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क्षीर चम्पा के फायदे एवं नुकसान – Health Benefits of Plumeria (Champa)

परिचय|उपयोग|साइड इफेक्ट्स|डोसेज|उपलब्ध
क्षीर चम्पा के फायदे एवं नुकसान – Health Benefits of Plumeria (Champa)

परिचय

क्षीर चम्पा क्या है?

क्षीर चम्पा एक फूल का पौधा है जिसमें औषधीय गुण पाए जाते हैं। सामान्य तौर पर लोग इसे चंपा, चम्पा, चम्पक या चमेली के नामों से जानते हैं। इसे अंग्रेजी में प्लमेरिया (Plumeria) कहते हैं। यह मैगनोलिएसी (Magnoliaceae) परिवार से संबंध रखता है। इसके अलावा इसे गुलचीन भी कहते हैं। इसके फूल की खासियत है कि यह बारहमासी खिलते हैं। इसके फूल बाहर की तरफ से सफेद रंग के और अंदर की तरफ से हल्के पीले रंग के हो सकते हैं।

क्षीर चम्पा का पौधा दक्षिण- पूर्व एशिया के देशों यानी चीन, मलेशिया, सुमात्रा, जावा और भारत में प्राकृतिक रूप से पाया जा सकता है। हालांकि, इसकी मूल उत्पत्ति का स्थान भारत में पूर्वी हिमालय के साथ-साथ अन्य पड़ोसी देशों को माना जाता है। इसके अलावा निकारगोवा और लाओस देशों का ये राष्ट्रीय फूल भी घोषित किया गया है।

वहीं, इसके फूलों के आधार पर इसकी दो मुख्य प्रजातियां पाई जा सकती हैं, जिनमें शामिल हैंः

1. माइकेलिया चम्पक (Michelia Champaca)

इसकी पंखुड़ियां लंबी और नुकीली होती हैं। इसकी प्रमुख चार प्रजातियां होती हैं, जिनमें शामिल हैंः

  • माइकेलिया आइनियाः यह गुलाबी रंग का होता है और इसका उत्पत्ति स्थान चीन और वियतनाम माना जाता है।
  • माइकेलिया अल्बा या क्षीर चम्पा श्वेत (Plumeria alba Linn.): यह सफेद रंग का होता है। मुख्य रूप से यह एशिया में सबसे अधिक पाया जाता है। इसका इस्तेमाल एक सजावटी पौधे और महंगे इत्रों के लिए किया जा सकता है। इसे जोयट्री के नाम से भी जाना जाता है।
  • माइकेलिया डीलटसोपाः यह मूल रूप से पूर्वी हिमालय का झाड़ीनुमा वृक्ष होता है। जो 30 मीटर तक ऊंचा हो सकता है। इसके फूल सिर्फ बंसत के मौसम में खिलते हैं। इसका स्वाद मीठा होता है।
  • माइकोलिया किगो क्रीमः इसके फूल का रंग हल्का बैंगनी होता है। यह एक प्रकार की जंगली झाड़ी होती है जिसे पोर्टवाइन भी कहा जाता है।

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2. प्लूमेरिया (Plumeria)

इसकी पंखुड़ियां चौड़ी और गोल होती हैं। मुख्य रूप से इसकी पांच से छह प्रकार पाए जा सकते हैं, जिसमें से चार सबसे अधिक पाए जा सकते हैं। इनमें शामिल हैंः

  • प्लूमेरिया अल्बाः क्षीर चम्पा श्वेत यानी क्षीर चम्पा का सफेद फूल। यह सफेद रंग का होता है। हालांकि, इसके अंदर का भाग हल्का पीले हो सकता है। यह प्रमुख रूप से एशियाई प्रजाति है जो दक्षिण एशिया में सबसे अधिक पाया जा सकता है। यह चार से पांच मीटर ऊंचा हो सकता है। इसका छोटे आकार का पौधा एक सदाबहार पेड़ माना जाता है। इसके तने फूले हुए होते हैं जिनकी मोटी छाल होती है।इसकी पत्तियां शाखाओं के अंत पर गुच्छों के रूप में होती हैं। पत्तियों के गुच्छों के बीच के शिरे में ही इसके फूल खिलते हैं, जो भी गुच्छे में हो सकते हैं। इसके फूल सफेद रंग के होते हैं। हालंकि, फूलों के बीच का कुछ भाग पीले रंग का होता है। इसकी सुगंध मीठी-मीठी होती है। जिसका इस्तेमाल खासतौर पर मंदिरों और पूजा स्थलों पर किया जा सकता है।

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इसका वानस्पतिक नाम मैगनोलिया चम्पक या मिशेलिया चम्पक होता है। सफेद चंपा के तने की छाल का स्वाद कड़वा होता है, जो लैक्सिटिव, डायूरेटिक, सूजन, वात, बुखार, गोनोरिया और हर्पीस के उपचार में लाभकारी माना जा सकता है। छाल का उपयोग आंतरिक रूप से और बाह्य रूप से अल्सर के उपचार के लिए भी किया जा सकता है। साथ ही, इसकों जड़ों में त्वचा से संबंधित परेशानियों को कम करने की क्षमता होती है। वहीं, इसके बीज का इस्तेमाल शरीर में खून को गाढ़ा करने नें मदद कर सकता है। इसके बीज में हेमोस्टेटिक गुण होते हैं।

  • प्लूमेरिया ऑब्टूसाः यह मूल रूप से अमेरिकी प्रजाति माना जाता है। लेकिन इसकी खूशबू सबसे अधिक मीठी होती है। इसका फूल बाहर से सफेद और अंदर के एक छोटे से केंद्र में हल्का पीला होता है। इसकी पंखुड़ियां एक दूसरे से अलग और थोड़ी दूर-दूर होती हैं।
  • प्लूमेरिया पुडिका पनामाः यह मूल रूप से कोलम्बिया और वेनेजुएला में पाए जाता है। इसकी पंखुड़ियां नर्म और हल्की त्वचा वाली होती हैं। इसका रंग सफेद और केन्द्र हल्का पीला होता है। इसकी एक प्रजाति थाईलैंड में भी पाई जाती है जिसका रंग गुलाबी होता है।
  • प्लूमेरिया रूब्रा या क्षीर चम्पा लाल (लाल चम्पा) (Plumeria rubra Linn.): यह लाल रंग का होता है। जो मुख्य तौर पर मेस्किको में पाया जा सकता है। इसका पौधा सात से आठ मीटर तक ऊंचा हो सकता है। इसकी जड़ की छाल थोड़ी कड़वी होती है। जिसका इस्तेमाल भूख बढ़ाने, शारीरिक शक्ति बढ़ाने, शरीर से पसीना बहाने और सूजन कम करने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, इसका इस्तेमाल एंटीसेप्टिक के रूप में भी किया जा सकता है।

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इसके अलावा, भारत में भी क्षीर चम्पा के मुख्य रूप से पांच प्रकार पाए जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैंः

1. सोन चम्पा

इसके फूल पीले, सफेद और नारंगी रंग के हो सकते हैं जिनकी खुशबू बहुत तेज होती है। इसलिए इसका इस्तेमाल इत्र के रूप में भी किया जा सकता है। साथ ही, इसके तेल का इस्तेमाल शरीर की गर्मी दूर करने के लिए किया जा सकता है जो चंदन के तेलों से अधिक असरदार हो सकता है। निम्न स्थितियों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसेः

  • कॉस्मेटिक के लिए
  • कपड़ों को रंगने के लिए
  • अपच का उपचार करने के लिए
  • बुखार कम करने के लिए
  • सिरदर्द दूर करने के लिए
  • कान का इंफेक्शन दूर करने के लिए
  • इसके अलावा इसकी ताजी पत्तियों का लेप बनाकर उसका इस्तेमाल एक ऐंटीसेप्टिक लोशन के रूप में भी किया जा सकता है।
  • इसके फूल और पत्ती के साथ-साथ इसका छाल और बीज भी औषधी के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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2. नाग चम्पा

नाग चम्पा के फूल पीले या गुलाबी रंग के हो सकते हैं। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से भारत और नेपाल के कुछ हिन्दू और बौद्ध मठों में इत्र बनाने के लिए किया जाता है। जिसका इस्तेमाल अध्यात्मिक ध्यान को बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। साथ ही, यह मन को शांत कर सकता है। इसके फूल की पंखुड़ियां सांप के जैसे होती है, जिस वजह से इसे नाग चम्पा कहा जाता है।

इसमें विभिन्न रासायनिक घटक पाए जाते हैं, जिनमें शामिल हैंः

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3. कनक चम्पा

कनक चम्पा के पत्तों का इस्तेमाल भोजन परोसने के लिए भी किया जा सकता है। इसके पत्ते 40 सेमी तक लम्बे होते हैं और इसकी दोगनी चौड़ाई के हो सकते हैं। इसका पेड़ 50 से 70 फिट ऊंचा हो सकता है। इसके फूल कलियों के अन्दर बंद होते हैं। इसकी कलियां पांच हिस्सों में बंटी होती हैं। जो एक छिले हुए केले की तरह दिखाई देती हैं।

हालांकि, इसका फूल सिर्फ एक दिन तक ही खिला रह सकता है और अगली सुबह होते ही ये पूरी तरह से मुरझा जाते हैं। इसके पत्ते और छाल का इस्तेमाल चेचक और खुजली की दवा बनाने में किया जाता है।

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4. सुल्तान चम्पा

सुल्तान चम्पा दक्षिणी भारत, पूर्वी अफ्रीका, मलेशिया और आस्ट्रेलिया के समुद्र तटीय क्षेत्रों में पाए जा सकते हैं। इनकी ऊंचाई 8 से 20 मीटर तक हो सकती है। इस पेड़ का इस्तेमाल विभिन्न तरह के तेल और साबुन बनाने में किया जा सकता है। इसको वात, पित, डायरिया और मूत्र जैसे कई रोगों के उपचार में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

5. कटहरी चंपा (हरी चंपा)

कटहरी चम्पा को ही हरी चंपा कहते हैं। इसका पौधा क्षीर चम्पा की अन्य जातियों से काफी अलग होता है। हालांकि, इसका फूल क्षीर चम्पा की ही प्रजातियों से मिलता है लेकिन इसके फूल का रंग हरा होता है। इसका पेड़ झाड़ी जैसा होता है, जो तीन से लेकर पांच मीटर तक ऊंचा हो सकता है। इसके फूलों की खुशबू पके हुए कटहल के जैसी हो सकती है।

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क्षीर चम्पा का उपयोग किस लिए किया जाता है?

क्षीर चम्पा के एक से अधिक प्रजातियां पाई जा सकती हैं। जिसका इस्तेमाल उनकी प्रजाति के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। मुख्य तौर पर, क्षीर चम्पा के पौधे अक्सर घर को सजाने, पार्किंग एरिया और गार्डन में पाए जा सकते हैं। इसके फूलों में भीनी-भीनी खूशबू होती है। क्षीर चम्पा के पौधे के पूरे भागों में सफेद रंग का दूध जैसा पदार्थ होता है। जो विषैला माना जाता है। अगर यह पदार्थ आंखों में चला जाए, तो इससे आंखों की रोशनी जा सकती है।

हालांकि, अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के उपचार में इस पदार्थ का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल आप एक एंटी इफ्लैमटोरी, एंटीपायरेटिक, मूत्रवर्धक, एमेनगॉग , फेब्रिफ्यूज,परगेटिव और रूबफासेंट के तौर पर कर सकते हैं।

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निम्न स्वास्थ्य स्थितियों में आपके डॉक्टर आपको क्षीर चम्पा के सेवन की सलाह दे सकते हैं, जिसमें शामिल हो सकते हैंः

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आप निम्न रूपों में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैंः

साइटोटॉक्सिक या एंटीट्यूमर के रूप में

इंडोनेशिया में किए गए एक शोध के मुताबिक, इसके छाल में साइटोटॉक्सिक घटक पाया जाता है जो कैंसर सेल्स को खत्म कर सकता है।

एसेंशियल ऑयल्स के रूप में

अध्ययनों के अनुसार इसके फूलों में खासतौर पर सफेद रंग के फूलों में बेंजिल सैलिसिलेट, बेंजिल बेंजोएट, ट्रांस-नेरोलिडोल, नारिल फेनिलसेट और लिननलोल की मात्रा होती है जिसका इस्तेमाल विभिन्न तरह के तेल बनाने के लिए किया जा सकता है।

  • एंटीऑक्सिडेंट के रूप में
  • एंटी-इंफ्लमेट्री के रूप में
  • एंटीमुटाजेनिक के रूप में
  • एंटी-फंगल के रूप में

इस जडी बूटी के एसेंशियल ऑयल से स्‍वास्‍थ्‍य को कई तरह के लाभ होते हैं, जैसे कि –

त्‍वचा को स्‍वस्‍थ : यह एसेंशियल ऑयल एस्ट्रिंजेंट की तरह काम करता है। मसाज थेरेपी में स्किन को मॉइश्‍चराइज करने के लिए इसका इस्‍तेमाल कर सकते हैं। यह तेल त्‍वचा को मुलायम रखता है और फटी और रूखी त्‍वचा को ठीक करता है।।

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सिरदर्द से आराम

जिन लोगों को बहुत तेज सिरदर्द होता है, उन्‍हें क्षीर चम्‍पा एसेंशियल ऑयल का इस्‍तेमाल करना चाहिए। इसमें एंटी इंफलामेट्री गुण होते हैं जो तेज सिरदर्द, मांसपेशिशें में दर्द और कमर दर्द को दूर करते हैं।

स्‍ट्रेस करे दूर

ये एसेंशियल ऑयल शरीर में स्‍ट्रेस को कम करने में मदद करता है और मन और दिमाग को शांत रखता है। इसके शामक प्रभाव से अच्‍छी नींद आती है। यह मन को शांत करता है और तनाव से राहत प्रदान करता है।

एंटीऑक्‍सीडेंट गुण

क्षीर चम्‍पा एसेंशियल ऑयल एंटीऑक्‍सीडेंटस और एंटी इंफलामेट्री गुण होते हैं जो शरीर के सभी कार्यों को ठीक तरह से करने में मदद करता है। एंटीऑक्‍सीडेंट शरीर को फ्री रेडिकल्‍स से भी बचाते हैं और बीमारी पैदा करने वाले कीटाणुओं को शरीर से दूर करता है। बॉडी के लिए एंटीऑक्‍सीडेंट बहुत अच्‍छे और फायदेमंद होते हैं।

क्षीर चम्पा कैसे काम करता है?

क्षीर चम्पा के विभिन्न प्रजातियों के फूलों, बीजों, पत्तियों और छालों में विभिन्न तरह के औषधीय गुण पाए जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैंः

  • इसके फूल काफी सुगंधित होते हैं जिनका इस्तेमाल इत्र बनाने के लिए किजा सकता है, जिसे फ्रेंजीपियानी (Frangipiani) कहा जाता है। साथ ही, इसके फूल से प्राप्त तेलों का इस्तेमाल भिन्न तरह के शरीर दर्द को दूर करने के लिए भी किया जा सकता है।
  • इसके छाल स्वाद में कड़वा होता है, जिसमें दो फीसदी तक ग्लूकोसाइड, प्ल्यूमिरिड की मात्रा पाई जा सकती है।
  • इसके पौधे से पाए जाने वाले दूध जैसे तरल पदार्थ जिसे लेटेक्स कहा जाता है, उसमें रेजिन, कॉउटचौक और प्लमाइरिक एसिड में कैल्शियम, सेरोटिनिक एसिड और ल्यूपॉल की मात्रा होती है।
  • इसके पत्तों में तेल प्राप्त किया जा सकता है, जिसका इस्तेमाल शरीर को ठंडा बनाए रखने में किया जा सकता है।
  • इसके मेथनॉल अर्क के फाइटोकेमिकल स्क्रीनिंग में स्टेरॉयड, फ्लेवोनोइड्स, टैनिन, अल्कलॉइड और ग्लाइकोसाइड की मात्रा होती है।
  • इसके पत्तों के चूर्ण में अल्कलॉइड, सायनोजेनिक ग्लाइकोसाइड, फेनोलिक कंपाउंड, फ्लेवोनोइड्स, टेरानोइड्स, टैनिन और सैपोनिन्स की मात्रा पाई जा सकती है।
  • इसके बीजों में हेमोस्टैटिक पाया जाता है।

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उपयोग

क्षीर चम्पा का उपयोग करना कितना सुरक्षित है?

क्षीर चम्पा की विभिन्न प्रजातियों के कई हिस्सों का इस्तेमाल एक औषधी के रूप में किया जा सकता है। जिसका औषधीय रूप में इस्तेमाल करना पूरी तरह से लाभकारी माना जा सकता है। हालांकि, इसके पौधे से बहने वाले सफेद पदार्थ को आंखों से दूर रखना चाहिए। इसका एसिड आंखों की रोशनी के लिए घातक साबित हो सकता है।

इसके अलावा, अगर आप किसी भी रूप में इसका सेवन करना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने डॉक्टर की सलाह लें और अपने डॉक्टर द्वारा बताए गए निर्देशों के अनुसार ही इसका सेवन करें। साथ ही, ध्यान रखें कि, आपको इसके ओवरडोज की मात्रा से बचना चाहिए। उतनी ही खुराक का सेवन करें, जितना आपके डॉक्टर द्वारा निर्देशित किया गया हो।

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साइड इफेक्ट्स

क्षीर चम्पा से क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं?

क्षीर चम्पा के विभिन्न प्रजातियों को मुख्य रूप से पाया जा सकता है। हालांकि, इसकी सभी प्रजातियों पर अभी भी उचित अध्ययन करने की आवश्यकता है। अगर इसका सेवन करने के दौरान आपको किसी तरह के साइड इफेक्ट्स दिखाई देते हैं, तो तुरंत इसका सेवन करना बंद करें और अपने डॉक्टर से परामर्श करें। साथ ही, निम्न स्थितियों के बारे में भी अपने डॉक्टर से बात करें अगरः

  • आप मौजूदा समय किसी भी प्रकार की दवा का नियमित सेवन कर रहे हैं
  • आपको किसी भी तरह की एलर्जी है या इसमें पाए जाने वाले किसी भी रसायन से आपको आपको एलर्जी की समस्या है
  • आप प्रेग्नेंसी प्लानिंग कर रही हैं या प्रेग्नेंट हैं
  • आप शिशु को स्तनपान करा रही हैं
  • आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या है
  • आपने हाल ही में कोई सर्जरी करवाई हो
  • आपको कोई अनुवांशिक बीमारी हो

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डोसेज

क्षीर चम्पा को लेने की सही खुराक क्या है?

क्षीर चम्पा का इस्तेमाल आप विभिन्न रूपों में कर सकते हैं। इसकी मात्रा आपके स्वास्थ्य स्थिति, उम्र और लिंग के आधार पर आपके डॉक्टर द्वारा निर्धारित की जा सकती है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए कृपया अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

हालांकि, एक दिन में आप इसके अधिकतम खुराक का सेवन करते हैंः

  • चूर्ण – 3 से 6 ग्राम
  • काढ़ा – 20 से 30 मिली

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उपलब्ध

यह किन रूपों में उपलब्ध है?

आयुर्वेद में क्षीर चंपा के विभिन्न रूपों का सेवन किया जा सकते है, जिसमें शामिल हैंः

  • क्षीर चम्पा की जड़
  • क्षीर चम्पा की जड़ की छाल
  • क्षीर चम्पा के तने की छाल
  • क्षीर चम्पा की पत्तियां
  • क्षीर चम्पा की शाखाएं
  • क्षीर चम्पा का फूल
  • क्षीर चम्पा का दूध
  • क्षीर चम्पा का बीज
  • पाउडर
  • काढ़ा

अगर आपका इससे जुड़ा किसी तरह का कोई सवाल है, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

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सूत्र

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Ankita mishra द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 15/07/2021 को
डॉ. पूजा दाफळ के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड