Cranberries : क्रैनबेरी क्या है?

By Medically reviewed by Dr. Radhika apte

क्रैनबेरी किसलिए इस्तेमाल किया जाता है? (Cranberry Uses In Hindi )

क्रैनबेरी (cranberry) यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। क्रैनबेरी का जूस यूटीआई (UTIs) को रोकने में मदद तो करता है लेकिन इसको ठीक करने में ज्यादा प्रभावी नहीं है।

क्रैनबेरी (cranberry) न्यूरोजेनिक ब्लैडर यानी ब्लैडर संबंधी बीमारी के अलावा ऐसे लोग जिनको मूत्र नियंत्रण करने में कठिनाई होती है, उनके मूत्र की दुर्गंध को दूर करने में इस्तेमाल होता है। कुछ लोग यूरीन के फ्लो को बढाने, कीटाणुओं को मारने, त्वचा के घाव को जल्दी भरने और बुखार को कम करने में क्रैनबेरी का इस्तेमाल करते हैं।

कई लोग टाइप 2 डायबिटीज़, क्रोनिक फटीग सिंड्रोम (chronic fatigue syndrome, CFS), स्कर्वी रोग, फेफड़े के चारों तरफ होने वाले इन्फ्लेमेशन और कैंसर आदि में क्रैनबेरी का इस्तेमाल करते हैं।

क्रैनबेरी कैसे काम करता है?

यह हर्बल सप्लीमेंट शरीर मे कैसे काम करता है इस बारे में अभी ज्यादा शोध मौजूद नहीं है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप किसी डॉक्टर या किसी हर्बल विशेषज्ञ से संपर्क करें। हालांकि कुछ शोध ऐसा मानते हैं कि क्रैनबेरी और इसकी तरह तमाम सब्जियों और फलों में पर्याप्त मात्रा में सैलिसिलिक एसिड पाया जाता है जोकि ऐस्प्रिन का एक महत्वपूर्ण इंग्रेडिएंट (ingredient) होता है।

क्रैनबेरी का जूस पीने से शरीर मे सैलिसिलिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है। आपको बता दें कि सैलिसिलिक एसिड सूजन को कम करता है, ब्लड क्लॉट को रोकता है और इसमें ढेर सारे एन्टी-ट्यूमर इफेक्ट्स भी होते हैं।

क्रैनबेरी से जुड़ी सावधानियां और चेतावनी (Precautions and Warnings Related To Cranberry In Hindi)

क्रैनबेरी के इस्तेमाल से पहले मुझे क्या जानकारी होनी चाहिए? 

क्रैनबेरी और उससे जुड़े पदार्थों को धूप और नमी से दूर रखना चाहिए।

क्रैनबेरी यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन Urinary Tract Infection (UTI) को रोकने में प्रभावी है लेकिन इस बीमारी को पूर्णतः ठीक नहीं कर पाता है।

क्रैनबेरी का इस्तेमाल करते समय आपको जेनिटोयूरिनरी स्टेटस (genitourinary status) को मॉनिटर करना चाहिए: जैसे यूरिनरी फ्रीक्वेंसी(urinary frequency), हेजीटेंसी पेन(Hesitency Pain) या जलना आदि। यदि किसी को यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (Urinary Tract Infection) है तो उस मरीज को एंटीबायोटिक थेरैपी का इस्तेमाल करना चाहिए।

हर्बल सप्लीमेंट के उपयोग से जुड़े नियम दवाओं के नियमों जितने सख्त नहीं होते हैं। इनकी उपयोगिता और सुरक्षा से जुड़े नियमों के लिए अभी और शोध की ज़रुरत है। इस हर्बल सप्लीमेंट के इस्तेमाल से पहले इसके फायदे और नुकसान की तुलना करना ज़रुरी है। इस बारे में और अधिक जानकारी के लिए किसी हर्बल विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक डॉक्टर से संपर्क करें।

कितना सुरक्षित है क्रैनबेरी का सेवन?

ऐसे लोग जिनको कम मात्रा में मूत्र निकलने की समस्या हो या मूत्र ना निकलने की समस्या हो या फिर जो लोग इस हर्ब्स (Herbs) के प्रति अतिसंवेदनशील हों, उनको क्रैनबेरी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

अगर किसी को यूरिनरी फ्रीक्वेंसी(Urinary Frequency), हेजिटेन्सी पेन(Hesitency Pain), या फ़िर जलन की समस्या है तो ऐसे लोग एंटीबायोटिक थेरैपी की जगह पर क्रैनबेरी का इस्तेमाल ना करें।

अगर आपको किडनी स्टोन की समस्या है तो आप क्रैनबेरी से जुडे किसी भी पदार्थ या फिर क्रैनबेरी के जूस से परहेज करें।

क्रैनबेरी के सेवन से मुझे क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं? (Side Effect Of Cranberry In Hindi)

क्रैनबेरी के सेवन से कई तरह के साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं जैसे

  • डायरिया(अधिक मात्रा में इस्तेमाल करने पर)
  • अतिसंवेदनशीलता Hypersensitivity Reactions)

क्रैनबेरी के सेवन से अन्य किन चीजों पर प्रभाव पड़ता है? (Cranberry Interaction In Hindi)

क्रैनबेरी के सेवन से आपकी बीमारी या आप जो वतर्मान में दवाइयां खा रहे हैं उनके असर पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए सेवन से पहले डॉक्टर से इस विषय पर बात करें। कुछ परस्पर प्रभाव इस प्रकार हैं,

वयस्कों- नीचे दी गईं दवाओं के साथ सावधानी बरतें।

वारफैरिन(Warfarin): वारफैरीन(कॉमाडीन, Coumadin), ब्लड क्लॉटिंग को धीमा कर देता है। आपको बता दें कि क्रैनबेरी शरीर में वारफैरिन को बढ़ा देता है जिसकी वजह से कटने और ब्लीडिंग की संभावना बढ़ जाती है। आपको अपने ब्लड की जांच नियमित रूप से करानी चाहिए। आपके वारफैरीन की खुराक में बदलाव की जरूरत है।

बच्चों में (Minor): इनको निम्नलिखित दवाओं के साथ सावधानी बरतनी चाहिए,

लीवर से जुड़ी दवाइयां (साइटोक्रोम p450, 2C9(CYP2C9) सब्सट्रेट): कुछ दवाओं का स्वरूप लीवर के द्वारा बदल जाता है। आपको बता दें कि क्रैनबेरी लीवर की इस क्रिया को कम कर देता है। अगर आप ऐसी दवाओं के साथ जिनका स्वरूप लीवर के द्वारा बदल जाता है, क्रैनबेरी का सेवन करते हैं तो इन दवाओं के साइड इफेक्ट बढ़ सकते हैं। अगर आप ऐसी दवाएं ले रहे हैं जिनका स्वरूप लीवर के द्वारा बदल जाता है तो ऐसी स्थिति में क्रैनबेरी का सेवन करने से पहले किसी हेल्थकेयर प्रोवाइडर से संपर्क करें।

वो दवाइयां जिनका स्वरूप लीवर के द्वारा बदल जाता है वो निम्नलिखित हैं,

एमीट्रिप्टीलीन (इलविल, Elavil), डायजेपॉम (वेलियम, Valium), जिलेउटान (जाइफ़्लो, Zyflo), सेलीकॉक्सिब (सेलेब्रेक्स, Celebrex), डिक्लोफेनेक (वोलटैरिन, Voltaren), फ्लूवास्टेटिन (लेस्कोल, Lescol), ग्लिपीजाइड (ग्लूकोट्रॉल, Glucotrol), आइबूप्रोफेन (ऐडविल, मोट्रीन), इर्बेसारटन (ऐवाप्रो, Avapro), लोसारटन (कोजार, Cozaar), फेनीटोइन ( डाईलैटिंन, Dillantin), पाईरोक्सिकेम (फेल्डन, Feldene), टैमोक्सिफेन (नोल्वाडेक्स,Nolvadex), टॉलब्यूटामाइड ( टोलीनेज, Tolinase), टोरसेमाइड (डेमाडेक्स, Demadex), वारफैरीन (कौमाडीन, Coumadin) एवं अन्य।

क्रैनबेरी की खुराक (Doses of Cranberry In Hindi)

यहां पर दी गई जानकारी को डॉक्टर की सलाह का विकल्प ना मानें। किसी भी दवा या सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने से पहले हमेशा डॉक्टर की सलाह ज़रुर लें।

आमतौर पर कितनी मात्रा में क्रैनबेरी का सेवन करना चाहिए?

कैप्सूल: रोजाना 400 से 500 mg की 9 से 15 कैप्सूल का सेवन किया जा सकता है।

जूस: रोजाना एक से दो कप क्रैनबेरी के जूस का सेवन कर सकते हैं।

इस हर्बल सप्लीमेंट की खुराक हर मरीज के लिए अलग हो सकती है। आपके द्वारा ली जाने वाली खुराक आपकी उम्र, स्वास्थ्य और कई चीजों पर निर्भर करती है। हर्बल सप्लीमेंट हमेशा सुरक्षित नहीं होते हैं। इसलिए सही खुराक की जानकारी के लिए हर्बलिस्ट या डॉक्टर से चर्चा करें।

सूत्र

रिव्यू की तारीख जुलाई 4, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया सितम्बर 20, 2019

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