चिचिण्डा (स्नेक गोर्ड) एक बेल है, जो अपने फल के लिए जाना जाता है। इस पर एक लंबा फल लगता है, जिसे सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण, इसका इस्तेमाल दवा के रूप में भी किया जाता है। यह चिचौंडा (Chichonda), चिंचिडा (Chinchida), स्नेक गॉर्ड (Snake gourd), क्लब गोर्ड (Club gourd) आदि के नाम से जाना जाता है। इसका वानस्पतिक नाम ट्रिकोसैन्थीज ऐन्गुइना (Trichosanthes anguina Linn) है। यह कुरबिटेसिए परिवार (Cucurbitaceae) से ताल्लुक रखता है।

इसकी पत्तियां दिल के आकार की होती हैं। इस पौधे पर सफेद रंग के सुंदर और चमकदार फूल लगते हैं, जो रात में ओपन होते हैं। यह दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया के व्यंजनों में सबसे लोकप्रिय है। इसकी पत्तियों का साग बनाकर खाया जाता है। यह दक्षिण भारत की एक लोकप्रिय सब्जी है।
आयुर्वेद में इस पौधे को कब्ज, त्वचा रोग, जलन, मधुमेह, एनोरेक्सिया, पेट फूलना, बुखार और सामान्य कमजोरी के लिए फायदेमंद बताया गया है। ये विटामिन ए, बी और सी का अच्छा स्त्रोत है। यह भूख को बढ़ावा देने में मदद करता है। आयुर्वेद में इसका इस्तेमाल कई रोगों की दवाओं में किया जाता है। इसके फल में कई ऐसी प्रॉपर्टीज होती हैं, जो हृदय रोग, ब्लड प्रेशर को नियंत्रित, सोरायसिस और रूमेटिज्म के इलाज में मदद करते हैं।
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चिचिण्डा का उपयोग निम्नलिखित परेशानियों के इलाज के लिए किया जाता है:
बुखार को कम करता है (Lower fever):
चिचिण्डा का इस्तेमाल बुखार को कम करने के लिए किया जाता है। बुखार में इसके काढ़े को पीने की सलाह दी जाती है।
टॉक्सिन्स को नष्ट करता है (Eliminate toxins):
चिचिण्डा का जूस एक्सट्रैक्ट शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर करता है। इसकी पत्तियां एमेटिक (emetic) के रूप में काम करती हैं, जो शरीर के विषाक्त पदार्थों को दूर करती है और आंत्र को साफ करने में मदद करती है।
कैंसर से बचाव (Prevent cancer):
स्नेक गोर्ड में उच्च मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं, जो फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान को रोकते हैं। यह मुक्त कणों को बांधता है और उन्हें बेअसर करने में मदद करता है।
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डायबिटीज के इलाज में मददगार :
चाइनीज थेरेपी में डायबिटीज के इलाज में चिचिण्डा का इस्तेमाल किया जाता है।
ओबेसिटी को कंट्रोल करता है :
चिचिण्डा एक लो कैलोरी फूड है। वजन को कंट्रोल करने में यह मदद करता है।
एसिडिटी की परेशानी में राहत :
स्नेक गोर्ड का सेवन करने से एसिड का प्रोडक्शन कम होता है। गैस्ट्रिटिस, पेप्टिक अल्सर जैसी स्थिततियों के इलाज में यह मदद करता है। यह एसिड रिफ्लक्स और जलन जैसे लक्षणों से राहत देता है।
हृदय संबंधित परेशानियों को दूर रखता है :
चिचिण्डा में ऐसे रसायन होते हैं जो दिल की धड़कन, तनाव और दर्द जैसे आर्टेरियल डिसऑर्डर में मदद करता है। इसका अर्क सर्कुलेशन को बढ़ावा देने में मदद करता है।
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स्किन केयर :
स्नेक गोर्ड का पेस्ट जख्मों को भरने के लिए लगाया जाता है। ये झुर्रियों को दूर करने में भी मदद करता है।
रेस्पिरेटरी हेल्थ :
स्नेक गोर्ड एक्सपेक्टोरेंट के रूप में कार्य करता है, जो साइनस और श्वसन तंत्र में कफ में राहत पहुंचाता है। सांस लेने में होने वाली परेशानियों को दूर करता है।
लिवर संबंधित परेशानियों से बचाता है :
कई शोध के अनुसार, स्नेक गोर्ड में हेपाटो-प्रोटेक्टिव प्रॉपर्टीज होती हैं जो लिवर रोग जैसे हेपेटाइटिस और पीलिया के इलाज में मदद करता है।
इसमें बहुत सारे न्युट्रिएंट्स होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए कई तरह से फायदेमंद होते हैं। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, और सॉल्यूबल फाइबर होता है। इसके अलावा ये विटामिन सी, विटामिन ए, रिबोफ्लेविन, थियामिन, निएसिन भरपूर होता है। इसमें मैग्नीशियम, कैल्शियम, आयरन, मैंग्नीज, फासफॉरस, पोटेशियम और आयोडिन जैसे मिनिरल्स होते हैं। इसमें कैरोटिनॉइड, फ्लेवोनॉइड और फेनोलिक एसिड होते हैं।
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चिचिण्डा के औषध के रूप में इस्तेमाल को लेकर आयुर्वेद में भी वर्णन है। लेकिन जरूरी नहीं है इसका सेवन हमेशा हर किसी के लिए सुरक्षित हो। इसका सेवन हमेशा अपने डॉक्टर की निगरानी में ही करना चाहिए। कुछ स्वास्थ्य स्थितियों में चिकित्सक इसके साथ अन्य जड़ी-बूटियों का भी मिश्रण रिकमेंड कर सकते है, जो इसके गुण को बढ़ाने का काम कर सकते हैं। हालांकि, इसके ओवरडोज से बचना चाहिए। हमेशा उतनी ही खुराक का सेवन करें, जितना आपके डॉक्टर द्वारा निर्देशित किया गया हो।
चूहों पर किए गए एक शोध के अनुसार, स्नेक गोर्ड का सेवन प्रेग्नेंसी में नहीं करना चाहिए। इसमें एंटी-फर्टिलिटी प्रॉपर्टीज होती हैं। महिलाओं में इसका सेवन एंटी-ओव्यूलेर एक्टीविटी का कारण बन सकता है। इसके बीजों के ओवरडोज से उल्टी, गैस्ट्रिक सोरनेस, एब्डोमिनल पेन और डायरिया की शिकायत हो सकती है।
ज्यादातर लोगों के लिए इसका सेवन सुरक्षित होता है। यदि आपको इसका सेवन करने से किसी तरह का कोई साइड इफेक्ट नजर आए तो बिना देरी करें अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें।
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चिचिण्डा की खुराक हर किसी के लिए अलग हो सकती है। इसकी खुराक डॉक्टर आपकी उम्र, मेडिकल कंडिशन और अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित करते हैं। कभी भी इसकी खुराक खुद से निर्धारित न करें। ऐसा करना आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
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चिचिण्डा निम्नलिखित रूपों में उपलब्ध है:
अगर आपका इससे जुड़ा किसी तरह का कोई सवाल है, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।
डिस्क्लेमर
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Current Version
05/10/2020
Mona narang द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. हेमाक्षी जत्तानी
Updated by: Ankita mishra