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पोर्क खाने से नहीं होता है स्वाइन फ्लू, जानें H1N1 से जुड़े ऐसे ही 5 मिथ

पोर्क खाने से नहीं होता है स्वाइन फ्लू, जानें H1N1 से जुड़े ऐसे ही 5 मिथ

स्वाइन फ्लू या H1N1 वायरस (swine flu) एक भयंकर संक्रामक रोग है। व्यक्ति की श्वास प्रणाली पर हमला करने वाला रोग प्रमुख रूप से शूकर (सुअर) में पाया जाता है। पहले ये बीमारी सिर्फ सुअरों को होती थी, लेकिन फिर ये इंसानों भी फैलने लगी। पहले ये बीमारी सुअरों के साथ सीधे संपर्क में रहने वाले लोगों को फैली इसके बाद ये इंसानों से इंसानों में फैलने लगी। हालांकि, आज भी इस बीमारी को लेकर कई अफवाहें है, जिनपर लोग यकीन करते हैं। अफवाहों के कारण अक्सर लोग समय पर ट्रीटमेंट नहीं ले पाते हैं या फिर बीमारी को दूर करने के लिए गलत तरीके अपनाने लगते हैं। बेहतर होगा कि आप स्वाइन फ्लू के बारे में सही जानकारी रखें। संक्रमण की बीमारियों से निजात पाने का बेहतर तरीका सही जानकारी और सावधानी है। आप इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए कि स्वाइन फ्लू से संबंधित कौन-सी अफवाहों या H1N1 वायरस मिथ लोगों के बीच फैलें हैं और साथ ही जानिए कि स्वाइन फ्लू से बचने का सही तरीका क्या है ?

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स्वाइन फ्लू (H1N1 वायरस) से जुड़ी अफवाहें

1. H1N1 वायरस मिथ : पोर्क (pork) खाने से होता है स्वाइन फ्लू:

कुछ लोग सुअर के मांस को सेवन करते हैं। ऐसे में मिथक है कि ये बीमारी पोर्क खाने से भी होती है, लेकिन आपको बता दें कि स्वाइन फ्लू का जन्म भले ही सुअरों से हुआ हो, लेकिन इसके फैलने का पोर्क खाने या न खाने से कोई लेना देना नहीं है। H1N1 वायरस सबसे ज्यादा हवा के जरिये फैलता है। जब आप खांसते या छींकते हैं तो हवा में या जमीन पर या किसी भी सतह पर मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं, वह वायरस की चपेट में आ जाता है।

यह कण हवा के जरिये या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। यानी स्वाइन फ्लू का वायरस हाथ मिलाने और गले लगने के अलावा किसी दरवाजे, फोन, कीबोर्ड, रिमोट कंट्रोल के जरिये भी फैल सकता है। इसलिए अब कोई कहे कि पोर्क खाने से भी स्वाइन फ्लू होता है तो इसे नजरअंदाज करें।

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2. H1N1 वायरस मिथ: स्वाइन फ्लू का इलाज संभव नहीं:


swine flu myths

यह भी एक अफवाह है। स्वाइन फ्लू का आसानी से इलाज संभव है। टेमीफ्लू नाम से स्वाइन फ्लू की दवा आती है जो इस पर तेजी से काबू करती है। यह दवाई तेजी इनफेक्शन को कम करती है। स्वाइन फ्लू होने के पहले 48 घंटों के भीतर इलाज शुरू हो जाए, तो इसका इलाज प्रभावी तरीके से होता है।

3. H1N1 वायरस मिथ: जीवन में एक ही बार होता है स्वाइन फ्लू:

एक बार आप H1N1 वायरस की चपेट में आकर उबरने के बाद हो सकता है कि आपके शरीर में उस बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता जन्म ले ले। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको जीवन में सिर्फ एक बार ही स्वाइन फ्लू हो सकता है, दोबारा नहीं। अगर आप अकसर संक्रमण के करीब आ रहे हैं, तो निश्चित ही अनेकों बार आप इसका शिकार बन सकते हैं। हालांकि, अब वैक्सीनेशन का विकल्प भी है जो एक साल तक आपको इस वायरस से बचाए रखता है।

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4. H1N1 वायरस मिथ: बदल गया है स्वाइन फ्लू का वायरस:

दुनियाभर के साइंटिस्टस स्वाइन के फ्लू के वायरस पर रिसर्च कर चुके हैं, जिसमें साफ है कि इस वायरस में किसी प्रकार का बदलाव (mutation) नहीं हुआ है। किसी जीन के डीएनए में कोई स्थायी परिवर्तन होने की प्रक्रिया को बायोलॉजी में म्यूटेशन कहते हैं। अगर बीमारी के वायरस में म्यूटेशन होता है, तो इससे निपटने के पुराने तरीके फेल हो जाते हैं।

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5. H1N1 वायरस मिथ : विंटर में नहीं होता है स्वाइन फ्लू

स्वाइन फ्लू की अफवाह में ये बात भी जुड़ी है कि ये बीमारी सर्दी के मौसम में नहीं होती है। ये बात सच है कि मार्च और अप्रैल में स्वाइन फ्लू की बीमारी अपने पीक पर होती है, यानी अधिकतर लोग इस संक्रमण का शिकार बन सकते हैं, लेकिन ये बात भी सच है कि स्वाइन फ्लू का संक्रमण विंटर यानी ठंड में भी हो सकता है। कोरोना महामारी को लेकर भी कई लोग कयास लगा रहे थे कि मौसम बदलने के साथ कोरोना की बीमारी कम या खत्म हो सकती है, लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है।

6. H1N1 वायरस मिथ : वैक्सिनेशन की सबको जरूरत नहीं है

जिस तरह से स्वाइन फ्लू का वैक्सिनेशन बच्चों के लिए जरूरी होता है, ठीक उसी तरह से स्वाइन फ्लू का वैक्सिनेशन एडल्ट कि लिए भी जरूरी होता है। कुछ लोगों के मन में ये बात होती है कि स्वाइन फ्लू का वैक्सिनेशन एडल्ट के लिए इसलिए जरूरी नहीं है, क्योंकि ये बच्चों को आसानी से संक्रमित कर सकता है। आपको वैक्सिनेशन कैसे कराना है और कब कराना है, इस बारे में अपने डॉक्टर से जानकारी जरूर प्राप्त करें।

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इन बातों को रखें ध्यान

बेहतर होगा कि आप H1N1 वायरस मिथ पर यकीन न करें और इस बारे में सही जानकारी प्राप्त करें। अगर आपके घर में किसी भी व्यक्ति को स्वाइन फ्लू की बीमारी हैं तो बेहतर होगा कि उससे उचित दूरी बनाकर रखें और साथ ही संक्रमित व्यक्ति को मास्क लगाने की सलाह दें। अगर आपको खांसी, छींक के साथ ही बुखार है तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं। अगर स्वाइन फ्लू है तो डॉक्टर आपको कुछ मेडिसिन देगा। समय पर रोगी को दवा देनी चाहिए और साथ ही घर में ऐसे व्यक्ति के सभी जरूरी रोजमर्रा की वस्तुओं को अन्य व्यक्तियों को उपयोग नहीं करना चाहिए। संक्रमण खांसी या छींक के दौरान दूसरे व्यक्ति तक पहुंचता है, इसलिए सावधानी रखने की आवश्यकता है। H1N1 वायरस मिथ के बारे में अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से परामर्श करें।

उम्मीद करते हैं कि इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपके मन से कई गलत अवधारणाएं समाप्त हो गई होंगी। अगर आपको स्वाइन फ्लू से संबंधित किसी भी तरह जानकारी चाहिए तो बेहतर होगा कि आप डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। भारत फिलहाल कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है। ऐसे में आपको न सिर्फ कोरोना से सावधान रहने की जरूरत है, ब्लकि आपको सीजन में होने वाली सभी संक्रामक बीमारियों से खुद को बचाने की जरूरत है। अगर आपको संक्रमण के कोई भी लक्षण नजर आएं तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं और ट्रीटमेंट भी कराएं। हर बीमारी की तरह स्वाइन फ्लू के कारण (H1N1 वायरस) को लेकर भी कई तरह की अफवाहें प्रचलित हैं। ऐसे में अगर आपके मन में कोई संशय है, तो अपने डॉक्टर की सलाह लेना न भूलें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Key Facts about Swine Influenza   https://www.cdc.gov/flu/swineflu/keyfacts_pigs.html Accessed on 8/7/ 2019

Influenza   https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3032190/ Accessed on 8/7/ 2019

Influenza, The flu season cdc.gov/flu/about/season/flu-season.html    Accessed on 8/7/ 2019

World Health Organization. (2010). H1N1 in post-pandemic period who.int/mediacentre/news/statements/2010/h1n1_vpc_20100810/en/

Accessed on 8/7/ 2019

 

लेखक की तस्वीर
Piyush Singh Rajput द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 10/08/2020 को
Dr. Pooja Bhardwaj के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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