परवल को सामान्य तौर पर एक सब्जी के रूप में जाना जाता है। जिसका वानस्पतिक नाम ट्राइकोसेन्थेस डायोइका रोक्सब. (Trichosanthes dioica Roxb.) है। इसे पटोला, हरा आलू और पॉइंटेड गॉर्ड के नाम से भी जाना जाता है। ये सभी कुकुरबिटास (Cucurbitaceae) के परिवार से संबंध रखते हैं जो ककड़ी के समान ही होते हैं। हालांकि, परवल एक बारहमासी सब्जी है, लेकिन ककड़ी बारहमासी नहीं होते हैं। इसका इस्तेमाल सब्जी के अलावा एक औषधी के तौर पर भी किया जा सकता है। इसकी पत्तियों और फलों का इस्तेमाल मुख्य रूप से एक टॉनिक के तौर पर फेब्रिफ्यूज, एडिमा, पीलिया और लिवर से जुड़े उपचार में किया जा सकता है। इसके अलावा, इसके पौधे की पत्तियों का उपयोग एंटीपायरेटिक, मूत्रवर्धक, कार्डियोटोनिक, एंटीसुलर आदि के रूप में किया जा सकता है।

इसके औषधीय गुणों की बात करें तो इसमें एंटीहाइपरग्लाइसेमिक, एंटीहाइपरलिपिडेमिक, एंटीट्यूमर, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीडायरियल, एंटी एजिंग, विटामिन ए, विटामिन बी1, विटामिन बी2, विटामिन सी, मैग्निशियम और लो कैलोरी के साथ-साथ इसमें कैल्शियम की भी उच्च मात्रा पाई जाती है, जो हड्डियों के विकास में मदद करती है।
भारत की कई अलग-अलग हिस्सों में परवल का इस्तेमाल मुख्य रूप से सब्जी बनाने के लिए किया जाता है। हालांकि, कुछ हिस्सों में इसका इस्तेमाल मिठाई बनाने के लिए भी किया जाता है। परवल छोटे आकार का होता है। इसके फल का आकार अलग-अलग हो सकता है। यह मुख्यतया हरे रंग का होता है, जिसमें चौड़ी धारियां होती हैं। इसका पौधा बेल की तरह होता है, जिसे बढ़ने के लिए किसी सहारे की जरूरत होती है। या यह जमीन पर भी फैल कर बढ़ सकता है। सामान्य तौर पर इसका पौधा पांच से छह मीटर लंबा हो सकता है। परवल के पौधे की पत्तियां दिल के आकार में होती है। जो 7 से 10 सेंमी लंबी और 4 से 8 सेमी चौड़ी हो सकती हैं। इसकी खेती गर्म या नमी वाले जलवायु में भी हो सकती है। हालांकि, सर्दियों के मौसम में परवल का पौधा सूख जाता है, लेकिन वसंत आते ही इसका पौधा फिर से अपने आप पनप सकता है। इसके साथ ही, इसकी खेती के लिए पानी की अधिक मात्रा चाहिए होती है।
देश के टॉप टेन राज्य जहां मुख्य तौर पर परवल की खेती होती हैः
पाइंटेड गॉर्ड का इस्तेमाल कई शारीरिक समस्याओं से लेकर ब्यूटी के लिए भी किया जा सकता है, जिनमें शामिल हैंः
मौसम में बदलाव के कारण सर्दी और सामान्य फ्लू जैसी स्वास्थ्य समस्याएं होना काफी सामान्य स्थिति हो सकती है। इनसे बचने के लिए इम्यून सिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता हो सकती है। ऐसी स्थिति से बचाव करने के लिए परवल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
परवल के पत्तों और फल के अर्क का इस्तेमाल पीलिया के उपचार में किया जा सकता है।
परवल खून की साफ करने के लिए सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। ब्लड के साथ-साथ या शरीर के टिश्यू को भी फिल्टर करने का कार्य कर सकता है।
परवल के सेवन करने से भूख कंट्रोल होती है। जिससे आप आसानी से अपने वजन को नियंत्रित कर सकते हैं।
इसमें अधिक मात्रा में फाइबर पाया जाता है जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। साथ ही, यह गैस और लीवर से जुड़ी समस्याओं के उपचार में भी लाभकारी साबित हो सकता है।
बढ़ती उम्र के कारण चेहरे पर झुर्रियों और डेड स्किन की समस्या होना काफी आम होता है। वहीं, परवल में काफी उच्च मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन ए और विटामिन सी पाया जाता है जो कणिक अणुओं से लड़ने में मदद कर सकता है। जिसकी मदद से बढ़ती उम्र के निशान को आसानी से दूर किया जा सकता है।
परवल के बीज में शुगर लेवल कंट्रोल करने की क्षमता होती है। जिससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल की लेवल भी कंट्रोल रखा जा सकता है। जो डायबिटीज से भी बचाव करने में मदद कर सकता है। कई शोध में पाया गया है कि परवल के एंटीहाइपरग्लाइसेमिक गुण खून में ग्लूकोज के स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं।
परवल के बीज का सेवन करने से कब्ज की समस्या को कम किया जा सकता है।
[mc4wp_form id=’183492″]
आयुर्वेद के अनुसार, परवल में विटामिन ए, विटामिन सी, टैनिन, सैपोनिन, एल्कलॉइड, नोवल पेप्टाइड्स का अच्छा मिश्रण पाया जाता है। साथ ही, इसमें प्रोटीन टेट्रा और पेंटासाइक्लिक ट्राइटरपेन की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है। जो स्वस्थ्य शरीर के लिए लाभकारी हो सकते हैं।
और पढ़ें : पारिजात (हरसिंगार) के फायदे एवं नुकसान – Health Benefits of Night Jasmine (Harsingar)
एक औषधी और सब्जी के तौर पर परवल का उपयोग करना पूरी तरह से सुरक्षित माना जाता है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया अपने आहार विशेषज्ञ से संपर्क करें।
सामान्य तौर पर, परवल खाने के कोई साइड इफेक्ट्स नहीं देखे जाते हैं। हालांकि, इसके अधिक सेवन से पेट खराब होने और पेट में पानी की मात्रा बढ़ने की समस्या हो सकती है। इस तरह की समस्याओं से बचे रहने के लिए इसका सेवन उचित मात्रा में ही करना चाहिए।
इसके अलावा अगर आपको लो ब्लड शुगर की समस्या है, तो आपको भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इसका एंटीहाइपरग्लाइसेमिक गुण खून में मौजूद शुगर के लेवल को कम कर सकता है। जो नुकसानदायक हो सकता है।
साथ ही, ध्यान रखें कि अगर आपकी त्वचा संवेदनशील है, तो इसके सेवन से आपको एलर्जी होने का खतरा हो सकता है। इसलिए इसका सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
परवल का सेवन कितनी मात्रा में करनी चाहिए, इसके बारे में उचित जानकारी नहीं है। हालांकि, आपको इसका सेवन एक उचित मात्रा में ही करना चाहिए। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर की परामर्श ले सकते हैं।
अगर आपका इससे जुड़ा किसी तरह का कोई सवाल है, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।
डिस्क्लेमर
हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।
Indian Production of PARWAL/POINTED GOURD. http://agriexchange.apeda.gov.in/india%20production/India_Productions.aspx?cat=Vegetables&hscode=1081. Accessed on 02 June, 2020.
Trichosanthes dioica Roxb.: An overview. https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3358970/. Accessed on 02 June, 2020.
Sample records for trichosanthes dioica roxb. https://www.science.gov/topicpages/t/trichosanthes+dioica+roxb.html. Accessed on 02 June, 2020.
Draft-DUS guidelines-Pointed-Gourd.pdf. http://www.plantauthority.gov.in/pdf/Draft-DUS%20guidelines-Pointed-Gourd.pdf. Accessed on 02 June, 2020.
Classification for Kingdom Plantae Down to Species Trichosanthes dioica Roxb. https://plants.usda.gov/java/ClassificationServlet?source=display&classid=TRDI7. Accessed on 02 June, 2020.
Pointed gourd (Parval) Prices. https://data.gov.in/keywords/pointed-gourd-parval-prices. Accessed on 02 June, 2020.
Pointed Gourd: Potential for Temperate Climates. https://hort.purdue.edu/newcrop/proceedings1999/v4-397.html. Accessed on 02 June, 2020.
Current Version
17/09/2020
Ankita mishra द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. हेमाक्षी जत्तानी
Updated by: Ankita mishra