आपके गले और लैरिंक्स को करीब से देखने और जांचने के लिए किये जाने वाले टेस्ट को लैरिंगोस्कोपी कहते हैं। लैरिंक्स सांस की नली के ऊपर स्थित होती है। सांस की नली में होने वाली किसी परेशानी को लैरिंगोस्कोपी टेस्ट से देखा जा सकता है। लैरिंगोस्कोपी टेस्ट गले की समस्या को जांचने के लिए किया जाता है। गला अगर हेल्दी नहीं है तो गले में कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं। कुछ समस्याएं जैसे कि गले में तेजी से दर्द होना या गले में कुछ फंसा होने का एहसास, थ्रोट में स्वेलिंग आदि होने पर इस टेस्ट को किया जा सकता है। इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए कि लैरिंगोस्कोपी टेस्ट की जरूरत कब होती है और कैसे इसे किया जाता है।
निम्नलिखित स्थितियों में ये टेस्ट करवाया जा सकता है:

इन ऊपर बताई गई स्थितियों में डॉक्टर टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।
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निम्नलिखित परिस्थितियों में लैरिंगोस्कोपी नहीं की जा सकती है। जैसे-
इन स्थितियों लैरिंगोस्कोपी नहीं करवाई जा सकती :
इस प्रक्रिया के बाद गले में हल्की जलन हो सकती है। लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है ये आम है।
हो सकता है डॉक्टरआपको खून को पतला करने वाली दवाओं लेने से मना करें। इस बारे में भी डॉक्टर से बात कर लें।
इस प्रक्रिया लगभग पांच से 45 मिनट समय लगेगा। ये दो प्रकार की हो सकती है :
1. इनडाइरेक्ट: प्रक्रिया में डॉक्टर आपको कुर्सी पर बैठाएंगे पर एनस्थीसिया डालेंगें इसके बाद जीभको गौज (Gauze) से ढककर पकड़ लेंगें। इसके बाद शीशे को गले में डाल कर अंदर के रीजन देखेंगें।
2 . डाइरेक्ट: इस प्रक्रिया में टेलिस्कोप का उपयोग होता है। नाक या मुंह से टेलिस्कोप गले के अंदर डाला जाता है। डॉक्टर टेलिस्कोप की मदद से लैरिंक्स और गले के अंदर के हिस्से को देखते हैं। बहुत ज्यादा गहरी जांच केलिए ये तरीका अधिक कारगर है।
जांच के बाद हल्के गरम पानी से गरारा करने से गले को राहत मिलेगी। और अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
इस प्रक्रिया का परिणाम इसके किए जाने के कारण पर निर्भर करता है। कई बार गले में विकार की जांच और कई बार किसी बाहरी फांसी हुई चीज को निकालने के लिए लैरिंगोस्कोपी का उपयोग किया जा सकता है। अगर लैरिंगोस्कोपी के साथ बायोप्सी भी हुई है तो परिणाम आने में अधिक समय लगेगा।
आपकी जांच के आधार पर डॉक्टर आपको इलाज और दवाइयों की सलाह देंगें। अधिक जानकारी केलिए डॉक्टर से अवश्य मिलें।
लैरिंगोस्कोपी टेस्ट के निम्नलिखित साइड इफेक्टस हो सकते हैं। जैसे-
इन साइड इफेक्ट्स के साथ-साथ अन्य शारीरिक परेशानी हो सकती हैं। लैरिंगोस्कोपी के बाद आपके हेल्थ एक्सपर्ट आपको जरूरी सलाह देंगे।
निम्नलिखित घरेलू उपाय से इस परेशानी से बचा जा सकता है। जैसे-
अगर आप कोई ऐसा काम करते हैं जिसमे आपको बोलने की जरूरत ज्यादा होती है तो कोशिश करें गले को आराम देने की। बहुत तेज आवाज में बात न करें। आराम से बात करने की कोशिश करें।
गले की खरास से बचने के लिए हल्के गर्म पानी से गार्गल करें। कोशिश करें की गार्गल खाना खाने के बाद दिन या रात में करें। इससे ज्यादा राहत मिल सकती है।
एप्पल साइडर विनेगर सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है। एक चम्मच एप्पल साइडर विनेगर में एक चम्मच शहद मिला लें। अब इसमें पानी मिलायें। दिन में दो बार इसे पीने से एलर्जी की समस्या कम हो सकती है और साथ ही साथ वजन कम करने के लिए भी काफी उपयोगी है। इसलिए भी एप्पल साइड वेनिगर का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ रहा है। बढ़ता वजन किसी को भी पसंद नहीं आता और हर कोई खुद को स्लिम ट्रिम और मेंटेन रखना चाहता है।
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गले की परेशानी या सर्दी-जुकाम होने पर अदरक फायदेमंद होता है। अदरक को हल्का पका कर शहद के साथ खाने से परेशानी कम हो सकती है। इसके सेवन से कफ और इंफेक्शन की समस्या भी कम हो सकती है।
लहसुन में मौजूद एंटीवायरल, एंटीऑक्सीडेंट और एंटीफंगल गुण होते हैं। इसके अलावा इसमें विटामिन, मैंगनीज, कैल्शियम, आयरन आदि पोषक तत्व होते हैं। ताजे लहसुन के सेवन से भी गले की समस्या से राहत मिल सकती है।
अत्यधिक तेज चिल्लाने या गाना गाने से बचें। ऐसा करने से समस्या बढ़ सकती है।
उपरोक्त दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अगर आपको लैरिंगोस्कोपी टेस्ट कराना है तो आप डॉक्टर से इस बारे में जानकारी ले सकते हैं। अगर आप लैरिंगोस्कोपी से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।