बैक्टीरियल निमोनिया फेफड़ों का एक संक्रमण है, जो कुछ बैक्टीरिया की वजह से होता है। बैक्टीरियल निमोनिया का सबसे सामान्य बैक्टीरिया स्ट्रेप्टोकोकुस (निमोकोकुस) Streptococcus (pneumococcus) है। लेकिन अन्य बैक्टीरिया से आपको बैक्टीरियल निमोनिया हो सकता है। यदि आप युवा हैं और आप हेल्दी हैं तो यह बैक्टीरिया बिना कोई नुकसान पहुंचाए आपके गले में जीवित रह सकते हैं। यदि कुछ कारणों की वजह से आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है तो यह बैक्टीरिया आपके फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। ऐसा होने पर आपके फेफड़ों में मौजूद एयर सेक (Air sacs) में संक्रमण हो जाता है और इनमें इनफ्लेमेशन आ जाती है। यह फ्लूड से भर जाते हैं और निमोनिया का कारण बनते हैं।

बैक्टीरियल निमोनिया एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है। यह किसी भी आयु वर्ग के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। यदि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है तो आपको बैक्टीरियल निमोनिया हो सकता है।
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बैक्टीरियल निमोनिया की तीव्रता की वजह से हर मामले में इसके लक्षण अलग हो सकते हैं। कुछ लोगों में बैक्टीरियल निमोनिया के हल्के लक्षण ही नजर आते हैं, जबकि अन्य लोगों में जानलेवा जटिलताएं लक्षण के रूप में नजर आती हैं। अमेरिकन लंग एसोसिएशन के मुताबिक, बैक्टीरियल निमोनिया के लक्षण निम्नलिखित हैं:
बच्चों और व्यस्कों में बैक्टीरियल निमोनिया के लक्षण एक समान ही नजर आते हैं। अमेरिकन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के मुताबिक, बच्चों और नवजात बैक्टीरियल निमोनिया में ज्यादा रोते हैं। उनकी बॉडी में एनर्जी का स्तर गिर जाता है और त्वचा पीली पड़ जाती है।
किसी व्यक्ति में बैक्टीरियल निमोनिया के लक्षण नजर आने पर उसे तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। बिना डॉक्टर को दिखाए किसी भी प्रकार के निमोनिया का पता लगाना मुश्किल होता है। चूंकि बैक्टीरियल और वायरल निमोनिया का इलाज अलग है। ऐसे में इसके सही कारण का पता लगाया जाना काफी अहम है, जिससे पीढ़ित का उचित इलाज किया जा सके।
उपरोक्त लक्षण नजर आते ही आपको तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी प्रकार का इलाज या घरेलू उपाय न अपनाए। बलगम में ब्लड आना, सांस लेने में परेशानी, 102 डिग्री से अधिक बुखार और त्वचा के नीला पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। यह सभी लक्षण किसी आपात स्थिति के संकेत हैं।
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बैक्टीरियल निमोनिया के कारण निम्नलिखित हैं:
बैक्टीरियल निमोनिया उन बैक्टीरिया से होता है, जो आपके फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं और फिर अपने गुणांक (multiplies) बनाते हैं। यह समस्या अपने आप हो सकती है या किसी बीमारी जैसे सर्दी या फ्लू के बाद विकसित हो सकती है।
निम्नलिखित लोगों को बैक्टीरियल निमोनिया का खतरा सबसे ज्यादा होता है:
डॉक्टर बैक्टीरियल निमोनिया का वर्गीकरण इस आधार पर करते हैं कि यह अस्पताल के अंदर हुआ है या बाहर।
कम्युनिटी एक्वायर निमोनिया (Community-acquired pneumonia) (CAP): यह बैक्टीरियल निमोनिया का सबसे सामान्य प्रकार है। अस्पताल के बाहर आप बैक्टीरिया फैलाने वाले तत्वों के संपर्क में आने पर यह होता है। आप खांसी या छींक से ड्रॉप्लेट्स को सांसों या स्किन-टु-स्किन के संपर्क में आने पर यह रेस्पिरेटरी में प्रवेश कर जाते हैं।
हॉस्पिटल एक्वायर निमोनिया (Hospital-acquired pneumonia) (HAP): अस्पताल के भीतर दो या इससे अधिक दिनों तक जीवाणुओं के संपर्क में रहने पर यह निमोनिया होता है। इसे नोसोकोमियल इंफेक्शन (nosocomial infection) कहा जाता है। इस प्रकार का निमोनिया अक्सर एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति मजबूत होता है और इसका इलाज करना मुश्किल होता है।
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निम्नलिखित कारकों से बैक्टीरियल निमोनिया का जोखिम बढ़ जाता है:
यहां प्रदान की गई जानकारी को किसी भी मेडिकल सलाह के रूप ना समझें। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
निम्नलिखित तरीकों से बैक्टीरियल निमोनिया का पता लगाया जा सकता है:
बैक्टीरियल निमोनिया के ज्यादातर मामलों में घर पर ही दवाओं के साथ इलाज किया जाता है। इससे अस्पताल में आने वाली समस्याओं को रोका जाता है। घर पर इलाज करने से एक हेल्दी व्यक्ति एक हफ्ते के भीतर ठीक हो सकता है। वहीं, कमजोर इम्यून सिस्टम वाले व्यक्ति को इससे ठीक होने में इससे अधिक समय लग सकता है।
कुछ मामलों में मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ती है। कम उम्र के बच्चे और बुजुर्गों को अस्पताल में इंट्रावेनियस एंटीबायोटिक (intravenous antibiotics) दवाओं की जरूरत पड़ती है। साथ ही उन्हें यहां पर मेडिकल केयर और रेस्पिरेटरी थेरेपी दी जाती है।
अस्पताल में आपके निमोनिया के प्रकार के आधार पर विशेष एंटीबायोटिक दवाइयां दी जाती है। इससे इंट्रावेनियसली दिया जाता है। साथ ही आपको फ्लूड भी चढ़ाया जाता है, जिससे डीहाइड्रेशन को रोका जा सके।
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निम्नलिखित घरेलू उपाय आपको बैक्टीरियल निमोनिया में राहत प्रदान करने में मदद करेंगे:
वैक्सीनेशन कराएं: कुछ प्रकार के निमोनिया को रोकने के लिए वैक्सीन उपलब्ध हैं। इन वैक्सीन को लेने के लिए आप डॉक्टर से सहायता ले सकते हैं। हालांकि, समय के हिसाब से इन टीकाकरणों के दिशा निर्देश में परिवर्तन होता रहता है।
बच्चों का टीकाकरण कराएं: दो वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए डॉक्टर अलग प्रकार के वैक्सीन की सलाह देता है। वहीं दो वर्ष और पांच वर्ष की आयु के बच्चे जिन्हें न्युमोकोकल डीजेज (pneumococcal disease) का खतरा रहता है, उन्हें अलग वैक्सीन दिया जाता है।
हाईजीन का ध्यान रखें: रेस्पिरेटरी इंफेक्शन को रोकने के लिए आपको साफ-सफाई का ध्यान रखना चाहिए। नियमित रूप से सेनिटाइजर से अपने हाथों को साफ करें।
स्मोकिंग न करें: स्मोकिंग करने से आपके फेफड़ों की इंफेक्शन के प्रति प्राकृतिक प्रतिरक्षा नष्ट हो जाती है।
इम्यून सिस्टम को मजबूत रखें: नींद पूरी करें, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें और एक हेल्दी डायट जरूर लें
इस संबंध में आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि आपके स्वास्थ्य की स्थिति देख कर ही डॉक्टर आपको उपचार बता सकते हैं।
डिस्क्लेमर
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Current Version
29/09/2020
Mona narang द्वारा लिखित
के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड डॉ. पूजा दाफळ
Updated by: Nidhi Sinha