिखाई ना देना या दृष्टि हानि
• रंगों का सही से ना दिखना
• धब्बे या काले तार (जिन्हें फ्लोटर्स भी कहा जाता है)
• प्रकाश की चमक

यदि आपको इनमें से किसी भी परेशानी का सामना करना पड़े, तो अपने आंखों के डॉक्टर से संपर्क करें।

डॉक्टर से कब संपर्क करें?

डाइअबीटीज का सही प्रकार से मैनेजमेंट करना आपकी दृष्टि हानि को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। यदि आपको डायबिटीज है, तो साल में कम से कम एक बार नेत्र चिकित्सक के पास जाकर अपने नेत्रों का परीक्षण अवश्य करवाएं – भले ही आपकी दृष्टि ठीक हो।

गर्भावस्था के दौरान मधुमेह रेटिनोपैथी और बिगड़ सकता है, इसलिए यदि आप गर्भवती हैं, तो आपका चिकित्सक आपकी गर्भावस्था के दौरान अतिरिक्त नेत्र परीक्षण की सलहा दे सकता है। यदि आपकी दृष्टि अचानक बदल जाती है या धुंधली या धब्बेदार हो जाती है, तो तुरंत अपने नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें।

और पढ़ें : Hypopituitarism : हाइपोपिटिटारिज्म क्या है?

मधुमेह संबंधी नेत्र रोग के कारण क्या हैं?

मधुमेह वाले लोगों में हाई ब्लड शुगर (हाइपरग्लाइसीमिया) और मेटाबॉलिज्म में अन्य असामान्यताएं शरीर के ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचने के कारण शरीर के विभिन्न भागों में रक्त का बहाव सही प्रकार से नहीं हो पाता है। चूंकि रक्त का कार्य ऑक्सीजन और अन्य पोषक तत्वों को ले जाने के लिए होता है, इस खराब संचलन के कारण शरीर के विभिन्न हिस्सों में टिशू को ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है और बाद में उन टिशू को नुकसान होता है। रक्त के प्रवाह में कमी और ऑक्सीजन वितरण के लिए सबसे संवेदनशील टिशू में शामिल है: मस्तिष्क, हृदय, किडनी और आंखें। इन क्षेत्रों में पर्याप्त ऑक्सीजन ना पहुंचने से स्ट्रोक, दिल का दौरा, किडनी का फैल होना और दृष्टि हानि हो सकती है।

नॉन-रेटिनल परिवर्तन जिसके कारण मधुमेह नेत्र रोग (Diabetic Eye Disease) होता है:

मोतियाबिंद (कैटरैक्ट )

ब्लड शुगर लेवल में तेजी से बदलाव: डायबिटीज की समस्या से पीड़ित कई लोगों के ब्लड शुगर लेवल में काफी तेजी से बदलाव होने पर उनकी दृष्टि धुंधली हो जाती है। यह धुंधलापन अस्थायी रूप से होता है, क्योंकि रक्त में बढ़ता हुआ शुगर लेवल आंख के लेंस में फैल सकता है और इसमें सूजन आ सकती है, इस प्रकार आंख का केंद्र बिंदु बदल जाता है और परिणामस्वरूप दृष्टि धुंधली हो जाती है। बार-बार सूजन आने से आंख के लेंस को नुकसान पहुंचता है, जिसके परिणामस्वरूप मोतियाबिंद होता है।

ग्लोकोमा (Glaucoma)

हाई ब्लड शुगर लेवल भी आंख के सामने की ओर सेल लाइनिंग, ट्रेक्यूलर मेशवर्क को नुकसान पहुंचा सकता है, जहां आंख के भीतर से द्रव बहता है।

जब ये कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो ट्रैब्युलर मेशवर्क ठीक से काम नहीं कर सकता है। यदि ट्रेबिकुलर मेशवर्क ठीक से काम नहीं करता है, तो द्रव आंख से बाहर नहीं निकल सकता है और आंख के अंदर दबाव बढ़ सकता है। आंख के अंदर यह उच्च दबाव ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचा सकता है और स्थायी दृष्टि हानि का कारण बन सकता है।इस प्रक्रिया को ग्लोकोमा कहा जाता है।

मधुमेह नेत्र रोग (Diabetic Eye Disease) कई तरह की समस्याओं का कारण बन सकता है, जो आंखों को प्रभावित करता है, इसमे विशेष रूप से रेटिना, लेंस, और ट्रेक्यूलर मेशवर्क शामिल है।

मधुमेह संबंधी रेटिनोपैथी (Diabetic retinopathy)

“रेटिना” आंख का वह हिस्सा है जो मधुमेह के कारण सबसे पहले प्रभावित होता है। मधुमेह से होने वाली रेटिना संबंधी असामान्यताओं को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहते हैं। डायबिटिक रेटिनोपैथी वाले ज्यादातर लोगों को दोनों आंखों में समस्या होती है, हालांकि गंभीरता का स्तर भिन्न हो सकता है।

रेटिना की तुलना एक कैमरे की फिल्म से की जा सकती है। यदि कैमरे में फिल्म खराब होगी, तो परिणामस्वरूप तस्वीर धुंधली होगी। इसी तरह से, यदि आंख का रेटिना सूज गया हो, उस पर झुर्री आ गयी हो, या किसी अन्य प्रकार से क्षतिग्रस्त हो, तो उस आंख में दृष्टि धुंधली हो जाती है। रेटिना के प्रकार, स्थान और क्षति की मात्रा के आधार पर, यह पता लगता है कि दृष्टि में परिवर्तन न्यूनतम से लेकर गंभीर है या अस्थायी या स्थायी होगा ।

आमतौर पर यह तब होता है जब मधुमेह रेटिना की छोटी ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचाता है। छोटी ब्लड वेसेल्स “बैलून” से शुरू हो सकती हैं, जिसे माइक्रोन्यूरिसेस कहा जाता है, साथ ही रिसाव द्रव (जिसे एडिमा कहा जाता है) और रक्त (रेटिना डॉट और ब्लॉट हेमरेज) रेटिना में जमा हो जाता है। इस प्रक्रिया को बैकग्राउंड डायबिटिक रेटिनोपैथी या नॉनप्रोलिफेरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है। यदि रेटिना के मध्य भाग में तरल पदार्थ जमा होता है (जिसे मैक्युला कहा जाता है) और वहाँ सूजन का कारण बनता है, तो प्रक्रिया को डायबिटिक मैक्यूलर एडिमा कहा जाता है।

और पढ़ें- Diabetic nephropathy: डायबिटिक नेफ्रोपैथी क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज

रेटिना में ऑक्सीजन की डिलीवरी कम होने की प्रतिक्रिया के रूप में, रेटिना के भीतर नई असामान्य ब्लड वेसेल्स विकसित होना शुरू हो सकती हैं, जो कि एक प्रक्रिया है जिसे न्यूक्लियलाइज़ेशन कहा जाता है। इसकी मुख्य जटिलता यह है कि अगर समय रहते इसका पता नहीं लगाया गया अंधापन हो सकता है। यही कारण है कि मधुमेह वाले लोगों के लिए नियमित रूप से उनकी दृष्टि के स्वास्थ्य की निगरानी करना बहुत महत्वपूर्ण है।

मधुमेह संबंधी नेत्र रोग के जोखिम क्या हैं?

मधुमेह वाले किसी भी व्यक्ति को मधुमेह संबंधी नेत्र रोग (Diabetic Eye Disease) हो सकता है। यह जोखिम अधिक बढ़ जाते है, जब:

• हाई ब्लड ग्लूकोस का इलाज ना होने पर
• उच्च रक्तचाप का इलाज ना होने पर
• हाई ब्लड कोलेस्ट्रॉल और धूम्रपान भी मधुमेह संबंधी नेत्र रोग (Diabetic Eye Disease) के जोखिम को बढ़ा सकता है।

कुछ समूह दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावित होते हैं। अफ्रीकी अमेरिकियों, अमेरिकी भारतीयों और अलास्का मूल निवासी, हिस्पैनिक्स / लैटिनो, पैसिफिक आइलैंडर्स और वृद्ध आदमियों को दृष्टि खोने या मधुमेह से अंधे होने का अधिक खतरा है।

यदि आपको मधुमेह है और आप गर्भवती हैं, तो ऐसें में आपको बहुत जल्दी आँखों की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता हैं। यदि आपको पहले से ही डायबिटिक रेटिनोपैथी की परेशानी है, तो यह गर्भावस्था के दौरान परेशानी का कारण बन सकता है। गर्भावस्था के दौरान आपकी आंखों की कोशिकाओं पर दवाब पढ़ता है, ऐसे में आप अपने डॉक्टर के सुझाव के अनुसार नियमित रूप से आंखों की जांच करवाएं और आपकी दृष्टि की रक्षा करें। डायबिटीज़ जो केवल गर्भावस्था के दौरान होती है, जिसे जेस्टेशनल डायबिटीज़ कहा जाता है, आमतौर पर आँखों की समस्या नहीं होती है।

यदि आपको लंबे समय से डायबिटीज़ के परेशानी है, तो ऐसे में आपको मधुमेह संबंधी नेत्र (Diabetic Eye Disease) रोग के विकास की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

आंखों के संपूर्ण परीक्षण के जरिये आप डायबिटीज से हुई आंखों की समस्याओं का पता लगा सकते है। आंखों की पुतली को बड़ा करने के लिए डॉक्टर आपकी आँख में दवाई की कुछ बूंदें डालते है। डॉक्टर एक विशेष लेंस का उपयोग करके प्रत्येक आंख की जांच करते है। परीक्षण के बाद कुछ घंटों के लिए आपकी दृष्टि धुंधली हो जाती है।

इसके साथ ही आपका डॉक्टर निम्नलिखित परीक्षण भी करता है:

• अपनी दृष्टि का परीक्षण
• अपनी आंखों में दबाव को मापना
• आपका डॉक्टर आपके स्वास्थ्य इतिहास के आधार पर, अन्य परीक्षण भी सुझा सकता है।

मधुमेह संबंधी नेत्र रोग के उपचार क्या है?

डायबिटीज से पीड़ित ज्यादातर लोगों को आपका डॉक्टर साल में एक बार आंखों की पूरी जांच कराने की सलाह दे सकता है। इसके अंतर्गत मधुमेह एबीसी का प्रबंधन करना, जिसमें आपके ए 1 सी, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल शामिल हैं। इसके साथ ही आपको धूम्रपान छोड़ने की भी सलहा दी जाती है। अपनी स्वास्थ्य देखभाल टीम से पूछें कि आप अपने लक्ष्यों तक पहुँचने के लिए क्या कर सकते हैं।

दवा

आपका डॉक्टर आपकी आंखों का इलाज एंटी-वीईजीएफ़ दवाई, जैसे कि एफ़िबेल्सेप्ट, बेवाकिज़ुमैब, या रैनिबिज़ुमाब से कर सकता है। ये दवाएं आंख में असामान्य रक्त वाहिकाओं के विकास को रोकती हैं। एंटी-वीईजीएफ दवाएं भी तरल रिसाव को रोक सकती हैं, जो मधुमेह के मैक्युलर एडिमा के इलाज में मदद कर सकती हैं।

सबसे पहले डॉक्टर आपकी आंखों में एंटी-वीईजीएफ दवा इंजेक्ट करते है। एंटी-वीईजीएफ उपचार दृष्टि हानि को रोक सकते हैं और इसके इस्तेमाल से कुछ लोगों की दृष्टि में सुधार किया जा हैं।

लेजर उपचार

लेजर उपचार, जिसे फोटोकोगुलेशन भी कहा जाता है, इसके अंतर्गत आपकी आंखों का उपचार लेजर बीम द्वारा किया जाता है। इस उपचार में आमतौर पर डॉक्टर आपकी आंखों को सबसे पहले सुन्न करने के लिए दवा का उपयोग करते है तथा उसके पश्चात लेजर प्रक्रिया शुरू करते है। लेजर उपचार आपकी आँखों को काफी हद तक ठीक करने में सक्षम है। लेकिन एंटी-वीईजीएफ दवाओं की तुलना में पहले से ही खोयी हुई दृष्टि वापस लाने के लिए लेजर उपचार की संभावना कम है।

लेजर उपचार के दो प्रकार हैं:

फोकल / ग्रिड लेजर उपचार के जरिये रेटिना के छोटे हिस्से में डायबिटिक मैक्युलर एडिमा का इलाज किया जा सकता है।

स्कैटर लेज़र ट्रीटमेंट, जिसे पैनेरेटिनल फोटोकैग्यूलेशन (PRP) भी कहा जाता है, रेटिना के एक बड़े हिस्से को कवर करता है। यह विधि असामान्य रक्त वाहिकाओं के विकास का इलाज करती है, जिसे प्रोलिफेरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है।

विट्रेक्टॉमी

विट्रेक्टॉमी एक सर्जरी है, जिसके अंतर्गत आंखों पर से क्लियर जेल को हटाया जाता है, जिसे विटेरस जेल भी कहा जाता है। विट्रेक्टॉमी के जरिये आँखों में होने वाले गंभीर रक्तस्राव या स्कार टिशू के कारण होने वाली समस्याओं का इलाज किया जाता है।

मोतियाबिंद लेंस सर्जरी

मोतियाबिंद लेंस सर्जरी के अंतर्गत डॉक्टर आपकी आंख में आये धुंधले लेंस को हटा सकता है, जहां मोतियाबिंद बढ़ गया है, और इसे कृत्रिम लेंस के साथ बदल सकता है। जिन लोगों को मोतियाबिंद की सर्जरी होती है उनमें आमतौर पर बाद में बेहतर दृष्टि होती है। आपकी आंख की सर्जरी होने के बाद, आपको अपने चश्मे का नंबर बदलना पड़ सकता है। मोतियाबिंद सर्जरी के बाद आपकी दृष्टि भी डायबिटिक रेटिनोपैथी या मैक्यूलर एडिमा से किसी भी नुकसान के इलाज पर निर्भर हो सकती है।

अपनी दृष्टि की रक्षा के लिए निम्नलिखित कदम उठाएं

• डायबिटीज से होने वाली आंखों की क्षति को रोकने के लिए, अपने ब्लड शुगर पर सही प्रकार से नियंत्रण बनाए रखें
• पौष्टिक आहार का सेवन करें
• नियमित रूप से व्यायाम करें
• नियमित रूप से आँखों की जांच करवाएं

उपरोक्त दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से जरूर पूछें। आपको इस आर्टिकल के माध्यम से आपको मधुमेह संबंधी नेत्र रोग (Diabetic Eye Disease) के बारे में जानकारी मिल गई होगी। अगर मन में अधिक प्रश्न हैं, तो बेहतर होगा कि इस बारे में डॉक्टर से पूछें। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

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Poonam द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 29/06/2021 को
डॉ. पूजा दाफळ के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड