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कोविड-19 और हार्ट डैमेज : कोरोना के मरीज पहले से ही रहें अलर्ट!

कोविड-19 और हार्ट डैमेज : कोरोना के मरीज पहले से ही रहें अलर्ट!

कोरोना की तीसरी लहर ने भी दस्तक दे दी है और यह कितने समय तक रहने वाला है, यह किसी को भी नहीं पता है। यह सभी को पता है कि कोराेना के शिकार मरीजों के लंग काफी प्रभावित हो रहे हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि लंग के अलावा कई मरीजों में हार्ट की भी गंभीर समस्या देखने को मिल रही है। कोविड-19 और हार्ट डैमेज (Covid-19 and heart damage)में बहुत गहरा संबंध है। कोरोना से ठीक होने के बाद भी, ठीक हुए मरीजों में कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम हो रही हैं। यहां तक कि कई मामले ऐसे भी आए हैं, जहां करोनो से ठीक हो चुके मरीजों की मौत हार्ट अटैक के कारण हो गई। यहां हम आपको इसके पीछे की वजह और इससे बचने का तरीका बता रहे हैं। इससे पहले जानें यहां किकोविड-19 और हार्ट डैमेज (Covid-19 and heart damage) में क्या संबंध है?

और पढ़ें: कोरोना वायरस के ट्रांसमिशन फैक्टर: मास्क पहनने के साथ, इन छोटी-छाेटी बातों की तरफ भी गौर करें!

कोविड-19 और हार्ट डैमेज में क्या संबंध है? (Covid-19 and heart damage)

ऑक्सफोर्ड के जर्नल की एक स्टडी के अनुसार जिन लोगों को गंभीर कोरोना हुआ था, उनमें से करीबन 30 प्रतिशत हॉस्पिटल में भर्ती हो मरीजों की रिकवरी के कुछ दिनों और महीनों के बाद हार्ट डैमेज (Heart Damage) की समस्या देखी गई थी। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि कोरोना वायरस (Corona Virus) हमारे शरीर के रिसेप्टर सेल्स को भी प्रभावित कर सकते है और मायोकार्डियम टिशू को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए समय रहते इसकी देखभाल बहुत जरूरी है, नहीं तो यह बाद में चलकर हार्ट फेल्योर का कारण बन सकता है। जिन लोगों को पहले से ही दिल की बीमारी है, उनके लिए खतरा और भी बढ़ सकता है। रिकवरी के बाद भी मरीज काे समय-समय पर अपना हार्ट रेट को चेक करवाते रहना चाहिए। कोविड-19 का संक्रमण शरीर में इंफेक्शन को ट्रिगर करता है, जिस कारण हार्ट की मांसपेशियां प्रभावित होकर धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। इस कारण कई बार ब्लड क्लॉटिंग की समस्या (Blood clotting problem) भी हो सकती है। कई एक्स्पर्ट का भी मानना है कि 30 से 50 की उम्र वाले कोविड-19 से रिकवर होने वाले लोगों में तेजी से हार्ट से जुड़ी समस्याएं देखी गई हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो इसमें सांस लेने में दिक्कत महसूस होना, सीने में दर्द, अचानक हार्ट बीट का घटना और बढ़ना जैसे लक्षण हार्ट अटैक और हार्ट फेल्योर जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

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कब होता है हार्ट फेल (Heart Failure)

हार्ट फेल की कंडिशन किसी व्यक्ति में तब होती है, जब हार्ट की मांसपेशियां में ब्लड फ्लो के साथ सही रूप से पम्प नहीं हो पाता है। सही रूप से पंप न हो पाने के कारण तब संकुचित धमनियां और हाय ब्लड प्रेशर दिल को पर्याप्त पम्पिंग के लिए कमजोर कर देता है। ये एक प्रकार की क्रॉनिक डिजीज है, जिसका रहते इलाज बहुत जरूरी है। एक्सपर्ट्स भी यही सलाह देते हैं कि जिन लोगों को कोरोना के चपेट में आने से से पहले जिन्हें कोई मामूली हार्ट डिसीज हो रखा हो या फिर कोविड-19 के बाद छाती में दर्द की शिकायत है, तो वो हार्ट के इमेजिंग जरूर करवाएं। इसमें आपको पता चल पायगा कि कहहं वायरस ने दिल की मांसपेशियों को तो नुकसान नहीं पहुचाया है।

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हार्ट फेल होने के लक्षण (Symptoms of heart Failure)

यदि किसी भी व्यक्ति में हार्ट से संबंधित समस्या शुरू हो रही है, तो उनमें सांस फूलने के लक्षण (Symptoms of shortness of breath)जरूर दिखायी देने लगते हैं। इसके अलावा सीने में दर्द और भूख न लगना भी इसका एक लक्षण है। इसके साथ ही शरीर में कमजोरी और थकावट भी महसूस हो सकती है। कई मरीजों की हार्ट बीट तेज और अनियमित भी हो सकती हैं। अगर किसी इंसान में ये सभी लक्षण दिखायी देते हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं। शुरुआती स्टेज पर इलाज मिलने पर हार्ट अटैक की समस्या को कंट्रोल किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर इलाज के लिए लेफ्ट वेंट्रीकुलरअसिस्ट डिवाइस प्रोस्यूजर और थेरिपी के साथ एक हार्ट ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। हार्ट के लक्षण नजर आ सकते हैं।

और पढ़ें: अल्जाइमर और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज: हार्ट फेलियर बन सकता है अल्जाइमर का कारण?

कोविड-19 और हार्ट डैमेज : हृदय रोग की समस्या से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान (Heart Problem)

कोविड के बाद भी शरीर में इंफ्लामेशन (Inflammation) और ब्लड क्लॉटिंग (Blood clotting) की समस्या भी देखने को मिलता है। कई बार क्लॉटेज की समस्या की वजह से भी मरीजों में हार्ट से जुड़ी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। इसके अलावा हार्ट के मरीजों में इस तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं:

  • कुछ मरीजों में कोरोना का संक्रमण रेस्पिरेट्री ट्रैक्ट (Corona infection respiratory tract) और लंग्स को ही प्रभावित करता है। कई बार हार्ट भी इससे प्रभावित हो सकता है।
  • हार्ट पेशंट्स को कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए अपना विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। छोटा सा इंफेक्शन भी उनके लिए भारी हो सकता है। क्योंकि सामान्य लोगों की तुलना में हार्ट पेशंट्स को अगर कोरोना इंफेक्शन से प्रभावित हो जाते हैं, तो उनकी लाइफ पर रिस् 10 प्रतिशत ज्यादा ही होता है।
  • कोरोना का संक्रमण दिल की मांसपेशियों में सूजन का कारण भी बन सकता है। जिससे हार्ट को पंपिंग करने में दिक्कत आती है और ब्लड सप्लाई भी ठीक तरह से नहीं हो पाती है। जिस कारण लोगों में दर्द की समस्या भी देखने को मिल सकती है।
  • कोरोना से ठीक हुए मरीजों को शुरूआत के कुछ महीने डॉक्टर की सलाह पर मल्टी विटामिंस भी लेते रहना चाहिए। इससे उनकी इम्यूनिटी को भी मजबूत होने में मदद मिलेगी। यदि किसी को डायबिटीज जैसी क्रॉनिक डिजीज है या प्रेग्नेंट महिलाएं अपने मन से किसी प्रकार की दवाएं न लें। जो भी दवा लें डॉक्टर की सलाह पर ही लें। अअपने मन से दवा लेना भारी पड़ सकता है।

और पढ़ें: कोरोना वायरस के ट्रांसमिशन फैक्टर: मास्क पहनने के साथ, इन छोटी-छाेटी बातों की तरफ भी गौर करें!

  • कोरोना के साथ डायबीटीज, हायपरटेंशन या लो ब्लड प्रेशर के मरीजों में भी हार्ट प्रॉब्लम का रिस्क हाय हो जाता है। उनके समय-समय पर चैकअप करवाते रहना चाहिए। यदि सामान्य लोगों से तुलना की जाए, तो दिल के मरीजों की ही तरह शुगर के पेशंट्स में कोरोना इंफेक्शन से जान का खतरा 20 प्रतिशत तक बढ़ जाता है और हाय बीपी होने पर यह खतरा 7.3 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
  • कोरोना से ठीक होने के बाद भी सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें
  • ऐसे में मैं हार्ट डिजीज के से बचाव के लिए पेशेंट को अपनी हेल्थ का ध्यान रखना चाहिए। वो अधिक से अधिक समय फैमिली के साथ समय बिताइए, टेंशन फ्री रहें और आराम करें। जो लोग अधिक स्ट्रेस लेते हैं, उन्हें हार्ट की समस्या का रिस्क ज्यादा होता है।
  • यदि पहले भी कोई फैमिली हिस्ट्री हार्ट की रह चुकी है, तो मरीज को और भी विशेष ध्यान देना चाहिए। सामान्य लोगों की तुलना में कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों में कई तरह की बीमारी हावी हो सकती है। इस तरह से काेविड-19 और हार्ट डैमेज में बहुत गहरा संबंध है। कोरोना संक्रमण के शिकार हो चुके लोगों की इम्यूनिटी शुरूआती दौर पर काफी कमजोर देखी जाती है।

और पढ़ें: हायपरटेंशन में सिलाहार्ट 10 एमजी: हार्ट रिस्क्स से बचाव के लिए दी जा सकती है इस मेडिसिन की सलाह!

  • कोराेना के मरीजों में बाद में भी कई तरह के तनाव और मूड स्विंग की समस्या देखी गई है। जिस वजह से भी उनमें हार्ट के दिक्कतें बढ़ सकती हैं। इस तरह से कोविड-19 और हार्ट डैमेज का भी गहरा संबंध है। कोरोना के मरीज कोशिश करें कि वो कम से कम तनाव लें।
  • कोराेना मरीजों को अपने एक्सरसाइज का भी विशेष ध्यास रखना चाहिए। इससे भी वो दिल की समस्या से बच सकते हैं।
  • अगर इस तरह से कोविड-19 और हार्ट डैमेज की बात करें तो कोरोना के शिकार हो चुके लोगों को शुरूआत के कुछ महीने अपनी डायट का विशेषतौर पर ध्यान रखना चाहिए। एंटी-ऑक्सिडेंट युक्त फूड ज्यादा लें।
  • अगर आप लगातार घर पर ही है, तो इसका यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि आप अपना रेग्युलर शेड्यूल डिस्टर्ब कर लें। अपनी दिनचर्या और लाइफस्टाइल को पहले जैसे ही एक्टिव रखने की कोशिश करें।
  • खुद को आराम दें और पूरी नींद लें। अच्छा हेल्थ के लिए भरपूर नींद बहुत जरूरी है। क्योंकि अगर आपका सोने-जागने का वक्त बदल जाता है, तो ऐसे में दवाइयों का शेड्यूल भी डिस्टर्ब हो सकता है।
  • फिजिकली ऐक्टिव रहने के लिए आप वॉक भी कर सकते हैं।

इस तरह से कोविड-19 और हार्ट डैमेज में क्या संबंध है आपने जाना यहां। कोराेना से ठीक होने के बाद मरीजों को अपने हेल्थ और डायट का विशेषतौप पर ध्यान रखना चाहिए। थोड़ी सी भी लापरवाही उन पर भारी पड़ सकती है। समय-समय पर अपने हार्ट का और कुछ जरूरी चैकअप जरूरी करवाएं। डायट डॉक्टर की सलाह पर ही लें और अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से ही संपर्क करें।

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बीएमआई कैलक्युलेटर

अपने बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की जांच करने के लिए इस कैलक्युलेटर का उपयोग करें और पता करें कि क्या आपका वजन हेल्दी है। आप इस उपकरण का उपयोग अपने बच्चे के बीएमआई की जांच के लिए भी कर सकते हैं।

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
और Admin Writer द्वारा फैक्ट चेक्ड
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