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शीशम के फायदे एवं नुकसान - Health Benefits of Shisham (Indian Rosewood)

परिचय|उपयोग|साइड इफेक्ट्स|डोसेज|उपलब्धता
शीशम के फायदे एवं नुकसान - Health Benefits of Shisham (Indian Rosewood)

परिचय

शीशम क्या है?

शीशम के पेड़ के बारे में सभी को जानकारी होगी क्योंकि, भारत में शीशम की लकड़ी से बना फर्नीचर काफी मजबूत माना जाता है और लोकप्रिय भी है। लेकिन, फर्नीचर के अलावा शीशम हमारे स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद और प्रभावशाली जड़ी-बूटी है। आयुर्वेद के मुताबिक, मोटापा, विटिलिगो, बुखार, घाव, अल्सर, बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया, गोनोरिया आदि के उपचार में इससे बनी औषधियों का उपयोग किया जाता है।

शीशम के पेड़ का आकार मध्यम से लेकर बड़े तक हो सकता है और यह पेड़ भारत में पाया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम डैल्बर्जिया सिसो (Dablergia Sissoo) है, जो कि फैबेसी (Fabaceae) फैमिली से ताल्लुक रखता है। इसमें एनेलजेसिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एमिनोएसिड, फ्लेवोनॉयड, फेनोलिक कंपाउंड, डायजेस्टिव, ऑस्ट्रोजेनिक, थर्मोजेनिक, एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं। इसे अंग्रेजी में इंडियन रोजवुड के नाम से भी जाना जाता है और इस पेड़ की जड़, पत्तियां, छाल, गुदे आदि का इस्तेमाल किया जाता है।

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उपयोग

शीशम का उपयोग किस लिए किया जाता है?

शीशम का उपयोग निम्नलिखित स्थितियों या समस्याओं में किया जाता है जैसे-

एनीमिया को करता है दूर

शरीर में खून की कमी हो जाने को एनीमिया कहते हैं और शीशम इस बीमारी को दूर करने में मदद करता है। इस समस्या के लिए शीशम के पत्तों के रस का सेवन किया जाता है। इस बीमारी की वजह से शरीर में रेड ब्लड सेल्स की कमी हो जाती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है और आपको थकान या कमजोरी जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।

मधुमेह से राहत

शीशम में एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं, जो आपकी मधुमेह की बीमारी को दूर करने में मदद करते हैं। इससे आपके शरीर के खून में मौजूद ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित हो जाता है और आप स्वस्थ महसूस करने लगते हैं। अगर, मधुमेह के रोग को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो, इससे कोरोनरी आर्टरी डिजीज, चेस्ट पेन, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, नर्व डैमेज जैसी घातक समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है।

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त्वचा की जलन करे कम

सनबर्न या अन्य कारणों की वजह से कभी-कभी हमारी त्वचा पर जलन महसूस होने लगती है, जो की काफी परेशान करने वाली स्थिति होती है। यह समस्या उन लोगों में ज्यादा देखने को मिलती है, जिनकी त्वचा संवेदनशील होती है। इस समस्या के लिए शीशम के तेल से मसाज करने पर आराम मिल सकता है।

डायरिया से राहत

2015 में हुई एक स्टडी के मुताबिक, शीशम में एंटी- डायरियल गुण होते हैं, जो डायरिया की समस्या से राहत दिलाने में मदद करता है। इस शोध में प्रयोग के लिए चूहों में डायरिया जैसी समस्या विकसित की गई। इसके बाद उन्हें शीशम के द्वारा उपचार प्रदान किया गया, जिसके बाद उनकी डायरिया की समस्या में सुधार देखा गया।

बुखार में राहत

बुखार कई तरह की समस्या के कारण हो सकता है लेकिन इसका सबसे आम प्रकार ठंड या फ्लू की वजह से होने वाला बुखार है। इस समस्या में शीशम का इस्तेमाल करके बुखार में राहत पाई जा सकती है। शीशम से तैयार की गई औषधि बुखार को जड़ से खत्म करने और आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने का कार्य करती है। क्योंकि, जिस व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, उसे बुखार जैसी समस्याएं कम होती हैं।

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गोनोरिया के इलाज में मददगार

गोनोरिया एक सेक्शुअल ट्रांमिटिड इंफेक्शन है, जो कि बैक्टीरिया के कारण होता है। गोनोरिया पुरुष और महिला दोनों को अपना शिकार बना सकता है। जिसमें पेनिस या वजायना से असामान्य डिस्चार्ज या पेशाब करते समय दर्द हो सकता है। पुरुषों में इस समस्या की वजह से टेस्टिकल्स में दर्द हो सकता है औऱ महिलाओं को इसकी वजह से पेट के निचले हिस्से में दर्द का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन, इस समस्या के इलाज के लिए आप शीशम के पत्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

घावों को साफ करने में होता है इस्तेमाल

कई चोट या घाव ऐसे हो जाते हैं, जो क्रीम या जेल आदि से जल्दी ठीक नहीं होते और उनके आसपास सूजन व खुजली की समस्या भी होने लगती है। ऐसे घावों व चोटों को साफ करने के लिए आप शीशम के पत्तों और छाल के पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे आपके घाव जल्दी ठीक हो जाएंगे।

अन्य स्थितियों एवं समस्याओं में शीशम का इस्तेमाल

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शीशम का इस्तेमाल कितना सुरक्षित है?

शीशम का इस्तेमाल काफी सुरक्षित है, लेकिन अगर आप किसी गंभीर या लंबे समय से चली आ रही बीमारी से जूझ रहे हैं या आपको किसी खाद्य पदार्थ या दवा या हर्बल से एलर्जी है, तो इसके सेवन से पहले डॉक्टर से चर्चा करें। वहीं, अगर आप गर्भवती महिला हैं या स्तनपान करा रही हैं, तो डॉक्टर की सलाह के बिना किसी चीज का सेवन न करें। ध्यान रखें कि, अगर आप एलोपैथिक दवा के साथ शीशम जैसी जड़ी-बूटी ले रहे हैं, तो पहले एलोपैथिक दवा का सेवन करें।

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साइड इफेक्ट्स

शीशम से मुझे क्या-क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं?

  • शीशम का इस्तेमाल प्रेग्नेंसी में नहीं करना चाहिए।
  • यदि आपको कब्ज की समस्या है, तो शीशम की जड़ का सेवन या इस्तेमाल न करें।
  • हैवी पीरियड्स के दौरान शीशम के पत्तों का जूस एक्सट्रैक्ट नुकसान दे सकता है।

हर्बल सप्लीमेंट्स हमेशा सुरक्षित नहीं होते हैं, इसलिए इनका सेवन या इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर या हर्बलिस्ट से संपर्क जरूर कर लें। वह आपके स्वास्थ्य व मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखते हुए उचित सलाह दे सकते हैं। अन्यथा, आपको जड़ी-बूटी से फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है।

डोसेज

शीशम लेने की सही खुराक क्या है?

शीशम - Shisham

शीशम की खुराक दवा के रूप में हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकती है। जो कि आपकी उम्र, लिंग, स्वास्थ्य व अन्य कारणों पर निर्भर करती है। अपने लिए उचित खुराक के लिए डॉक्टर या हर्बलिस्ट से संपर्क करें। किसी भी चीज का अत्यधिक मात्रा में सेवन या इस्तेमाल करने से नकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

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उपलब्धता

किन रूपों में उपलब्ध है?

शीशम निम्नलिखित रूपों में उपलब्धता हो सकता है। जैसे-

  • रॉ- पत्ते, छाल, गुदा, जड़
  • पाउडर
  • तेल
  • एक्सट्रैक्ट, आदि

हम उम्मीद करते हैं कि इस आर्टिकल में आपको जड़ी-बूटी शीशम के बारे में सभी जानकारी मिल गई होगी। लेकिन फिर भी इसका उपयोग करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें और अगर आपको इसके बारे में हमसे कोई अलग जानकारी चाहिए, तो नीचे कमेंट बॉक्स में लिखें।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Shisham – http://www.flowersofindia.net/catalog/slides/Shisham.html – Accessed on 3/6/2020

Dalbergia sissoo – http://www.iucngisd.org/gisd/species.php?sc=1186 – Accessed on 3/6/2020

Dalbergia sissoo Roxb. ex DC.Show All Indian rosewood – https://plants.usda.gov/core/profile?symbol=DASI – Accessed on 3/6/2020

Protective Effect of Dalbergia Sissoo Roxb. Ex DC. (Family: Fabaceae) Leaves Against Experimentally Induced Diarrhoea and Peristalsis in Mice – https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/23788395/ – Accessed on 3/6/2020

DALBERGIA SISSOO IN INDIA – http://www.fao.org/3/ae910e/ae910e02.htm – Accessed on 3/6/2020

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Surender aggarwal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 12/10/2020 को
डॉ. पूजा दाफळ के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड